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श्याम सुन्दर अग्रवाल

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12 Jun 2010
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ਯਤੀਮ

  ਸ਼ਿਆਮ ਸੁੰਦਰ ਅਗਰਵਾਲਯਤੀਮ ਮੁੰਡੇ ਦੇ ਦੁੱਧ ਧੋਤੇ ਚਿੱਟੇ ਕਪਡ਼ਿਆਂ ਵੱਲ ਨੀਝ ਨਾਲ ਦੇਖਦਿਆਂ ਜੱਗੂ ਨੇ ਪੁੱਛਿਆ, “ਤੂੰ ਸਕੂਲ ਪਡ਼੍ਹਨ ਜਾਨੈਂ?”“ਹਾਂ ਯਤੀਮਖਾਨੇ ਦੇ ਸਾਰੇ ਬੱਚੇ ਪਡ਼੍ਹਨ ਜਾਂਦੇ ਐ।”“ਬਡ਼ਾ ਖੁਸ਼ਕਿਸਮਤ ਐਂ!” ਜੱਗੂ ਨੇ ਯਤੀਮ ਮੁੰਡੇ ਨੂੰ ਹਸਰਤਭਰੀ ਨਿਗ੍ਹਾ ਨਾਲ ਦੇਖਦਿਆਂ ਕਿਹਾ।“ਯਤੀਮ ਨਾਲ
Jun 13 2010 07:47 AM
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गिद्ध

कोसी धूप में बैठे चारों मित्र शनिवार की छुट्टी का आनंद ले रहे थे। सभी अपने-अपने दफ्तर में काम करने वाली लड़कियों के किस्से छेड़े हुए थे। पास में रखा ट्रांजिस्टर फिल्मी गीत सुना रहा था। ट्रांजिस्टर ने अचानक गीत बंद कर वयोवृद्ध नेता, महान स्वतंत्रता सेनानी
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एक वोट की मौत

नगरपालिका के लिए मतदान हो रहा था। धूप बहुत तेज थी। मतदान-केंद्र के बाहर मतदाताओं की लंबी कतार लगी थी। शोर मच रहा था। धक्कम-धक्का चल रहा था। दो-तीन लोग तो गरमी सहन न कर सकने के कारण बेहोश होकर गिर चुके थे। दो उम्मीदवारों के बीच बहुत सख्त मुकाबला था। ऐसे
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ਮਕਾਨ

ਮਕਾਨ ਨੂੰ ਦੇਖ ਦੇਖ ਕੇ ਕਿਰਾਏਦਾਰ ਬਹੁਤ ਖੁਸ਼ ਹੋ ਰਿਹਾ ਸੀ। ਉਸ ਨੇ ਕਦੇ ਸੋਚਿਆ ਵੀ ਨਹੀਂ ਸੀ ਕਿ ਸ਼ਹਿਰ ਵਿਚ ਇੰਨਾ ਵਧੀਆ ਮਕਾਨ ਕਿਰਾਏ ਲਈ ਖਾਲੀ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ। ਸਭ ਕੁਝ ਤਾਂ ਵਧੀਆ ਸੀ– ਬੈਡਰੂਮ, ਡਰਾਇੰਗ ਰੂਮ, ਬਾਥਰੂਮ, ਕਿਚਨ, ਲੈਟਰੀਨ। ਕਿਤੇ ਕੋਈ ਕਮੀ ਨਹੀਂ ਸੀ। “ਛੱਤਾਂ ਤਾਂ ਪੱਕੀਆਂ ਹੋਣਗੀਆਂ? ਉਸ ਨੇ ਮਕਾਨ
Feb 28 2010 05:39 PM
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वापसी

“अपने काम से थोड़ा समय निकाल कर, घर पर ज़रूर होकर आना। मम्मी का हालचाल पूछना और अगर रात रुकना ही पड़े तो घर पर ही ठहरना।” पत्नी ने सफर के लिए तैयार होते पति से कहा।“कोशिश करुंगा,” कहते हुए वह मन ही मन हँस रहा था कि पगली तेरे मायके तेरी छोटी बहन सुमन से
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आम आदमी

भला करो’ के दो शब्द ही अपने धर्म में पाता है जहाँ तक हो सके निभाता है आगे भी वही फैलाता है। प्यार के लिए ही समय पर्याप्त नहीं मिलता नफ़रत के लिए वक्त कहाँ निकाल पाता है। किसी के दुख का सबब न बने कोई परेशान न हो ठेस न पहुँचे किसी मन को और भावनाएँ आहत
Dec 29 2009 11:57 AM
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जीवन-गाथा

जीवन की पुस्तक वर्षों से मेज पर खुली पड़ी है हवा चलती है तो पन्ने फड़फड़ाने लगते हैं कुछ पन्नों से किलकारियों की आवाज़ें सुनाई देती हैं। कुछ पन्नों से खिलखिलाहट की आवाज़ें भी आती हैं। बर्फीली हवाओं के शिकार हुए बहुत से पन्ने सीलन की बदबू आती रहती है
Dec 29 2009 11:57 AM
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ਮਾਂ

। ਬਜ਼ੁਰਗ ਮਾਂ ਨੂੰ ਮਾਰਨ ਵਾਸਤੇ ਲਾਲ ਸੂਹਾ ਹੋਇਆ ਪੁੱਤ ਹੇਠਾਂ ਆ ਰਿਹਾ ਸੀ ਕਿ ਪੌੜੀਆਂ ਵਿਚ ਪੈਰ ਫਿਸਲ ਗਿਆ। ਪੌੜੀਆਂ ਦੇ ਰੇਲਿੰਗ ਵੀ ਨਹੀਂ ਸੀ ਲੱਗੀ ਹੋਈ। ਤਿੰਨ ਚਾਰ ਪੌੜੀਆਂ ਰੁੜ੍ਹਨ ਮਗਰੋਂ ਉਹ ਪਾਸਿਓਂ ਥੱਲੇ ਸਿਰ ਭਾਰ ਡਿੱਗ ਪਿਆ। ਉਸਨੂੰ ਤੁਰੰਤ ਹਸਪਤਾਲ ਲਿਜਾਇਆ ਗਿਆ। ਡਾਕਟਰ ਨੇ ਦੇਖਦਿਆਂ ਹੀ ਉਸਨੂੰ ਮ੍
Dec 29 2009 11:57 AM
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ਬਜ਼ੁਰਗ ਰਿਕਸ਼ੇਵਾਲਾ

। ਤਿੰਨ ਦਿਨਾਂ ਤੋਂ ਉਹੀ ਖੜਾ ਮਿਲਦਾ ਹੈ, ਸਵੇਰੇ ਸਵੇਰੇ। ਜੀ ਕੀਤਾ ਕਿ ਇਹਦੇ ਰਿਕਸ਼ੇ ਵਿਚ ਬੈਠਣ ਨਾਲੋਂ ਤਾਂ ਪੈਦਲ ਹੀ ਤੁਰ ਪਵਾਂ, ਵੀਹ ਕੁ ਮਿੰਟ ਦਾ ਹੀ ਰਸਤਾ ਹੈ। ਘੜੀ ਵੇਖੀ ਤਾਂ ਏਨਾ ਕੁ ਸਮਾਂ ਹੀ ਬਚਦਾ ਸੀ। ਕਿਤੇ ਬੱਸ ਹੀ ਨਾ ਨਿਕਲ ਜਾਵੇ, ਸੋਚ ਕੇ ਮਨ ਕਰੜਾ ਕੀਤਾ ਤੇ ਰਿਕਸ਼ੇ ਵਿਚ ਬੈਠ ਗਿਆ। ਪੱਕਾ ਮਨ ਬਣਾ
Dec 29 2009 11:57 AM
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तीस वर्ष बाद

आज फिर सुखविंदर की माँ का फोन आया था।” पत्नी ने बताया तो नरेश व्याकुल हो उठा, “तीसरे दिन ही फोन आ जाता है किसी न किसी का। दिमाग खराब कर रखा है।” सुखविंदर इंजनियरिंग कालेज में उनकी बेटी बबली का सहपाठी रहा था। दोनों एक-दूसरे को चाहते थे। न लड़का कहीं औ
Dec 29 2009 11:57 AM
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एक उज्जवल लड़की

रंजना, उसकी प्रेयसी, उसकी मंगेतर दो दिन बाद आई थी। आते ही वह कुर्सी पर सिर झुका कर बैठ गई। इस तरह चुप-चाप बैठना उसके स्वभाव के विपरीत था। “क्या बात है मेरी सरकार! कोई नाराजगी है?” कहते हुए गौतम ने थोड़ा झुक कर उसका चेहरा देखा तो आश्चर्यचकित रह गया। ऐ
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वापसी-1

पत्नी के त्रिया हठ के आगे मेरी एक न चली। अपने खोये हुए सोने के झुमके के बारे पूछने के लिए, उसने मुझे ‘डेरे वाले बाबा’ के पास जाने को बाध्य कर दिया। पत्नी का झुमका पिछले सप्ताह छोटे भाई की शादी के अवसर पर घर में ही कहीं खो गया था। बहुत तलाश करने पर भी
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संतू

प्रोढ़ उम्र का सीधा-सा संतू बेनाप बूट डाले पानी की बालटी उठा जब सीढ़ियां चढ़ने लगा तो मैने उसे सचेत किया, “ध्यान से चढ़ना! सीढ़ियों में कई जगह से ईंटें निकली हुई हैं। गिर न पड़ना।” “चिंता न करो, जी! मैं तो पचास किलो आटे की बोरी उठाकर सीढ़ियां चढ़ते ह
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ਚਮਤਕਾਰ

। ਅੱਜ ਬੱਚਾ ਕੁੱਝ ਠੀਕ ਹੋਇਆ ਤਾਂ ਘਰ ਵਿਚ ਰਾਸ਼ਨ ਪਾਣੀ ਮੁਕ ਗਿਆ ਸੀ। ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਪਿਆਉਣ ਲਈ ਘਰ ਵਿਚ ਇਕ ਤੁਪਕਾ ਦੁੱਧ ਵੀ ਨਹੀਂ ਸੀ। “ ਜਾਓ, ਹੱਟੀ ਆਲੇ ਨੂੰ ਆਖੋ ਜੁਆਕ ਬਮਾਰ ਐ, ਪਾਈਆ ਦੁੱਧ ਹੁਦਾਰ ਦੇ ਦਵੇ। ਭਲਕ ਨੂੰ ਦੇਦਾਂਗੇ ਉਹਦੇ ਸਾਰੇ ਪੈਸੇ।” ਪਤਨੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਤਾਂ ਗਰੀਬੂ ਗੜਵੀ ਲੈ ਕੇ ਤੁਰ ਪਿਆ। ਉਹਨੇ
Dec 29 2009 11:57 AM
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ਕੁੰਡਲੀ

। ਸ਼ਾਸਤਰੀ ਜੀ ਕੁੜੀ ਦੀ ਕੁੰਡਲੀ ਨਾਲ ਭਰਾ ਦੀ ਕੁੰਡਲੀ ਮਿਲਾਉਂਦੇ ਤੇ ‘ਨਾਂਹ’ ਵਿਚ ਸਿਰ ਹਿਲਾ ਦਿੰਦੇ। ਕਦੇ ਅੱਠ ਗੁਣ ਮਿਲਦੇ ਤੇ ਕਦੇ ਦਸ। ਮਾਂ ਪੱਚੀ ਕੁ ਗੁਣਾਂ ਦੇ ਮਿਲੇ ਬਿਨਾ ਆਪਣੇ ਸਪੁੱਤਰ ਦੇ ਰਿਸ਼ਤੇ ਲਈ ਤਿਆਰ ਨਹੀਂ ਸੀ। ਪੰਦਰਾਂ ਕੁ ਯੋਗ ਕੁੜੀਆਂ ਦੇ ਰਿਸ਼ਤੇ ਮਾਂ ਦੀ ਇਸ ਪਰਖ ਕਸੌਟੀ ਦੀ ਬਲੀ ਚੜ੍ਹ ਚੁੱਕੇ
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अनमोल ख़ज़ाना

अपनी अलमारी के लॉकर में रखी कोई वस्तु जब पत्नी को न मिलती तो वह लॉकर का सारा सामान बाहर निकाल लेती। इस सामान में एक छोटी-सी चाँदी की डिबिया भी होती। सुंदर तथा कलात्मक डिबिया। इस डिबिया को वह बहुत सावधानी से रखती। उसने डिबिया को छोटा-सा ताला भी लगा रख
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यादगार

विरसा सिंह बस से उतर, गाँव वाली सड़क पर पहुँच कर रुक गया। विलायत से आने के पश्चात, वह अपने मामा के लड़के से मिल कर आ रहा था। उस गाँव के बाहर बने बहुत बड़े एवं सुंदर गेट को देख कर उसने सोचा कि वह भी अपनी माँ की स्मृति में अपने गाँव के बाहर एक वैसा ही
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ਸਾਂਝਾ ਦਰਦ

। ਮੇਰੇ ਤਾਂ ਕੋਈ ਔਲਾਦ ਨਹੀਂ।” ਪੱਤਰਕਾਰ ਬੋਲਿਆ, “ ਤੁਹਾਨੂੰ ਗਮ ਤਾਂ ਹੋਵੇਗਾ ਪੁੱਤਰ ਨਾ ਹੋਣ ਦਾ। ਪੁੱਤਰ ਹੁੰਦਾ ਤਾਂ ਅੱਜ ਤੁਸੀਂ ਇਸ ਬਿਰਧ ਆਸ਼ਰਮ ’ਚ ਨਾ ਹੋ ਕੇ ਆਪਣੇ ਘਰ ਹੁੰਦੇ।” ਬਜ਼ੁਰਗ ਔਰਤ ਨੇ ਥੋੜੀ ਦੂਰ ਬੈਠੀ ਇਕ ਦੂਜੀ ਔਰਤ ਵੱਲ ਇਸ਼ਾਰਾ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਕਿਹਾ, “ ਉਹ ਬੈਠੀ ਮੇਰੇ ਨਾਲੋਂ ਵੀ ਦੁਖੀ, ਉਹਦੇ
Dec 29 2009 11:57 AM
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ਸੰਤੂ

। ਪੌੜੀਆਂ ’ਚ ਕਈ ਥਾਵਾਂ ਤੋਂ ਇੱਟਾਂ ਨਿਕਲੀਆਂ ਹੋਈਐਂ । ਡਿੱਗ ਨਾ ਪਈਂ ।” “ ਚਿੰਤਾ ਨਾ ਕਰੋ ਜੀ, ਮੈਂ ਤਾਂ ਪੰਜਾਹ ਕਿਲੋ ਆਟਾ ਚੁੱਕ ਕੇ ਪੌੜੀਆਂ ਚੜ੍ਹਦਾ ਨਹੀਂ ਡਿੱਗਦਾ ।” ਤੇ ਸਚਮੁਚ ਵੱਡੀਆਂ-ਵੱਡੀਆਂ ਦਸ ਬਾਲਟੀਆਂ ਪਾਣੀ ਦੀਆਂ ਢੌਂਦੇ ਸੰਤੂ ਦਾ ਪੈਰ ਇਕ ਵਾਰ ਵੀ ਨਹੀਂ ਸੀ ਫਿਸਲਿਆ । ਦੋ ਰੁਪਏ ਦਾ ਇੱਕ ਨੋਟ ਅ
Dec 29 2009 11:57 AM
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मां का कमरा

छोटे-से पुश्तैनी मकान में रह रही बुज़ुर्ग बसंती को दूर शहर में रहते बेटे का पत्र मिला- ‘मां, मेरी तरक्की हो गई है। कंपनी की ओर से मुझे बहुत बड़ी कोठी मिली है, रहने को। अब तो तुम्हें मेरे पास शहर में आकर रहना ही होगा। यहां तुम्हें कोई तकलीफ नहीं होगी।
Dec 29 2009 11:57 AM
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खुशखबरी

दफ्तर में अपनी सीट पर बैठा जैगोपाल काफी परेशान था। बेटी शुशीला के पहला बच्चा होने वाला था। जब से पत्नी व माँ ने इस अवसर पर होने वाले खर्चे का ब्यौरा दिया था, उसकी नींद गायब हो गई थी। कम से कम सात हज़ार रुपये का खर्च था। अगर लड़का हुआ तो यह रकम दस हज़
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मरुस्थल के वासी

श्याम सुन्दर अग्रवाल गरीबों की एक बस्ती में लोगों को संबोधित करते हुए मंत्री जी ने कहा, “ इस वर्ष देश में भयंकर सूखा पड़ा है। देशवासियों को भूख से बचाने के लिए जरूरी है कि हम सब सप्ताह में कम से कम एक दिन का उपवास रखें।” मंत्री जी के सुझाव का लोगों न
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ਜ਼ਰੂਰੀ ਸ਼ਰਤ

। ਕੋਈ ਘੱਟ ਪੜ੍ਹਿਆ ਲਿਖਿਆ ਹੁੰਦਾ, ਕਿਸੇ ਦਾ ਕੰਮ ਧੰਦਾ ਠੀਕ ਨਾ ਹੁੰਦਾ ਤੇ ਕਿਸੇ ਦਾ ਪਰਿਵਾਰ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਹੁੰਦਾ। ਇਕ ਦਿਨ ਮੰਗਤ ਰਾਮ ਬੋਲ ਹੀ ਪਿਆ, “ ਆਹ ਏਨਾ ਵਧੀਆ ਰਿਸ਼ਤਾ ਐ। ਮੁੰਡਾ ਪੜ੍ਹਿਆ ਲਿਖਿਆ, ਕਮਾਊ, ਕੰਮ ਧੰਦਾ ਵਧੀਆ। ਮਾਂ ਪਿਓ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਘਰ ’ਚ ਇਕ ਛੋਟਾ ਭਰਾ ਈ ਐ, ਯਾਨੀ ਨਿੱਕਾ ਜਿਆ ਪਰਵਾਰ।
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मकान

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Sep 18 2009 05:44 AM
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रिश्ते

विश्वास का मौसमज़रूरत की धरती’गर मिलें तोउग ही जाते हैं रिश्ते।लंबा हो मौसमहो ज़रख़ेज़ धरतीतो बढ़ते हैं, फलते हैंखिलखिलाते हैं रिश्ते।बदले जो मौसमबदले जो माटीतो पौधों की भाँतिमर जाते हैं रिश्ते। -0-
Aug 18 2009 10:15 PM
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उत्सव

सेना और प्रशासन की दो दिनों की जद्दोजेहद अंतत: सफल हुई। साठ फुट गहरे बोरवैल में फंसे नंगे बालक प्रिंस को सही सलामत बाहर निकाल लिया गया। वहाँ विराजमान राज्य के मुख्यमंत्री एवं जिला प्रशासन ने सुख की साँस ली। बच्चे के माँ-बाप व लोग खुश थे।दीन-दुनिया से
Aug 05 2009 09:25 PM
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ਜੋਧਾ

। ਕਾਲੇ ਕੋਟ ਵਾਲਾ ਟਿਕਟਚੈੱਕਰ ਜਮਦੂਤ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸਾਹਮਣੇ ਖੜਾ ਸੀ। ਮੇਰਾ ਟਿਕਟ ਵੇਖਦਿਆਂ ਹੀ ਉਹ ਬੋਲਿਆ, “ਇਹ ਤਾਂ ਆਰਡਨਰੀ ਕਲਾਸ ਦਾ ਹੈ। ਸਲੀਪਰ ਕਲਾਸ ’ਚ ਕਿਉਂ ਬੈਠੇ ਹੋ?” “ਆਰਡਨਰੀ ਕਲਾਸ ਦੇ ਤਾਂ ਦੋ ਹੀ ਡੱਬੇ ਹਨ। ਦੋਨੋਂ ਨੱਕੋ-ਨੱਕ ਭਰੇ ਹਨ। ਉੱਥੇ ਤਾਂ ਖੜੇ ਹੋਣ ਨੂੰ ਵੀ ਜਗ੍ਹਾ ਨਹੀਂ। ਸਲੀਪਰ ਕਲਾਸ ’
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तुम्हारे नाम…

पत्र जो मन से लिखे जाते हैं वो कहाँ तुम तक पहुँच पाते हैं। पत्र तो बहुत लिखता हूँ पत्र तो रोज लिखता हूँ मगर पत्र जब कागज़ पर लिखता हूँ तब मस्तिष्क नीचे उतर आता है फिर उसी द्वारा पत्र लिखा जाता है मस्तिष्क जो संवेदनहीन होता है मस्तिष्क जो तर्कशील होता
 
ਸ਼ਿਆਮ ਸੁੰਦਰ ਅਗਰਵਾਲ/श्याम सुन्दर अग्रवाल
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भिखारिन

बच्चा भूखा है, कुछ दे दे सेठ ! ” गोद में बच्चे को उठाए एक जवान औरत हाथ फैला कर भीख माँग रही थी। “ इस का बाप कौन है? अगर पाल नहीं सकते तो पैदा क्यों करते हो? ” सेठ झुंझला कर बोला। औरत चुप रही। सेठ ने उसे सिर से पाँव तक देखा। उसके वस्त्र मैले तथा फटे ह
 
ਸ਼ਿਆਮ ਸੁੰਦਰ ਅਗਰਵਾਲ/श्याम सुन्दर अग्रवाल
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कोठी नंबर छप्पन

गाँव से आई भागवंती पूछ-ताछ कर जब तक आनंद नगर पहुँची, सूर्य अग्नि-पिंड बन कर उसके सिर पर लटक रहा था। उसके भानजे ने शहर के इसी मुहल्ले में पिछले दिनों नई कोठी बनाई थी। उसी से मिलने आई थी भागवंती। गरमी बढ़ गई थी और गलियाँ सूनी पड़ी थीं। भागवंती साठ वर्ष
 
ਸ਼ਿਆਮ ਸੁੰਦਰ ਅਗਰਵਾਲ/श्याम सुन्दर अग्रवाल