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मेरी रचनाएँ

http://lekhnee.blogspot.com/
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31 May 2010
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शेक्सपियर ग़लत था.... नाम में बहुत कुछ रखा है.... : महफूज़

दुनिया में इन्सान जब जन्म लेता है, तब वह अपने साथ कोई नाम नहीं लाता. हाँ! फ़ौरी तौर पर उसका नामकरण कर दिया जाता है. जैसे:- पप्पू, बिल्लू, पिंकी, चिंटू, बाबू.. आदि और भी बहुत से नाम. नाम तो पैदा होने के कुछ दिनों पर रखा जाता है,
 
महफूज़ अली
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खुशियाँ बांटने से बढती है..नफरत का क्या काम? : महफूज़

सबसे पहले समस्त ब्लॉग जगत को इतना अपनापन और स्नेह देने के लिए धन्यवाद. (खुशदीप भैया के लिए सिर्फ एक बात कहना चाहूँगा कि मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ. मुझे गर्व है आप पर.) मैं बिन माँ-बाप का होकर भी अकेला नहीं हूँ, यह मुझे समस्त ब्लॉग जगत ने बता दिया.
 
महफूज़ अली
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इस क़दर टूटा हूँ कि रोना चाहता हूँ....: महफूज़

कभी-कभी मन बहुत उदास होता है. कारण ख़ुद को भी नहीं पता होता. हम रोना तो चाहते हैं, लेकिन आंसू नहीं निकलते, मंज़िल सामने तो होती है लेकिन रास्तों का पता नहीं होता. विचारों का द्वंद्व  दिल-ओ-दिमाग़ में चलता रहता है लेकिन विचारों में ठहराव
 
महफूज़ अली
Mar 05 2010 07:44 PM
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इसीलिए सिर्फ प्रेम करना चाहिए..: महफूज़

अन्नपूर्णा कूड़ा फेंकने घर के बाहर आई तो देखा कि तीन बूढ़े व्यक्ति घर के बाहर वाले चबूतरे पर बैठे हैं. अन्नपूर्णा ने उन्हें नहीं पहचानते हुए कहा " वैसे तो मैं आप लोगों को नहीं जानतीं, फिर भी घर के अन्दर आईये और कुछ भोजन ग्रहण कीजिये.""क्या घर का मालिक घर
 
महफूज़ अली
टैग: धन
Feb 18 2010 07:44 PM
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जज़्बा ग़र दिल में हो तो हर मुश्किल आसाँ हो जाती है... मिलिए हिंदुस्तान के एक उभरते हुए ग़ज़लकार से: महफूज़

कहते हैं.....कविता या शायरी ख़ुदा  की ज़ुबां होती है...और उस ज़ुबां  को हम तक पहुँचाने वाले लोग बहुत ख़ास होते हैं...ऐसे ही एक बहुत ख़ास शख्स से आज मैं आपका विसाल करवाने जा रहा हूँ..नाम है जनाब पवन कुमार सिंह. यूँ  तो इनका
 
महफूज़ अली
टैग: gorakhpur
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जब मैं चोरी करते पकड़ा गया..:- महफूज़

आज आपको अपने स्कूल का एक बहुत मजेदार संस्मरण बताने जा रहा हूँ. यह संस्मरण पढ़ कर आपको पता चलेगा कि मैं स्कूल में कितना बदमाश किस्म का लड़का था. चंचलता व बदमाशी तो आज भी इस उम्र में भी (?) करता हूँ. बात उन दिनों की है जब मैं बारहवीं क्लास में पढ़ता था.
 
महफूज़ अली
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सिर्फ एक सवाल का जवाब आज मांगता हूँ...: महफूज़

कहाँ खो गयीं थीं तुम?जवाब दो....मत पूछो हाल मेरा,पर मेरे हर आंसू  का हिसाब दो.बुना था जो ख़्वाब तुम्हारे साथ,उसे धड़कन बना कर पास रखा था,तस्वीर जो बनाई थी तुम्हारी,उसे आँखों में बसा कर रखा था.सिर्फ एक सवाल का जवाब आज मांगता
 
महफूज़ अली
टैग: शिखा
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रोक सको तो रोक लो: - महफूज़

अभी थोड़े दिन पहले कि ही बात है. मैं जिम से एक्सरसाइज़ कर के अपने दोस्त पंकज के साथ घर लौट रहा था. कडाके कि ठण्ड में भी मुझे बहुत गर्मी लग रही थी. उस दिन कार्डियो और बेंच प्रेस बहुत ज्यादा कर लिया था. मुझे बॉडी बिल्डिंग का बहुत शौक़ है, मैं आज भी दो
 
महफूज़ अली
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मैं झूठ नहीं बोलता: महफूज़

मैं झूठ नहीं बोलता,साहित्य-कला से क्या लेना?ढूंढ रहा खुद को मैं,खोज रहा प्याज़,छिलकों में.....
 
महफूज़ अली
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नाम तेरा अभी मैं अपनी ज़ुबां से मिटाता हूँ....: एक ग़ज़ल जो मैंने पहली बार लिखी....देख कर बताइयेगा...: महफूज़

बहुत दिनों से सोच रहा था कि ग़ज़ल लिखूं. पर मुझे ग़ज़ल का  क ख ग  भी नहीं आता था.. फिर मैंने कुछ अध्ययन किया.. ग़ज़ल लिखने का तरीका सीखा. पर जब सीखा तो यही लगा कि रूल्ज़ फौलो करने पर हम वो चीज़ नहीं लिख पाते हैं....जो चाहते हैं... कुछ लोगों
 
महफूज़ अली
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आप सबका प्यार और आशीर्वाद.... मेरा आभार...और मिलिए मेरी सन्यासन गर्ल फ्रेंड से....: महफूज़

मेरा लेख  "जानना नहीं चाहेंगे आप संस्कार शब्द का गूढ़ रहस्य? एक ऐसा शब्द जो सिर्फ भारत में ही पाया जाता है... :- महफूज़"  का प्रकाशन दिनांक १९/दिसंबर/२००९ को राष्ट्रीय हिंदी दैनिक 'अमर उजाला' के सम्पादकीय पृष्ठ पर जिनका मैं आभारी
 
महफूज़ अली
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जानना नहीं चाहेंगे आप संस्कार शब्द का गूढ़ रहस्य? एक ऐसा शब्द जो सिर्फ भारत में ही पाया जाता है... :- महफूज़

अभी  थोड़े  दिन पहले की बात है, किसी ने मुझ से पूछा था कि ' संस्कार कि इंग्लिश बताईये?' मुझे मालूम नहीं था, मैंने कहा कि देखकर बताता हूँ. सही कहूँ तो संस्कार कि इंग्लिश कहीं नहीं मिली. थोडा शोध किया तो पता चला कि विश्व के किसी भी भाषा में स
 
महफूज़ अली
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हम फिर साथ खेलेंगे......: महफूज़..

एक पल लिए तो मैं घबरा ही गया था, मेरे समझ में ही नहीं आ रहा था कि  क्या करुँ......... ?  मुझे लगा कि  अब सब ख़त्म!!!!!!!! डॉक्टर ने भी जवाब दे दिया....... डॉक्टर ने चेक अप  करने के बाद कहा कि  अब देखो यह प्रॉब्लम में फिफ्टी/फ
 
महफूज़ अली
Dec 12 2009 07:11 PM
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मुझे अफ़सोस है.. .गलती का सुधार कर रहा हूँ. : महफूज़

अपनी पिछली  पोस्ट ( लखनऊ में ब्लॉगर दंगा: सलीम खान और उम्दा सोच वाले सौरभ के बीच घमासान युद्ध.. : A Special Report ) को लिखते हुए या उसे  पोस्ट करने के पीछे मेरा मकसद सस्ती लोकप्रियता पाना या किसी में मनमुटाव बढ़ाना कतई नहीं था..अब मुझ
 
महफूज़ अली
Dec 10 2009 08:19 PM
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BOLD अत्याधुनिक नारी.....: एक लघुकथा.....

तृप्ति ने शादी से पहले अपने होने वाले पति से पूछा ............ 'क्या तुम वर्जिन हो'?  शायद अटपटा लगा था संदीप को यह सुनकर, पर जल्द ही संभलकर बोला।  "......और तुम.......?" अबकी सवाल उसने दागा........... जवाब बोल्ड था............... । ॥ खुलेप
 
महफूज़ अली
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अबे! साले, हंस क्यूँ रहा है?

एक और बड़ा अच्छा वाक़या याद आया है। बात उन दिनों की है जब मैं दसवीं क्लास में पढता था..... हमारे एक इतिहास के टीचर हुआ करते थे.... उनका नाम तो याद नही आ रहा है..... पर लंगूर नाम से पूरा स्कूल उनको जानता था.... यह नाम भी उनका इसलिए पड़ा था.... क्यूंकि
 
महफूज़ अली
Nov 30 2009 07:05 PM
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मेरी जंग: वक़्त का सबसे बड़ा झूठ...

जब मैं खोया हुआ रहता हूँ, एकटक छत को घूरता रहता हूँ अपने आसपास से अनजान और काटता रहता हूँ दांतों से नाखून. नहीं सुनाई देती है कोई भी आवाज़ कोई मुझे थक हारकर झिंझोड़ता है और पूछता है क्यूँ क्या हुआ? मेरे मुहँ से अचानक निकलता है नहीं......!!!! कुछ भी त
 
महफूज़ अली
टैग: अदा
Nov 25 2009 06:45 PM
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साला! मालूम कैसे चलेगा की मुसलमान है?

आज तबियत थोड़ी नासाज़ है.... बहुत हरारत सी हो रही है... किसी काम में मन नहीं लग रहा है.. चिडचिडाहट सी भी हो रही है... शायद  वाइरल में ऐसा ही होता है...इसलिए आज घर जल्दी आ गया ....आराम करने...पर घर पर भी किसी काम में मन नहीं लग रहा है, दवाई
 
महफूज़ अली
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कहा था तुमने की कभी बुझना नहीं.....मैं लगातार जल रहा हूँ॥

कहा था तुमने की कभी रुकना नहीं और  मैं लगातार चल रहा हूँ॥ ज़मीन क्या ,  आस्मां पे भी मेरे पैरों के निशाँ हैं..... मेरी हदें मुझे पहचानतीं हैं, और  मैंने वीरान हुए रास्तों को भी आबाद किया है॥ शांत हो के मैं ठहर जाऊँ  यह असंभव
 
महफूज़ अली
टैग: अदा
Nov 14 2009 06:48 PM
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काग़ज़ पर स्वीमिंग पूल .......

तरण-ताल  (Swimming-pool) नए खेल अधिकारी ने आज विभाग ज्वाइन करते ही पूरे खेल प्रांगण और विभाग का निरीक्षण किया, फिर  चपरासी को सारी पुरानी फाइलें लाने का आदेश दिया. चपरासी ने सारी फाइलें टेबल पर लाकर रख दिया. फाइलों को देखते हुए अधिकारी
 
महफूज़ अली
Nov 08 2009 07:38 PM
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तुम प्यार से मनाने का तरीका सीख लो..........

शब्दों के जाल में उलझने की बजाये , हाव-भाव से दिल का हाल जान लो तुम। एक सुरक्षित सहारा ....... एक ऐसा आगोश, जहाँ दुनिया के किसी खतरे से डर न लगे॥ तारीफ़ की दरकार है मुझे.....  कोई तो हो जिसकी ,  नज़रों में सिर्फ़ मेरा ही अक्स नज़र आए॥ मैं भ
 
महफूज़ अली
Nov 02 2009 08:01 PM
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...मत बनाना मेरा बुत, मेरी मौत के बाद....

मैं हमेशा चलना चाहता हूँ,  बोलते रहना चाहता हूँ,  सुनते रहना चाहता हूँ, मत बनाना मेरा बुत, मेरी मौत के बाद, क्यूंकि मैं नहीं चाहता बहरा ,  गूंगा और निश्चल होना......... महफूज़ अली
 
महफूज़ अली
टैग: बुत
Oct 30 2009 08:56 PM
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मुझे हर पल ज़रुरत है तुम्हारी, मत छोड़ो साथ मेरा कि आँसू भी साथ न निभा पायें .....

अहसास साथ हैं, हर पल हर वक्त पर ऐसा लगता है की खोया हुआ सा है कुछ। नही हो तुम मेरी कल्पना हो तुम मेरा यथार्थ ख़ुद राह मैं तलाशूंगा जब तुम दोगी मेरा साथ। मुझे हर पल ज़रुरत है तुम्हारी, जलते रहने के लिए, धड़कते रहने के लिए, मत आओ एक हवा के झोंके की तरह
 
महफूज़ अली
टैग: अदा
Oct 27 2009 08:24 PM
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वादा करो छोडोगी नहीं तुम मेरा साथ.....

तन्हाई में जब मैं अकेला होता हूँ, तुम पास आकर दबे पाँव चूम कर मेरे गालों को, मुझे चौंका देती हो, मैं ठगा सा, तुम्हें निहारता हूँ, तुम्हारी बाहों में,  मदहोश हो कर खो जाता हूँ. सोच रहा हूँ..... कि अब की बार तुम आओगी, तो नापूंगा तुम्हारे प्यार की
 
महफूज़ अली
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आइये जानें क्यों यूरोपीय व कुछ एशियाई देश शून्य (ज़ीरो) को 'ओ' (O) बोलतें हैं?

काफी लोगों को मालूम है कि पूरा यूरोप और एशिया के कुछ देश (जिसमें भारत यानि  कि That is India भी) ज़ीरो यानि कि शून्य को ज़ीरो यानि कि शून्य नहीं बोलतें हैं. अंग्रेज़ी का 'O' (ओ) अक्षर बोलतें हैं. अब सौ कि वर्तनी अंग्रेज़ी में बोलनी है तो वो
 
महफूज़ अली
Oct 22 2009 09:58 PM
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हौले से तुम्हारे कानों में कहता हूँ कि आई लव यू...

किस वक़्त कहूँ मैं कि , आई लव यू? उस वक़्त जब तुम मुझे  देख हलके से मुस्कुरा देती हो? या उस वक़्त जब मैं परेशां  होकर तुम्हे देखता हूँ, और तुम मेरे हाथों में अपना हाथ देकर, मेरी सारी परेशानी समेट लेती हो? तुम रूठ जाती हो, मेरी किस
 
महफूज़ अली
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आरती ओम् जय जगदीश हरे का सच..... आईये जानें इसको और इस आरती के जनक को......

शारदा राम "फिल्लौरी"  19वीं शताब्दी के प्रमुख सनातनी धर्मात्मा थे. एक समाज सुधारक होने के साथ-साथ उन्होंने हिंदी तथा पंजाबी साहित्य क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किये. आधुनिक हिंदी के क्रमिक (Gradual) विकास में इनका अप्रतिम योगदान कभी न
 
महफूज़ अली
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क्या सब ओ.के. (O.K.) है? आइये जानें ओ.के. (O.K.) का सच और इतिहास...

ओ.के. (O.K.) शब्द हम सब अपनी ज़िन्दगी में रोज़ाना प्रयोग करते हैं. इस शब्द के बिना हमारा दैनिक जीवन अधूरा है. जब भी हम किसी से मिलते  हैं  तो  ओ.के. (O.K.) शब्द का प्रयोग करते हैं. जब भी हम अपनी बात ख़त्म करते हैं तो  ओ.के. (O.K.)
 
महफूज़ अली
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एक घरौंदा जो बनाया था, बरसात में बह गया.

आईने से बातें करते करते थक गया, कतरा-कतरा आँखों से कुछ बह गया, जो नींव मैंने रखी थी उस मकां की, वो मकान ढह गया. कई लोग आये, और देख कर चले गए, शीशा फिर भी चमकता रह गया, ख़ुद से कहा वफ़ा कि नुमाइश मत कर और यह सितम मेरा दिल सह गया, एक घरौंदा जो बनाया था
 
महफूज़ अली
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मेरे अन्दर एक नयी शक्ति का वास है, कुछ भी कर सकना अब मेरे बस कि बात है..

सपनों कि मंज़िल  तक पहुँचने कि ख़्वाहिश है, पर रास्तों में कांटो की बारिश है, किस कदर अपने क़दमों को रोकूँ मैं? इधर कुआँ, तो उधर खाई नज़र  आई है. ख़्वाहिश तक पहुँचने की ख़्वाहिश, दिल में दब गयी  ऐसा लगा, सपनों को हकीकत में बदलने क
 
महफूज़ अली
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अब तो जीतने की आदत हो गयी है मुझे तो......

पता नहीं क्यूँ?  अब मुझे जीतने कि आदत हो गयी है.... मैं अब हारना नहीं चाहता, किसी भी FRONT पे ... मुझे अब हार जैसे शब्द से चिढ हो गयी है. मैं ऐसे ही अपने पिछले एक साल का विश्लेषण कर रहा था, तो रिजल्ट यही निकला कि इन एक सालों में मैं कहीं हारा नह
 
महफूज़ अली
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गाँधी-स्मृति में......

१. मैं थोडा उत्तेजित हूँ, दो अक्टूबर !  गाँधी का जन्मदिन समाधि पर फूल चढाने और कुछ क्षण शांत मौन खडा सोचता, "क्या यहाँ कभी कोई आता भी है और भी किसी दिन?" शायद ! गाँधी कि याद में "गाँधी" टंका रह गया है? या फिर गाँधी के मरने के बाद, हे! राम क
 
महफूज़ अली
Oct 02 2009 01:48 PM
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तो क्यूँ ना माँगूं आसमाँ यहाँ??

दुनिया की इस भीड़ में, खोजता फिरता हूँ अपना मुकाम हर चीज़ वो मिलती नहीं जिसकी होती चाहत यहाँ, क्या खोने के डर से, मैं भूलूँ, कुछ पाने की चाह यहाँ? जब चाहत हो तारों की, तो क्यूँ ना माँगूं आसमाँ यहाँ??  
 
महफूज़ अली
Sep 30 2009 08:08 PM
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हम इतिहास सिर्फ इसीलिए पढ़ते हैं क्यूंकि....... कल के सवाल का जवाब....

हम इतिहास (History) क्यूँ पढ़ते हैं? सवाल था तो सीधा ...... लेकिन साथ ही साथ टेढा भी.  अब आप लोग सोच रहे होंगे कि मैंने यह सीधा और सरल सवाल क्यूँ किया? वैसे यह सवाल करने का एक मकसद था. क्यूंकि हमारी ज़िन्दगी हमेशा पास्ट यानी की भूतकाल  से ज
 
महफूज़ अली
Sep 27 2009 07:53 PM
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सिर्फ एक सवाल.. कि " हम इतिहास (HISTORY) क्यूँ पढ़ते हैं?" जवाब राष्ट्रहित में ज़रूरी है..

मेरा सिर्फ एक सवाल है....... आप सब लोगों  से........... प्लीज़.................. इस पोस्ट को पढने के बाद जवाब ज़रूर दीजियेगा ............ सवाल यह कि  सिर्फ यह बता दें  कि " हम इतिहास (HISTORY) क्यूँ पढ़ते हैं?" (सही और
 
महफूज़ अली
Sep 25 2009 10:07 PM
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दम-साज़

रात में ख़ामोश चाँद हो तुम... उस चाँद की पहली चांदनी हो तुम, फूलों की कली, फ़रों से बनीं, इत्र की खुशबू हो तुम, खो गया मैं तेरे प्यार में, उस दाश्तह की पहचान हो तुम.......... ग़र्क़-ऐ-बहर-ऐ-फ़ना " महफूज़" , मेरे हमसफ़र और दम-साज़ हो तुम... .... ..... .
 
महफूज़ अली
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भरोसा बुनियाद है ज़िन्दगी की !!!

मैं इबादत करता हूँ। नमाज़ ( सलात्) पढता हूँ, हालांकि देखा जाए तो यह सब regularly करने का discipline मुझमें नही है। मेरी कोशिश रहती है की मैं रोज़ मस्जिद जाऊँ। यह मुझे एक नई ज़िन्दगी की शुरुआत जैसा लगता है। मुझे अपने धर्म, इबादत के तौर-तरीके, और क़ुरान
 
महफूज़ अली
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बागबाँ

मैं गुलाब था खुशबु भरा, मुझे आँधियों ने हिला दिया, जो मुझे बचाने को बने थे , मेरे उन काँटों ने मुझे ही रुला दिया। तोडा मुझे, फिर तोड़ के फेंका मुझे, और पैरों तले मसल दिया। वक्त साज़िश करता रहा, पर मेरे साथ मेरा ख़ुदा रहा , जो संभाल ले मुझे प्यार से ऐसे
 
महफूज़ अली
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बोलो न ? क्या है राज़?

मैं जानना चाहता हूँ तुम्हारी हर मुस्कराहट का राज़........ कैसे तुम उड़ा देती हो? सिर्फ़ एक हँसी में मेरी ज़िन्दगी की परेशानियों को बेआवाज़ । मुझे तपती धूप में भी होता है ठंडक का एहसास तुम्हारे साथ। कैसे झाँक लेती हो? तुम मेरे अन्दर और देख लेती हो उन न
 
महफूज़ अली
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अब कभी झगडा नही करूंगा.. ...... ...... promise

आज मेरे मन् में एक ख़याल आया की कितनी ही बार मैंने ख़ुद को लाचार पाया तब - तब तुमने मुझे उम्मीद का सहारा दिया मेरे झगडे और कड़वे बोल को हंस कर पिया मैं जानता हूँ की मेरी वजह से तुम्हारे मन् में झंझावातों का तूफ़ान उठा होगा और तुम्हारा दिल टूटा होगा फिर
 
महफूज़ अली