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कौन थी आशा थी तुम्हारी
कौन थी आशा थी तुम्हारी जो अभी पानी थीयाद कैसी थी हमारी जो नहीं आनी थीहमने क्या दखल दिया ,आप खुद ही आ बैठेबचके जो निकल गए , राह को ही ले बैठेसाथ होने में बुराई भी नहीं मानी थी || याद कैसी ....मन में जब पीर भरी कोई छिपाए कैसेदृग से जो नीर ढले वो न रुलाये
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Jun 16 2010 08:00 AM


Shuffle








