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26 May 2010
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मौसीक़ी की धुनों पर थिरकते लफ़ज़ों का ख़ालिक- इर्शाद कामिल

अक्सर ज़िंदगी में कुछ ऐसा हो जाता है जिसके बारे में आदमी बहुत ज़्यादा सोचे नहीं होता है। चाहत व आरज़ू कुछ होती है और किस्मत कुछ और दिला देती है। हिंदी साहित्य में पीएचडी की डिग्री हासिल करने वाले इर्शाद कामिल ने भी शायद ये नहीं सोचा होगा कि वह बॉलीवुड की
 
Razi Shahab
May 26 2010 12:32 PM
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गैर का ख़त मेरे नाम आया है

दफ्अतन तुम पे इक निगाह पड़ीदिल की दुनिया को हार बैठे हमज़िंदगी थी मेरी अमानत-ए-गैरउसको तुम पर ही हार बैठे हम####वक्त रूख़्सत हुआ मोहब्बत काअब के नफरत का दौर आया हैज़िंदगी दर्द-ए-दिल को पूजती हैतुम से बिछड़े तो याद आया हैअब के फिर ना मिलें ख़्यालों
 
Razi Shahab
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मिलन की कोई रात आई ही नहीं

रात तारीकियों का पहरा थामेरी खिड़की के दोनों दरवाज़ेहवा के तुन्द झोंकों से लड़ रहे थेचंद जुगनू कभी चमक करकेतीरगी से भरी मेरी कोठरी मेंखैरात में रौशनी के चंद टुकड़े उंडेल देते थेसारी दुनिया थी अपने ख़्वाबों मेंमैं तुम्हारे ख़्यालों में जागता ही रहावक्त की
 
Razi Shahab
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untitled

इन दिनो कुछ अजीब आलमप्यार की राह देखती हूं मैंज़िंदगी की तलाश में शब भरचांद तारों से बातें करती हूंप्यार, इक़रार और वफ़ा हमदमसबके मानी तलाशती हूं मैंज़ेहन में उल्झनों का दफ़्तर हैरात आंखों में काटती हूं मैंजिसको पाना था उसको पा तो गईफिर भी तन्हाईयों में
 
Razi Shahab
Apr 30 2010 12:05 PM
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नज़रें सब कुछ कहती हैं...

कहते हैं किनज़रें वह सब कहती हैं जिसेज़बान नहीं कह सकती हैउल्फत का इज़हार हो याफिर दर्द की तस्वीरनज़र सब कुछ बयां कर देती हैकहते हैं किनज़रें वह सब सुन लेती हैंजो कान नहीं सुन सकते हैंप्यार का इक़रार हो याफिर उल्झन की तस्वीरनज़रें सब कुछ सुन लेती हैंइसी
 
Razi Shahab
Feb 16 2010 11:06 AM
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...यतीम हो जाएंगे

दिल तो करता हैसियाह ज़ुल्फों तलेसारे सपनेतमाम ख़्वाबहर आरज़ू औरसारी चाहतें रख करसो जाएंमगर फिरख़्याल आता है किअगर तुम ने भीऔर की तरहइन्हें सहारा ना दिया तोरूह साथ छोड़ देगीऔरये सारी मासूम आरज़ुएंयतीम हो जाएंगी
 
Razi Shahab
Jan 31 2010 11:49 AM
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वो यादें...

एक लम्बे वक्त से सुबह उठ कर देखता हूं, दो कबूतरों का जोड़ा मेरे कमरे के बाहर लगे पेड़ पर आ कर बैठता है, उस पर लटकी गागर से प्यास बुझाता है, दो चार बूंदें एक दूसरे के परों पर डालते हैं और फिर उड़ जाते हैं...ये रोज़ का खेल है, जैसे उनकी आदत सी हो गई
 
Razi Shahab
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जैसे मां बच्चे को सीने से लगा लाई हो

अब के फिर जाग के रातों की ख़नक देखी हैकितनी सुंदर है वो एहसास की मूरत की तरहजैसे पाज़ेब किसी ने कहीं छनकाई होजैसे मूरत कोई रस्ते पे निकल आई होजैसे गुलनाज़ कोई टब से नहा कर निकलेजैसे खुश्बू लिए बाद-ए-सबा आई होजैसे जंगल में कोई राग नया छेड़े होजैसे बदमस्त
 
Razi Shahab
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UNTITELED

...जब ठंड ने जवां ख़ून को सर्द कर दिया था...शराब का सहारा लेकर गर्मी हासिल करने की कोशिश की जा रही थी...पूरा घर बिजली के कुमकुमों, सुरेले साज़ों और मस्त धुनों पर थिरकती जवानियों से पटा हुआ था...उस वक्त गेट पर बैठा बूढ़ा दरबान तेज़ हवाओं से लड़ रही अपनी
 
Razi Shahab
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मुझे मंज़िलों का पता नहीं मेरा कारवां कहीं और है

मेरी हसरतें मेरे साथ हैं मेरी आरज़ू कहीं और हैमुझे रास्ता मेरा मिल गया मेरी मंज़िलें कहीं और हैंयहां कोई दर्द ना ग़म कोई नई आरज़ू नया जोश हैमेरी ज़िंदगी मेरे साथ चल मेरी धड़कनें कहीं और हैंमेरी मान मेरे यार तू मुझे रोक ना बीच मोड़ परमुझे मंज़िलों का पता
 
Razi Shahab
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नया साल मुबारक हो

आज दिल से बस एक ही दुआ निकल रही है कि हर किसी को नया साल मुबारक हो... उसकी ज़िंदगी में कोई गम ना आए, हमेशा खुशियों का पहरा हो, कलियों की तरह खिलना और फूलों की तरह महकना हर किसी की पहचान बन जाए... हर आरज़ू हर तमन्ना हर चाहत पूरी हो... हर मकसद में कामयाब
 
Razi Shahab
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छोटू ज़रा चाय लाना....

उर्वशी, लछ्मी और सुचित्रा नाम की तीन अदाकाराओं के घर पर पुलिस ने छापा मार कर वहां से बाल मज़दूरों को आजाद कराया। चर्चाऐं तो ऐसे हो रहीं थी कि ऐसा महसूस हो रहा था मानो जंग ही जीत ली हो। मगर क्या कर सकते हैं कभी कभी तो कोई भला काम होजाता है ऐसे में अगर
 
Razi Shahab
Dec 29 2009 11:47 AM
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रात को ही क्यों...

एक वक्त था जब महबूबा से मिलने के लिए आशिक को रात से अच्छा वक्त कोई नहीं लगता था इस लिए वह जब आंचल रात का लहराए और सारा आलम सो जाए, तुम शमा जला कर ताज महल में मुझ से मिलने आ जाना की गुहार लगाया करता था, ज़ाहिर है हर किसी की चाहत भी तो यही होती है कि ज
 
Razi Shahab
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एक नज़्म

उनसे बिछडे हुए एक अरसा हुआ उनको देखे हुए इक ज़माना हुआ लोग कहते हैं हम उनके दीवाने हैं वो शमा और हम उनके परवाने हैं प्यार उनके लिए मेरी आंखों में है मेरा दिल मेरी जान उनकी सांसों में है वह संवरती थी हम को दिखाने की ख़ातिर ऐसे चलती थी हम को लुभाने की
 
Razi Shahab
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छह दिसंबर को मिला दूसरा बनवास मुझे…

दिसम्बर 1992 को जो घटना बाबरी मस्जिद की शहादत के रूप में हुई उसने ना सिर्फ हिंदुस्तानी तहज़ीब का ख़ून किया बल्कि भारतीय संमिधान का भी जनाज़ा निकाल दिया था। इस घटना ने जहां हर दिल को रोने पर मजबूर कर दिया था वहीं यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया था कि आख़
 
Razi Shahab
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मैं तुम बिन अधूरी हूं

मुसलसल ख़्वाब आते हैं सूरज अपना सफर तय करके अपने घर आराम करने जा रहा है कोई पागल , दीवानी बाल खोले, नन्गे क़दम, दीवानावार तपती रेत पर सरपट भाग रही है दुपट्टा उसके सर से होता हुआ कांधे पर आ कर लटक गया है उसकी बालियां कानों में झूला झूल रही है उसके हों
 
Razi Shahab
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तुम ईद मना लो तनहा तनहा हम रो लेंगे तनहा ही

मेरी पलकों पर जो सपने थे पल भर में चकनाचूर हुए क्या ख़बर सुनाई ज़ालिम ने और हम ग़म से रनजूर हुए क्या सोचा था इस बार अगर हम उनसे मिलने जाएंगे हर वक्त हमारे साथ रहें कुछ ऐसे लम्हे लाएंगे पर ख़ता हमारी थी शायद जो सपना पूरा हो न सका क्या ख़बर सुनाई ज़ालि
 
Razi Shahab
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दम तोड़ती संस्कृति

भारत में महान हस्तियों की पूजा और उनकी महानता के गुणगान करने का रिवाज बहुत पहले से चला आ रहा है और इस में किसी तरह की कोई कमी नहीं छोड़ी जाती है शायद इसी वजह से किसी ने हिंदुस्तान को मुर्दा परस्तों का देश भी कहा था क्योंकि ये यहां किसी भी बड़ी हस्ती
 
Razi Shahab
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एक तमन्ना-एक एहसास

किसी को प्यार करूं और किसी के साथ रहूं किसी को अपना बना लूं किसी का नाम बनूं किसी की खुश्बू चुरा लूं किसी को महकाऊं किसी की आंख में काजल की तरह बस जाऊं किसी के लब से मुहब्बत का जाम पी करके किसे की नरम सी बाहूं में जा के सो जाऊं किसी की शौख़ अदा दिल क
 
Razi Shahab
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ख़ून में सने सपने

हर तरफ शोर मचा था, कहीं चीखें थीं तो कहीं रोना, एक आफत एक तूफान आ गया था ज़िन्दगी की गली में, तलवारें मियान से बाहर थीं, किरपान निकले थे, तिरशूल लहरा रहे थे, मंदिर की घंटियां, मस्जिद से उठने वाली सदाएं, गुरूदवारे की आवाज़ें सब तलवारों, किरपानों और ति
 
Razi Shahab
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ख़्वाबों की शहज़ादी

ख़्वाब और जवानी एक दूसरे से जुडी हुई चीज़ें हैं। बच्पन में ख़ूबसूरत परियों की कहानियां सुन कर सोना जितना अच्छा लगता है जवानी में हसीनों की दास्तान उतना ही मज़ा देती है। एक उम्र के बाद सपनें देखना और उनकी ताबीरें सोचना दिमाग को बहुत पसंद आता है, खास क
 
Razi Shahab
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शाहरूख़ - सपनों के सफ़र का कामयाब मुसाफिर

एक शख़्स जिस का चेहरा हज़ारों के ख़्वाबों की तस्वीर, एक ऐसा अदाकार जिस का ज़माना दीवाना, एक ऐसा इंसान जिसके रोने का अंदाज़ लाखों हसीनाओं की नींदें उड़ा दे, एक ऐसा दीवाना जिसकी चाहत हर किसी का सपना, उसकी हर अदा, हर अंदाज़, हर नख़रा और हर अहसास सभी के
 
awaz do humko
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करवट

उम्र के एक पड़ाव पर आकर ज़िन्दगी ज़ोर ज़ोर से सासें लेने लगती है...शायद थक चुकी होती है या बहुत ज़्यादा शरारतें उसकी सांसें तोडने लगती हैं या फिर यह वक्त का तक़ाज़ा होता है... कुछ भी हो मगर यहां से ज़िन्दगी अपने रंग बदलने लगती है, कुछ कड़वाहटों का सा
 
awaz do humko
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गरीबों का लेखक- मुंशी प्रेम चंद

मुंशी प्रेम चंद की पुण्यतिथि पर खास अगर हिनदुसतान को ताज महल जैसी हसीन इमारत पर फ़ख़्र है, कुतुब मीनार की बलंदियों पर नाज़ है और लाल किला की मजबूती पर उस की छाती चौड़ी हो जाती है तो वहीं रबिन्द्र नाथ टैगोर की कविताओं, बुल्बुले हिन्द सरोजनी नाइडो की क
 
awaz do humko
Oct 14 2009 07:47 PM
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शब्दों का जादूगर-मजरूह सुल्तानपुरी

अगर हिन्दुस्तानी सिनेमा को राजकपूर की अदाकारी ने दीवाना बनाया था, रफी के सुरों ने नचाया था, नौशाद की धुनों ने एक नई दुनिया में खो जाने पर मजबूर किया था, साहिर के लिखे गानों नें जिन्दगी की तल्ख़ सच्चाईयों से सामना कराया था तो मजरूह सुलतानपूरी के गीतों
 
awaz do humko
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कहां है गांधी के सपनों का हिन्दुस्तान?

एक ऐसा इंसान जिसने हिन्दुस्तान को एक महान देश बनाने के लिए अपने जान की कुर्बानी दी आज उस का जन्म दिन मनाया जा रहा है मगर उसके सपनों का भारत जिस के लिए उसने कुर्बानी दी उसका वजूद खोता नज़र आ रहा। गांधी एक ऐसा नाम है जिसने दुनिया में सिर्फ मोहनचंद के र
 
awaz do humko
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मन्ना डे जादुई आवाज़ का बेताज बादशाह

ये कोई उस वक्त की बात है जब पूरी दुनिया रफी, लता, मुकेश और तलअत महमूद के गाने सुनकर उनके सुरों पर झूमती थी, उस वक्त इन महान गायकों में से एक महान गायक जिस ने अपनी आवाज़ की दिलफरेबीयों से पूरी दुनिया को मदहोश कर रखा था वह ख़ुद मन्ना ड़े सुरों पर थिरकत
 
awaz do humko
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मेरी आवाज़ ही पहचान है मेरी

कल एक ऐसी आवाज़ की मलिका का जन्म दिन है जिस के सुरों पर पूरी दुनिया झूमती है। जी हां कल लता मंगेशकर 80 साल की हो जाएंगी, मगर ये भी एक सच्चाई है की लता जी की आवाज़ से उन की उम्र का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता है। 13 साल की उम्र से गाने का सफ़र शुरू करन
 
awaz do humko
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सदाबहार अभिनेता देव आनंद

हिन्दुसतानी फिल्मी दुनिया में हजारों चेहरों ने अब तक जन्म लिया, अपनी अदाओं और अपने जलवों से लोगों को लुभाया, एक वक्त तक परदे पर राज भी किया मगर कामियाबी का ये सफर ज्यादा देर तक कायम न रह सका और सभी एक खास वक्त के बाद मुरझाए गुलाब की तरह बेमाना हो कर रह
 
Razi Shahab
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लहरों का तड़पना...

आज बहुत दिनों बाद साहिल पर जाने का इत्तेफाक हुआ था, तुम से दूर हुए शायद एक साल का लंबा वक्त गुज़र चुका था, तेज़ हवा के झोंके थे और लहरों की पहुंच से दूर रेत का उड़ता हुआ मंज़र, तंहा खुजूर के पेड़ के नीचे में भी तनहा था, ये और बात है मेरे साथ कुछ हसीन
 
Razi Shahab
Sep 15 2009 07:15 PM
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दम मारो दम...

अपनी मीठी आवाज़ से राह चलते राही के कदम रूकने पर मजबूर करदेने वाली आवाज़ो की मलिका आशा भोसले आज 76 साल की हो गईंहै। फिल्म चुनरिया में सावन आया से अपनी प्यारी आवाज़ का सफरशुरू करने वाली आश आज भी संगीतकारों की पहली पसंद बनी हुई है।साल की उम्र हो जाने के
 
Razi Shahab
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कैसे काटें केक?

आज जब की सारे दोस्त बधाई और हैप्पी बर्थ ड़े का पैगामभेज रहे है, साहिर की नज़्म के ये कुछ जुम्ले मेरी जबानपर खुदबखुद रेंगने लगे है। ये ऊँचे ऊँचे मकानों की देवड़ीयों के बताना या कहनाहर काम पे भूके भिकारीयों की सदाहर एक घर में अफ़्लास और भूक का शोरहर एक
 
Razi Shahab
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दिल जल्ता है तो जलने दे...

कहते है आवाजें मरती नही हैं आवाज़ें हमेशा जिंदा रहती है, कभी भीगे मुंडेरो तो कभी पानी के झरनों से कुछ मीठी आवाज़ें कानों मे रस घोलती रहती हैं। कुदरत ये तोहफा बस कुछ ही लोगों को देता है। वरना मुहम्मद रफ़ी, मन्ना डे, किशोर कुमार और इन जैसे बड़े गायकों की
 
Razi Shahab
Aug 28 2009 10:00 AM
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बन के परवाना तेरी आग में जलना है हमें

ज़िन्दगी मिल कि तेरे साथ ही चलना है हमें पी के हर जाम तेरे साथ संभलना है हमें***बन के शमा शबेतारीक में जलती ही रहो बन के परवाना तेरी आग में जलना है हमें ***जागती आँखें जो थक जाएँ तो ये कह देना चलो सो जाओ कि अब ख्वाबों में मिलना है हमें ***चैन लेने नही
 
Razi Shahab
Aug 23 2009 02:01 PM
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मेरी रुसवाई तेरे काम आए

मेरी रुसवाई तेरे काम आए ज़िन्दगी कुछ तो मेरे काम आए कुछ दिनों से यही चाहत है उसका पैगाम मेरे नाम आए उसको मिलते रहे खुशियों के सुराग हर सिसकता हुआ गम मेरे नाम आए मुद्दतें बीत गयी बिछडे हुए वस्ल की फिर कोई रात आए
 
Razi Shahab
Aug 22 2009 03:45 PM
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आँचल से खेलती लडकियां

कितनी अजीब होती हैं ये लड़कियां ...कितना अच्छा लगता है उन्हें सपनों में जीना ...बचपन ही से किसी नामालूम और अनजान से चेहरे पर फ़िदा हो जाती हैं , सपनों में आने वाले घोङसवार को अपना शहजादा बना कर हर लम्हा हर पल उस के नाम की मालाएं जब्ती हैं ... उस के साथ
 
Razi Shahab
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वो ना आया ...

कल जब शाम रात के लुबादे में छुपने को बेकरार थी , सलेटी मायल सुर्ख आसमान के किनारे बहुत नीचे ढलान पर लुढ़कता आफताब बुझते दिए की तरह ज़ोर लगा कर रौशन होने की कोशिश कर रहा था , आसमान पर सियाही अपना पैर पसार रही थी ...निगाह बार बार उन पक्दंदिओं की तरफ़ उ
 
awaz do humko
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मैं नही मानता ...

सब कहते हैं मुहब्बत बहुत अच्छी चीज़ है ... किस्मत वालों को ही मुहब्बत मिलती है .... कम ही लोगों के आँगन में मुहब्बत का गुज़र होता है ... सब कहते हैं मुहब्बत खुशियाँ देती है ... मुहब्बत जीने की आस देती है ... मुर्दा और बे असर दिल में भी एहसास के शोलों
 
awaz do humko
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एहसास की ताक़त ....

तुम में ज़रूर कोई बसा है ... हाँ तुम ने ज़रूर किसी से धोका खाया है ... बताओ न उस का क्या नाम था ... उस ने तुम्हें छोड़ किओं दिया ... अब वो कहाँ है ... वो ... अरे रुको भी या बोलते ही रहो गे ...तुम किस के बारे में कह रहे हो ... ऐसी कोई बात नही मैं ने कि
 
awaz do humko
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दिल कहता था चल उस से मिल ....

मैं याद तुझे ना करता पर दिल पर मेरा ज़ोर ना था दो आंसू आँख से टपके थे और सामने तेरा चेहरा था मैं तेरी क़सम पूरी करता ,बरसात ने पर वो काम किया दो बूँदें बदन से लिपटी थी और सामने तेरा चेहरा था मैं खुश था साहिल पर आकर मैं था और तन्हाई थी इक हुस्न ने ली व
 
awaz do humko