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सबद-लोक । The World of Words

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01 Apr 2010
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खुश है जमाना आज .... (हरिभूमि में प्रकाशित व्‍यंग्‍य)

मूर्ख दिवस कहीं जाता नहीं है वो तो यहीं बसा रहता है सबके दिमाग में। बस सिर्फ होता यह है कि एक अप्रैल को वह उकसाए जाने पर अपनी पूर्णता में सिर उठाता है और अपने वजूद का ऐलान कर देता है और देखिए सब उसके प्रभाव में बह जाते हैं या मोहग्रसित हो जाते हैं।अब
 
अविनाश वाचस्पति
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पप्‍पू की होशियारी देख लो

पप्‍पू चला रहा था बाइकबैठे उपर तीन होकर टाइटपुलिस ने रोक लियातीन बैठना जुर्म हैपप्‍पू बोला हमें भी शर्म हैईमानदारी सिर्फ तुम्‍हारा न धर्म हैइसलिए जुर्म कोमतलब तीसरे कोघर छोड़ने जा रहे हैंहमें भी कानून तोड़ना नहीं सुहाता हैअपुन तीसरे को घर छोड़ने जाता है।
 
अविनाश वाचस्पति
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पप्‍पू की पत्‍नी को तलाशो ?

पप्‍पू की पत्‍नीबस में नहीं रहीवो उसे कहां ढूंढेमैंने बतला दियातुरंत से जल्‍दीकार में तलाशोवो सचमुच मेंबस में नहीं थीकार में भी नहीं थी।
 
अविनाश वाचस्पति
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पप्‍पू की होली आज ही होली

प से पप्‍पूप से पायलटहवाई जहाज में दोनोंहैडफोन छीन लियापप्‍पू ने पायलट सेरोके नहीं रूकाचिल्‍ला रहा था जोर सेटिकट के पैसे हम देंऔर ड्राइवर अकेलाहोली के गाने सुनेह से होली हैह से शुभकामनाएं कैसे देंह से हुआ हरा रंगहरे रंग की शुभकामनाएंपप्‍पू से आज ही ले
 
अविनाश वाचस्पति
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पप्‍पू आज विदगम है (अविनाश वाचस्‍पति)

आज पप्‍पू शांत हैमत समझें भ्रांत हैमांगी थी बोरोलीनबेटे ने दे दी गम।
 
अविनाश वाचस्पति
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पप्‍पू थानेदार संवाद

बहुत सा सामान मिला है चोरी काअपना अपना सामान पहचान लेंथानेदार ने बोल दियापप्‍पू ने तुरंत ही मुंह खोल दियासामने जो शर्ट है केन्‍टाबिल कीवो मेरी है उस पर पी लिखा हैरंग उसका है लालयह भी कोई सबूत हुआमेरी कमीज भी केन्‍टाबिल की हैउस पर भी पी लिखा हैपर इसका रंग
 
अविनाश वाचस्पति
Feb 13 2010 03:44 AM
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पप्‍पू का छोटा बेटा गंदी गंदी गालियां देता है

पड़ोसी पप्‍पू का नाम प्‍यारेलालआकर बोला - जय राधेलालछोटा बेटा तुम्‍हाराखोटा घणा हैगालियां देता हैगंदी गंदी।प्‍यारेलाल जी मत कीजिये चिंताउसे बड़ा होने दीजियेफिर गालियां भीअच्‍छी अच्‍छी दिया करेगासबका जिया जीत लेगा।पप्‍पू ने बतलाया हैपप्‍पू अब वो पप्‍पू
 
अविनाश वाचस्पति
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पप्‍पू का रिसेंट फोटो देखना मत भूलियेगा

पप्‍पू ने बांध दियाबांध दिया मजाजा रहे थे सड़कसड़कलिखा देगा दीवार परकुछ कड़कदिमाग गया पप्‍पू कातुरंत सरक... पढ़ने वाला गधावहीं रूक गयेकदमों में दम थापर वहीं जम गयेजमे रहे कई घंटेमौसम कई बदलेफिर बदला दिमागलिखी लाईनों को मिटायाउनकी जगह जवाब जमायालिखने वाला
 
अविनाश वाचस्पति
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पप्‍पू की पत्‍नी ने 26 जनवरी का भी इंतजार नहीं किया

पप्‍पू के पुत्‍तर की टीचर नेपप्‍पू दी कापी विच लिख्‍यापुत्‍तर नूं अपने नहलाकर भेजा करें।पप्‍पू ने अपनी पत्‍नी कोकापी फारवर्ड कर दीपप्‍पू की पत्‍नी ने तुरंतएक्‍शन ले लिया26 जनवरी का भीनहीं किया इंतजार।पुत्‍तर नूं असीभेजदे ने पढ़ान वास्‍तेतुस्‍सी ओनू
 
अविनाश वाचस्पति
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पप्‍पू के बेटे को अपनी बीवी चाहिये

पप्‍पू आजकल असमंजस में हैउसके बेटे ने कर दी है बगावतकह दिया है खुलकर और दे दिया है अल्‍टीमेटम।आपकी बीवी के साथ अबनहीं हो सकता मेरा गुजारामुझे तो मेरी बीवी लाकर दो।पप्‍पू सन्‍न हैपप्‍पू की मां प्रसन्‍न हैऔर बेटे की आजादीछिनने ही वाली है।उसको कोई ये वाली
 
अविनाश वाचस्पति
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पैसा है पप्‍पू के पास इसलिए मिल रही है सूखी घास

तू तू हैमैं मैं हूंतू मैं हैमैं तू हूंतू मैंमैं तूतू तू मैं मैंपप्‍पू चिल्‍लायाइतनी बढि़या कारउससे शानदार बंगलाउसमें ऐशो आरामसब बदौलत मेरे पैसे की हैपत्‍नी ने सहज भाव सेतुरंत स्‍वीकार लियाहल्‍के से कह दियासुन लो जी कान खोलकरचिल्‍लाऊंगी नहींऔर न बोलूंगी
 
अविनाश वाचस्पति
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पप्‍पू का बेटा समझदार हो गया है

पप्‍पू का बेटा ?उसका नाम पूछ नहीं रहा मैं।पर है पप्‍पू सेदो कदम आगेचार कदम भीहो सकते हैं वो।पप्‍पू ने कहाबेटे जब तुम छोटे थेबहुत अच्‍छे थेकहना मानते थेजिद नहीं करते थे।बेटे ने दिया जवाबपप्‍पू को कर दियालाजवाब!बोला भोलेपन सेतब मुझमें अक्‍ल नहीं थी पिताजी।
 
अविनाश वाचस्पति
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पप्‍पू शर्मिन्‍दा है पर नहीं परिन्‍दा है

जब बजी मोबाइल की घंटी पप्‍पू बना रहा था दाढ़ी मतलब काट रहा था बनाना ही कहते हैं सब। पप्‍पू ने कहा पत्‍नी से करो फोन पर बात पर मेरे बारे में पूछे तो कह देना घर में नहीं हैं। पत्‍नी ने फोन पर जब की बात तो कहा वो घर में हैं। पप्‍पू चिल्‍ला पड़ा मैंने कह
 
अविनाश वाचस्पति
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पप्‍पू तेल डालता है

बरसों पहले की बात है सो रहे थे पिताजी पप्‍पू भी उसी कमरे में पर सो नहीं पा रहा था। आवाज आ रही थी उसके पिता की नाक से खर्र खुर्र खुर्रम गर्रम खर्राक झर्राक ठर्राक। पप्‍पू तब न सोचता न था विचारता कहे को अक्षरश: मानता उसने पिताजी की नाक में डाल दिया इंज
 
अविनाश वाचस्पति
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पप्‍पू पहेली पूछ रहा है ?

करते हैं नाश्‍ता और खाते हैं भरते हैं पेट। पर ऐसी चीज बतलाओ जिसे नाश्‍ते में नहीं खा सकते इस बार पप्‍पू ने पूछा है सभी मुन्‍ना(ओं) से एक आसान सा सवाल ? आसान होता है तभी जब आता हो वरना मुश्किल का ही है भ्राता वो।
 
अविनाश वाचस्पति
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पप्‍पू दीवाना हो गया है

पप्‍पू हमारा दीवाना हो गया है मेट्रो में चढ़ा और पूछा एयरपोर्ट तक का टिकट है कितने का ? जवाब मिला 70 रुपये का बिना रूके बोला ठीक ठीक लगाओ 10 ले लेंगे। 500 रूपये में मान जाओ नहीं तो बस में चले जायेंगे लेकिन तुरंत लौट कर आया बस का टिकट मेट्रो से भी जब
 
अविनाश वाचस्पति
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पप्‍पू टीना के साथ सोते हुए पकड़ा गया था

मुन्‍ना ने जब अपनी पत्‍नी टीना से पप्‍पू को मिलवाया तो पप्‍पू का जवाब सुन दिमाग उसका चकराया। पप्‍पू बोला जानता हूं मैं इसे हम साथ सोते पकड़े गए थे क्‍या बकवास कर रहे हो मुन्‍ना तो भन्‍ना गया। बकवास नहीं कर रहा हूं कह रहा हूं बिल्‍कुल सच हम दोनों गणित
 
अविनाश वाचस्पति
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पप्‍पू का नौकर प्रेम बना गया प्रेमिका का भाई

प्रेमिका के घर आया पप्‍पू शादी से पहले का किस्‍सा पसंद आ गया नौकर भी कामकाज करने में तगड़ा। शादी जब करेंगे तो रखेंगे इस नौकर को भी साथ पप्‍पू ने कहा इस हाथ यह बांध लो जी गांठ। प्रेमिका बोली मुस्‍कराती हुई खिलखिलाती हुई बतियाई तुम भी कुछ किया करोगे मे
 
अविनाश वाचस्पति
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पप्‍पू की पत्‍नी और औरतें जैसे कपड़े पहनेगी, कोई एतराज मत करना

पप्‍पू की निकली थी लाटरी और जीता था बीस करोड़ आप सबको याद है न ? भूल तो नहीं गए जब पप्‍पू लाटरी के छोड़ बीस करोड़ लेकर बीस रुपये पहुंचा घर तो पत्‍नी ने डांटा हो सकता है चांटा भी हो जमाया पर हमें इसकी खबर नहीं है। पर जब ग्‍यारह करोड़ लेकर पप्‍पू पहुंच
 
अविनाश वाचस्पति
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पप्‍पू की याद और रूमाल की गुलाबी गांठ का किस्‍सा

पप्‍पू के पास एक रूमाल दिन-भर रखता है जेब में सुबह बांधता उसमें गांठ रात को करता है याद। दिन भर करता धींगामस्‍ती शाम होते ही आती सुस्‍ती जब रूमाल की देखी गांठ कपड़े उतारे आ गई चुस्‍ती। खाना खाकर लेट गया और करने लगा याद नहीं आई दिमाग में बांधी क्‍यों
 
अविनाश वाचस्पति
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पप्‍पू बदल रहा भगवान, सुन रही हो भागवान

पप्‍पू ने लड़ा चुनाव चुना गया और पार कर गया चुनाव की नाव और खा गया तुरंत ताव। वोटों के सहारे तैर गया कुर्सी पे जाके बैठ गया पर नहीं हुआ संतोष संसद सदस्‍य बनकर। मंदिर में जाकर बहुत जोर से चिल्‍लाया चिल्‍लाते समय धर्मेन्‍द्र और उसका बेटा सन्‍नी देओल का
 
अविनाश वाचस्पति
Oct 31 2009 04:31 AM
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पप्‍पू सब्‍जीवाला है : ढंग उसका निराला है

पप्‍पू ने खोल ली है सब्‍जी की दुकान सब्जियां महंगी हो रही हैं कमाई की भरपूर संभावना है श्रीमान। पर आदत से लाचार है पप्‍पू हमारा खूब मजेदार है पहले छोले भटूरे की दुकान पर खूब साल किया है काम भरपूर एक्‍सपीरियंस है। वहां ग्राहक से पूछता था यहीं खाओगे या
 
अविनाश वाचस्पति
Oct 24 2009 04:23 AM
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तेजेन्द्र शर्मा की कविता - पतझड़

तेजेन्द्र शर्मा जी का जन्म 21 अक्टूबर 1952 को पंजाब के शहर जगरांव में हुआ। तेजेन्द्र शर्मा की स्कूली पढाई दिल्ली के अंधा मुगल क्षेत्र के सरकारी स्कूल में हुई. आपनें दिल्ली विश्विद्यालय से बी.ए. (ऑनर्स) अंग्रेज़ी, एम.ए. अंग्रेज़ी, एवं कम्पयूटर कार्य म
 
सुशील कुमार
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दीपावली पर पप्‍पू जीता बीस करोड़ की लॉटरी

दीपावली पर्व संध्‍या पर पप्‍पू ने खरीद ली बीस रूपये नकद देकर एक लॉटरी टिकट इनाम था बीस करोड़। अखबार में नंबर छपते ही पप्‍पू गया डीलर के पास था लाटरी डीलर ईमानदार काटकर टैक्‍स स्‍त्रोत पर ही गिनकर पकड़ाये ग्‍यारह करोड़। पप्‍पू पहले तो पीला हुआ फिर हो
 
अविनाश वाचस्पति
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सबद-लोक । The World of Words

भूपेन्द्र नारायण यादव ‘मधेपुरी’ , जन्मः 10 फरवरी 1947, आजादनगर, मधेपुरा, बिहार शिक्षा: पी-एच.डी., भागलपुर विश्वविधालय। सक्रियता: विभिन्न विधाओं में निरन्तर लेखन और प्रकाशन। अनेक संस्थाओं से सक्रिय संबद्धता। आकाशवाणी से रचनाओं का प्रसारण। बी.एन.मंडल व
 
सुशील कुमार
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पप्‍पू की अलार्म घड़ी का किस्‍सा

अफसर दहाड़ा पप्‍पू पर तुम लेट क्‍यों आए हो जी मैं तो बैठ कर आया हूं । अफसर गुस्‍साया मेरा मतलब देर से है । पप्‍पू ने बताया अलार्म घड़ी का दोष है । अफसर अब चिल्‍लाया है इसका क्‍या मतलब है ? मेरे घर में 6 सदस्‍य हैं अलार्म 5 का लगाया था सिवाय मेरे सभी
 
अविनाश वाचस्पति
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हरि शर्मा के गीत -

पुनर्प्रस्तुति:हरि शर्मा के गीत            एक- तुम मधु ऋतू मे मिल जाओ प्रिये मैं सपनो का संसार समर्पण कर दूंगा जब मित्र सभी देखा करते उजियारो को मैंने जीवन मे सिर्फ अँधेरा देखा है जब चार दिशा मे गूँज
 
सुशील कुमार
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पप्‍पू की मम्‍मी की चिंता खत्‍म हो गई है, मत समझें पप्‍पू की शादी हो गई है

पप्‍पू बोला मम्‍मी से पर शादी से पहले की बात है उसकी मम्‍मी की शादी से पहले की नहीं पप्‍पू की शादी से पहले की। मम्‍मी आपकी चिंता का हल पापा ने निकाल लिया है ? कौन सी चिंता हल कर दी है जानना चाह रही है मम्‍मी ? आज तक तो वो सदा हलचल ही मचाते रहे हैं मन
 
अविनाश वाचस्पति
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संजीव निगम की कवितायें

संजीव निगम परिचय : संजीव निगम [ एम् ए, एम फिल] हिंदी के सुपरिचित लेखक, कवि, व्यंगकार और नाटककार .एक अत्यंत प्रभावी वक्ता भी. रचनाएँ देश की सभी प्रमुख पत्रिकाओं में प्रकाशित तथा आकाशवाणी और दूरदर्शन से प्रसारित. .एक सरकारी बैंक में मुख्य प्रबंधक मार्क
 
सुशील कुमार
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पप्‍पू की करतूत कहेंगे आप या कहेंगे कारनामा ?

अब तो हो गई है शादी इससे पहले पप्‍पू नहीं था निरा पप्‍पू कुछ गप्‍पू भी था। बड़े छोटों के काटता था कान हज्‍जाम नहीं था होता तो उस्‍तरा चलाता गाल परसिर्फ काटता होता बाल।एक दिन अपने मित्र मुन्‍ना के साथ गया दिल्‍ली रेलवे स्‍टेशन और दिल दे बैठा। पूछताछ
 
अविनाश वाचस्पति
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रति सक्सेना की कवितायें -

परिचय: डा.रति सक्सेना हिंदी की उन थोड़े से मूर्द्धन्य कवयित्रियों में से हैं जिनकी काव्य-रचना प्रक्रिया से गुजरते हुए मुझे यह भासमान होता है कि उन्होंने कविता की स्थापित क्लासिकी और वर्जनाओं पर अपना ध्यान ज्यादा केन्द्रित नहीं किया, बल्कि खुद की अपनी
 
सुशील कुमार
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पप्‍पू ने पूछा है पत्‍नी से : बाथरूम में नहाते समय क्‍या लगायेंगे ?

ठंडे ठंडे पानी से नहाना चाहिए नहाते समय क्‍या लगाना चाहिए पूछ लिया पप्‍पू ने आकर मूड में पत्‍नी से। तुरंत जवाब दिया पत्‍नी ने पप्‍पू की पत्‍नी जो है साबुन ?नहीं शेम्‍पू ?नहीं अब समझी पानी से नहाना चाहिए !पानी तो मैंने बतलाया हैमैं पूछ रहा हूं क्‍या लगाना
 
अविनाश वाचस्पति
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पप्‍पू लाया ऑटोमैटिक डेंटल क्‍लीनर - (अविनाश वाचस्‍पति)

सच का सामना मेंपत्‍नी के खुलासे के बादपप्‍पू सदमे में आ गया हैफिजीकली तौर पर घबरा गया हैदमा तो नहीं हुआ है उसेपर बेदम वो हो गया हैबेगम नहीं हुआ हैमर्द जो है।सच का सामना मेंसाफ मना संभव नहीं हैटी. आर. पी. गिरती है इससेइसलिए ये ऑप्‍शन अवेलेबल नहीं हैपप्‍पू
 
अविनाश वाचस्पति
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पप्‍पू सलाह केन्‍द्र खुल गया है (अविनाश वाचस्‍पति)

गुस्‍सा आता हैतो फेंकी जाती है चीजेंचीजें जो टूटती हैंचीजें वो जो टूटने सेबच जाती हैंउन्‍हें कौन बचाता है ?इसका सनातन उपायक्‍या होसोच रहे थे यहीउस लड़की के परिवार वालेकैसे लड़के से की जाए उसकी शादीजो चीजों को फेंकती है औरकरती है बरबादी। लड़की की गुस्‍से
 
अविनाश वाचस्पति
Sep 19 2009 03:25 PM
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कविवर एकान्त श्रीवास्तव की कवितायें -

छवि: एकान्त श्रीवास्तव-परिचय- आप विगत दो वर्षो से भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता की मानक पत्रिका ‘वागर्थ’ के संपादक हैं। समकालीन कविता में आपका योगदान अविस्मरणीय रहा है जो आपके लेखन से ही स्वस्पष्ट है। हिन्दी के प्रखर आलोचक डा. नामवर सिंह जी के शब्दों में
 
सुशील कुमार
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लावण्या शाह की ताज़ा कविताएँ-

छवि - लावण्या शाह :परिचय- लावण्या शाह सुप्रसिद्ध कवि स्व० श्री नरेन्द्र शर्मा जी की सुपुत्री हैं और वर्तमान में अमेरिका में रह कर अपने पिता से प्राप्त काव्य-परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं।समाजशा्स्त्र और मनोविज्ञान में बी.ए.(आनर्स) की उपाधि प्राप्त लावण्या
 
सुशील कुमार
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कविवर विजेन्द्र की ताज़ा कविताएँ

कविवर विजेन्द्र की ये ताज़ा कविताएँ उनसे अनुरोध कर फोन से प्राप्त किया गया है। चौहत्तर की वय पार कर चुके कविवर विजेंद्र के लगभग चार दशकों से उपर के दीर्घ कालखंड में समाये कविकर्म और सौंदर्यदृष्टि को देखकर यह सहज ही लक्ष्य किया जा सकता है कि
 
सुशील कुमार
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अरविन्द श्रीवास्तव की कवितायें

छवि : अरविन्द श्रीवास्तव आप बिहार से हिन्दी के युवा कवि हैं, लेखक हैं। संपादन -रेखांकन और अभिनय -प्रसारण जैसे कई विधाओं में आप अक्सर देखे जाते हैं। जितना आप प्रिंट पत्रिकाओं में छपते हैं, उतनी ही आपकी सक्रियता अंतर्जाल पत्रिकाओं में भी है - परिचय- जन
 
सुशील कुमार
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अशोक सिंह की एक ताज़ा कविता- पहाड़ पर बैठ एक पहाड़िया आदिवासी प्रेमी युगल की बात-चीत

अशोक सिंह- परिचय - जन्म : 08 फरवरी, 1971,बिहार के जमुई जिले में, किंतु बचपन से दुमका (झारखण्ड) में निवास। शिक्षा :- बी०ए०, (हिंदी) ।रुचि: साहित्य,रंगमंच,रेखांकन और पत्रकारिता। हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं में लिखने-पढ़ने में गहरी रुचि. कविताएँ-आलेख इत्यादि
 
सुशील कुमार
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अरविन्द ठाकुर की कवितायें

अरविन्द ठाकुर परिचय - पिता - बलेन्द्र नारायण ठाकुर ’विप्लव’ जन्म- १४ फरवरी १९५७, सुपौल , बिहार । हिन्दी और मैथिली में लेखन प्रकाशित पुस्तक- - धरती टूट रही है/ धरती टूटि रहल अछि (हिन्दी एवं मैथिली में कविता संग्रह) अन्हारक विरोध में- मैथिली कथा संग्रह
 
सुशील कुमार