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खुश है जमाना आज .... (हरिभूमि में प्रकाशित व्यंग्य)
मूर्ख दिवस कहीं जाता नहीं है वो तो यहीं बसा रहता है सबके दिमाग में। बस सिर्फ होता यह है कि एक अप्रैल को वह उकसाए जाने पर अपनी पूर्णता में सिर उठाता है और अपने वजूद का ऐलान कर देता है और देखिए सब उसके प्रभाव में बह जाते हैं या मोहग्रसित हो जाते हैं।अब
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Apr 01 2010 09:52 AM


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