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अस्तित्व

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08 Mar 2010
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गणतंत्रोत्सवः एक मंत्र कविता

इस गणतन्त्र मेंगण के तन्त्र को नमस्कार हैतन्त्र की शक्तिगण की भक्तिविकास की तख्ती मेंचढ़े हुए रंगों को नमस्कार हैइस व्यवस्था, तन्त्र मेंलोकसभा मेंउखाड़े गये माईक औरकुर्सियों को नमस्कार हैविधानसभा पटल पररखे गये रिश्वत के नोटों को नमस्कार हैहर पाँच साल
 
सुरेश पण्डा
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Mar 08 2010 03:53 PM
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गणतंत्रोत्सवः एक मंत्र कविता

इस गणतन्त्र मेंगण के तन्त्र को नमस्कार हैतन्त्र की शक्तिगण की भक्तिविकास की तख्ती मेंचढ़े हुए रंगों को नमस्कार हैइस व्यवस्था, तन्त्र मेंलोकसभा मेंउखाड़े गये माईक औरकुर्सियों को नमस्कार हैविधानसभा पटल पररखे गये रिश्वत के नोटों को नमस्कार हैहर पाँच साल
 
सुरेश पण्डा
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ललित निबंध : नया कलेवर

वह एक गहरी नींद से जगा था । नींद भी कोई ऐसी वैसी नहीं थी । बेहोशी या समाधि । दोनों या कोई नहीं । वह कब सोया था ? कितने अंतराल के बाद जागा ?, उसे नहीं पता । समय काल, जिसकी गोद में यह सारा आडम्बर का अस्तित्व फलता फूलता , खेलता कूदता है, स्वयं में
 
सुरेश पण्डा
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ललित निबंध : नया कलेवर

वह एक गहरी नींद से जगा था । नींद भी कोई ऐसी वैसी नहीं थी । बेहोशी या समाधि । दोनों या कोई नहीं । वह कब सोया था ? कितने अंतराल के बाद जागा ?, उसे नहीं पता । समय काल, जिसकी गोद में यह सारा आडम्बर का अस्तित्व फलता फूलता , खेलता कूदता है, स्वयं में
 
सुरेश पण्डा
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Jan 03 2010 11:45 AM
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सिविक सेंस

दोपहर के समय सडकों पर ट्रेफिक का दबाव अपेक्षाकृत कम रहता है । कालोनियों के बीच की सडकें तो प्राय खाली ही होती हैं । इसी समय गृह स्वामिनियाँ भी अपने पति और बच्चों को आफिस और स्कूल|कालेज के लिये बिदा कर फुरसत से होती हैं , अतः पास पडोस की दो चार सहेलिय
 
सुरेश पण्डा
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कुज दोष या मंगली दोष

आमतौर पर अपने चिरंजिव या लाडली के लिये योग्य बहू या वर चुनाव की प्रक्रिया में जन्म कुन्डली मिलाना एक आवश्यक शर्त के रूप में भली भॉंति प्रतिष्ठित है । अनेक सम्बन्ध केवल इसी कारण से मूर्तरूप नहीं ले पाते । इस प्रक्रिया में मंगल का योगदान निश्चय ही बहुत
 
सुरेश पण्डा
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बस्तर पर तीन कविताएँ

जनमानस उद्वेलित है पहले सरकार, गैर सरकारी संस्थाएँ, साहूकार उनके विकास के लिये कृत संकल्पित थे अब उन्हें नक्सलियों के छॉंव तले विकास करना है बाप पहले के साथ है बेटा नक्सलियों के साथ और मॉं बेटी सलवाजूडूम केम्प में । अब तो उन्हे भी पता चल चुका है विका
 
सुरेश पण्डा
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बस्तर पर तीन कविताएँ

1जनमानसउद्वेलित हैपहलेसरकार,गैर सरकारी संस्थाएँ,साहूकारउनके विकास के लियेकृत संकल्पित थेअब उन्हेंनक्सलियों के छॉंव तलेविकास करना हैबापपहले के साथ हैबेटानक्सलियों के साथऔरमॉं बेटी सलवाजूडूम केम्प में ।अब तोउन्हे भी पता चल चुका हैविकास तो उन्हें करना ही
 
सुरेश पण्डा
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Dec 26 2009 01:15 PM
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परियों का देश थाईलैंड

कहते हैं पुरानी पीढ़ी का अनुभव नई पीढ़ी के लिये कथा कहानी या गल्प से अधिक मायने नहीं रखती । वर्तमान का खट्टा मीठा स्वाद सजीव होता है , जबकि भूत जो वर्तमान के काँधे चढ़कर आता है , सूचना बनकर सरोकारों तक बिखरता तो है पर उसमें ताजे फूल की खुशबू नहीं होती ।
 
सुरेश पण्डा
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परियों का देश थाईलैंड

कहते हैं पुरानी पीढ़ी का अनुभव नई पीढ़ी के लिये कथा कहानी या गल्प से अधिक मायने नहीं रखती । वर्तमान का खट्टा मीठा स्वाद सजीव होता है, जबकि भूत जो वर्तमान के काँधे चढ़कर आता है, सूचना बनकर सरोकारों तक बिखरता तो है पर उसमें ताजे फूल की खुशबू नहीं होती । इसे
 
सुरेश पण्डा
Nov 30 2009 06:46 AM
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दीपक को जलने दो

द्वार पर धरा दीपक भोर तलक जलने दो । सूरज ने कैद किया विद्रोही चाँद लुकछिप कर भागा है शुक्र बाढ़ फाँद तारों ने टाँक दिये चमकीले बूटे क्षितिज के पार नहीं ज्योति पिंड छूटे जुगनू का संगी बन अंधियारा हरने दो दीपक को जलने दो । यौवन में रंग भरे मंगल की चाल म
 
सुरेश पण्डा
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तुम्हारा नाम

फिर बिछलती साँझ ने भरमा दिया लेकर तुम्हारा नाम । बहककर है आ गया मेरे दुआरे अन्य बागों से मधुर मलयी पवन बिछ रहे पथ में अतुल विश्वास लेकर किस अदेखे ताल से ये भीगकर आये नयन । हर सुलगते शब्द ने आकर किया है फिर मुझे बदनाम । फिर बिछलती साँझ ने भरमा दिया ले
 
सुरेश पण्डा
Nov 22 2009 05:36 PM
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बाजार से डरना मना है

आज बाजार के साथ वाद शब्द जुड़कर एक बिल्कुल ही नये अर्थ में प्रयुक्त होने लगा है । बाजारवाद शब्द में जिस दार्शनिक गंभीरता का पुट होना चाहिये , वह नदारत है । मुझे बाजारवाद के पक्ष में खड़ा कोई नहीं दिखता । सब के सब बिपक्ष में हैं । प्रजातन्त्र के इस युग
 
सुरेश पण्डा
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जीओ और जीने दो

मानव अधिकारों में जीवन का अधिकार मेरे विचार से प्राथमिक अधिकार है । यदि मानव जीवित रहेगा तभी अपने अन्य अधिकारों का उपभोग कर सकेगा । मुर्दे के अधिकार में तो केवल नष्ट होना ही होता है । देश में सुरक्षा का माहौल जो आज दिखाई देता है और जन साधारण का आत्मर
 
सुरेश पण्डा
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अजीत जोगी झारखण्ड जायेंगे

अजीत जोगी यदि मान गये तो उन्हें काग्रेस पार्टी राज्यपाल बनाकर झारखण्ड भेजना चाहती है । इस समाचार का अलग अलग लोगों पर अलग अलग प्रभाव पड़ना स्वाभाविक ही है । अजीत जोगी काग्रेस पार्टी की छत्तीसगढ़ इकाइ के दमदार नेता के रुप जाने पहचाने जाते रहे हैं । पार्ट
 
सुरेश पण्डा
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सावधान प्रदूषण अपनी विकरालता में दिनोदिन बढ़ोत्तरी करता चला जा रहा है

आज हम चारों तरफ से समस्याओं से घिरे हुए हैं । सर्वव्यापी वायु प्रदूषण अपनी विकरालता में दिनोदिन बढ़ोत्तरी करता चला जा रहा है । ध्वनि प्रदूषण की मात्रा तथा भयावहता सीमा तोड़ती नजर आ रही है । आसपास सड़कों पर कचरा बिखरा रहता है । नालियाँ कचरे से जाम हो गई
 
सुरेश पण्डा
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समय प्रबंधन

कहीं पढ़ा था कि जापानी लोगों के शब्दकोश में लेट|बिलम्ब शब्द नहीं है । समय की पाबंदी उनका सहज स्वभाव है। समय पर सारे कार्य करना उनकी परम्परा है । यदि कोई कहीं देरी से पहुँचता है तो उसे लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ती है। ज्यादा देरी तो उसका काम ही बिगाड़ दे
 
सुरेश पण्डा
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सिविक सेंस

दोपहर के समय सडकों पर ट्रेफिक का दबाव अपेक्षाकृत कम रहता है । कालोनियों के बीच की सडकें तो प्राय खाली ही होती हैं । इसी समय गृह स्वामिनियाँ भी अपने पति और बच्चों को आफिस और स्कूल|कालेज के लिये बिदा कर फुरसत से होती हैं , अतः पास पडोस की दो चार सहेलिय
 
सुरेश पण्डा
Nov 22 2009 05:36 PM
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कुज दोष या मंगली दोष

आमतौर पर अपने चिरंजिव या लाडली के लिये योग्य बहू या वर चुनाव की प्रक्रिया में जन्म कुन्डली मिलाना एक आवश्यक शर्त के रूप में भली भॉंति प्रतिष्ठित है । अनेक सम्बन्ध केवल इसी कारण से मूर्तरूप नहीं ले पाते । इस प्रक्रिया में मंगल का योगदान निश्चय ही बहुत
 
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दीपक को जलने दो

द्वार पर धरा दीपक भोर तलक जलने दो । सूरज ने कैद किया विद्रोही चाँद लुकछिप कर भागा है शुक्र बाढ़ फाँद तारों ने टाँक दिये चमकीले बूटे क्षितिज के पार नहीं ज्योति पिंड छूटे जुगनू का संगी बन अंधियारा हरने दो दीपक को जलने दो । यौवन में रंग भरे मंगल की चाल म
 
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दीपक को जलने दो

द्वार पर धरादीपकभोर तलक जलने दो ।सूरज ने कैद कियाविद्रोही चाँदलुकछिप करभागा हैशुक्र बाढ़ फाँदतारों ने टाँक दियेचमकीले बूटेक्षितिज के पार नहींज्योति पिंड छूटेजुगनू का संगी बनअंधियारा हरने दोदीपक को जलने दो ।यौवन में रंग भरेमंगल की चालमदमाता केतु अबदेता है
 
सुरेश पण्डा
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Oct 17 2009 01:22 PM
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तुम्हारा नाम

फिर बिछलती साँझ ने भरमा दिया लेकर तुम्हारा नाम । बहककर है आ गया मेरे दुआरे अन्य बागों से मधुर मलयी पवन बिछ रहे पथ में अतुल विश्वास लेकर किस अदेखे ताल से ये भीगकर आये नयन । हर सुलगते शब्द ने आकर किया है फिर मुझे बदनाम । फिर बिछलती साँझ ने भरमा दिया ले
 
सुरेश पण्डा
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तुम्हारा नाम

फिर बिछलती साँझ नेभरमा दियालेकर तुम्हारा नाम ।बहककर है आ गयामेरे दुआरेअन्य बागों से मधुर मलयी पवनबिछ रहे पथ मेंअतुल विश्वास लेकरकिस अदेखे ताल से येभीगकर आये नयन ।हर सुलगते शब्द नेआकर किया हैफिर मुझे बदनाम ।फिर बिछलती साँझ नेभरमा दियालेकर तुम्हारा नाम
 
सुरेश पण्डा
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Oct 11 2009 04:36 PM
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बाजार से डरना मना है

आज बाजार के साथ वाद शब्द जुड़कर एक बिल्कुल ही नये अर्थ में प्रयुक्त होने लगा है । बाजारवाद शब्द में जिस दार्शनिक गंभीरता का पुट होना चाहिये , वह नदारत है । मुझे बाजारवाद के पक्ष में खड़ा कोई नहीं दिखता । सब के सब बिपक्ष में हैं । प्रजातन्त्र के इस युग
 
सुरेश पण्डा
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बाजार से डरना मना है

आज बाजार के साथ वाद शब्द जुड़कर एक बिल्कुल ही नये अर्थ में प्रयुक्त होने लगा है । बाजारवाद शब्द में जिस दार्शनिक गंभीरता का पुट होना चाहिये , वह नदारत है । मुझे बाजारवाद के पक्ष में खड़ा कोई नहीं दिखता । सब के सब बिपक्ष में हैं । प्रजातन्त्र के इस युग में
 
सुरेश पण्डा
Oct 04 2009 12:49 PM
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जीओ और जीने दो

मानव अधिकारों में जीवन का अधिकार मेरे विचार से प्राथमिक अधिकार है । यदि मानव जीवित रहेगा तभी अपने अन्य अधिकारों का उपभोग कर सकेगा । मुर्दे के अधिकार में तो केवल नष्ट होना ही होता है । देश में सुरक्षा का माहौल जो आज दिखाई देता है और जन साधारण का आत्मर
 
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जीओ और जीने दो

मानव अधिकारों में जीवन का अधिकार मेरे विचार से प्राथमिक अधिकार है । यदि मानव जीवित रहेगा तभी अपने अन्य अधिकारों का उपभोग कर सकेगा । मुर्दे के अधिकार में तो केवल नष्ट होना ही होता है । देश में सुरक्षा का माहौल जो आज दिखाई देता है और जन साधारण का आत्मरक्षा
 
सुरेश पण्डा
Sep 28 2009 04:29 PM
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अजीत जोगी झारखण्ड जायेंगे

अजीत जोगी यदि मान गये तो उन्हें काग्रेस पार्टी राज्यपाल बनाकर झारखण्ड भेजना चाहती है । इस समाचार का अलग अलग लोगों पर अलग अलग प्रभाव पड़ना स्वाभाविक ही है । अजीत जोगी काग्रेस पार्टी की छत्तीसगढ़ इकाइ के दमदार नेता के रुप जाने पहचाने जाते रहे हैं । पार्ट
 
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अजीत जोगी झारखण्ड जायेंगे

अजीत जोगी यदि मान गये तो उन्हें काग्रेस पार्टी राज्यपाल बनाकर झारखण्ड भेजना चाहती है । इस समाचार का अलग अलग लोगों पर अलग अलग प्रभाव पड़ना स्वाभाविक ही है । अजीत जोगी काग्रेस पार्टी की छत्तीसगढ़ इकाइ के दमदार नेता के रुप जाने पहचाने जाते रहे हैं । पार्टी
 
सुरेश पण्डा
Jun 05 2009 02:33 PM
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सावधान प्रदूषण अपनी विकरालता में दिनोदिन बढ़ोत्तरी करता चला जा रहा है

आज हम चारों तरफ से समस्याओं से घिरे हुए हैं । सर्वव्यापी वायु प्रदूषण अपनी विकरालता में दिनोदिन बढ़ोत्तरी करता चला जा रहा है । ध्वनि प्रदूषण की मात्रा तथा भयावहता सीमा तोड़ती नजर आ रही है । आसपास सड़कों पर कचरा बिखरा रहता है । नालियाँ कचरे से जाम हो गई
 
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सावधान प्रदूषण अपनी विकरालता में दिनोदिन बढ़ोत्तरी करता चला जा रहा है

आज हम चारों तरफ से समस्याओं से घिरे हुए हैं । सर्वव्यापी वायु प्रदूषण अपनी विकरालता में दिनोदिन बढ़ोत्तरी करता चला जा रहा है । ध्वनि प्रदूषण की मात्रा तथा भयावहता सीमा तोड़ती नजर आ रही है । आसपास सड़कों पर कचरा बिखरा रहता है । नालियाँ कचरे से जाम हो गई हैं
 
सुरेश पण्डा
Jun 05 2009 07:49 AM
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समय प्रबंधन

कहीं पढ़ा था कि जापानी लोगों के शब्दकोश में लेट|बिलम्ब शब्द नहीं है । समय की पाबंदी उनका सहज स्वभाव है। समय पर सारे कार्य करना उनकी परम्परा है । यदि कोई कहीं देरी से पहुँचता है तो उसे लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ती है। ज्यादा देरी तो उसका काम ही बिगाड़ दे
 
सुरेश पण्डा
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समय प्रबंधन

कहीं पढ़ा था कि जापानी लोगों के शब्दकोश में लेट|बिलम्ब शब्द नहीं है । समय की पाबंदी उनका सहज स्वभाव है। समय पर सारे कार्य करना उनकी परम्परा है । यदि कोई कहीं देरी से पहुँचता है तो उसे लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ती है। ज्यादा देरी तो उसका काम ही बिगाड़ देती
 
सुरेश पण्डा
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सिविक सेंस

दोपहर के समय सडकों पर ट्रेफिक का दबाव अपेक्षाकृत कम रहता है । कालोनियों के बीच की सडकें तो प्राय खाली ही होती हैं । इसी समय गृह स्वामिनियाँ भी अपने पति और बच्चों को आफिस और स्कूल|कालेज के लिये बिदा कर फुरसत से होती हैं , अतः पास पडोस की दो चार सहेलियाँ
 
सुरेश पण्डा
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May 30 2009 01:14 PM
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कुज दोष या मंगली दोष

आमतौर पर अपने चिरंजिव या लाडली के लिये योग्य बहू या वर चुनाव की प्रक्रिया में जन्म कुन्डली मिलाना एक आवश्यक शर्त के रूप में भली भॉंति प्रतिष्ठित है । अनेक सम्बन्ध केवल इसी कारण से मूर्तरूप नहीं ले पाते । इस प्रक्रिया में मंगल का योगदान निश्चय ही बहुत बडा
 
सुरेश पण्डा