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10 Jun 2010
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डेल्ही के भोलागर ....अब खूब भोलिए चटका चटका ..कमेन्ट कमेन्ट ..हम चले इलाहबाद ...मिथिलेश दुबे

प्रमेन्द्र भाई की पोस्ट को सभ्य भाषा में लिखा जाना ""ब्‍लागिंग वाले गुंड़ो मै "महाशक्ति" चुनौती स्‍वीकार करता हूँ" आज तक किसी भी प्रकार से कमतर आंकने की जो गलती कर रहें हैं वो सावधान .............? १५ जून को आपके लिए काठ खोला जा रहा है.........और जो चटके
 
Mithilesh dubey
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प्राप्त सूचना के अनुसार छत्तीसगढ में कुत्तो का महा ब्लोगर सम्मेलन होने वाला है.-------मिथिलेश दुबे

प्राप्त सूचना के अनुसार छत्तीसगढ में कुत्तो का महा ब्लोगर सम्मेलन होने वाला है. गब्बर-- नाच बसंती नाच वीरु -- नहीं बसंती तुम इन कुत्तों के सामनें मत नाचनाबसंती-- परन्तु मेरे सईया मैंने तो सुना है कि सारे कुत्ते छत्तीसगढ़ गयें है ब्लोगर सम्मेलन में ये
 
Mithilesh dubey
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ब्‍लागिंग वाले गुन्‍डो के बीच फंसी चिट्ठाकारी (भागा २) अविनाश जी जवाब दीजिए -----------मिथिलेश दुबे

अब बहुत हुआ , अब बात साफ हो जानी चाहिए कि अब नहीं चलेगा अधिकार हिन्दी ब्लोगिंग में मठाधीशों कां , आखिर ये लोग होते कौन है किसी पोस्ट का निर्धारण करने वाले , जब भी कोई पोस्ट इनके गुट का होता है , चाहे उसमे कबाड़ ही क्यों ना लिखा है तुरंत चटके लग जायेंगे ,
 
Mithilesh dubey
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हिन्दी ब्लोगिंग में सघंटन क्यों ??? मिथिलेश दुबे

अभी हाल ही में दिल्ली में इंटरनेशनल ब्लोगिंग सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया , इसके लिए आयोजको को बहुत-बहुत बधाई । सम्मेलन में अधिक से अधिक ब्लोगरो ने पहुँच कर इस सम्मेलन को सफल बनाने में अपनी भूमिका अदा की जो सराहनिय रहा । मैं किसी कारण वश नहीं पहुँच सका
 
Mithilesh dubey
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आधुनिकता की आँधी में पिसता वय -- (मिथिलेश दुबे)

आधुनिक जीवनशैली और ऊँची आकांक्षाओं के बोझ तले वय बुरी तरह से पिस रहा है । इसके प्रभाव से किशोर वय व लड़के-लड़कियाँ मूल्यो, नैतिकताओं और वर्जनाओं से उदासीन और लापरवाह होते चले जा रहे हैं । जो मूल्य और मानदंड इन्हे विकसीत और सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक होते
 
Mithilesh dubey
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May 18 2010 07:44 PM
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और लिख दी कहानीं अपने खून से---------मिथिलेश दुबे

एक चिड़िया को एक सफ़ेद गुलाब से प्यार हो गया ,गुलाब से अपनी मोहब्बत का इजहार किया ,गुलाब ने जवाब दिया कि जिस दिन मै लाल हो जाऊंगा उस दिन मै तुमसे प्यार करूँगा ,जवाब सुनके चिड़िया गुलाब के आस पास काँटों में लोटने लगी और उसके खून से गुलाब लाल हो गया,ये
 
Mithilesh dubey
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फैशन हो या पोर्नोग्राफी सब बिना किसी शरम के परोसी जा रही हैं--------- मिथिलेश दुबे

अगर ये कहा जाए कि विगत वर्षो में सबसे ज्यादा प्रगति विज्ञान क्षेत्र ने किया तो गलत ना होगा । पिछले पच्चीस वर्षों मे तो इलेक्ट्रानिक्स के क्षेत्र में हुए आविष्कार के कारण सूचनातंत्र का पूरा जंजाल घर-घर में पहुँच गया है । पूरे विश्व ने उन्नीसवीं शताब्दी
 
Mithilesh dubey
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समीर लाल जी की तुलना लुच्चो से , अब तो हद हो गयी --------मिथिलेश दुबे

जय हो हिन्दी ब्लोगिंग की , एक बार फिर विवाद चल पड़ा है कि कौन है हिन्दी ब्लोगिंग में सर्वश्रेष्ठ ? कमबख्त ये भी कोई सवाल है पुछने को,खैर तब पर भी कुछ अविचारी लोग इस मसले पर लड़ पड़ते हैं , जबकि ब्लोगिंग के हर बच्चे को मालुम है कि कौन है सर्वश्रेष्ठ ।
 
Mithilesh dubey
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आजादी का अर्थ निरंकुशता और अनुशासनहीनता कतई नहीं है--------मिथिलेश दुबे

आजादी को परिभाषित करना बहुत मुश्किल है। हर इंसान अपनी बुद्धि का सही उपयोग करते हुए आजादी की सीमा तय करता है। हर व्यक्ति स्वतंत्र रहना चाहता है, परंतु इसकी अधिकता कभी-कभी नुकसानदेह साबित होती है। आज बेटी-बेटे को समानता का दर्जा दिया जाता है, लेकिन समाज का
 
Mithilesh dubey
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मुझे माँ मत बोलो,,, क्या कहें इसे नारी विकास या नारीत्व पतन???-----मिथिलेश दुबे

आज मैं कुछ नहीं कहूँगा आज मैं आपको एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ जिसे सुनने के बाद आप भी शायद सोचने पर मजबुर हो जायें । हमारा देश विकास के पथ पर अग्रसर है, विकास हर क्षेत्र में हो रहा इससे कदापि इनकार नहीं किया जा सकता । देश आधनिकता की वय इस तरह पिस
 
Mithilesh dubey
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भद्र समाज इन्हें बुरी औरत एवं कुल्टा के रूप में देखता है----------(मिथिलेश दुबे)

समाज में वेश्या की मौजूदगी एक ऐसा चिरन्तन सवाल है जिससे हर समाज, हर युग में अपने-अपने ढंग से जूझता रहा है। वेश्या को कभी लोगों ने सभ्यता की जरूरत बताया, कभी कलंक बताया, कभी परिवार की किलेबंदी का बाई-प्रोडक्ट कहा और सभी सभ्य-सफेदपोश दुनिया का गटर जो
 
Mithilesh dubey
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तन पर लपेटे फटे व पुराने कपड़े---------------------(मिथिलेश दुबे)

तन पर लपेटे फटे व पुराने कपड़ेवह सांवली सी लड़की,कर रही थी कोशिश शायद ढक पाये तन को अपने,हर बार ही होती शिकार वहअसफलता और हीनता कासमजा की क्रूर व निर्दयी निगाहेंघूर रहीं थी उसके खुलें तन को,हाथ में लिए खुरपे सेचिलचिलाती धूप के तलेतोड़ रही थी वह पेड़ो से
 
Mithilesh dubey
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भारत को गुलाम बनाना बहुत आसान है क्योंकि ??? मिथिलेश दुबे

सन् १९४७ में भारत और भारतवासी विदेश दासता से मुक्त हो गये। भारत के संविधान के अनुसार हम भारतवासी 'प्रभुता सम्पन्न गणराज्य' के स्वतन्त्र नागरिक है। परन्तु विचारणीय यह है कि जिन कारणो ने हमें लगभग १ हजार वर्षो तक गुलाम बनाये रखा था , क्या वे कारण निशेःष हो
 
Mithilesh dubey
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कितना कारगर साबित होगा सेक्स एजुकेशन----------मिथिलेश दुबे

एचआईवी, यौन शोषण आदि से बच्चे कैसे बचें? जागरुकता लाने के प्रयास के तहत संयुक्त राष्ट्र के शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन ने यौन शिक्षा पर नए दिश-निर्देश जारी किए हैं। यौन शिक्षा पर बनाए गए अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देश के तहत शिक्षक छात्रों को
 
Mithilesh dubey
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"पति-पत्नी के निजी एकांतिक संसार की तरह बच्चो में भी प्राइवेसी का आग्रह बढ़ने लगा है "----------मिथिलेश दुबे

सभ्यता और संस्कृति के विकास का आरंभ परिवारसंस्था के साथ जोड़ा जा सकता है । पौराणिक और आध्यात्मिक दृष्टि से इसके उद् भव की जो भी गाथायें या कारण हैं, समाज शास्त्रीय दृष्टि से मनुष्य के भीतर जन्मे सहयोग और अनुराग को परिवार का आधार कहा जाता है । सहयोग और
 
Mithilesh dubey
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क्या आप हिन्दू हैं ?------------मिथिलेश दुबे

'हिन्दू' शब्द मानवता का मर्म सँजोया है। अनगिनत मानवीय भावनाएँ इसमे पिरोयी है। सदियों तक उदारता एवं सहिष्णुता का पर्याय बने रहे इस शब्द को कतिपय अविचारी लोगों नें विवादित कर रखा है। इस शब्द की अभिव्यक्ति 'आर्य' शब्द से होती है। आर्य यानि कि मानवीय
 
Mithilesh dubey
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इडियट बॉक्स........और हम गुलाम------------मिथिलेश दुबे

अगर ये कहा जाए कि विगत वर्षो में सबसे ज्यादा प्रगति विज्ञान क्षेत्र ने किया तो गलत ना होगा । पिछले पच्चीस वर्षों मे तो इलेक्ट्रानिक्स के क्षेत्र में हुए आविष्कार के कारण सूचनातंत्र का पूरा जंजाल घर-घर में पहुँच गया है । पूरे विश्व ने उन्नीसवीं शताब्दी
 
Mithilesh dubey
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लेडी डान / शिखन्डी चर्चाकार------------ मिथिलेश दुबे

बच के रहना रे बाबा बच के रहना रेनहीं तो हो जायेगी चिट्ठा चर्चाअगर नहीं कर पाऊंगा कुछ तुम्हारातो चिट्ठा चर्चा कर के हीनिकाल लूंगा सारी भड़ासकर दुंगा सबकी ऐसी की तैसीसाथ नहीं बचेंगे तुम्हारे हितैषीमुझे सब कहते है लेडी डॉनजिसका चाहूँ कर दू काम तमामलिखती हूँ
 
Mithilesh dubey
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चिट्ठा चर्चा को ये अधिकार किसने दिया------- मिथिलेश दुबे

शायद ये सवाल आज तक किसी ने नहीं पूछा होगा । आखिर किससे पूछ कर मेरे लेख को चिट्ठा चर्चा पर प्रकाशित किया गया , मैं इतनी मेहनत से लिखता हूँ , चाहे जो लिंखू ये मर्जी है , लेकिन मेरे चिट्ठे को बिना मेरे इजाजात से क्यों प्रकाशित किया गया । चिट्ठा चर्चा किसका
 
Mithilesh dubey
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नारी का शील उघड़ने लगे ,लज्जा वसन छूटने और लुटने लगे तो सांस्कृतिक प्रदुषण बढ़ता है---------------मिथिलेश दुबे

नारी यदि संस्कृति संरक्षण करें तो सांस्कृतिक परिदृश्य में सुखद परिवर्तन निश्चित है । वैसे भी संस्कृति का नारी.के साथ प्रगाढ रिश्ता हैं। नारी के संस्कार, शील व लज्जा से किसी भी देश की सांस्कृतिक पवित्रता बढ़ती है , लेकिन यदि इसके विपरीत होने लगे , नारी का
 
Mithilesh dubey
Mar 04 2010 06:17 PM
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आ चले कहीं दूर इन सब रिश्तो से अलग---------------मिथिलेश दुबे

...आ चले कही दूर....इन सब रिश्तो से अलग.......एक नया रिश्ता बनाये...दूरियां गुम हो जाये...सारे बंधन तोड़ हम एक हो जाये.....आ सनम चल मेरे संग....इन सब मौसमो से अलग....एक नया मौसम लाये....मोहब्बत की बारिस में बस भीगते जाये....रास्तो पर संग फिसलते जाये....आ
 
Mithilesh dubey
Mar 02 2010 07:45 PM
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ये कैसा खुशियों का त्योहार है माँ----------------मिथिलेश दुबे

माँ आज तेरी याद बहुत आ रही है...हाँ पता है कि कोई त्योहार है आज....लेकिन माँ मुझे कोई नहीं कह रहा........कि तुम अच्छे और नयें कपड़े पहन........ही निकलना घर से,माँ तू तो जानती है ना कि........ज्यादा भिगने से मेरी तबियत खराब हो जाया करती...........लेकिन
 
Mithilesh dubey
Feb 28 2010 02:49 PM
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अगर आप कलाकार हैं तो अपनी माँ बहन की नंगी तस्विर बनाओं और दिखाओं अपने कला का जौहर---------मिथिलेश दुबे

ये तो सबको मालुम ही होगा कि कांग्रेस ऐसे कोई मौका नहीं चूकती जिससे हिन्दूओं को हतोउत्साहित किया जा सके , लेकिन शायद वह यह भूल जाती हैं कि हिन्दू कमजोर नहीं कि वह किसी डरें , उन्हे अपनी रक्षा करनी अच्छी तरह से आती है । भारत की वार्तमान स्थिति पर अगर ध्यान
 
Mithilesh dubey
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' इजी मनी-इजी सेक्स' एवं वन नाइट स्टैड़ ' --------------मिथिलेश दुबे

नैतिकता की ढहती दीवारें यौवन का विनाश करने में लगी हैं । मर्यादाओं एवं वर्जनाओं में आई दुष्प्रभाव एवं दरारों के बीच किशोर कुम्हला रहे हैं और युवा विनिष्ट हो रहे हैं जिस सुख और साधन की तलाश में युवा नैतिकता के तडबंध तोड़ रहे हैं, वह उन्हे मनोग्रंथियों एवं
 
Mithilesh dubey
Feb 22 2010 07:00 PM
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लिखे कविता जीतें ईनाम--------------------------(मिथिलेश दुबे)

हिन्दी साहित्य मंच "चतुर्थ कविता प्रतियोगिता" मार्च माह में आयोजित कर रहा है। इस कविता प्रतियोगिता के लिए किसी विषय का निर्धारण नहीं किया गया है अतः साहित्य प्रेमी स्वइच्छा से किसी भी विषय पर अपनी रचना भेज सकते हैं । रचना आपकी स्वरचित होना अनिवार्य है ।
 
Mithilesh dubey
Feb 19 2010 08:42 PM
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भारतीय संस्कृति अर्थात ऐसी संस्कृति जो अंहकार और द्वेष रहित है -----------(मिथिलेश दुबे)

भारतीय संस्कृति अर्थात ऐसी संस्कृति जो अंहकार और द्वेष रहित है । भारतीय संस्कृति के संपर्क में अनेंको संस्कृतियां आई परन्तु भारतीय संस्कृति ज्यों की त्यों पवित्र एवं निर्मल बनी रही। भारतीय संस्कृति में बहुत सी बाहरी संस्कृतियां मिली लेकिन भारतीय संस्कृति
 
Mithilesh dubey
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वो लड़की --------------------------------------------(मिथिलेश दुबे)

फटे पुराने कपड़े तन पर लिए,झाड़ियों में घूमती वो,हाथ में कुल्हाड़ीऔरसर पर लकड़ी का बोझ,नंगे पांव सर्द हवाओं के बीच,आंखों से टपकते आंसू उसकेकांटों के बीच टहलती वो,कटकटाते दांतों की आवाज,थरथराता उसका बदन,ठंड ने आगोश में ले लिया थासांवली सूरत को,हर रोज नजर
 
Mithilesh dubey
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सांसे जो कम पड़ जायें तो ले लेना मेरी-----------(मिथिलेश दुबे)

इंम्तहान तेरे प्यार का अब होगा ,यार तेरा जब तुझसे जुदा होगा,बस बातें ही रह जायेगी यादों का पुलिन्दा बनकर,इनके ही सहारे जीवन का सफर अब होगा ।।जमाने से मिलकर तो चलना ही होगा ,राहें है मुश्किल मगर मंजिल पर पहुँचना होगा,सांसे जो कम पड़ जायें तो ले लेना
 
Mithilesh dubey
Feb 15 2010 06:27 PM
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वेलेन्टाइन डे,,,युवक युवती मिलेंगे तो विनाश दिवस बनेगा------------(मिथिलेश दुबे)

कल क्या है ? मैं भी फालतू मे ही यह पुछ रहा हूँ ये तो सबको ही पता होगा, हाँ वसंत पंचमी कब है ये शायद ही किसी को पता हो । कल १४ फरवरी यानी वेलेन्टाइन डे । १४ फरवरी को पश्चिम देशों में युवक युवतियाँ एक दुसरे को ग्रीटिंग कार्ड , फूल , आदि देकर प्रेम के दिंन
 
Mithilesh dubey
Feb 13 2010 06:33 PM
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अब मैं ना हिम्मत हारूँगा---------------(मिथिलेश दुबे)

एक बार फिर हाजीर हूँ मैं, साधारण भाषा में इसे पूर्नजन्म भी कह सकते हैं । मेरा ब्लोगिंग को छोड़ने का फैसला गलत था इसका एहसास मुझे प्रतिक्रिया मिलने के बाद हुआ । ब्लोगिंग छोड़ने का फैसला लेना मेरे लिए बहुत मुश्किल था , लेकिन कभी-कभी भावुकता वश कुछ गैर
 
Mithilesh dubey
Feb 11 2010 06:39 PM
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मैं तो चला भई .............अब आप चाटो ( बाय - बाय ब्लोगिंग )-------मिथिलेश दुबे

मैंने आज ब्लागिंग को अलविदा कहने का मन बना लिया है , मैनें हमेशा वही लिखा और कहा जो मुझे सार्थक लगा । किसी को भी नीचा दिखाना मेरे समझ से परे रहा है और रहेगा । मेरे लेखन से अगर किसी को दुख हुआ है तो इसके लिए खुद को दोषी समझता हूँ । मुझे किसी भी मुद्दे (
 
Mithilesh dubey
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क्या हिन्दी ब्लोगिंग में रचनाओं की अकाल पड़ गयी है? (मिथिलेश दुबे)

सूनने में अजीब सा जरुर लग रहा हो परन्तु ये ऐसी सच्चाई है जो बहुतो को कड़वा लगेगी । अगर ध्यान दिया जाये तो आप देखेंगे कि पिछले कुछ समय से हिन्दी ब्लोगिंग में पोस्ट की अकाल पडी हुई है । इसके कारण क्या हो सकते हैं ये बताना जरा मुश्किल होगा । पिछले कुछ समय
 
Mithilesh dubey
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मेरे कोरे दिल की कल्पना हो तुम--------(मिथिलेश दुबे)

मेरे कोरे दिल की कल्पना हो तुम,कविता में पिरे शब्दों की व्यजंना हो तुम,मर्म-स्पर्शी नव साहित्य की सृजना हो तुम,नव प्रभा की पथ प्रदर्शक लालिमा हो तुम,मेरे कोरे दिल की कल्पना हो तुम,स्वप्न दर्शी शुप्त आखों मेंबसी तलाश हो तुम,सावन की कजरी में घुली मिठास हो
 
Mithilesh dubey
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शरीर दिखाने वाले कपडे पहनने को आजादी कतई नहीं माना जा सकता----(मिथिलेश दुबे)

आजादी को परिभाषित करना बहुत मुश्किल है। हर इंसान अपनी बुद्धि का सही उपयोग करते हुए आजादी की सीमा तय करता है। हर व्यक्ति स्वतंत्र रहना चाहता है, परंतु इसकी अधिकता कभी-कभी नुकसानदेह साबित होती है। आज बेटी-बेटे को समानता का दर्जा दिया जाता है, लेकिन समाज का
 
Mithilesh dubey
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कट्टरताओं मत बाँटो देश ---- धर्म , जाती और क्षेत्र के नाम पर

नया युग वैज्ञानिक अध्यात्म का है । इसमें किसी तरह की कट्टरता मूढता अथवा पागलपन है। मूढताए अथवा अंधताये धर्म की हो या जाति की अथवा फिर भाषा या क्षेत्र की पूरी तरह से बेईमानी हो चुकी है । आज से पाँच-छह सौ साल पहले यूरोप जिस अंधविश्वास दंभ एंव धार्मिक
 
Mithilesh dubey
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लिखता हूँ मैं कूड़ा करकट फिर भी, टिप्पणियां काश मिलती खूब सारी----(मिथिलेश दुबे)

बहुत दिंनो से देख रहा हूँ कि टिप्पणी को लेकर ब्लोगजगत में काफी उधम मचा हुआ है, कोई ब्लोगिंग ही छोड़ कर जा रहा,, कारण बस टिप्पणी ना मिलना । कभी-कभी लगता है कि टिप्पणी हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है, लेकिन क्या टिप्पणी मात्र से ही कविता या अन्य विधा का
 
Mithilesh dubey
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मैंने जो किया वह सही है पर फिर भी अकेला हूँ क्यों ?-- (मिथिलेश दुबे)

कुछ भी सही लगता रहा न जाने क्यों गलत होते हुए भी ? हमेशा से एक तलाश अधूरी लिए दिल के कोने में कभी नहीं भटका अचानक ही कुछ ऐसा जिसकी मुझे जरूरत थी पर शायद उम्मीद तो कभी भी न थी । पहली मुलाकात की याद शायद ही कभी जेहन से उतर पाये । इन सब के बीच खुद इतना खुश
 
Mithilesh dubey
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जहाँ नारी अपने अलग-अलग अंगों का घंटों और मिनटों के हिसाब से अलग-अलग सौदा कर रही है ---(मिथिलेश दुबे)

समाज में वेश्या की मौजूदगी एक ऐसा चिरन्तन सवाल है जिससे हर समाज, हर युग में अपने-अपने ढंग से जूझता रहा है। वेश्या को कभी लोगों ने सभ्यता की जरूरत बताया, कभी कलंक बताया, कभी परिवार की किलेबंदी का बाई-प्रोडक्ट कहा और सभी सभ्य-सफेदपोश दुनिया का गटर जो
 
Mithilesh dubey
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ये हैं कमजोर दिल ब्लोगर..... और ये हैं नमक हराम ब्लोगर...-- (मिथिलेश दुबे)

और नहीं तो क्या, इसमें गलत ही क्या कह दिया मैने , , कैसे ये भी अभी कुछ ही देर में साफ हो जायेगा । पहले बाते करते है दिल के कमजोर लोगो कि , जैसा कि सभी लोगो को मालुम ही होगा कि पिछले कुछ समय से हिन्दी ब्लोंगिग में बहुत कुछ हुआ , और जो सबसे दुःख दायक रहा
 
Mithilesh dubey
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ढकोसला नंद महाराज को चाहिए मल्लिका से गर्मी , हिन्दी ब्लोगिंग में ये कब से होने लगा , शर्म नहीं आती इनकों

जी हाँ बिल्कुल सही सुना आपने, शायद ऐसे बाबा और साधू के बारे में आप लोग पहली बार सुन रहें हों कि येमहाराज अपने भक्तो से कह रहें कि बच्चा ठंड बहुत ज्यादा बढ गयी है , कोई मल्लिका जैसी चेली भेजो जो मुझे गर्मी प्रदान कर सके इस ठंड में ,। सुनकर बडा अजीब लगता
 
Mithilesh dubey