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21 Apr 2010
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छोड़ जाएंगे यह जहां तन्हा...

मीना कुमारी को जानने वाले 'क्वीन ऑफ ट्रेजडी' कहते थे क्योंकि वह अपने असल जीवन का दुख ही रूपहले परदे पर जीती थी। उनकी लिखी गजलों में भी यह दर्द दिखता है। आज की पोस्ट मीना कुमारी को श्रद्धांजलि। चांद तन्हा है, आस्मां तन्हादिल मिला है, कहां-कहां तन्हाबुझ गई
 
हेमेन्द्र मिश्र
Apr 21 2010 01:34 PM
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मौत पर टैक्स ?

एक अनुमान के मुताबिक, हम जितना टैक्स भरते हैं उसका महज २० फीसदी ही विकास कार्यों पर खर्च होता है। शेष रकम नौकरशाहों और सरकारी नुमांइदों के ऊपर हुकूमत खर्च करती है। ऐसा इसलिए क्योंकि हम इतने अराजक हो गए हैं कि हमें संभालने के लिए एक 'मजबूत' तंत्र का होना
 
हेमेन्द्र मिश्र
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कंधमाल के डंक

चुनाव की सीढ़ीयां चढ़ कर ही लोकतंत्र मजबूत होता है। अगर इस सीढ़ी पर डर के साथ कदम रखा जाए तो शायद स्वस्थ लोकतंत्र की कल्पना नहीं की जा सकती। भारत में लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए चुनाव हो रहे है। 16 अप्रैल को पहले चरण के मतदान के साथ ही राजनीतिक ताप
 
हेमेन्द्र मिश्र
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जूता बनाम लोकतंत्र

इन दिनों नेताओं और जूतों में एक रिश्ता सा बनता जा रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बुश पर जूते क्या चले नेताओं को जूते मारने का चलन सा चल पड़ा। चीनी नेता बेन जियाबाओ, गृहमंत्री पी.चिदंबरम,विपक्ष के नेता लाल कृष्ण आडवाणी, यहां तक कि अब अभिनेता जीते
 
हेमेन्द्र मिश्र
Dec 29 2009 11:58 AM
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मुद्रास्फीति बनाम ‘वास्तविक’ महंगाई दर

मार्च के दूसरे सप्ताह, यानि 14 मार्च को समाप्त हुए हफ्तेमें महंगाई दर 0.27 फीसद दर्ज की गई है। हाल के सप्ताहों में लगातार लुढ़क रहे इस आंकड़े की यह दर 1977-78 के बाद की सबसे कम है। दिलचस्प है कि लगातार गिर रहे महंगाई दर को अर्थशास्त्री भारतीय अर्थव्यवस
 
हेमेन्द्र मिश्र
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अगली होली में...

अगली होली में अबीर-गुलाल याद करूंगा... गालों पर लाली याद करूंगा... कैंटीन के आगे जोर-जोर से ढ़ोलक बजाना याद करूंगा... ओएसडी का डांटना याद करूंगा... पेट भर ढ़डई पीना याद करूंगा... दिन भर नशे में झूमना याद करूंगा ... जी भर गुजिया और मट्ठी खाना याद करूंगा
 
हेमेन्द्र मिश्र
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पत्रकार को धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए?

इलेस्ट्रेटेड विकली के संपादक अनिल धारकर ने 19-25 दिसंबर 1992 के अंक में अपनी संपादकीय टिप्पणी में सहकर्मियों के साथ हुई बैठक का जिक्र किया है। यह बैठक 6 दिसंबर के बाबरी मस्जिद विध्वंस की छाया में हो रही थी । एक ने पूछा,‘‘आप के पास आडवाणी के इस आरोप क
 
हेमेन्द्र मिश्र
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सुखराम: शर्ट रूप सुक्रम

सोमवार की सुबह पुस्तकालय में किताबों के बीच मुझे नागार्जुन रचनावली दिखी। इसके भाग-2 के पन्नों को पलटते वक्त मेरी नजर एक कविता पर टिक गई। यह कविता पी.वी. नरसिंहराव सरकार में केन्द्रीय संचार मंत्री रहे सुखराम पर लिखी गई है। 1996 ई. में लिखी गई इस कविता
 
हेमेन्द्र मिश्र
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मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा ...

पं0 भीमसेन जोशी की आवाज में आपने ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा’ गाने को दूरदर्शन पर बराबर देखा होगा। इस संगीतमय प्रस्तुती में भारत की पहचान ‘अनेकता में एकता’ दिखती है। 80 के दशक में आई इस गाने की जीवंत तस्वीर अगर देखनी हो तो आपका सूरजकुण्ड
 
हेमेन्द्र मिश्र
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पटरी पर सरकती जिंदगी!

पिछले दिनों संसद में अंतरिम रेल बजट पेश किया गया। रेल बजट पर केन्द्रित लैब जर्नल के लिए मुझे एक रिपोर्ट लिखना था। इसलिए मैं नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की तरफ निकल पड़ा। रेलवे अघिकारियों से अनुमति लेने जब मैं पटरियों से गुजर रहा था तब मुझे आदित्य दिखाई दिए
 
हेमेन्द्र मिश्र
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सुरमयी अंखियों में बसा संजय वन

रंग बिरंगे और सुगंधित, फूलों से कुतंल को साजे, इंद्रनील की माला डाले, शंख सरीखे सुधड़ गालों में ... बाबा नागार्जुन की यह पंक्ति संजय वन के सौंदर्य को बखुबी परिभाषित करती है। संजय वन दिल्ली के महत्वपूर्ण वनों में एक है जहां की सुरमयी सुबह कई मामलों में
 
हेमेन्द्र मिश्र
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समाचारपत्र का भविष्य

ई।में अमेरिका में किसी भी समाचारपत्र की अंतिम प्रति छपेगी ‘‘ (द वेनेशिंग न्यूजपेपर)। फिलिप मेयर की इस भविष्यवाणी के बाद समाचारपत्र के भविष्य को लेकर बहसें तेज होने लगी और कहा जाने लगा कि तकनीक के हावी होने से समाचारपत्र खत्म हो जाऐंगे। लेकिन मेरी राय
 
हेमेन्द्र मिश्र
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जल या जहर

जीवन का मुख्य आधार जल अब जहर बनता जा रहा है । कुल भूभाग के ७५% भाग पर बहते इस मुख्य संसाधन के एक महत्वपूर्ण स्त्रोत भूजल में बढ़ रही फ्लोराइड और आर्सेनिक की मात्रा अगर अपनी रफ्तार से बढती रही तो शायद वह दिन दूर नही जब जल ही जीवन है की उक्ति जल ही जहर
 
हेमेन्द्र मिश्र
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एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश!

क्या राजनीति की बिसात पर किसी ऐतिहासिक स्थल की कुर्बानी देनी सही है? नहीं, लेकिन बाबरी विध्वंस की घटना भारतीय राजनीति का वह काला अध्याय है, जिसमें संकीर्ण मानसिकता की वेदी पर एक ऐतिहासिक इमारत की आहूति दे दी गई। महज भगवान श्रीराम का जन्मस्थल होने की
 
हेमेन्द्र मिश्र
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मोहल्ला लाइव का सवाल और मेरा विचार : हम कब बोलेंगे ?

कोई हमारी गलतियां गिनाये और यथार्थ का आईना दिखाये, तो क्या हम उद्वेलित नहीं होंगे? जब पड़ोसी हमसे कहता है कि मेरे घर का कचरा उसके मकान के सामने फैंका गया है, तो सही होने पर भी क्या हम उसे स्वीकारते हैं, उससे नहीं झगड़ते? जब कोई हम पर झूठा होने का तोह
 
हेमेन्द्र मिश्र
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आखिर क्यों करे इन बुजुर्गों का सम्मान?

सप्ताह का आखिरी दिन मेरे लिए कुछ खास होता है। इस दिन मेरी छुट्टी होती है और अपने मन-मुताबिक मैं अपनी दिनचर्या तय करता हूं। दिन का ज्यादातर समय अपने इष्ट-मित्र से मिलने में बीतता है और मुमकिन हुआ तो रात भी किसी दोस्त के घर पर ही गुजरती है।खैर, इस शनिवार
 
हेमेन्द्र मिश्र
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संपादकगण बेबस करें गुमाश्‍तागीरी...

अभी अभी बीते आम चुनाव में खबरों को जब बाजार की सुनहली पालकी में झुला कर उपभोक्ता के सामने रखा गया, तो खूब हाय-तौबा मची। चारों ओर से यह आवाज उठने लगी कि पत्रकारीय मूल्य में गिरावट आ गयी है और ख़बरों को अर्थ के आधार पर तय किया जाने लगा है। आप कुछ भी छापें
 
हेमेन्द्र मिश्र
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बच्चा बच्चा हिंदुस्तानी मांग रहा है पानी

उत्तर प्रदेश का नोयडा औद्योगिक शहर के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। तेजी से बढ़ रहे कंक्रीट के जाल इस शहर को नया रूप देने में कोई कोताही नहीं कर रहे। लेकिन मैंने जब इस शहर को नजदीक से देखा, तो मुझे हैरानी हुई कि यहां पीने का पानी उपलब्ध नहीं है। मीठ
 
हेमेन्द्र मिश्र