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दीपक भारतदीप की हिंदी एक्सप्रेस पत्रिका

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31 May 2010
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‘जीवन जीने की कला’ का मतलब है कि कभी विचलित न होना-हिन्दी लेख (meaning of art of living-hindi article

कथित रूप से जीने की कला सिखाने वाले एक संत के आश्रम पर गोली चलने की वारदात हुई है। टीवी चैनलों तथा समाचार पत्रों की जानकारी के अनुसार इस विषय पर आश्रम के अधिकारियों तथा जांच अधिकारियों के बीच मतभेद हैं। आश्रम के अधिकारी इसे इस तरह प्रचारित कर रहे हैं कि
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हिंदू धर्मं सन्देश-विषैले पदार्थ और विषयों से दूर रहना श्रेयस्कर

कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार---------------------------नित्यं जीवस्य च ग्लानिर्जायते विषदर्शनात्।एषामन्यतमेनापि समश्नीयत्परीक्षितम्।हिन्दी में भावार्थ-प्रतिदिन विष को देखने से ही मन में ग्लानि हो जाती है इसलिये किसीके  सहयोग से भोजन की परीक्षा
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पतंजलि योग दर्शन-स्थिर होकर सुख से बैठने का नाम आसन है (patanjali yog sahitya in hindi)

स्थिरसुखमासनम्।हिन्दी में भावार्थ.स्थिर होकर सुख से बैठने का नाम आसन है।प्रयत्नशैथिल्यानन्तसमापतिभ्याम्।हिन्दी में भावार्थ-आसन के समय प्रयत्न रहित होने के साथ परमात्मा का स्मरण करने से ही वह सिद्ध होता है।ततोद्वन्द्वानभिघातः।।हिन्दी में भावार्थ-आसनों से
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May 15 2010 10:07 AM
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भर्तृहरि नीति शतक-स्त्री तथा देवता एक ही होना चाहिए (woman and god-hindu dharma sandesh

एको देवः केशवो वा शिवो वा ह्येकं मित्रं भूपतिवां यतिवां।एको वासः पत्तने वने वा ह्येकं भार्या सुन्दरी वा दरी वा।।हिन्दी में भावार्थ-मनुष्य को अपना आराध्य देव एक ही रखना चाहिये भले ही वह केशव हो या शिव। मित्र भी एक ही हो तो अच्छा है भले ही वह राजा हो या
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हिन्दू धर्म संदेश-धर्म रहित कार्य केवल मूर्ख आदमी ही करता है (moorkh aadmi karta hai dharma rahit karya-hindu dharma sandesh)

आधिव्याधिविपरीतयं अद्य श्वो वा विनाशिने।कोहि नाम शरीराय धम्मपितं समाचरेत्।।हिन्दी में भावार्थ-तमाम तरह के दुःखों से भरे और कल नाश होने वाले इस शरीर के लिये धर्म रहित कार्य केवल कोई मूर्ख आदमी ही कर सकता है।महावाताहृतभ्त्रान्ति मेघमालातिपेलवैः।कष्टां नाम
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May 08 2010 09:50 AM
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विदुर दर्शन-सत्य से ही धर्म की रक्षा संभव (satya se hi dharma ki raksha sanbhav)

सत्येन रक्ष्यते धर्मो विद्या योगेन रक्ष्यते।मृजया रक्ष्यते रूपं कुलं वृत्तेन रक्ष्यते।।हिन्दी में भावार्थ-सत्य से धर्म, योग से विद्या, सफाई से सुंदरता और सदाचार से कुल की रक्षा होती है।  पर्जन्यनाथाः पशवो राजानो मन्त्रिबान्धवाः।।पतयो बान्धवा
May 04 2010 08:47 AM
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विदुर नीति-धर्म का दिखावा करना अहंकार का प्रमाण (dharma aur ahnakar-hindi sandesh)

इन्याध्ययनदानादि तपः सत्यं क्षमा घृणा। अलोभ इति मार्गोऽयं धर्मस्याष्टविधः समृतः।।हिन्दी में भावार्थ-नीति विशारद विदुर का कहना है कि यज्ञ, अध्ययन, दान, तप, सत्य, क्षमा, दया और अलोभ वह गुण है जो धर्म के मार्ग भी हैं।  तत्र पूर्वचतुर्वर्गो दम्भार्थमपि
Apr 27 2010 09:14 AM
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मनुस्मृति-श्रमिक का हाथ सदैव पवित्र रहता है (worker is hollyman-hindu dharma sandesh)

नित्यमास्यं शुचिः स्त्रीणां शकुनि फलपातने।प्रस्त्रवे च शुचर्वत्सः श्वा मृगग्रहणे शुचिः।।हिन्दी में भावार्थ-नारियों का मुख, फल गिराने के लिये उपयोग  में लाया गया पक्षी, दुग्ध दोहन के समय बछड़ा तथा शिकार पकड़ने के लिये उपयोग में लाया गया कुत्ता पवित्र
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संत कबीर दास के दोहे-परोपकार पर ही यश मिलना संभव (kabir ke dohe-paropkar aur yash)

धन रहै न जोबन रहे, रहै न गांव न ठांव।कबीर जग में जस रहे, करिदे किसी का काम।संत कबीर दास जी कहते हैं कि एक दिन यह न धन रहेगा न यह यौवन ही साथ होगा। गांव और घर भी छूट जायेगा पर रहेगा तो अपना यश, यह तभी संभव है कि हमने किसी का काम किया हो।स्वारथ सूका लाकड़ा,
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विदुर दर्शन-सत्संग से बुद्धि प्राप्त करे वही पण्डित (satasang kare vahi pandit-hindu

प्रज्ञामेवागमयति यः प्राज्ञेभ्यःस पण्डितः।प्राज्ञो ह्यवापप्य धर्मार्थौं शक्नोति सुखमेधितम्।।हिन्दी में भावार्थ-नीति विशारद विदुर जी के मतानुसार जो मनुष्य बुद्धिमानों की संगत कर सद्बुद्धि प्राप्त करता है वही पण्डित है। बुद्धिमान पुरुष ही धर्म और अर्थ को
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चाणक्य दर्शन-आमदनी से अधिक खर्च मुसीबत का कारण (amdani aur kharcha-chankya niti)

अनालोक्य व्ययं कर्ता ह्यनाथःः कलहप्रियः।आतुर सर्वक्षेत्रेपु नरः शीघ्र विनश्चयति ।।हिंदी में भावार्थ-नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि बिना विचारे ही अपनी आय के साधनों से अधिक व्यय करने वाला सहायकों से रहित और युद्धों में रुचि रखने वाला तथा कामी आदमी का बहुत
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कबीर के दोहे-दुष्टों कि निंदा कि बजाय साधुओं के प्रशंसा में वक्त बिताएं (kabir ke dohe-ninda aur prashansa)

काहू को नहिं निन्दिये, चाहै जैसा होय।फिर फिर ताको बन्दिये, साधु लच्छ है सोय।।संत कबीरदास का कहना है कि चाहे व्यक्ति अच्छा हो या बुरा उसकी निंदा न करिये। इसमें समय नष्ट करने की बजाय उस आदमी की बार बार प्रशंसा करिये जिसके लक्षण साधुओं की तरह हों।सातो सागर
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संत कबीर के दोहे-धामिक व्यक्ति दूसरे जीवों का कल्याण कर अपना धर्म प्रमाणित करता है (Dhamik vyakti ki pahachan-kabir ke dohe)

फलं कतकवृक्षस्य यद्यप्यम्बुप्रसादकम्।न नामग्रहणादेव तस्य वारि प्रसीदति।।हिन्दी में भावार्थ-निर्मली का वृक्ष जल को शुद्ध करता है भले ही उसकी जानकारी सभी को नहीं है। उसका नाम लेने से जल शुद्ध नहीं होता बल्कि वह स्वयं उपस्थित होकर जल शुद्ध करता है। उसी
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Apr 11 2010 12:04 PM
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रहीम दर्शन-सज्जन लोग समाज सेवा के लिए संपत्ति संचय करते हैं

तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहि न पान।कहि रहीम पर काज हित, संपति संचहि सुजान।।कविवर रहीम कहते हैं कि जिसत तर पेड़ कभी स्वयं अपने फल नहीं खाते और तालाब कभी अपना पानी नहीं पीते उसी तरह सज्जनलोग दूसरे के हित के लिये संपत्ति का संचय करते हैं। तन रहीम है कर्म
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Apr 10 2010 09:52 AM
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भर्तृहरि नीति शतक-जागरुक लोग अपनी बेइज्जती नहीं सहते

सवल्पस्नायुवशेषमलिनं निर्मासमप्यस्थिगोः श्वा लब्ध्वा परितोषमेति न तु तत्तस्य क्षुधाशान्तये।सिंहो जम्बुकंकमागतमपि त्यकत्वा निहन्ति द्विपं सर्वः कृच्छ्रगतोऽप वांछति जनः सत्तवानुरूपं फलम्।।हिन्दी में भावार्थ-जिस तरह कुत्ता थोड़े रस और चरबी वाली हड्डी पाकर
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Apr 07 2010 09:33 AM
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श्रीगुरुवाणी-भक्ति से शक्ति प्राप्त होती है (adhyamik gyan sandesh-bhakti se shakti)

मैंने मुहि चोटा न खाईमैंने जम क साथ न जाइ।।हिन्दी में भावार्थ-भक्ति से मनुष्य को इतनी शक्ति मिल जाती है कि वह कहीं भी मुंह की नहीं खाता और न यमराज उसे ले जा सकते हैं-अर्थात उसकी आत्म तो परमात्मा स्वरूप को प्राप्त हो जाती है।तीरथ नावा जे तिस भावा।’हिन्दी
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चाणक्य नीति और दर्शन-अधिक व्यय करना कष्टदायी होता है

अनालोक्य व्ययं कर्ता ह्यनाथःः कलहप्रियः।आतुर सर्वक्षेत्रेपु नरः शीघ्र विनश्चयति ।।हिंदी में भावार्थ-नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि बिना विचारे ही अपनी आय के साधनों से अधिक व्यय करने वाला सहायकों से रहित और युद्धों में रुचि रखने वाला तथा कामी आदमी का बहुत
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मनु संदेश-नाम पाने के लिये ढोंग करने वाले ‘बिडाल’ (manu darsha sandesh in hindi)

धर्मघ्वजी सदा लुब्धश्छाद्यिको लोकदम्भका।बैडालवृत्ति को ज्ञेयो हिस्त्रः सर्वाभिसन्धकः।।हिंदी में भावार्थ-अपनी कीर्ति पाने की इच्छा पूर्ति करने के लिये झूठ का आचरण करने वाला, दूसरे के धरन कर हरण करने वाला, ढौंग रचने वाला, हिंसक प्रवृत्ति वाला तथा सदैव
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विदुर नीति-योग साधना से विद्या की रक्षा होती है (yog sadhna and education-hindi sandesh)

सत्येन रक्ष्यते धर्मो विद्या योगेन रक्ष्यते।मृजया रक्ष्यते रूपं कुलं वृत्तेन रक्ष्यते।।हिन्दी में भावार्थ-सत्य से धर्म, योग से विद्या, सफाई से सुंदरता और सदाचार से कुल की रक्षा होती है।पर्जन्यनाथाः पशवो राजानो मन्त्रिबान्धवाः।।पतयो बान्धवा स्त्रीणां
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विदुर नीति-विद्वानों का सहायक ज्ञान है

सत्येन रक्ष्यते धर्मो विद्या योगेन रक्ष्यते।मृजया रक्ष्यते रूपं कुलं वृत्तेन रक्ष्यते।।हिन्दी में भावार्थ-सत्य से धर्म, योग से विद्या, सफाई से सुंदरता और सदाचार से कुल की रक्षा होती है।वर्तमान संदर्भ में संपादकीय व्याख्या-जीवन में ज्ञान का होना जरूरी है
Mar 08 2010 08:13 AM
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रहीम संदेश-स्वार्थ के अनुसार लोगों का दृष्टिकोण बदलता है (svarth aur drishtikon-rahim sandesh)

स्वारथ रचत रहीम सब, औगुनहूं जग मांहिबड़े बड़े बैठे लखौ, पथ रथ कूबर छांहि।।कविवर रहीम कहते हैं कि लोग अपने स्वार्थ के अनुसार दूसरे में गुण और अवगुण ढूंढते रहते हैं। जो कभी अपना स्वार्थ साधने के लिये रथ के हरसो की टेढ़ी मेढ़ी छाया को अशुभ कहते हैं वह लोग उसकी
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Feb 26 2010 08:24 AM
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कौटिल्य दर्शन-कभी पर्वत की तरह सहनशील तो कभी अग्नि की तरह तीक्ष्ण बन जायें

काले सहिष्णुगिंरिवदसहिश्णुश्चय वह्वित्।।स्कन्धेनापि वहेच्छत्रन्प्रियाणि समुदाहरन्।।हिन्दी में भावार्थ-समय आने पर पर्वत के समान सहनशील और अग्नि के समान असहनशील हो जायें। समय पर मित्र के कंधे पर हाथ रखें तो शत्रु पर भी उसका प्रयोग करें।असत्यता निष्ठुरता
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Feb 24 2010 08:36 AM
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विदुर दर्शन-दोष दृष्टि रहित होने पर ही आनंद की प्राप्ति

प्रज्ञामेवागमयति यः प्राज्ञेभ्यःस पण्डितः।प्राज्ञो ह्यवापप्य धर्मार्थौं शक्नोति सुखमेधितम्।।हिन्दी में भावार्थ-नीति विशारद विदुर जी के मतानुसार जो मनुष्य बुद्धिमानों की संगत कर सद्बुद्धि प्राप्त करता है वही पण्डित है। बुद्धिमान पुरुष ही धर्म और अर्थ को
Feb 21 2010 08:44 AM
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विदुर नीति-पैसे का बुद्धि से कोई रिश्ता नहीं (hindu dharma sandesh-buddhi aur paise ka rishta)

न बुद्धिर्धनलाभाय न जाह्यमसद्धये।लोकपर्यावृतांत प्राज्ञो जानाति नेतरः।।हिंदी में भावार्थ- धन केवल बुद्धि से ही प्राप्त होता है या मूर्खता के कारण आदमी दरिद्र रहता है, ऐसा कोई नियम नहीं है। इस संसार के नियमों को केवल विद्वान पुरुष ही जानते हैं।असंविभागो
Feb 17 2010 08:43 AM
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विदुर नीति-पवित्र संकल्प वाला ही वीर होता है

अपनीतं सुनीतेन योऽयं प्रत्यानिनीषते।मतिमास्थाय सुदृढां तदकापुरुषव्रतम्।।हिंदी में भावार्थ-जो अन्याय के कारण नष्ट हुए धन को अपनी स्थिर बुद्धि का आश्रय लेकर पवित्र नीति से वापस प्राप्त करने का संकल्प लेता है वह वीरता का आचरण करता है। मार्दव सर्वभूतनामसूया
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Feb 14 2010 08:28 AM
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पतंजलि योग दर्शन-धर्म मार्ग का विचार करे वही धर्मज्ञ (dharama marg ka vichar-patanjali yog darshan)

शान्तोदिताव्यपदेश्यधर्मानुपाती धर्मी।हिन्दी में भावार्थ-जो मनुष्य अतीत, वर्तमान और भविष्य का विचार करते हुए  धर्म में विद्यमान होता है वही धर्मज्ञ है। क्रमान्यत्वं परिणामन्यत्वे हेतुः।हिन्दी में भावार्थ-परिणाम की भिन्नता में क्रम की भिन्नता कारण
Feb 12 2010 09:07 AM
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कौटिल्य दर्शन-ऋणहीन व्यक्ति को ही राजकीय कार्य सौंपें

जो यद्वस्तु विजानाति तं तत्र विनियोजयेत्।अशेषविषयप्राप्तविन्द्रियार्थ इवेन्द्रियम्।।हिन्दी में भावार्थ-राज्य प्रमुख को चाहिये कि जो व्यक्ति संबंधित विषय का ज्ञाता हो उससे संबंधित विभाग और कार्य में ही उसे नियुक्त करे। जिस तरह समस्त इंद्रियां अपने गुणों
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संत कबीर के दोहे-एकमत न रहने वाले लोगों से संपर्क न रखें (sant kabir vani in hindi)

कबीर न तहां न जाइये, जहां जु नाना भाव।लागे ही फल ढहि पड़े, वाजै कोई कुबाव।।संत शिरोमणि कबीरदास का कहना है कि वह कभी न जायें जहां नाना प्रकार के भाव हों। ऐसे लोगों से संपर्क न कर रखें जिनका कोई एक मत नहीं है। उनके संपर्क से के दुष्प्रभाव से हवा के एक झौंके
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मनु दर्शन-कदाचरण के खिलाफ दंड आवश्यक (strong action against corruption-hindi sandesh)

यौ निक्षेपं नार्पयति यश्चानिक्षिप्य याचते।तावुभौ चैरवच्चासयो दाप्यौ या तस्समं दभम्।।हिंदी में भावार्थ-किसी की धरोहर नहीं लौटाने वाले तथा बिना ही रखे उसे मांगने वालो को चोर के समान दंड देना चाहिये। धरोहर की राशि के बराबर ही उन पर दंड लगाना
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विदुर नीति-हर समय सहज रहने वाला ही सुखी (sahaj manushya sukhi rahta hai-hindu dharma sandesh)

बोलने से न बोलना अच्छा बताया गया है, किन्तु सत्य बोलना भी एक गुण है। चुप या मौन रहने से सत्य बोलना दो गुना लाभप्रद है। सत्य मीठी वाणी में बोलना तीसरा गुण है और धर्म के अनुसार बोला जाये यह उसका चौथा गुण है। मनुष्य जैसे लोगों के साथ रहता है और जिन लोगों की
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चाणक्य नीति-स्वयं अपने गुणों का बखान करना अल्पज्ञानी का काम (apni tarif svyan na karen-hindi sandesh)

पर-प्रौक्तगुणो वस्तु निर्गुणोऽपि गुणी भवेत्।इन्द्रोऽपि लघुतां याति स्वयं प्रख्यापितैर्गृणैः।।हिन्दी में भावार्थ-जिसके गुणों की प्रशंसा अन्य लोग भी करें उसका ज्ञान भले ही अल्प हो पर फिर भी उसे गुणवान माना जायेगा। इसके विपरीत जिसे ज्ञान में पूर्णता प्राप्त
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रहीम संदेश-फर्जीवाड़े से कभी सम्मान नहीं मिलता

रहिमन वहां न जाइये, जहां कपट को हेत।हम तन ढारत ढेकुली, संचित अपनी खेत।कविवर रहीम कहते हैं कि उस स्थान पर बिल्कुल न जायें जहां कपट होने की संभावना हो। कपटी आदमी हमारे शरीर के खून को पानी की तरह चूस कर अपना खेत जोतता है/अपना स्वार्थ सिद्ध करता है।रहिमन
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चाणक्य नीति दर्शन-कुसंस्कारी में सुधार की अपेक्षा व्यर्थ (sanskar aur satsang-hindi sandesh)

अंतर्गतमलो दृष्टस्तीर्थस्नानशतैरपि।न शुध्यति यथा भाण्डं सुराया दाहितं च यत्।।हिंदी में भावार्थ-जिसके मन में मैल भरा है ऐसा दुष्ट व्यक्ति चाहे कितनी बार भी तीर्थ पर जाकर स्नान कर लें पर पवित्र नहीं हो पाता जैस मदिरा का पात्र आग में तपाये जाने पर भी पवित्र
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मनु स्मृति-तनाव में भोजन करने से उसके तत्व नष्ट होते है (no tension time on eating)

पूजितं ह्यशनं नित्यं बलमूर्ज च यच्छाति।अपूजितं च तद्भुक्तमूभयं नाशयेदिदम्।।हिंदी में भावार्थ-सदाशयता से ग्रहण किया भोजन बल और वीर्य में वृद्धि करता है जब निंदा करते हुए उदरस्थ करने से उसके तत्व नष्ट होते हैं।पूजयेदशनं नित्यमद्याच्चेतकुत्सयन्दृष्टवा
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कौटिल्य दर्शन-अनापशनाप बकने से जमाना विपरीत हो जाता है (bakbas karna theek nahin-hindu dharama sandesh)

अकस्मादेव यः कोपादभीक्ष्णं बहु भाषते।तसमाबुद्धिजते लोकः सस््फुलिंगदिवानलात्।।हिंदी में भावार्थ-जो व्यक्ति अचानक ही क्रोध में अनापशनाप बकने लगता है वह संसार को वैसे ही अपने विपरीत बना लेता है जैसे आग से निकलने वाली चिंगारी से लोग उत्तेजित होकर उससे दूर हो
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संत कबीर के दोहे-शब्द वही है जो दिल में समाए (sant kabir ke dohe-shabd jo dil me samae)

सीखे सुनै विचार ले, ताहि शब्द सुख देय बिना समझै शब्द गहै, कछु न लोहा लेय संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि जो व्यक्ति अपने गुरूजनों से शब्द सीखकर उसे अपने हृदय में धारण कर उनका सदुपयोग करता है वही जीवन का आनंद उठा सकता है पर जो केवल उन शब्दों को रटत
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विद्वान करता है एक साथ सैंकड़ों शिकार-हिन्दू धर्म संदेश

पश्यदिभ्र्दूरतोऽप्रायान्सूपायप्रतिपत्तिभिः। भवन्ति हि फलायव विद्वादभ्श्वन्तिताः क्रिया।। हिन्दी में भावार्थ- विद्वान तो दूर से विपत्तियों को आता देखकर पहले ही से उसकी प्रतिक्रिया का अनुमान कर लेता है और इसी कारण अपनी क्रिया से उसका सामना करता है। अशि
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संत कबीर के दोहे-मन के चोर को मारना कठिन (man ka chor-hindu dharm sandesh)

अपने अपने चोर को, सब कोय डारै मार मेरा चोर मुझको मिलै, सरबस डारूं वार संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि संसार के सब तो अपने अपने चोर को मार डालते हैं, परंतु मेरा चोर तो मन है। वह अगर मुझे मिल जाये तो मैं उस पर सर्वस्व न्यौछावर कर दूंगा। सुर नर मुनि
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चाणक्य नीति शास्त्र-कुसंस्कारी लोगों का साथ करने से यश नहीं मिलता

अर्थार्थीतांश्चय ये शूद्रन्नभोजिनः। त द्विजः कि करिष्यन्ति निर्विषा इन पन्नगाः।। हिंदी में भावार्थ- नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि अर्थोपासक विद्वान समाज के लिये किसी काम के नहीं है। वह विद्वान जो असंस्कारी लोगों के साथ भोजन करते हैं उनको यश नहीं मिल
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हिन्दू धर्म संदेश-पेट में पचे वही खाना खायें (pet men pache vahi khana khayen-hindu dharm sandesh)

भक्ष्योत्तमप्रतिच्छन्नं मत्स्यो वङिशमायसम्। लोभाभिपाती ग्रसते नानुबन्धमवेक्षते।। यच्छक्यं ग्रसितुं ग्रस्यं ग्रस्तं परिणमेच्च यत्। हितं च परिणामे यत् तदाद्यं भतिमिच्छता।। हिंदी में भावार्थ -मछली कांटे से लगे चारे को लोभ में पकड़ कर अपने अंदर ले जाती है