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31 May 2010
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जाते जाते,,, तेरे नाम मां...

वो दानिश्तां छोड़कर दामन मेराशहर की गलियों में खो गया आखिर हमने बारहा रोका था कहके रस्ता तेराअपनी मिट्टी से बिछडकर न बच पाएगा यहां की माटी तेरे पुरखों की अमानत है ये बाग़, ये गुलशन, ये खंडहर सबएक उम्र बचा रखते हैं अपने पहलू में टूटती शाख कोई हिसाब है
 
Sonalika
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तुम चले गए....

तुम्हारी महानता या सब आँचल में समेट लेना था उसका स्वाभाव कितने ही ग्रन्थ भरे पड़े हैं धरा की प्रशंसा से कहीं कहीं तुम पर भी बरसी है उदारता पर मर्म तो अब भी है अनछुआ हर मांग को, हर बात को स्वीकरोक्ति देते थे तुम ही कठोर चेहरे और सख्त जुमलो के साथ दिन भर
 
Sonalika
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'अजन्मे किरदार'

गिर चुका है रंगमच का पर्दा ख़त्म हो चुका हैमेरा और तुम्हारा "रोल"शुरू हो गई है 'जिंदगी' पहने गए हैं पुराने libas किन्तु मंच पर अब भी जीवित हैं 'अजन्मे किरदार'जिनकी जुबा पर स्वाद ही नहीं जीवन कावह भी बिलख रहें हैं इनकी भूख में यूँ स्नेह से न देखो इन्हें
 
Sonalika
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Tamanna

अंजुरियों में भर लेती हूँदेखती हूँ,मुस्कुराती हूँ,जाने क्या कहते हैं?जाने क्या सुन जाती हूँ.कभी घबराकर,कभी शरमाकर,छुपा देती हूँ इनके बीच चेहरा'अपना' चिपक जातें हैं पेशानी से लबों तक,'अक्स', 'खुशबू''सिमटना',' बिखरना''राख' और 'ख्वाब''अजीज',
 
Sonalika
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मेरी खामोशियाँ

अक्सर मेरी खामोशियाँतुम्हें परेशां करती हैउलझा देती है तुम्हे, मेरी चुपवो भी सोच लेते हो जो मुमकिन ही नही क्यों ?बोलो न, क्यों उलझ जाता है सबकुछतुमने तो दावे किए थे मुझे जानने के, समझने के, महसूस करने केतुम्हें तो हर कहानी का अंत पता होता तुम्हें हर सच
 
Sonalika
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मै, मेरी पत्नियां और व़ो

मारे गये गुलफाम, बेचारे करुणा जी पर कोई भी करुणा दिखाने को तैयार नहीं है, औरो की क्या बात करें जब बीवियों ने ही शिकंजा कस रखा है। सो अच्छा खासा ड्रामा चला। एक्शन, रोमांस, थ्रिल, डायलॉगबाजी जमकर हुई। लोगों ने खूब मजा लिया। करुणा जी तो अच्छे स्क्रिप्ट
 
Sonalika
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युवा राज

व़ह कहता है कि उनके नाम के आगे गांधी लगा है इसमें उनकी कोई गलती नहीं है, वह यह भी कहता हैं कि सत्‍ता में रहने वाली सरकार सभी संस्‍थाओं का प्रयोग कहीं न कहीं अपने लाभ के लिए करती है इतना ही वह यह भी स्‍वीकार लेता हैं कि उसमे अभी प्रधानमंञी बनने की काब
 
Sonalika
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तो क्‍या बांध न टूट जाएगा

कई दिनों से मैंने तुम्‍हें फोन नहीं किया बात नहीं की कुछ घबराई हूं डर जाती हूं भरे गले से कैसे बात करुंगी कैसे दे पाऊंगी हिसाब ठोकरों का जानती हूं बहुत सहनशील हो धरा की तरह लेकिन मैंने देखा है तुमको आंसुओं के साथ मेरी चोटों पर मरहम लगाते हुए तो कैसे
 
Sonalika
Dec 29 2009 11:56 AM
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Tamanna

दोस्त मेरा... कभी फूल तो कभी गुल्नारों की बातें करता था दोस्त मेरा चाँद सितारों की बातें करता था दूर तलक कड़ी धूप में चलते चलते दोस्त मेरा बहारों की बातें करता था डूब गया गैरों को पार लगाने में दोस्त मेरा किनारों की बातें करता था ख़ुद अपनी हथेली पर प
 
Sonalika
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Tamanna

अब शांति से सोने मत सजाओ मुझे चौराहे पर, अब शांति से सोने दो। मत सुनाओ बच्चों को मेरी कहानी कि मन में टीस उठती है, मत रखो रास्तों के नाम मुझ पर मेरे नंगे पैरों में छाले पड़ते हैं, सब किया मैंने तुम्हारे लिए, जिया हूं मैं बस तुम्हारे लिए, मैंने जीना स
 
Sonalika
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समयांतर की वृद्धि

क्‍या तुमने देखा हैकलियों को फूल बनते हुए,अपनो को पराए होते,बीज का पौधा, पौधे का पेड,बच्‍ची को लड़की, लड़की के दुल्‍हनबनने का सफर,ढूंढना मुश्किल है,समयांतर की वृद्धि कोमुझे दिख नहीं रहा,वह दिन, वह पल, वह क्षणजब अलग हो गएमेरे दुखतुम्‍हारे सुखों सेपहले तो एक
 
Sonalika
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अफसुर्दा होती नहीं हूं मैं।

बीज कोई अब नया बोती नहीं हूं मैं,इ‍सलिए अफसुर्दा होती नहीं हूं मैं।मिल न जाए कोई नया सूरज मुझेइस डर से रात भर सोती नहीं हूं मैं।मेरे दर्द उसकी आंखों से छलकते हैं,मां जब सामने हो, रोती नहीं हूं मैंएक दुआ को ओढ़ रखा है सिर पर,मुश्किलों में हौसला खोती नहीं
 
Sonalika
Aug 09 2009 03:16 PM
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किसी राह में किसी मोड़ पर...

जाने क्‍यों लगता है,फिर मिल जाओगे मुझेकिसी राह पर किसी मोड़ पर,जाने क्‍यों अजनबी शहर कीहर एक शय में,बेबस निगाहें ढूंढ़ती हैंतुम्‍हारी सी कोई पहचान,जाने क्‍यों डूबते सूरज के साथमेरी लाल ओढ़नी मेंमहकने लगते हैंतुम्‍हारी पीली डायरी केकुछ सूखे फूल।शहर के
 
Sonalika
Aug 07 2009 01:31 PM
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भइया मत कहो

भइया शब्‍द यूपी और बिहार वालों की पहचान माना जाता है। ऐसा सुना है कि कुछ क्षेत्रों में इसे गाली भी माना जाता है। यकीनन वह क्षेत्र भारत के अत्‍याधुनिक क्षेत्रों में होंगे। वैसे मेरा मुद्दा यह है भी नहीं। आज राखी का त्‍योहार है, अरे नहीं भई राखी सावंत का
 
Sonalika
Aug 05 2009 03:32 PM
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क्‍या मुझसे दोस्‍ती करोगे

कहते हैं कि कुछ रिश्‍ते ऊपरवाला बनाता है, कुछ रिश्‍ते लोग बनाते हैं पर कुछ लोग बिना किसी रिश्‍ते के ही रिश्‍ते निभाते हैं शायद वही दोस्‍त कहलाते हैं। दोस्‍ती एक अनमोल रिश्‍ता है एक दोस्‍त में आप बहुत से रिश्‍तों का समावेश पा जाते हैं। कभी वह बाप की तरह
 
Sonalika
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ये इंसानी सांप

सांपों से बडा़ ही डर लगता था मुझको, उसके जहर से ज्‍यादा उसके शरीर के चकत्‍ते मेरे दिमाग की नसे सुलगाने लगते थे। गंदे चकत्‍ते, अजीब सी घिन आती उसकी लपलपाती जीभ से, उसकी आंखे हमेशा डर पैदा कर देता था मेरे अंदर। आज सोचती हूं तो लगता है शायद यह डर कम और घिन
 
Sonalika
Jul 26 2009 06:20 PM
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खो गया मेरा राह दिखाने वाला

अब नहीं आंखों में ख्‍वाब है आने वालाचैन से सो रहा है मेरी नींद उडाने वाला मेरी राहों में बिछाए रहता था पलकों कोआज गिरने पर भी न हाथ बढा़ने वाला कल तलक मेरी उंगली पकड़ चलता थामेरे आंगन के बीच दीवार उठाने वाला चाय के पैसे बचा लेता है आफिस मेंकुनबे का बोझ
 
Sonalika
Jul 25 2009 10:36 AM
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हौसला क्‍यों नहीं देता

गम अगर देता है तो हौसला क्‍यों नहीं देतावो नाखुदा है तो मेरा फैसला क्‍यों नहीं देतामेरी किस्मत की लकीरों में अगर नहीं है वोदिल-ए-बर्बाद अब उसे भुला क्‍यों नहीं देताहर फर्द लगा है मेरे जब्‍त को आजमाने मेंकोई अजनबी आकर मुझे रुला क्‍यों नहीं देताजिंदगी दे
 
Sonalika
Jul 23 2009 01:38 PM
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ज़िन्दगी ...

कहते हैं ज़िन्दगी उस कश्ती की मानिंद होती है जो समंदर के बीच में लाखों तूफानी लहरों के थपेडे खाने के बाद भी साहिल पर आने में कामयाब होती है ...
 
Sonalika
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तुम्‍हारी उर्मिला

तप रही है ये जमीन इस बार मानसून नहीं आया अब तक फट रहा है धरा का कलेजा बारिश की चाह में हाहाकार मच रहा है, चहुं ओर बहुत दिन हो गए भीगे हुए मुझे भी तो, तुम्‍हारे स्‍नेह में उर्मी, उर्मी सुन रही हो तुम सुन रही हूं, तुम्‍हारी पुकार को आज बस तुम्‍हे ही सु
 
Sonalika
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ओ चंचला कभी मेरी गली भी आ

कभी-कभी हमारे घर की दीवारों की नसों में द्रुत गति से बहने वाली हे चपला, हे चंचला, तुम्‍हारे आने से जिंदगी रौशन हो जाती है, मेरे घर का कोना-कोना चहकता है, खुशियां बिखरती है, गीत गुनगुनाते हैं, ताल नृत्‍य करते हैं। तुम्‍हारा छम से आना और पल भर में मायू
 
Sonalika
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लौट नहीं सकती मैं

पहाड़ों, झरनों और नदियों पर रेगिस्‍तानों, मैदानों में गलियों, सड़कों में बर्फ में, पानी में कहीं नहीं हैं ये सब पार कर आई यहां सब कहीं ढूंढ़ आई तकियों के गिलाफों में चादर की सिलवटों में कपों के हेंडलों पर इस कमरें की दीवार पर पर भी मिट गए हैं। उंगली क
 
Sonalika
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तुम्‍हारे गम

कई बार, बहुत बार छिपाया है, दबाया है, अपनी गलतियों को। पेड़ों पर कूद-फांद करते जब, फट जाती थी फ्रॉक, चुपके से आकर, कभी गेहूं की बडी़ ढेरी में तो कभी किसी संदूक में सबसे नीचे, छिपाया है दबाया है। टूटे हुए कांच के बर्तनों को, नई पेंसिल के ढेर से छिलकों
 
Sonalika
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खबर तो आप बनाइए जनाबे आली

चैनल पर अमेरिकी राष्‍ट्रपति बराक ओबामा को मख्खी मारते हुए देखा जिसे देखने के बाद जाने क्‍यों लावारिश फिल्‍म का गाना अपना तो खून पानी जीना मरना बेमानी याद आने लगा। गाने की गुनगुनाहट अभी होंठो पर ही थी कि जाने क्‍यों बुश महोदय का शरापा आंखों में घूम गय
 
Sonalika
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Tamanna: भूलता नहीं मुझको

भूलता नहीं मुझको
 
Sonalika
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भूलता नहीं मुझको

यादों के गलियारों में एक लालटेन जलाकर मैंने ढूढे कुछ खोए हुए पल, पर मैं तो भूल गई अतीत को याद नहीं, कौन था, किसने राह दिखाई याद नहीं, पिछली पंगडंडी का मोड़ कहां तक जाता था। जुबां पर जो अब भी है ठहरा यह स्‍वाद कब मिला था। बहुत याद करने पर भी याद नहीं आ
 
Sonalika
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ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्‍या है

दुनिया में न जाने कितनी ही हस्तियों ने आंखे ने खोली, अपना-अपना हुनर आजाया कुछ लोग तो बड़ी शान से उभरे उनका फन मशहूर हुआ मगर ये फन देर तक नहीं रह सका। उन्‍हें वह बुलंदियां नहीं नसीब हो सकी जिनके वो हकदार थे। जबकि कुछ लोग ऐसे भी पैदा हुए जिन्‍होंने जब अ
 
Sonalika
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ek shuruaat

main ne jeene ki tamanna to nahin ki thi aye dost phir kion tere hathoon mein khanjar nikla
 
Sonalika