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जाते जाते,,, तेरे नाम मां...
वो दानिश्तां छोड़कर दामन मेराशहर की गलियों में खो गया आखिर हमने बारहा रोका था कहके रस्ता तेराअपनी मिट्टी से बिछडकर न बच पाएगा यहां की माटी तेरे पुरखों की अमानत है ये बाग़, ये गुलशन, ये खंडहर सबएक उम्र बचा रखते हैं अपने पहलू में टूटती शाख कोई हिसाब है
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May 31 2010 10:51 PM


Shuffle








