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कुदरतनामा

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31 Dec 2009
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औषधों की खान नीम

नीम गहरी जड़ वाला, मध्यम ऊंचाई का, साल भर हरा रहनेवाला और मध्यम तेजी से बढ़नेवाला वृक्ष है। उसकी ऊंचाई 18 मीटर तक होती है। उसका ऊपरी घेरा गोलाकार या अंडाकार होता है। उसकी छाल मोटी और भूरे रंग की होती है और अंदर की लकड़ी लाल रंग की होती है। नीम हर प्रकार
 
बालसुब्रमण्यम
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क्यों महत्वपूर्ण है जैविक विविधता

संभव है कि अगले 20-30 वर्षों में पादपों एवं प्राणियों की 10 लाख से भी अधिक जातियां पृथ्वी पर से विलुप्त हो जाएं। इसका मूल कारण है मानव द्वारा किए जा रहे पर्यावरणीय परिवर्तन। यह दर, यानी प्रतिदिन 100 जातियों का विलुप्त हो जाना, विलोप की अनुमानित "स्वा
 
बालसुब्रमण्यम
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रेत के बढ़ते कदम

मरुस्थलीकरण (रेगिस्तान का फैलना) आज विश्व भर में एक विकट समस्या बन गया है। उससे बड़ी संख्या में मनुष्य प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि रेत का साम्राज्य बढ़ने से अन्न का उत्पादन घटता है और अनेक प्राकृतिक तंत्रों की धारण क्षमता कम होती है। पर्यावरण भी उसके क
 
बालसुब्रमण्यम
Dec 29 2009 11:42 AM
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भारत के बीज और परंपरागत-ज्ञान पर विदेशी आक्रमण

आजकल ऐसे-ऐसे अंतर्राष्ट्रीय समझौते हो रहे हैं जिनकी कल्पना करना ही मुश्किल है। भारत भी ऐसे समझौतों में शामिल है। इन समझौतों में कई ऐसी शर्तें रखी गई हैं जो कि भारत के हित में नहीं हैं। ये शर्तें खासतौर से हमारे आदिवासी और ग्रामीण समाज के हितों के खिल
 
बालसुब्रमण्यम
Dec 29 2009 11:42 AM
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किसान और पशुपालक का परस्पर लाभदायी संबंध

सौराष्ट्र में राजकोट के पास रहनेवाले भारवाड़ पशुपालकों की रेवड़ों में 90 प्रतिशत भेड़ और 10 प्रतिशत बकरियां रहती हैं। एक रेवड़ में 50-250 जानवर होते हैं। भेड़ों से ऊन प्राप्त होता है जो कंबल और गलीचे बनाने के लिए उत्तम होते हैं। भेड़ों से दूध, मांस और मींग
 
बालसुब्रमण्यम
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गिद्धों को खाते हैं बपाटला के लोग

खाने के मामले में सहमति प्राप्त करना मुश्किल होता है। जिसे कुछ लोग बड़े चाव से खाते हैं, उसका नाम भर सुन लेने से दूसरे लोगों को कय होने लगता है। फ्रांस के लोग मेंढ़क के पैरों को बड़े उत्साह से खाते हैं, पर क्या आप या मैं इस बेहूदी चीज को मुंह में लाएंगे? एक
 
बालसुब्रमण्यम
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Sep 04 2009 07:15 AM
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जटिंगा का रहस्य

असम के एक छोटे-से पहाड़ी गांव जटिंगा में हर साल अगस्त-अक्तूबर के दरमियान एक विचित्र एवं रहस्यमयी घटना घटती है, जिसने विश्वभर के वैज्ञानिकों को चकित कर रखा है।कुछ विशेष परिस्थितियों में जटिंगा में रात में जलाए गए किसी भी रोशनी की ओर बीसियों पक्षी आकर्षित
 
बालसुब्रमण्यम
टैग: पक्षी
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पर्यावरण समस्या और समाधान

सामान्य जीवन प्रक्रिया में जब अवरोध होता है तब पर्यावरण की समस्या जन्म लेती है। यह अवरोध प्रकृति के कुछ तत्वों के अपनी मौलिक अवस्था में न रहने और विकृत हो जाने से प्रकट होता है। इन तत्वों में प्रमुख हैं जल, वायु, मिट्टी आदि। पर्यावरणीय समस्याओं से मनुष्य
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 18 2009 09:24 AM
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पुरा गांव की गोबर गैस परियोजना

पुरा दक्षिण भारत में स्थित एक छोटा सा गांव है। यहां एक अनोखा प्रयोग चल रहा है जो लोगों की जीवन-शैली में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहा है। न तो इस गांव में विकास के नाम पर बड़े-बड़े कारखाने लगाए गए हैं, न उद्योग, परंतु स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग पर ध्यान
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 17 2009 07:41 AM
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बह गया बहिश्त!

बहुत साल पहले, कहीं दूर, एक छोटा सा टापू था, करु नाम का, जिसके निवासी बहुत ही सुखी थे। उनके टापू में सभी आवश्यक चीजें थीं -- भोजन के लिए नारियल के पेड़, जिनके फलों का मीठा जल उनकी प्यास भी बुझाता था, छाया के लिए विशाल टोमानों वृक्ष, मछलियों से भरा समुद्र,
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 14 2009 09:00 AM
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पक्षी प्रवास -- प्रकृति का अद्भुत रहस्य

हमारी झीलों-तालाबों में हर साल जाड़ों में तरह-तरह के जो असंख्य जलपक्षी दिखाई देते हैं, उनमें से अनेक हजारों किलोमीटर की कठिन यात्रा करके यूरोप, उत्तरी एशिया आदि ठंडे प्रदेशों से हमारे देश में आते हैं। इन आगंतुकों में दुर्लभ साइबीरियाई सारस, दुनिया का सबसे
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 13 2009 09:09 AM
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खून का प्यासा पिस्सू

बहादुर से बहादुर आदमी भी मामूली-सा पिस्सू देखकर पसीना-पसीना हो जाएगा क्योंकि प्लेग महामारी इसी तुच्छ कीट की सवारी पर चढ़कर मनुष्यों में तांडव मचाती है।पिस्सू की सैंकड़ों जातियां ज्ञात हैं। ये बिना पंखवाले छोटे कीट हैं जिनकी औसत लंबाई 2 मिलीमीटर होती है।
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 12 2009 07:36 AM
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चीते की वापसी

भारत के वन्य प्राणियों से परिचित सभी व्यक्ति इस खेदजनक बात से अवगत होंगे कि भारतीय उपमहाद्वीप से चीता विलुप्त हो चुका है। 1948 में कोरवाई रियासत के महाराजा ने तीन अवयस्क चीतों का शिकार किया था, जो संभवतः इस नस्ल के आखिरी तीन नमूने थे।बंबई नेचरल हिस्ट्री
 
बालसुब्रमण्यम
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Aug 11 2009 07:35 AM
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बस्तीवालों से समझौता

विकासशील देशों के सभी भागों में अनधिकृत बस्तियां एक गंभीर समस्या हैं। कई बार इन्हें सरकारों द्वारा जबरन हटाया जाता है, जिससे काफी सामाजिक तनाव पैदा होता है।इस समस्या का एक संभव समाधान थाइलैंड के बैंकोक शहर के अनुभव से प्राप्त होता है। इस शहर के अधिकांश
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 10 2009 07:56 AM
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दुनिया का सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य

म्यानमार में अभी हाल में दुनिया का सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य स्थापित किया गया है, जिसका कुल क्षेत्रफल 21,750 वर्ग किलोमीटर है। यह अभयारण्य एक दुर्गम वन्य स्थली में स्थित है जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के समय मौत की घाटी के नाम से जाना जाता था। वहां लगभग 100
 
बालसुब्रमण्यम
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Aug 07 2009 07:38 AM
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हिंद महासागर - एक अनोखा महासागर

हिंद महासागर एशिया के दक्षिण में अफ्रीका और आस्ट्रेलिया के बीच फैला हुआ है। उसका अधिकांश भाग पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्ध में आता है। उसके उत्तरी छोर पर भारतीय उपमहाद्वीप है, दक्षिण में अंटार्टिका, पश्चिम में अफ्रीका, और पूर्व में इंडोनीशिया और आस्ट्रेलिया।
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 06 2009 07:04 AM
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पृथ्वी के लिए टानिक

जब आप बीमारी से कमजोर हो जाते हैं तो डाक्टर कोई शक्तिवर्द्धक टानिक लेने को कहता है। जब स्वयं पृथ्वी कमजोर हो जाए तो क्या यही नुस्खा आजामाया जा सकता है? अमरीकी वैज्ञानिकों की मानें तो उत्तर है "हां"।वायुमंडल में कार्बन डाइआक्साइड की मात्रा बढ़ने के कारण
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 05 2009 08:05 AM
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मल-मूत्र से भोजन

जापानी वैज्ञानिकों ने शहरों के नालों में बहते मल-मूत्र को प्रोटीन-युक्त पदार्थ में बदलने में सफलता हासिल की है। यह पदार्थ देखने में मांस के समान लगता है और उन्हें आशा है कि वे जल्द ही उसमें मांस की जैसी सुगंध भी भर सकेंगे। इन वैज्ञानिकों ने इस विश्वास को
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 04 2009 07:55 AM
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पुराने टायरों का पुनरुपयोग

मोटरवाहनों के पुराने टायरों का निपटरा एक विकट समस्या है। इन्हें जलाने पर जहरीला धुंआ निकलता है। ये कुदरती तरीकों से नष्ट भी नहीं होते इसलिए इन्हें जमीन में दफनाने से भी कोई लाभ नहीं है। न ही इन्हें नदियों, तालाबों और समुद्र में फेंका जा सकता है, क्योंकि
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 03 2009 09:33 AM
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हाथी के मल से कागज

केनिया के माइक बुगारा नामक उत्साही संरक्षणविद ने अफ्रीकी हाथी की दयनीय स्थिति के बारे में चेतना जगाने के लिए एक विलक्षण विधि अपनाई है - वे हाथियों के मल से कागज बनाते हैं।हाथियों के पसंदीदा विहार स्थल माउंट केनिया नामक पर्वत की ढलानों में पले-बढ़े बुगारा
 
बालसुब्रमण्यम
टैग: हाथी
Aug 02 2009 10:07 AM
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क्षीण हो रही है ओजोन परत

ऊपर आसमान में कुछ विचित्र सा घट रहा है। मनुष्यों को हानिकारक पराबैंगनी किरणों से सुरक्षा प्रदान करनेवाली ओजोन परत पतली होती जा रही है। पराबैंगनी किरणों के लगने के कारण चर्मकैंसर हो सकता है। संघातिक प्रकार के चर्मकैंसरों में ३० प्रतिशत रोगी पांच साल के
 
बालसुब्रमण्यम
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दुनिया का सबसे बड़ा सांप अनाकोंडा

अनाकोंडा विश्व का सबसे बड़ा सांप माना जाता है। उसके विशाल आकार और आक्रामक स्वभाव को लेकर अनेक अतिशयोक्तिपूर्ण बातें कही गई हैं। इन मनगढ़ंत बातों के आधार पर बनी फिल्म "अनाकोंडा" अभी कुछ दिनों पहले काफी चर्चे में रही। इस फिल्म में इस सांप को काफी खतरनाक और
 
बालसुब्रमण्यम
Jul 31 2009 10:30 AM
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कोमोडो ड्रैगन

कोमोडो ड्रैगन दुनिया की सबसे बड़ी छिपकली है। उसकी लंबाई 3 मीटर (10 फुट) और वजन 180 किलो होता है।कोमोडो ड्रैगन की जीभ सांप की जीभ के समान फटी हुई होती है। उसके नाखून और दांत बहुत पैने और जबड़े बहुत ही मजबूत होते हैं। अपनी लंबी मांसल पूंछ की कोड़े जैसी मार से
 
बालसुब्रमण्यम
Jul 31 2009 10:28 AM
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एल्कहॉल से दौड़ती ब्राजील की कारें

विश्व के जिन देशों पर विदेशी कर्ज का बोझ सबसे अधिक है, उनमें से अग्रणी है दक्षिण अमरीका का विशाल देश ब्राजील। इस पर विदेशी कर्ज का संकट तो है ही, तेल की बढ़ती कीमत के कारण इसकी आर्थिक स्थिति और बिगड़ती गई है। उपलब्ध विदेशी मुद्रा का आधा तो आयातित तेल के
 
बालसुब्रमण्यम
Jul 30 2009 06:51 AM
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प्रकृति के अजूबे सफेद बाघ

देश-विदेश के बहुत से चिड़ियाघर सफेद बाघों को प्रदर्शित करते हैं। इन प्रकृति के अजूबों को देखने अपार भीड़ जुटती है। ये भव्य जानवर होते भी हैं बड़े ही आकर्षक - विशाल आकार, श्वेत चर्म पर गहरी भूरी धारियां, हल्के गुलाबी होंठ और नाक, तथा कठोर नीली आंखें। इन
 
बालसुब्रमण्यम
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Jul 29 2009 07:28 AM
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पवन शक्ति : भविष्य का प्रमुख ऊर्जा स्रोत

पवन शक्ति आज विश्व का सबसे तेजी से बढ़ता ऊर्जा स्रोत है। 1995 में विश्व भर में 4,900 मेगावाट बिजली हवा के बहाव से बनाई गई। 1994 में 3,700 मेगावाट बिजली इस स्रोत से बनाई गई थी। 1990 से 1995 के दौरान 20 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से पवन शक्ति से बिजली बना
 
बालसुब्रमण्यम
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कुदरतनामा हिंदुस्तान में

कुदरतनामा के पाठक प्रशांत मिश्रा ने जानकारी दी है कि कुदरतनामा ब्लोग का उल्लेख हिंदुस्तान अखबार के ब्लोग वर्ता स्तंभ में हुआ है। इस स्तंभ के लेखक हैं रवीश कुमार । कतरन संलग्न है।
 
बालसुब्रमण्यम
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अंटार्क्टिका -- दुनिया का सबसे ठंडा महाद्वीप

सातों महाद्वीपों में से सबसे ठंडा महाद्वीप अंटार्क्टिका महाद्वीप है। वह सबसे दुर्गम तथा मानव-बस्तियों से सबसे दूर स्थित जगह भी है। वह साल के लगभग सभी महीनों में दुनिया के सबसे अधिक तूफानी समुद्रों और बर्फ के बड़े-बड़े तैरते पहाड़ों से घिरा रहता है। उसका
 
बालसुब्रमण्यम
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हवा में घुली मौत

कुछ जहरीले पदार्थों के असुरक्षित समझी जानेवाली मात्रा में और काफी समय तक हवा में विद्यमान रहने को वायु प्रदूषण कहते हैं। ये पदार्थ मनुष्य, अन्य जीव-जंतु, भवन, फसल, पेड़-पौधे और पर्यावरण को नुक्सानकारक होते हैं। शहरी परिवेश में आम तौर पर पाए जाने वाले
 
बालसुब्रमण्यम
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वर्षा ऋतु में प्रकृति भ्रमण

वर्षा ऋतु में प्रकृति सचमुच खिल उठती है। अनेक प्रकार के जीव न जाने कहां से प्रकट होने लगते हैं--घोंघे, मेंढ़क, टर्र, अनगिनत कीड़े-मकोड़े, जलपक्षी, कुकुरमुत्ते और तरह-तरह के पौधे। पृथ्वी जैसे मखमली हरी चादर ओढ़ लेती है। वर्षा ऋतु अनेक जीव-जंतुओं के लिए सं
 
बालसुब्रमण्यम
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गांवों की शोभा बढ़ाता है सारस

सूरज डूबने लगा है, परछाइयां लंबा रही हैं। हवा के मंद-मंद बहाव के साथ-साथ रात और खामोशी धीरे-धीरे उतर रही हैं। इसी वक्त सारस का एक जोड़ा अपनी बिगुल जैसी आवाज में पुकार उठता है। कितनी रोमांचक लगती है उसकी यह पुकार। धीमे-धीमे पंख चलाते हुए, जमीन से मानो
 
बालसुब्रमण्यम
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बंदर भी तुतलाते हैं!

हमारे बच्चे जब पहले-पहल बोलना सीखते हैं तो उनकी तोतली बोली हमारे मन को भा लेती है। अब वैज्ञानिक पा रहे हैं कि बंदर शिशु भी हमारे ही बच्चों के समान तुतलाते हैं, और गलती कर-करके बंदर भाषा सीखते हैं। अतलांटा के इमोरी विश्वविद्यालय के जीव-वैज्ञानिकों द्व
 
बालसुब्रमण्यम
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मच्छर मारने की नई विधि

फ्लोरिडा विश्वविद्यालय की कीटविज्ञान प्रयोगशाला के डोव बोरोवस्की ने मच्छरों के डिंभकों (लार्वों) को मारने की नई विधि खोजी है। मच्छर के लार्वे ठहरे पानी में पनपनेवाले क्लोटेला नामक शैवाल का भक्षण करते हैं। बोरोवस्की इस शैवाल के आनुवांशिकी में परिवर्तन
 
बालसुब्रमण्यम
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बिजली की कहानी

जब किसी जोरदार तूफान के दौरान आकाश में पल-पल बिजली कड़क रही हो और कानों को सुन्न कर देनेवाला मेघ गर्जन हो रहा हो, तब हम एकाएक वायुमंडल में चल रही रहस्यमय एवं विध्वंसकारी प्राकृतिक घटनाओं के प्रति सचेत हो उठते हैं। हर साल दुनिया भर में हजारों लोग बिजली
 
बालसुब्रमण्यम
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मेंढ़क-मेंढ़की की शादी के बहाने जीव विज्ञान की कुछ बातें

कुछ दिन पहले असम के किसानों ने मेंढ़क और मेंढ़की की शादी रचाई ताकि मेघराज प्रसन्न हों और बरसात कराएं। कई सवाल उठानेवाली घटना है यह। हमारे देश में शिक्षण का प्रचार-प्रसार कितना कम है इस पर यह करारी टिप्पणी करता ही है, लोगों की मूर्खता को भी रेखांकित क
 
बालसुब्रमण्यम
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मानवभक्षी हाथी

असम के स्थानीय अखबारों में छप रही खबरें यदि सही हैं तो वहां के जंगली हाथियों ने एक डरावनी आदत डाल ली है, मानव-भक्षण की। अब तक हाथी को शुद्ध शाकाहारी पशु माना जाता था, लेकिन असम के एक वन्यजीव विशेषज्ञ श्री के के शर्मा कहते हैं कि उन्होंने दो अवसरों पर
 
बालसुब्रमण्यम
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पक्षी जगत के धोखेबाज

प्रकृति में सभी प्राणी एक-दूसरे पर आश्रित होते हैं। इसका मतलब यह भी है कि लगभग सभी प्राणी किसी-न-किसी अन्य प्राणी की आहार-सूची में शामिल होते हैं। पक्षी भी इसके अपवाद नहीं हैं। अनेक हिंसक जीव पक्षियों का शिकार करते हैं। परंतु प्रकृति ने पक्षियों को न
 
बालसुब्रमण्यम
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पक्षी जगत के लैला-मजनू

समस्त प्राणी जगत में यदि किसी प्राणी-समूह की प्रणय चेष्टाएं मनुष्यों की जितनी वैविध्यपूर्ण और आह्लादकारी कही जा सकती हैं, तो वह है पक्षियों की और खासकर जल-पक्षियों की। पक्षी भी हम मनुष्यों की ही तरह सज-धजकर अपने संगी-संगिनी को रिझाते हैं और उनके सामन
 
बालसुब्रमण्यम
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मनुष्य का बराबर का साथी घोड़ा

काठियाड़ी नस्ल का घोड़ा पालतू किए गए सभी जानवरों में से केवल घोड़े को मनुष्य बराबरी की हैसियत देता है, क्योंकि घोड़ा युद्ध जैसे गंभीर मामलों से लेकर यातायात, सैर-सपाटा, खेती-बाड़ी, खेल-कूद, धर्म-कर्म, शिकार-मनोरंजन आदि सभी गतिविधियों में शरीक होता है। प
 
बालसुब्रमण्यम
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ऊर्जा संकट की कुंजी समुद्रों में ढूढ़ी जानी चाहिए

पृथ्वी के 71 प्रतिशत सतह को ढकनेवाले समुद्र सूर्य से आनेवाली अथाह ऊर्जा को निरंतर सोखते रहते हैं और वे हमारे लिए ऊर्जा का एक अजस्र स्रोत हो सकते हैं। इसलिए इसमें आश्चर्य ही क्या कि विश्व भर में समुद्र से ऊर्जा प्राप्त करने की विधियों की खोज में पैसा
 
बालसुब्रमण्यम