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16 Jun 2010
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ईसुरी की एक और फाग

ईसुरी की एक और फाग:- चलतीं कर खालें खों मुइयां,रजऊ बैस लरकइयां,हेरत जात उंगरियन में हो, तकती हो परछइयां,लचकें तीन परें करिहा में, फरके डेरी बइयां,हर तन मुख झरें पतर फूल से, जे बागन में नइयां,धन्न भाग वे सइयां ईसुर, जिनकी आएं मुनइयां... (तुम नीचे को मुंह
 
रवि रावत
Jun 16 2010 08:47 PM
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novel

एक उपन्यास शुरू किया है। कुछ अंश डाल रहा हूं। आपकी प्रतिक्रियाएं चाहता हूं। धन्यवाद।शाम का वक्त था। राजू और मैं उसकी की दुकान के बाहर बैठे बातें कर रहे थे। तभी सामने सड़क पर देखा कि एक लड़की किसी औरत के साथ आ रही है। हल्का से अंधेरा होने लगा था, इसलिए साफ
 
रवि रावत
Feb 24 2010 06:23 PM
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असलियत से हारती उम्मीदें...

लोकल की दस्तान बीच में छोड़ते हुए, आप लोगों के सामने एक अलग की कहानी पेश कर रहा हूं। दरअसल, यह कहानी नहीं है, बल्कि सच्चाई है, जो राजस्थान पत्रिका की वेबसाइट से मैंने ली है। पता नहीं क्यूं, यह खबर मेरे दिल को छू गई है। सो आप लोगों तक भी पहुंचा रहा हू
 
रवि रावत
Dec 29 2009 12:01 PM
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मुंबई की बात निराली... :- 1

जिस शहर में लोगों को एक ही बिल्डिंग में रहने वाले की भी खबर नहीं होती, उसी शहर में लोकल टे्रन कई लोगों को जोडऩे का काम करती है। लोकल टे्रन न सिर्फ मुंबई की लाइफ लाइन है, बल्कि यह सफर करने वालों को भी जोड़ती है। मुंबई की आपाधापी के बीच लोकल टे्रन ही र
 
रवि रावत
Dec 29 2009 12:01 PM
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मुंबई की बात निराली...

अपने तरह का एक अकेला शहर है ये, सोता नहीं है, ऊंघता आठों पहर है ये। इस पेड़ की छाया में बसे हैं कई लोग, जो चाहे रह जाए सबका घर है ये। किस्मत आजमाने आते हैं यहां सब, किसी की मंजिल, किसी की रहगुजर है ये। इस शहर को अपनाना बहुत मुश्किल है, रुकता है वही,
 
रवि रावत
Dec 29 2009 12:01 PM
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आईपीएल बोले तो- इंडियन परेशानी लीग

मेरे एक मित्र का तर्क था, 'आईपीएल उन्हें इसलिए पसंद है, क्योंकि नए खिलाडिय़ों को खेलने का मौका मिल रहा है, जिन्हें किसी सीरीज में नहीं खिलाया जाता।' ठीक है, मुझे उनका तर्क अच्छा लगा, लेकिन क्या आईपीएल पैसे की बरबादी नहीं है, खासकर ऐसे दौर में, जबकि पू
 
रवि रावत
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उस दौर में भी निजी संपत्ति थीं महिलाएं!

कुछ दिनों पहले मैंने महाभारत सीरियल देखा। प्रसंग था द्रोपदी चीरहरण। हालांकि महाभारत तो मैं अपने बचपन के दिनों में भी देख चुका हूं, लेकिन उस दिन कुछ गौर करके देखा। दरअसल, दो महीने पहले मेरा एक्सिडेंट हो गया था और पैर टूटने की वजह से मैं घर पर ही था। ख
 
रवि रावत
Oct 14 2009 07:59 PM
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क्यों ठंडा पड़ गया हमारा जोश?

दोस्तों, याद है या फिर भूल गए। मैं बात कर रहा हूं उस तारीख की, जो कभी न भूलने वाली है, लेकिन लगता है मुम्बई की व्यस्त जिंदगी में हमारे युवा बंधु उस काली तारीख को भूल चुके हैं। मैं बात कर रहा हूं 26 नवम्बर 2008 की, जिसने सैकड़ों जानें लील ली थीं। मुझे
 
रवि रावत
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मैं राम-कृष्ण को नहीं मानता

आज हम इंसानों से अंजाने में भी कोई गलती हो जाती है, तो भी उसे सजा सुनाई जाती है। मैं उनकी बात नहीं कर रहा हूं, जो जानकर अपराध करते हैं। ऐसे लोगों को तो सजा मिलनी ही चाहिए। लेकिन एक बार मेरी तरह सोचकर देखिए कि क्या भगवान के युग से अपराध नहीं हो रहे है
 
रवि रावत
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मूर्ख नहीं फ्रस्ट्रेटेड हैं

एक ऐक्टर, जिसके पास इन दिनों कोई काम नहीं है। एक चैनल, जिसने आज तक लोगों को सिर्फ बेशर्मी ही परोसी है। फिर चाहे वो एकता कपूर के सीरियल के रूप में हो या फिर 'सच का सामना' में। बात भारतीय या विदेशी समाज की नहीं है। बात रिश्तों की है, जो कितनी मुश्किलों
 
रवि रावत
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मुंबई की बात निराली...:- 3

तीन दिनों के बाद आज फिर अपना एक अनुभव लिखने बैठा हूं, जो ढाई सालों से मैं लोकल में देखा रहा हूं। हार्बर लाइन की उस ट्रेन में वह लड़की रोज मुझे मिलती है। मैले-कुचैले कपड़े, बाल एक-दूसरे में उलझे हुए, आवाज से लेकर आखों में दीनता की झलक, जैसा कि एक भीख
 
रवि रावत
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मुंबई की बात निराली... :- 2

मैं फिर हाजिर हूं, मुंबई लोकल के नए अनुभव के साथ। मुंबई का एक सिरा दूसरे सिरे से इतना दूर है कि दो से तीन घंटे लोकल में ही बीत जाते हैं। जब मैं अपने गांव में जाकर लोगों को बताता हूं कि मेरा ऑफिस मेरे घर से 40 किलोमीटर दूर है, तो उन्हें बड़ा आश्चर्य ह
 
रवि रावत