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18 Jun 2010
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सत्य बहुमत की परवाह नहीं करता.....

जो हमें ठीक लगेवैसा कहना और वैसा ही करना,इसका नाम सत्य है___स्वामी विवेकानन्दअगर तुम मेरे हाथों परचाँद और सूरज भी ला कर रख दो,तब भी मैंसत्य के मार्ग से विचलित नहीं होऊंगा___हजरत मुहम्मदसत्य एक ही है दूसरा नहीं,सत्य के लिए बुद्धिमान लोग विवाद नहीं
 
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बहुत घमण्ड है अपने रिकोर्ड पर बी एस पाबला को...आज तोड़ डालो गुरूर उनका जो होगा, देखा जाएगा

यों तो हिन्दी ब्लोगिंग में एक से एक कोमलकान्त कवि,शान्त - शालीन साहित्यकार और प्रखर - मुखर टिप्पणीकारहैं लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं मेरे जैसे जो टी आर पी के लिएकिसी भी हद तक गिर सकते हैं । यहाँ तक कि कभी खुल्लमखुल्ला स्तन दिखाऊ ब्लॉग के विरोध में लिख देते
 
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अलबेला खत्री का अभियान - आओ देश बचायें - 1

सबसे पहले आम ज़िदगी से जुड़ी हुई -- भारतीय रेल !# एक वर्ष तक कोई नई रेल परियोजना शुरू न हो, बल्कि जो अधूरीपरियोजनाएं हैं, केवल उन्हें पूर्ण करने पर काम हो ।# कोई नई रेल शुरू न हो, बल्कि जो रेल गाड़ियाँ चल रही हैं, उनमेसे सारे गन्दे, टूटे फूटे और सुविधाहीन
 
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आग जब तक लकड़ी में छिपी रहती है, तब तक कोई भी उसे लांघ जाता है, मगर जलती हुई को नहीं

आदमी शक्तिशाली हो,लेकिन अपनी शक्ति न दिखाएतो लोग उसका तिरस्कार ही करते हैं ।आग जब तक लकड़ी में छिपी रहती हैतब तक कोई भी उसे लांघ जाता है,मगर जलती हुई को नहीं ।***********या तो जैसा अपने को बाहर से दिखाते होवैसा ही भीतर से बनो,या जैसे भीतर होवैसे ही बाहर
 
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टैग: save the nation
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सवाल देश का है दोस्तों ! आओ..आगे बढ़ो और अपना विचार प्रस्तुत करो..देर में सिवा अन्धेर के कुछ नहीं

आज सुबह मैंने जो पोस्ट लगाईं, उसे बहुत अच्छा प्रतिसाद मिलाहै । अनेक विद्वान लोगों ने अपने विचार प्रस्तुत किये हैंमैं हृदय से आभारी हूँ निम्नांकित महानुभावों का -1 श्री शिवम् मिश्रा2 श्री अन्तर सोहिल3 श्री काजल कुमार4 श्री विजय कुमार सप्पत्ति५ श्री विनय
 
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सिर्फ़ एक साल में भारत दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति बन सकता है, ये मुंगेरी लाल का सपना नहीं, सच है

बहुत हो गया विलाप और रुदन, बहुत हो गया गिला - शिकवा, बहुत दे दी गईं गालियाँ नेताओं को, कोई लाभ नहीं हुआ इस देश का और देशवासियों का । इसलिए अब कुछ और ठोस काम करनाज़रूरी हो गया है ।लगभग एक वर्ष हो गया है मुझे हिन्दी ब्लोगिंग में........इस दौरानकोई 1500 से
 
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टैग: विचार
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मृदु और शान्त हो जाते हैं...........

अपूर्णता ही हैजो अपूर्ण चीज की शिकायत करती है ।हम जितने ज़्यादा पूर्ण होते हैं,उतने ही ज़्यादा हमदूसरों के दोषों के प्रतिमृदु और शान्त हो जाते हैं- फैंकलिन www.albelakhatri.com
 
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टैग: कविता
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देता, उसको देत हूँ , सुनो सुदामा दास ! बिन दिए देऊं नहीं, चाहे फेरा फिरो पचास !!

एक आलेख दुखी मन से.............लोग कहते हैं इतिहास स्वयं को दोहराता है ।मैं कहता हूँ दोहराता क्या, तिहराता और चौहराता भी है ।हिन्दी ब्लोगिंग में इसका प्रमाण भी मिल रहा है ।पहले इतिहास में चलते हैं । भक्त सुदामा जब अपनी पत्नी कीप्रेरणा अथवा जिद्द के कारण
 
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ऐसे मौके बार बार नहीं आते - अगर आप कवि या शायर हैं तो कृपया इस पोस्ट को बहुत गंभीरता से लें

प्यारे स्वजनों !यदि आप समझते हैं कि आप एक अच्छे हास्य -व्यंग्य कवि हैंया एक उम्दा मज़ाहिया शायर हैं तो इस पोस्ट को गंभीरता से लेतेहुए तुरन्त मेरे बताये फ़ोन नम्बर पर सम्पर्क करके अपनीजानकारी दे देवें तथा सम्बद्ध व्यक्ति अगर आपको मुम्बई बुलाये तोज़रूर
 
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तुम भी कभी जवान हुआ करती थी रचना !

आज तुम ढीली पड़ गई हो रचना !इसलिए पीली पड़ गई हो रचना !लेकिनवो भी दिन थे ........जब तुम भी जवान हुआ करती थीतुम !हाँ हाँ तुम !तुम भी जब जवान हुआ करती थीतो जोश का तूफ़ान हुआ करती थीलोगरात-रात भर आनन्द लूटते थेसीटी बजाते थे, ताली पीटते थेमैं जब तुम्हें गाता
 
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टैग: जवान
Jun 09 2010 05:54 PM
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न तो अति समीप जाना चाहिए, न ही अति दूर

बड़े लोगों के सामने कानाफूसी मत करोऔर न ही किसी दूसरे के साथहँसो या मुस्कुराओ ।जो कोई राजाओं के साथ रहना चाहता है उसको चाहिए कि आग के सामने बैठ कर तापने वाले की तरहव्यवहार करे । उसको न तो अति समीप जाना चाहिए, न ही अति दूर ।-तिरुवल्लुवरwww.albelakhatri.com
 
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वह बहुमत में है चाहे अकेला ही क्यों ना हो.............

कोई आदमीजो सचाई के हक़ में है,जिसकी तरफ ईश्वर है,वह बहुमत में है चाहे अकेला ही क्यों ना हो.............- बीचरwww.albelakhatri.com
 
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टैग: बीचर
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गुलामों को दावतें देता है, घर वाली को भूखो मारता है

जो अपने शरीर को लज़ीज़ दावतें देता हैऔर अपनी आत्मा कोआध्यात्मिक आहार के बिना भूखो मारता है,वह उस शख्स के मानिंद हैजो अपने गुलामों को दावतें देता हैऔर अपनी घर वाली को भूखो मारता हैजय हिंगलाज !शुभ प्रभात !-अलबेला खत्रीwww.albelakhatri.com
 
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आज मैं सबके ब्लॉग पढ़ रहा था। सभी ने ख़ूब बढ़िया काम किया ,मुझे बड़ा आनन्द आया, लेकिन सर्वाधिक मज़ा आया रचना के एकब्लॉग पर, जहाँ पर प्रकाशित रचना भले ही दो कौड़ी की थी लेकिनएक अनुसरणकर्ता जो दिखा रही थी वहस्तनों का जोड़ा बड़ा शानदार थाआप स्वयं देख
 
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Jun 07 2010 07:12 PM
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मज़ा शीघ्र चला जाता है, परन्तु कलंक हमेशा लगा रहता है

माना कि श्रेष्ठ कार्य में मेहनत पड़ती है,मेहनत शीघ्र समाप्त हो जाती है,परन्तु कीर्ति अमर रहती है;जब कि नीच काम में,चाहे उसके करने में मज़ा भी आता रहा हो,मज़ा शीघ्र चला जाता है,परन्तु कलंक हमेशा लगा रहता है ।- जॉन स्टुअर्ट www.albelakhatri.com
 
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ईमान क्या है ? सब्र करना और दूसरों की भलाई करना ..

जब सत्कर्मी व्यक्ति को असह्य कष्ट हो,तो समझना चाहिए किईश्वर शीघ्र ही उस पर कृपा करने वाला हैयह बात मैंने साक्षात् अनुभव की है-टीकमचंद वारडेईमानदार आदमी ईश्वर की सर्वोत्कृष्ट कृति है ।- पोपईमान क्या है ?सब्र करना और दूसरों की भलाई करना ।अगर मोमिन ( ईमान
 
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आज कोई भी घटना तुम्हें अप्रसन्न नहीं कर पाएगी

निश्चय करो कि आज के दिन कीकोई भी घटनातुम्हें अप्रसन्न नहीं कर पाएगी ।अपने काम कोइस अनुपम और पवित्र निर्णय से शुरू करोकि उसके साथन मिलने पायेगी महत्वाकांक्षा,न लाभ की आसक्ति,न सुख की अभिलाषा ;औरउसके फल की कोई चिन्ता तुम्हें स्पर्श नहीं करेगी,न ही असफल
 
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केवल नमाज़ पढ़ लेने से ख़ुदा नहीं मिलता

ख़ुदा को पाने का रास्तासिवाय ख़ल्क की यानी दूसरों की ख़िदमत केऔर कोई नहीं है । माला लेकर 'अल्लाह अल्लाह ' रटने से,चटाई बिछा कर नमाज़ पढ़ने सेया गुदड़ी ओढ़ लेने से अल्लाह नहीं मिलता ।- एक सूफ़ी सन्तअपने रब को याद रखो और सब चीजों से बे-लगाव हो कर उसी की तरफ
 
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राजनीतिज्ञों की बनिस्बत वह देश की ज़्यादा सेवा करता है

जो कोईअनाज की एक बाली की जगह दो या घास की एक पत्ती की जगह दो उगाता है, ज़्यादा ख़ुशहाली का मुस्तहक हैऔर तमाम राजनीतिज्ञों की समूची जाति की बनिस्बतवह देश की ज़्यादा सेवा करता है । - स्विफ्ट
 
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क्या आप क्रोध करते हैं ?

क्रोध करने का मतलब हैआत्मशान्ति खोना,अपने ऊपर नियन्त्रण खोना,विचार की स्पष्टता खोना,परिस्थिति पर पकड़ खोनाऔर अक्सरअपने निकटवर्ती लोगों का मान खोना........- टीकमचंद वारडे www.albelakhatri.com
 
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मौन धरने में कलह नहीं

पुरूषार्थ में दरिद्रता नहींईश्वर चिन्तन में पाप नहींमौन धरने में कलह नहींजागने वाले को भय नहीं- चाणक्य
 
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उसको वन में रहने से क्या लाभ हो सकता है ?

जिसने इच्छा का त्याग कियाउसको घर छोड़ने की क्या आवश्यकता हैऔर जो इच्छा का बन्धुआ है,उसको वन में रहने से क्या लाभ हो सकता है ?सच्चा त्यागीजहाँ रहेवहीँ वन और वहीँ भजन-कन्दरा है-महाभारत
 
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May 28 2010 10:36 AM
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तो कौन धनी या विद्वान न बन जाता ?

अगर इस दुनिया में आलस्य न होतातो कौन धनी या विद्वान न बन जाता ?सिर्फ़ आलस्य के कारण हीयह सारी पृथ्वीनर-पशुओं और कंगालों से भरी हुई हैwww.albelakhatri.com
 
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कवियों ! अब तुम कविताओं में सिर्फ़ देश की बात करो

बहुत हो चुकी नारी की छीछालेदार इन मंचों परबहुत हो चुका घरवाली का कारोबार इन मंचों परबहुत हो चुके सड़े चुटकुले बार-बार इन मंचों परबहुत हो चुके टुच्चे टोटके लगातार इन मंचों परबहुत हो चुकी गीत ग़ज़ल छंदों की हार इन मंचों परबहुत हो चुका चीर काव्य का तार तार
 
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दो ऐसा वरदान प्रभो !

परचिन्तन, परहित, परसेवा, परमार्थ के काज करूँपवन - गति से चलूँ सत्य पे, सदा झूठ से लाज करूँवैर - भाव न रखूं किसी से, दो ऐसा वरदान प्रभो !झुकूं सदा मैं सभी के आगे, सबके हृदय पे राज करूँ
 
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फ़िल्मों में काम पाने के लिए वह किसी का भी बिस्तर गर्म करने को तैयार है, क्या यह चिन्ता का सबब नहीं ?

आज एक ऐसी बात ने झकझोर कर रख दिया है दिमाग़ को कि न कुछकहते बनता है और न कुछ लिखते बनता है......बस, अफ़सोस की एकलकीर पूरे ज़ेहन में खिंच गई है कि आखिर क्या हो गया है आज केइन्सान को ? दूसरों से आगे निकलने और कामयाब होने की होड़ मेंकोई कितना पतित हो सकता
 
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प्यार गर मिलता रहे इन्सान को इन्सान से

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तुम ही बताओ...अब इस चाय को कौन पीयेगा ?

प्यारी गुड्डू की माँ !ख़ुश रहो !ऐसा कह कह कर मैं शब्दों का अपव्यय नहीं करना चाहता क्योंकि मैं जानता हूँ तुम आलरेडी ख़ुश हो और आलवेज़ ख़ुश हीरहना चाहती हो । न केवल तुम ख़ुश रहना चाहती हो, बल्कि मुझे भीख़ुश ही देखना चाहती हो इसलिए 15 दिन के लिए मुझे घर
 
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विनम्र श्रद्धांजलि स्वर्गीय राजीव गांधी को...........

काश!हम इतने समर्थ होते काश!यह हमारे वश में होतातो वह मनहूस घड़ीकभी आने नहीं देतेआपको इस तरह,असमय जाने नहीं देतेभिड़ जाते हम नियति से,घमासान मचा देतेखेल जाते प्राणों पर...आपकी जान बचा देतेलेकिन नहीं ...कोई उपाय नहीं थाइस विडम्बना से बचने काकोई तोड़ नहीं
 
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लीजिये चिदम्बरम जी ! फ़ार्मूला हाज़िर है

पिछली पोस्ट में मैंने कहा था कि नक्सलवाद को ख़त्म करने काफार्मूला अगली पोस्ट में दूंगा तो ये लो.....मैंने अपना वादा पूरा कियाये रहा मेरा नया आलेख :__लीजिये चिदम्बरम जी !फ़ार्मूला हाज़िर है ।आपको कोई पहाड़ नहीं तोड़ना, कोई गंगा नहीं लानी स्वर्ग से औरन ही
 
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तुम श्लील कहो, अश्लील कहो, जो दिखता है वो लिखता हूँ मन्दिर में नहीं, मण्डी में हूँ , जो बिकता है वो लिखता हूँ

अविनाश वाचस्पति जी !आज पहली बार आपने एक ऐसी टिप्पणी की है जो मुझे आपकी नहींलग रही बल्कि किसी और के कहने पर अथवा दबाव पर की गई कुचरनी लगती है । जो भी हो, मुझे अपने लेखन के बारे में कोईसफ़ाई देने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि मैं जानता हूँ कि मैंने क्या लिखा है
 
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देश की चिन्ता करने वाले घर की चिन्ता करना सीख

टिप्पणियों पर मरने वाले विज्ञापन पे मरना सीखक्या रखा है वाह वाह में, नगद कमाई करना सीखघण्टों तक कम्प्यूटर से चिपका तो पत्नी उखड़ जाएगीदेश की चिन्ता करने वाले घर की चिन्ता करना सीखwww.albelakhatri.com
 
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इन्हीं कुँवारों के दम पर पलते हैं सारे नीम-हकीम, नियमपूर्वक सुबह -शाम जो इकसठ बासठ करते हैं

महिलाओं से नैन मटक्का लोग फटाफट करते हैंनहीं चाहिए ऐसा करना, जानते हैं, बट करते हैंहम पर आँख उठाने वाले याद रखें इस जुमले कोजो हमको ऊँगली करता है, हम उसको लट्ठ करते हैंइन्हीं कुँवारों के दम पर पलते हैं सारे नीम-हकीमनियमपूर्वक सुबह -शाम जो इकसठ बासठ करते
 
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दिल पे मत लो.......बस..मज़ा लो इस नये ज़माने की नयी बातों का

ज़माना बदल गया है भाई............पहले बाप के बाप को बाबा कहते थे,आजकल बेटे के बेटे को बाबा कहते हैंपहले जीम के ( खा के ) सेहत बनाते थेआजकल जिम में ( जा के ) सेहत बनाते हैंबदलाव के इस दौर मेंसंस्कृत के एक श्लोक का नया अर्थ देखिये.......सर्वे भवन्तु सुखिनः
 
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आनन्द दे रहा है मयंक का बुढापा , अंगूर के सारे मज़े किशमिश में आ गये हैं

अब कौन कितना और क्या लिखता और सोचता है यह तो मैंआंकलित नहीं कर सकता , लेकिन एक वर्ष हो गया मुझे भीब्लोगिंग में.........इसलिए मैं एक बात तो अनुभव के आधारपर ज़रूर कह सकता हूँ कि यदि कोई ब्लोगर सतत सेवा कररहा है और न केवल सेवा कर रहा है बल्कि मज़े ले ले कर
 
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जो सुलूक कवि सम्मेलन के आयोजकों ने एक वरिष्ठ शायर के साथ किया क्या वही सुलूक क्रिकेटरों के साथ करने का माद्दा BCCI में है ?

जिस प्रकार धोनी के धुरन्धर ज़ोरदार तरीके से शानदार हार ले करवेस्ट इंडीज़ से आये हैं उससे एक बात तो तय हो गई है कि भारतका कोई सानी नहीं दुनिया में...........भारत की पावन परम्परा केध्वजवाहक ये क्रिकेटर न केवल सम्माननीय हैं बल्कि पुरुस्कारनीयभी हैं । इतनी
 
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क्यों भाई, क्या इस देश की जनता इतनी गई गुज़री है ?

रेलवे स्टेशन की कैन्टीनों पर मूल्य सूची ........शीतल पेय 500 ml - 25 रूपयेशीतल पेय 300 ml - 15 रूपयेमिनरल वाटर - 12 रुपयेजनता खाना - 10 रुपयेकौतुहलवश मैंने देखने के लिए जब कैंटीन से जनता खाना माँगातो पहले तो उसने मुझे खा जाने वाली निगाहों से घूरा और फिर
 
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शीतल मोटर्स का स्नेह सम्मेलन प्रभावित कर गया

एक तरफ़ जहाँ सचमुच के रिश्ते आजकल ताक पर रख दिए जाते है वहीँ कुछ ऐसे लोग भी हैं जो नये-नये रिश्ते गढ़ लेने और उनके साथ पारिवारिक वातावरण बना देने का सामर्थ्य रखते हैं ।मैं बात कर रहा हूँ अहमदाबाद के एक बड़े व्यवसायी श्री अरविन्दभाई की जिनकी फ़र्म शीतल
 
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अक्षय कत्यानी की बीमारी, इलाज और हम ब्लोगर्स..... रौशनी बदनाम न हो जाये इसलिए रख दिया हमने दीया तूफ़ान के आगे

अविनाश वाचस्पति जी,दीपक मशाल जी,एवं वे सभी मित्र जन जिन्होंने अक्षय कत्यानी के इलाजसम्बन्धी मसले पर मुझसे बात कीमैं आप सबको विश्वासदिलाना चाहता हूँ कि अक्षय को कुछ नहीं होगा, उसके इलाजमें किसी भी तरह का अभाव आड़े नहीं आएगा ।आज मैंने अक्षय से भी खूब बात
 
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महफूज़ अली, सुन्दर सुकन्या और उसका बच्चा ...

मियां महफूज़ अली एक षोडशी सुकन्या पर मोहित हो गये और एक बहाद्दुर आशिक की तरह बोले -मैंने अपना दिल तुम्हारे नाम किया,अब तुम भी अपना दिल मुझे दे दो ............कन्या बोली - आज नहीं कल, मैं कल दूंगी...........अगले दिन कन्या एक बच्चा ले कर आईऔर महफूज़ साहेब
 
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