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व्यंग.......

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08 Mar 2010
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एक व्यंग्य :हरहुआ और टी० वी०

हरहुआ और टी०वी० किसी गाँव में, एक ज़मींदार साहब रहते थे।काफी लम्बी-चौड़ी ज़मींदारी थी।परन्तु जब से ज़मींदारी उन्मूलन अभियान शुरु हुआ तो उनकी ज़मींदारी ख़त्म हो गई और वह "बाबू-साहब" बन गए।ज़मींदारी तो ख़त्म हो गई परन्तु उनकी "कोठी" का "कोठापन" खत्म नहीं
 
आनन्द पाठक
Feb 21 2010 06:54 PM
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एक सूचना : उर्दू-से-हिंदी

www.urdu-se-hindi.blogspot.com ब्लाग का मक्सद फ़कत इतना है कि उर्दू अदब में आजकल जो लिखा/पढ़ा जा रहा है या जो सरगर्मियाँ उधर हैं उन्हे अपने हिन्दीदाँ दोस्तों को ज़ियादा से ज़ियादा वाक़िफ़ कराना है जो हिन्दी में लिखते-पढ़ते हैं और उर्दू से मोहब्बत है उर्दू के
 
आनन्द पाठक
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सुदामा की खाट

प्रिय मित्रो !"सुदामा की खाट’- मेरा दूसरा सद्द: प्रकाशित व्यंग्य-संग्रह’ है.जिसमें विभिन्न सामाजिक विद्रूपताओं पर लिखे गए १७ व्यंग्यों का संकलन है’ ।इस पुस्तक का प्रकाशन’अयन प्रकाशन१/२० ,महरौली ,नई दिल्ली ,११० ०३०दूरभाष ०११-२६६४५८१२ने किया हैआशा करता
 
आनन्द पाठक
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एक व्यंग : एक इन्टरव्यू मेरा भी....

जब से प्रसारण क्रान्ति आई ,टी०वी० चैनलों की बाढ़ आ गई। जिसको देखो वही एक चैनेल खोल रहा है।कोई न्यूज चैनेल,कोई व्यूज चैनेल।समाचार के लिए ८-१० चैनेल। दिन भर समाचार सुनिए ,एक ही समाचार दिन भर सुनिए। हिन्दी में सुनिए ,अंग्रेजी में सुनिए,कन्नड़ में सुनिए ,म
 
आनन्द पाठक
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एक व्यंग :विश्वासमत और छींक .....

राजनैतिक गहमागहमी व उठापटक के मध्य सदन-पटल पर एक पंक्ति का प्रस्ताव रखा गया - यह सदन सरकार के प्रति अपना विश्वास प्रगट करता है अध्यक्ष जी ने ,सदन की कार्यवाई शुरू करते हुए चर्चा में भाग लेने हेतु 'क' जी का नाम पुकारा 'क' महोदय जैसे ही अपना पक्ष रखना
 
आनन्द पाठक
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एक व्यंग : सियारिन और हुआं हुआं.....

हुआं ! हुआं ! रात के अँधेरे में कहीं दूर से आवाज़ आई'उफ़ ,स्साले रात में भी सोने नहीं देते'-नेता जी ने करवट बदलीशयन कक्ष के बाहर सुरती ठोंकते हुए रामदीन हवलदार ने नेता जी की अस्फुट अंतर्व्यथा सुन ली.साहब की आतंरिक पीडा से मर्माहत हो गया दिन भर साहब सभ
 
आनन्द पाठक
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एक व्यंग्य: अनावरण एक(गांधी) मूर्ति का...

नेता जी ने अपनी गांधी-टोपी सीधी की।रह रह कर टेढी़ हो जाया करती है। विशेषत: जब वह सत्ता सुख से वंचित रहते हैं।धकियाये जाने के बाद टेढी़ ,मैली-कुचैली हो जाती है।समय-समय पर सीधी रखना एक बाध्यता हो जाती है,अन्यथा विरोधी दल ’टोपी-कोण" पर ही हंगामा शुरू कर
 
आनन्द पाठक
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एक व्यंग्य : रावण नहीं मरता.....

एक व्यंग्य : रावण नहीं मरता.....सुबह ही सुबह मिश्रा जी आ टपके। हाथ में सद्द: प्रकाशित उनका कोई कहानी संग्रह था।मैं चिन्तित हो गया ,उन्हे देख कर नहीं ,अपितु उनका कहानी संग्रह देख कर।विगत वर्ष भी वह अपना ऐसा ही एक कहानी संग्रह लेकर उपस्थित हुए थे जिसका
 
आनन्द पाठक
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एक व्यंग्य: समर्पित है ....

एक व्यंग्य : समर्पित है....पाण्डुलिपि तैयार हो गई। काफी श्रम से लिखा था।दिन को दिन नहीं ,रात को रात नहीं समझा।छ्पास की जल्दी थी।हिंदी का लेखक लिखने में जल्दी नहीं करता ,छपने की जल्दी में रहता है। परन्तु जिस का भय था ,वही हुआ।समर्पण का।संग्रह समर्पित नहीं
 
आनन्द पाठक
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एक व्यंग्य : नेता जी और पंचतंत्र

एक व्यंग्य : नेता जी और पंचतंत्र ..प्राचीन काल की बात है किसी नगरी में नेता जी नामक एक प्राणी रहा करते थे उनके कार्यकाल में ,नगर में सर्वत्र शान्ति थी नागरिक गण अपना-अपना कार्य बड़ी लगन व निष्ठा से कर रहे थे .किसी कार्य के लिए 'सोर्स-पैरवी ' लगवाना एक
 
आनन्द पाठक
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एक व्यंग्य : सखेद सधन्यवाद ,....

इधर विगत कुछ दिनो से जब मेरी रचनाएं ’सखेद सधन्यवाद’ वापस आने लगी तो मुझे हिंदी की ’दशा’ व ’दिशा’ दोनों की चिन्ता होने लगी।अब यह देश नहीं चलेगा। रोक देंगे हिंदी के विकास रथ को ये संपादकगण। ले डूबेंगे हिंदी को ये सब।जितने उत्साह व तत्परता से मैं अपनी रचना
 
आनन्द पाठक
Jul 25 2009 11:15 AM
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एक व्यंग : एक ग़ज़ल की मौत ......

विवाहित कवियों को जो एक सुविधा सर्वदा उपलब्ध रहती है और अविवाहित कवियों को नहीं - वह है एक अदद श्रोता और वह श्रोता होती है उनकी श्रीमती जी -अभागिन अभागिन इसलिए कि वह हमारे जैसे चिरकुट कवि की धर्मपत्नी होती है अगर वह किसी हवलदार की पत्नी होती तो वह हम
 
आनन्द पाठक
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एक व्यंग : बड़े साहब का बाथरूम ... ....

ट्रिन ! ट्रिन !-टेलीफोन की घंटी बजी 'हेलो !हेलो! ,बड़े साहब हैं?""आप कौन बोल रहे हैं?": आफिस से बड़ा बाबू बोल रहा हूँ "" तो थोडी देर बाद फोन कीजिएगा ,साहब बाथरूम में है " बड़ा बाबू का माथा ठनका रामदीन तो कह रहा था की साहब आज घर पर ही है तो वह बाथरूम
 
आनन्द पाठक
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एक व्यंग: सुदामा फिर आइहौ....

एक व्यंग: सुदामा फिर आइहौ.... सुदामा की पत्नी ने अपनी व्यथा कही .... ' हे प्राण नाथ ! या घर ते कबहूँ न बाहर गयो,यह पुरातन फ्रीज़ और श्वेत-श्याम टी०वी० अजहूँ ना बदली जा सकी.पड़ोस की गोपिकाएं कहती हैं 'हे सखी! आज-कल आप के बाल-सखा श्रीकृष्ण का राज दरबार
 
आनन्द पाठक
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एक व्यंग :लघु व्यथा -- लोमड़ी कथा ....

लोमडी ने ललचाई नज़रों से अंगूर देखा ।मुंह में पानी भर आया और लार टपक गई ।सोचने लग गई ....आहा! क्या रस भरे अंगूर होंगे...कितने मीठे होंगे...काश ! यह अंगूर अपने आप टपक जाता ...काश! यह अंगूर मैं तोड़ पाती... यही सोच उसने दो-चार जोरदार छलाँग भी लगाईं ।परन
 
आनन्द पाठक
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एक व्यंग: लघु व्यथा -प्यासा कौआ....

प्यास से व्याकुल कौए ने घडा देखा .घडे में पानी था तो ज़रूर परन्तु पेंदे में , मुंह से बहुत नीचे था .प्यास बुझाने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा था .प्यास से हाल-बेहाल था .अचानक उसके मन में एक विचार कौंधा .फिर क्या था ! पास पड़े कंकडों को एक-एक कर के घडे में
 
आनन्द पाठक
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एक व्यंग : कुत्ता बड़े साहब का .....

एक व्यंग : कुत्ता बड़े साहब का .....वह बड़े साहब हैं.बड़ी -सी कोठी,बड़ी-सी गाडी, बड़ा-सा मकान ,बड़ा -सा गेट और गेट पर लटका बड़ा-सा पट्टा-'बी अवेयर आफ डाग" कुत्ते से सावधान सम्भवत: बड़ा होने का यही माप-दण्ड हो. चौकीदार चपरासी अनेक ,पर साहब एक मेंम साहिब
 
आनन्द पाठक
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कृपया प्रतीक्षा करें ......हम शीघ्र ही प्रस्तुत होंगे एक नए व्यंग के साथ ........आनंद
 
आनन्द पाठक