लेखमाला : मस्तिष्क की सत्ता - हमारा और अन्य सजीवों का शरीर कैसे बनता है - आपसे यदि पूछा जाये कि सजीवों के कुछ प्रमुख लक्षण बताइये तो आप क्या कहेंगे ? सजीव वही है जो जीवित है या जिसके पास एक जीवित देह है ।फिर
लेखमाला मस्तिष्क की सत्ता -- जीवन में प्रोटीन और डी.एन.ए. का अर्थपुरानी फिल्मों के दृश्यों को याद कीजिये ..कटघरे में एक स्त्री खड़ी है और वह चीख चीख कर कह रही है ..इस बच्चे का पिता यही है मी लॉर्ड” । दूसरे कटघरे में एक विलेन टाइप का
जब हम कोई नाटक देखते हैं तो सबसे पहले रंगमंच पर एक या दो पात्रों का प्रवेश होता है ,फिर धीरे धीरे अन्य पात्रों का प्रवेश होता है और इस तरह नाटक चलता रहता है । यह बृह्माण्ड का रंगमंच भी कुछ इसी तरह का है । इस रंगमंच पर आकाशगंगायें आईं , सौरमण्डल आये
इस बार कुछ देर हो गई । नवरात्रि पर अपने ब्लोग शरद कोकास पर विदेशी कवयित्रियों की कविता लगाने में व्यस्त रहा । इसके लिये क्षमा चाहता हूँ । खैर ..देर से ही सही प्रस्तुत है " मस्तिष्क की सत्ता " लेखमाला में इस बार की यह कड़ी हमारी पृथ्वी पर
पिछली पोस्ट से इतना ज़रूर याद रखें - सूर्य से निकला हुआ प्रकाश 8 मिनट में हम तक पहुंचता है । यह ऐसे होता है कि प्रकाश एक सेकंड में 3 लाख कि.मी. दूरी तय करता है, एक मिनट में (300000x60)कि.मी.,एक घंटे में (300000x60x60)कि.मी.,एक दिन में
पिछली पोस्ट से और कुछ याद रखें न रखें इसे ज़रूर याद रखें - वैज्ञानिकों का मानना है कि बृह्मांड की उत्पत्ति से पूर्व यहाँ हाईड्रोजन हीलियम प्लाज़्मा उपस्थित था । प्लाज़्मा अर्थात ठोस,द्रव्य,वायु के अतिरिक्त पदार्थ की चौथी अवस्था या इलेक्ट्रोन रहित
होली की मस्ती अब कम होने को है लेकिन बच्चों की मस्ती अभी कम नहीं हुई है ..हम सभी को अपने बचपन की होली याद आ रही है । चलिये " मस्तिष्क की सत्ता "लेखमाला के इस लेख क्रमांक -5 की शुरुआत यहीं से करें ..
लेखमाला " मस्तिष्क की सत्ता "की पहली किश्त में हम लोगों ने इस बात पर विचार किया कि हम अगर पैदा ही नहीं होते तो क्या होता ? लेकिन जबकि हम मनुष्य के रूप में जन्म ले चुके हैं , तो इस बात पर विचार करना ज़रूरी है कि हम मनुष्य क्यों हैं । वैज्ञानिक दृष्टि से इस
“ हम जानते हैं कि जो कुछ हमारे पास मूल्यवान है वह सब हमें विज्ञान ने प्रदान किया है । विज्ञान ही एक मात्र सभ्य बनाने वाला है । इसने गुलामों को मुक्त कराया , नंगों को कपड़े पहनाये , भूखों को भोजन दिया , आयु में वृद्धि की , हमें घर परिवार चूल्हा दिया
19 टिप्पणियाँ: Arvind Mishra ने कहा…आगे बढ़ते चलिए और इस जन्म को सार्थक करिए !स्वप्नदर्शी ने कहा…You can also visit my blog, I do write often about science, biotech and society and science often.बालसुब्रमण्यम ने कहा…यह बहुत अच्छा प्रयास
शोले" में गब्बरसिंह का मशहूर संवाद है"गाँव में जब कोई बच्चा रोता है तो माँ कहती है चुप हो जा नही तो गब्बर आ जाएगा"इस तरह के संवादों ने गब्बर को खलनायक बनाकर महिमामंडित किया लेकिन वास्तविकता यही है.गाँव हो या शहर अब भी रोते हुए बच्चे को चुप कराने के ल
कल्पना कीजिये यदि मनुष्य के पास मस्तिष्क नही होता तो क्या होता?सीधा सा जवाब है ..फ़िर आप यह कल्पना ही कैसे करते ?इस ब्लॉग पर आप सभी विज्ञान में जिज्ञासा रखने वालो का स्वागत है इसलिए की आप सभी के पास BRAIN है.आगे और बातें होंगी फिलहाल इतना ही ॥ शरद कोक
यह लगभग पन्द्रह वर्ष पुरानी घटना है । एक दिन सड़क पर वर्मा जी मिल गये बहुत उत्साह से बताने लगे “शरद जी पता है कल पाण्डे जी के यहाँ भजन था और एक चमत्कार हो गया ,हम लोगों ने गाना शुरू ही किया था कि अचानक बाबा की फोटो से भभूत झड़ने लगी ,पाण्डे जी ने
नवरात्रि का पर्व प्रारम्भ होने जा रहा है और बहुत से श्रद्धालु इस तैयारी में हैं कि इस बार पूरे नौ दिन का उपवास कर ही लिया जाये । उस दिन एक मित्र से पूछा “ क्यों भई इस बार भी पूरे नौ दिन ? “ उन्होने कहा “ बिलकुल “ मैं जानता था उन्हे पर्व के बारे में
21 सितम्बर 1995 का दिन इस दुनिया में एक ऐसे तथाकथित चमत्कार के लिये याद किया जायेगा जब गणेशोत्सव के दिनों से भी ज़्यादा गणेश जी के मन्दिरों मे भीड़ रही । अचानक एक अफवाह फैली कि गणेश कुल के देवी देवता दूध पी रहे हैं । मन्दिरों में लम्बी लम्बी कतारें लग
ब्लॉगिंग की दुनिया में वैज्ञानिक दृष्टि में विश्वास रखने वाले ब्लॉग्स बहुत कम है लेकिन कुदरतनामा के ज़रिये श्री बाल्सुब्रमणियम भुजंग के ज़रिये सुश्री लवली कुमारी और श्री अरविन्द मिश्रा तथा साईंस ब्लोगर असोसिएशन एवं तस्लीम के माध्यम से श्री ज़ाकिर अली रज
इस पृथ्वी पर मनुष्य का जन्म होने से पूर्व ही बहुत कुछ घटित हो चुका था.बृह्मांड,सूर्य,चान्द,सितारे,आकाश,हवायें,बादल सब कुछ उपस्थित था। मनुष्य नित नई परिघटनायें यहाँ घटित होते हुए देखता और अपनी मान्यतायें तय करता जाता |प्रकृती के रहस्यों को लेकर अलग अल