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न तुम्हें देखा मैं ने , न तुमने मुझको
"न तुम्हें देखा मैं ने , न तुमने मुझको" न तुम्हें देखा मैं ने , न तुमने मुझको फिर कैसी ये प्रीत, बतलाऊँ किसको?लगी कैसी लगन, रहूँ मैं यूँ मगन धरूँ ध्यान किसीका , पाऊँ मैं तुझकोक्या है तुम में वो, बात जपूँ दिन रातकहूँ कैसे न मैं,
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Jun 05 2010 12:25 AM


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