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कहां हैं नाज़ी
तब एक कविता पढी थी.....................पहले नाज़ी आये कम्युनिस्टों के लिये,फ़िर यहूदियों के लिये,फ़िर ट्रेड यूनियनों के लिये,फ़िर कैथोलिकों के लिये,फ़िर प्रोटेस्टेन्टो लिये...........पर अब नाज़ी नही है .वो घुस गये हैं हर किसी में,कम्युनिस्टों में,ईसाइयों
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Feb 02 2010 04:12 PM


Shuffle








