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इक बात मेरे दिल की आपके दिल तक

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16 May 2010
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70, 00,000 Crores (1 crore is 10 million) Rupees In Swiss Bank .

इन दिनों इक मेल इधर उधर हो रही है  मुझे भी अपने अग्रज मित्रवर से प्राप्त हुई. बात इस मेल में स्विस बैंक की थी. जानते सब है मगर बोले कौन ? विश्व में ७० देशो में "काला धन " जमा करवाने की सुविधा है. स्विस बैंक के पास भारत का ७०,०००, ०० करोड़ रुपया है.
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दिल की बात

कैसे होगा आपको यकीन यह बतलायेहम तो खुली किताब रहे है हमेशापन्ने अपने दिल के छुपाये तो क्योंकोई गहरे से देखे तो मनाही  नहीं  हैपढ़े दिल से और रखे दिल में तो सुकून हैवरना पन्ने युही हवा में उड़ जायेंगेकहा अटकेंगे पन्ने मेरे दिल केखुद
May 13 2010 11:24 AM
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चिदंबरम जी आख़िर यूँही कब तक चलेगा सिलसिला हमारे जवानों को शहीद बनाने का

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नृशंस नक्सली हमले में ८० से भी ज्यादा केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों के शहीद होने की ख़बर ने पुरे राष्ट्र को चोंका दिया। आख़िर कहाँ हैं हमारी माकूल सुरक्षा व्यवस्था ? यह नर संहार सरकार की निति रीती को स्पष्ट करती है कि सौ
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चला गया यह गणतंत्र दिवस - फिर आएगा फिर मनाएंगे

चला गया यह गणतंत्र दिवस                                फिर आएगा फिर मनाएंगे६० वर्ष पूर्ण हो गए हमारे गणतंत्र दिवस को । हर वर्ष आता है और हम हर वर्ष मनाते भी है ।
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वाह मेरा भारत महान , सरकार कर देगी तुझे ही कुर्बान

वाह मेरा भारत महान , सरकार कर देगी तुझे ही कुर्बान यह क्या हो रहा है देश के  हुक्मरानों को . लगता है सर्दी की मरे इनको कुछ सूझ ही नहीं रहा है . इक विज्ञापन में (ना) पाकिस्तान के सेन्य अधिकारी की तस्वीर इक मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञापन ने सरकार
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क्या हो रहा है ? कुछ ख़बर तो है .............. मेरा देश मेरा वोट ...... न होने दे देश पर चोट

कोई शक नही की हर इन्सान बहुत व्यस्त है इस सामाजिक व्यवस्था में। न जाने कितने ही दबाव से जूझता रहता इन्सान । मेरे दिल से फिर निकली इक बात की इन दबावों के उपरांत भी जरा समय निकले देश के लिए । आज आवश्यकता है , आपके समय की आपके विचारो की जिनके प्रभावों स
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फ़िर मौसम आया है चुनाव का

लो कर लो बात ! क्या करे दूसरा कोई मुद्दा है ही नही अभी चर्चा करने को - सिर्फ़ इक ही मुद्दा है और वो है चुनाव । किस को चुन्नना है कैसे को सेलेक्ट करे ? बहुत ही गंभीर एवं जटिल है ? फिर भी मत तो डालना ही है , ड्यूटी पुरी कर लेते है डालकर। कोई सोच कोई चि
Dec 29 2009 12:01 PM
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दिल की बात आप तक

देश मे क्या हो रहा है किस को खबर ? क्या हो रहा है किस को चिन्ता ? सब अपने मे मस्त है .... गाहे बगाहे चिन्ता जाहिर कर देते हे और बस इतिश्री ...... क्या ऐसे ही चलेगा ? कर्तव्य से विमुख तो हो ही नहि सकते ना जनाब ..... बस इस दिल मै कुछ हलचल होती है उसी क
Dec 29 2009 12:01 PM
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कौन कहता है इस देश में महंगाई हैं. यह सरासर झूट है भाई - सांसद को संसद में १२ रूपये में खाना इस कमरतोड़ महंगाई में उपलब्ध है

देश की जनता चाहे  भूखी सोये या फिर ९० रूपये किलो की दाल देख, सपने में भी खाने की हिम्मत न जुटा पाए मगर इस देश के राजनितिक ठेकेदार जिनके हाथो इस देश की बागडोर है उनको कोडियों के भाव सब वस्तुए मुनासिब होनी आवश्यक हैं. बी.पी.एल. श्रेणी तो समझ
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dil ki baat

हूँ में जिन्दा तेरे लिए तू माने  या न माने मेरे जीवन की सांस बस तेरे लिए आह भरे तो तड़फे दिल मेरा वाह करे तो धड़के  दिल मेरा बस कर कुछ न कुछ मेरे लिए कि धड़कन मेरे दिल की तेरे दिल से चले .................
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वाह रे मेरा भारत महान ! सांसदों को समय नहीं - देश अपनी रफ़्तार खुद चल रहा है

वाह रे मेरा भारत महान ! संसद का कल मखौल उड़ाया हमारे माननीय सांसदों ने ! १ मिनट कि कार्यवाही का खर्चा तक़रीबन २५००० रूपया लगता हैं. उसकी चिंता और न जनता कि चिंता है इन जन प्रतिनिधियों को . कल संसद का प्रश्न काल स्थगित किया गया किसी हल्ले गुल्ले के कार
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ओबामा घबराया हुआ लगता हैं ...... हमें जागना होगा .....

ओबामा घबराया हुआ लगता हैं तभी बहकी बहकी बातें चाइना में कह गया . चाइना के लिए (ना)पाक बहुत जरुरी हैं क्योंकि हिंदुस्तान से उसको घबराहट हैं. हिंदुस्तान का दुश्मन चाइना का दोस्त . .... और क्यों न हो चालबाजों का इसी से काम चलता है . और हमारे हुक्मरान है
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अब किसको क्या कहे ?

चीनी भी अब कसैलि होने लगी है. प्रभु के गुन भि अब बिना दाल खाये गाऐ जा रहे है . प्रभु ही तो इक सहारा बचा है. सरकार तो बस कार मै ही घुम रहि है. किराने कि दुकान से किनारा करने लगे है लोग . स्वाइन फ्लु क्यो नही फैलेगा - तरकारी सपना जो है . मानसून की मेहरबानी
Aug 29 2009 10:17 AM
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कल क्या होगा किसको पत्ता ? वोटर ख़ुद को नही मालूम उसने क्या किया ?

हिंदुस्तान का इक महापर्व कुछ लोगो को चुनने का ख़त्म हुआ । ५० प्रतिशत के लगभग जनता ने अपने मताधिकार का प्रयोग(उपयोग नही) किया। कुछ्ने मत देने के लिए मत दिया तो कुछ ने किसी के कहने पर दिया होगा। उनका प्रतिशत कम ही होगा जिन्होंने राष्ट्र धर्म निभाया होग
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ऐसा क्यों नही हो सकता देश हित में

अभी तो बस चुनाव के कारन पत्र पत्रिकाओ अथवा टीवी चेनलोंमें बस गरमा गर्म मसाला ही पढने और देखने सुनने को मिलता है। बस बैठ बैठे में इक विचार आया कि राष्ट्र हित में मुख्य दल कांग्रेस तथा भारतीय जनता पार्टी को कोई कड़ा निर्णय लेना ही होगा । यह निर्णय दिल क