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31 Dec 2009
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धन के संग्रह नहीं त्याग में सुख है

दो मित्र बहुत समय बाद मिले. एक मित्र सफल व्यवसाई बन गए थे. खूब धन संग्रह किया. दूसरे मित्र ने जन सेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया था. धन के प्रति उदासीनता ही उनका धन थी. नदी पार जंगल में घूमने गए. बहुत बातें करनी थी. अपनी सुनानी थी. दूसरे की सु
 
Suresh Chnadra Gupta
Dec 29 2009 11:47 AM
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भिक्षाम देही

साईं बाबा अपने भक्तों के घर जाकर आवाज लगाते थे - भिक्षाम देही. भक्त बाहर आते और जो कुछ घर में होता बाबा के अर्पण करते. बाबा अपनी झोली का मुंह खोल देते, भिक्षा झोली में आ जाती, और साथ ही झोली में आ जाते भक्तों के दुःख और कष्ट. एक बार कुछ लोगों के चढान
 
Suresh Chnadra Gupta
Dec 29 2009 11:47 AM
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मां ............

क्रिसमस की वधाई
 
Suresh Chnadra Gupta
Dec 29 2009 11:47 AM
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तुम अपनी पूजा करो

लोग अपनी-अपनी आस्था के अनुसार पूजा करते हैं. सब के पूजा करने के अपने अलग तरीके हैं. सबका अपना विश्वास है कि इस तरह पूजा कर के वह अपने भगवान् को पा सकेंगे. सब अपनी आस्था के अनुसार पूजा करें, और दूसरों को उनकी आस्था के अनुसार पूजा करने दें. किसी और की
 
Suresh Chnadra Gupta
Dec 29 2009 11:47 AM
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भगवान की प्राप्ति कैसे हो?

अक्सर लोग ऐसा कहते हैं कि भगवान की दया तो सभी पर समान भावः से है, फ़िर सबको भगवान की प्राप्ति क्यों नहीं होती? इस में कोई संशय नहीं कि भगवान की पूर्ण दया सभी पर समान भाव से है. किंतु जैसे कोई दरिद्र व्यक्ति अपने घर में गढ़े हुए धन को न जानने के कारण
 
Suresh Chnadra Gupta
Dec 29 2009 11:47 AM
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सब मुस्लिम भाई-बहनों को हेप्पी ईद-उल-जुहा

ईद-उल-जुहा इस्लाम धर्म में विश्वास करने वाले लोगों का एक प्रमुख त्यौहार है । यह त्यौहार पैगम्बर इब्राहीम द्वारा दिखाई गई बलिदान की भावना का त्यौहार है. यह इंसान के मन में ईश्वर के प्रति विश्वास की भावना को बढ़ाता है. परस्पर प्रेम, सहयोग और ग़रीबों की
 
Suresh Chnadra Gupta
Dec 29 2009 11:47 AM
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कबीरा कहिन

कबिरा प्याला प्रेम का, अंतर लिया लगाय । रोम रोम में रमि रहा, और अमल क्या खाय ॥ जल में बसै कमोदिनी, चंदा बसै अकास । जो है जाको भावता, सो ताही के पास ॥ प्रीतम के पतियाँ लिखूँ, जो कहुँ होय बिदेस । तन में मन में नैन में, ताको कहा सँदेस ॥ नैनन की करि कोठर
 
Suresh Chnadra Gupta
Dec 29 2009 11:47 AM
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आवाज दो हम एक हैं

मुंबई में हिंदू मरे, मुसलमान मरे, यहूदी मरे, गरीब मरे, अमीर मरे, आम आदमी मरे, खास आदमी मरे, बच्चे मरे, बड़े मरे, औरतें मरीं, सुरक्षा कर्मी मरे. गोली ने यह नहीं पूछा कि तुम किस धर्म के हो, समाज के किस वर्ग के हो, बस लगी और जिंदगी ख़त्म. जब जिन्दा थे त
 
Suresh Chnadra Gupta
Dec 29 2009 11:47 AM
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Interview with God !!!

CLICK to see an interview with God.
 
Suresh Chnadra Gupta
Nov 19 2009 01:33 PM
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सूर्य नमस्कार

सूर्यदेव आप जीवन रक्षक हैं, मेरे जीवन की सर्वदा रक्षा करें. सूर्यदेव आप आयु दाता हैं, मुझे दीर्घायु प्रदान करें. सूर्यदेव आप सौन्दर्य के प्रदाता हैं, मुझे सौन्दर्य प्रदान करें. मेरे जीवन में जो भी न्यूनता है, उस न्यूनता को दूर करें. मेरी जो भी आकांक्
 
Suresh Chnadra Gupta
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आप सबको दीपावली की शुभकामनाएं

आई आई दीवाली आई, साथ में कितनी खुशिया लायी, धूम मचाओ, मौज मनाओ, आप सब को दीवाली की बधाई. हैप्पी दीवाली दीवाली पर्व है खुशियो का, उजालो का, लक्ष्मी का, इस दीवाली आपकी aksजिंदगी खुशियो से भरी हो, दुनिया उजालो से रोशन हो, घर पर माँ लक्ष्मी का आगमन हो, ह
 
Suresh Chnadra Gupta
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खुदा का मजहब क्या है?

खुदा हिन्दू है या मुसलमान?ईसाई, सिख, बौध या जैन?मेरा सोच कुछ अलग है,खुदा का कोई मजहब नहीं होता,खुदा किसी के लिए मजहब नहीं चुनता, मजहब बनाये है इंसान ने,और बंद कर दिया है खुदा को,अपने मजहब की दीवारों में,कोई फर्क नहीं पड़ता खुदा को,कौन किस धर्म को मानता
 
Suresh Chnadra Gupta
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Sep 26 2009 11:27 AM
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ईद मुबारक, पर इस से दूसरों को परेशानी क्यों हो?

कल मुझे दस बजे अपने एक क्लाइंट के यहाँ पहुंचना था. बहुत जरूरी मीटिंग थी. लेकिन रास्ता बंद कर दिया गया था. बहुत ज्यादा परेशानी उठा कर वारह बजे पहुँच पाया. क्लाइंट अलग नाराज. काम बिगड़ गया. मेरे जैसे हजारों लोग कल इसी तरह परेशान हुए होंगे और कितनों ने
 
Suresh Chnadra Gupta
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Sep 22 2009 08:53 AM
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दया एवं प्रेम पर आधारित सम्बन्ध हमें ईश्वर से जोड़ते हैं

अखवार में यह लेख पढ़ा, बहुत अच्छा लगा, सोचा आप सबसे बांटू. आज भारतीय समाज में मानवीय संबंधों का जितना अनादर हो रहा है उतना कभी नहीं हुआ होगा. किसी भी मानवीय सम्बन्ध का कोई अर्थ नहीं रह गया है. लालच में मनुष्य इतना अँधा हो गया है कि कुछ रुपयों के लिए भी
 
Suresh Chnadra Gupta
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ईश्वर की सच्ची पूजा

मानवीय संबंधों का आदर करो,परिवार के प्रति कर्तव्यों का पालन करो,यही ईश्वर की सच्ची पूजा है.बड़ों का आदर करो,उनके सुख दुःख का ध्यान रखो,यही ईश्वर की सच्ची पूजा है.बच्चों से प्रेम करो,उन्हें सही शिक्षा दो,यही ईश्वर की सच्ची पूजा है.पड़ोसियों से प्रेम
 
Suresh Chnadra Gupta
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Sep 10 2009 03:58 PM
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मैंने कृष्ण से पूछा

यह प्रेसेंटेशन मुझे एक मित्र ने दिया. सोचा आप सबके साथ बांटू.
 
Suresh Chnadra Gupta
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सुख और दुःख - दो रिश्तेदार इंसानों के

कभी पढ़ा था - सुख और दुःख एक सिक्के के दो पहलू हैं. कल साईं बाबा सीरिअल में बाबा ने कहा - सुख और दुःख इंसानों के दो रिश्तेदार हैं. सुखों से इंसान खुद रिश्तेदारी रखना चाहता है और उसके लिए हर उपाय करता है. दुःख स्वयं ही इंसान के रिश्तेदार बन जाते हैं औ
 
Suresh Chnadra Gupta
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जानवर भी एहसान मानते हैं, पर इंसान !!!

मेरे एक सहयोगी ने इ-मेल में एक वीडियो भेजी जिस में एक शेर एक महिला को प्यार कर रहा है. हुआ यह कि इस महिला को यह शेर जंगल में धायल अवस्था में मिला. महिला ने उसे जानवरों के अस्पताल ले जाकर उस का ईलाज करवाया. कुछ दिन बाद शेर ठीक हो गया. महिला ने उसे चिड
 
Suresh Chnadra Gupta
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साईं बाबा आरती

जय साईं नाथ ............. Shirdi Sai Baba Tv Serial Aarti - Jai Jai Sainath - The most amazing home videos are here
 
Suresh Chnadra Gupta
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गणपति आरती

लता जी की मधुर आवाज में गणपति की आरती सुनिए
 
Suresh Chnadra Gupta
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मानव शरीर किस लिए है?

शिष्य ने गुरु से पुछा, 'हमें यह मानव शरीर किस लिए मिला है?' गुरु जी बोले, 'मानव ईशर की उत्कृष्ट रचना है. मानव शरीर पाकर हम ईश्वर को पा सकते हैं, पर उसके लिए हमें इस शरीर का सही उपयोग करना होगा. हम इस शरीर से बहुत सारे काम लेते हैं. मस्तिष्क सोचता है,
 
Suresh Chandra Gupta
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मालिक का घर अब कितना मालिक का बचा है?

जब भी मैं किसी मन्दिर, मस्जिद, गुरूद्वारे, चर्च के सामने से निकलता हूँ, मेरा मन श्रद्धा से गदगद हो जाता है - यह उसका घर है जो हम सबका मालिक है. हाथ अपने-अपने जुड़ जाते हैं इबादत में. मन में एक प्रार्थना जन्म लेती है - सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद ह
 
Suresh Chandra Gupta
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मन्दिर का धंधा

मैं सुबह जिस पार्क में घूमने जाता हूँ उसके पास एक मन्दिर है. मैं कभी मन्दिर के अन्दर नहीं गया, बाहर से ही भगवान को प्रणाम कर लेता हूँ. पार्क में आए कुछ सज्जन अक्सर मन्दिर के बारे में बात करते हैं. उनकी बातों से लगता है जैसे मन्दिर एक धंधा हो गया है.
 
Suresh Chandra Gupta
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वाँछित और अवांछित

मर्यादा का अतिक्रमण - - अधिकार का अतिक्रमण - व्यवहार का अतिक्रमण - व्यवस्था का अतिक्रमण तन, मन, धन - - तन मध्यम - मन विशाल - धन कम मस्तक, ह्रदय, चरण - - मस्तक वौद्धिकता - ह्रदय हार्दिकता - चरण धार्मिकता
 
Suresh Chandra Gupta
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ईसाई मिशनरियों द्बारा हिंदू धर्म को गाली-गलौज

एक ब्लाग (मोहल्ला) पर छपी एक टिपण्णी के अनुसार “न्यू लाईफ़ वॉइस” मिशनरी केन्द्र ने एक पुस्तक प्रकाशित की जिसका नाम रखा गया “सत्य दर्शिनी”, और इस बुकलेटनुमा पुस्तक को बड़े पैमाने पर गाँव-गाँव में वितरित किया गया। इस में छापा था: "1) “…इन्द्रसभा की नृत्य
 
Suresh Chandra Gupta