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शब्दों का दंगल

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16 Jun 2010
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“घोड़ी ने पटक दिया!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

“मुहूरत खराब चल रहा है!” कई साल पुरानी बात है। मुझे एक बारात में जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। गाँव की बारात थी और उसे किसी दूसरे गाँव में ही जाना था।  नया-नया दूल्हा था, नई-नई घोड़ी थी। कहने का मतलब यह है कि घोड़ी की भी पहली ही बारात थी और दूल्हे
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“माँ पूर्णागिरि की यात्रा” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

“माता ने अचानक बुलाया!” कानपुर से मेरे बड़े समधी अचानक खटीमा  पहुँचे! बिना किसी पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम के टनकपुर से 17 किमी पूर्णागिरि की पहाड़ी पर स्थित माता पूर्णागिरि के दर्शनों का कार्यक्रम बन गया! और चल पड़े माता जी के दर्शनों के
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“भय का भूत” (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

यह घटना मेरे बचपन की है। मेरी आयु उस समय 13-14 वर्ष की रही होगी। मेरा बचपन नजीबाबाद, उ0प्र0 मे बीता, वहीं पला व बड़ा हुआ । पास ही में एक गाँव अकबरपुर-चौगाँवा है, वहाँ मेरे मौसा जी एक मध्यमवर्ग के किसान थे । मैं अक्सर छुट्टियों में वहाँ चला जाता था । खेती
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“धैर्य और बुद्धि से काम लेना चाहिए” (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

विभुक्षिता किं न करोति पापम्,क्षीणाः जनाः निष्करुणा भवन्ति।त्वं गच्छ भद्रे प्रियदर्शनाय,न गंगदत्तः पुनरेति कूपम्।।उपरोक्त श्लोक का अर्थ लिखने से पूर्व एक छोटी सी कथा के माध्यम से ही इसे समझाने का प्रयत्न करता हूँ।एक कुएँ में प्रियदर्शन नाम का साँप, भद्रा
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“अब भी बाकी है, आशा की एक किरण” (डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक)

पिछले कई वर्षों से मैं दो-मंजिले पर रहता हूँ। मेरे कमरे में तीन रोशनदान हैं। उनमें जंगली कबूतर रहने लगे थे। वहीं पर वो अण्डे भी देते थे, परन्तु कानिश पर जगह कम होने के कारण अण्डे नीचे गिर कर फूट जाते थे। मुझे यह अच्छा नही लगता था। एक दिन कुछ फर्नीचर
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“काश् ये ज़ज्बा हमारे भीतर भी होता?” (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

सन् 1979, बनबसा जिला-नैनीताल का वाकया है। उन दिनों मेरा निवास वहीं पर था । मेरे घर के सामने रिजर्व कैनाल फौरेस्ट का साल का जंगल था। उन पर काले मुँह के लंगूर बहुत रहते थे। मैंने काले रंग का भोटिया नस्ल का कुत्ता पाला हुआ था। उसका नाम टॉमी था। जो मेरे
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“साहित्य और सम्वेदना” (मयंक)

“कौन धनी और कौन निर्धन?” आज दो संस्मरणों को प्रस्तुत कर रहा हूँ ! जो शीर्षक की पुष्टि स्वयं ही करेंगे! सन् 2007 की बात है! मेरे नगर में धनाढ्य वृद्धों ने एक संस्था का गठन किया! एक व्यक्ति ने धनाढ्य अध्यक्ष को अपने पक्ष में लेकर बाल साहित्य का कार्यक्रम
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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"चौरानब्बे वर्ष की आयु में भी कुर्सी से चिपकने का जुनून उनमें था।" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

‘‘माया मरी न मन मरा, मर-मर गये शरीर। आशा, तृष्णा ना मरी, कह गये दास कबीर।।’’ कान में सुनने की बढ़िया विलायती मशीन, बेनूर आँखों पर शानदार चश्मा। उम्र चौरानबे साल। सभी पर अपने दकियानूसी विचार थोपने की ललक। घर में सभी थे बेटे-पोते, पड़-पोते, लेकिन कोई भी बुढ़ऊ
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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आज “शब्दों का दंगल” एक वर्ष का हो गया है!

गत वर्ष आज ही के दिन “शब्दों का दंगल” शुरू किया था: इस रचना के साथ-एक वर्ष :135 पोस्ट  Thursday, 30 April 2009"दंगल अब तैयार हो गया।" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')यह कविता मेरे पुराने ब्लॉग ‘‘उच्चारण" पर भी उपलब्ध है।शब्दों के हथियार संभालो, सपना
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“धर्म बदला जा सकता है, जाति नही!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

मित्रों! आज मैं जातिवादी युग में एक अटपटा सा छोटा सा लेख प्रस्तुत कर रहा हूँ- आज जातिवाद की ज्वाला में हमारा देश झुलसा हुआ है! धर्म का मुद्दा तो आज काफी पीछे छूट गया है! लेकिन इतनी बात तो तय है कि जाति जन्म से होती है! वैदिक काल में पुरुष जाति और स्त्री
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“लोग क्यों?:डॉ.राजकिशोर सक्सेना राज”

लोग क्यों? बिन कोई ठोकर लगे ही, लड़खड़ाते लोग क्यों? परकटी चिड़िया से खुद ही, फड़फड़ाते लोग क्यों? जानकर लेते मुसीबत, खेलते फिर शौक से, जब लिपट जाती गले से, चिड़चिड़ाते लोग क्यों? असलियत सबको पता है, जानते हैं लोग सब, बेवजह महफिल में बेपर की, उड़ाते लोग
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“उद्यमेन् हि सिद्धयन्ति” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

एक गाँव में एक धनवान व्यक्ति रहता था! लेकिन वह बहुत कंजूस था। रात-दिन वह इन्ही ख्यालों में लगा रहता था कि किस प्रकार उसके धन में बढ़ोत्तरी हो! परन्तु वह इसके लिए कोई उद्यम भी नही करना चाहता था। एक दिन वह सन्त रैदास जी के पास गया और बोला- “महाराज आप
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“चमचों की तो यहाँ भी भरमार है”

"ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर।जरा-जरा सी बात पर, अपने बनते गैर।।"32 वर्ष पहले की बात है। हमारे पड़ोस में उन दिनों अपने एक स्वजातीय की किराने की दूकान थी। उस समय उनकी दूकान में प्रतिदिन 15 से 20 हजार रुपये तक की बिक्री होती थी। समय बदला और धीरे-धीरे
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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"इस पोस्ट में क्या आपत्तिजनक है?" (शब्दों का दंगल)

“पं.ललित शर्मा जी को भावभीनी विदाई!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)Saturday, 10 April 2010श्री ललित शर्मा जी ने जब ब्लॉग की दुनिया में पदार्पण किया था तो सबने इन्हें सिर-आँखों पर बिठाया था! इन्होंने अपने सतत् लेखन से कई कीर्तिमान स्थापित किये! लेकिन आज
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“पं.ललित शर्मा जी को भावभीनी विदाई!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

श्री ललित शर्मा जी ने जब ब्लॉग की दुनिया में पदार्पण किया था तो सबने इन्हें सिर-आँखों पर बिठाया था!इन्होंने अपने सतत् लेखन से कई कीर्तिमान स्थापित किये! लेकिन आज इन्होंने स्वेच्छा से ब्लॉगिंग को अलविदा कह दिया है! इनके
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“पानी में रहकर मगर से वैर” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”

सानिया की क्या मज़ाल जो पाकिस्तान में जाकर शादी से इनकार कर दे! आप क्या क़यास लगाए बैठे हैं? बेकार ही आस लगाए बैठे हैं!!  मना करना होता तो सानिया पाकिस्तान जाती ही क्यों? आपने यह कहावत तो सुनी होगी कि- “पानी में रहकर मगर से वैर” कोई अपनी पसन्द की
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
Apr 04 2010 08:20 AM
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"सिरफिरा कवि” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

“हमारी जूती और हमारी ही चाँद” सीमा सचदेव जी को उलाहना देते हुए मैंने उनके ब्लॉग नन्हा मन की एक पोस्ट पर निम्नांकित टिप्पणी की थी-  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…सीमा जी नमस्कार! आपने बहुत सुन्दर बालगीत नन्हामन पर लगाया है! आपकी
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“उपयोगी शिक्षाएँ” (अनुवादकः शास्त्री “मयंक”)

परोक्षे कार्यहन्तारं, प्रत्यक्षे प्रियवादिनम। वर्जयेत् तादृशं मित्रं, विषकुम्भं पयोमुखम्।। अनुवाद:- जो पीठ पीछे कार्य में बाधा डाले और सम्मुख आने पर मीठी-मीठी बातें करे। उस मित्र को त्याग देना चाहिए। वह उस घड़े के समान होता है जिसके भीतर विष फरा होता है
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
Mar 27 2010 07:05 PM
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“उत्तराखण्ड का प्रवेश-द्वार” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

बरेली से पिथौरागढ़ राष्ट्रीय-राजमार्ग परविगत दो वर्षों से मुँह चिढ़ाताउत्तराखण्ड का प्रवेश-द्वार बरेली के रास्ते कभी आप उत्तराखण्ड पधारें तो-उत्तर-प्रदेश के मझोला कस्बे से थोड़ा सा आगे निकलने पर उत्तराखण्ड की सीमा में प्रवेश करते ही यह
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“हिन्दी व्याकरण” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

“हिन्दी में रेफ लगाने की विधि” अक्सर देखा जाता है कि अधिकांश व्यक्ति आधा "र" का प्रयोग करने में बहुत गल्तियाँ करते हैं। उनके लिए व्याकरण के कुछ सरल गुर प्रस्तुत कर रहा हूँ!रेफ लगाने की विधिहिन्दी में रेफ  अक्षर के नीचे “र” लगाने के  लिए
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“मेरी पौत्री का जन्म-दिन”

कल 14 मार्च को मेरी पौत्री प्राची का 7वाँ जन्म-दिन था! ”अमर भारती” ब्लॉग पर पोस्ट लगाई थी! लेकिन न जाने वो कैसे उड़ गई! उसी के आग्रह पर यह पोस्ट यहाँ लगा रहा हूँ-
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“मेरा-जनपद” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

ब्लॉगर्स मित्रों सादर अभिवादन! आज “चर्चा हिन्दी चिट्ठों की में” पंकज मिश्र ने अपनी चर्चा में कहा था कि मैं रुद्रपुर आ गया हूँ! उड़नतश्तरी वाले समीर लाल जी ने अपनी टिप्पणी में पूछा था कि रुद्रपुर कहाँ है? उनकी तथा अन्य सभी ब्लॉगर्स की जानकारी हेतु यह
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“नारी-दिवस पर जूती पुत्रों को सलाम” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

प्रश्न- क्या महिला पाँव की जूती है? उत्तर- जी हाँ! प्रश्न- और पुरुष? उत्तर- ……  प्रश्नकर्ता- मैं बताऊँ? उत्तरदाता- बताइए! जूती पुत्र- प्रश्नकर्ता ने उत्तर दिया!
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“सामान सौ बरस का, पल की खबर नही!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

“मत्यु का समय निश्चित है!” आज दो घटनाक्रम सुनाने का मन है- 1- पाण्ड्वों के अज्ञातवास के समय बियाबान जंगल में जब पाँचों भाइयों को प्यास ने सताया तो युधिष्ठिर ने पानी लाने के लिए क्रम से सभी भाइयों को भेजा परन्तु एक भी लौटकर नही आया! अब स्वयं युधिष्ठर पानी
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“गुरूद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

“संक्षिप्त इतिहास” “गुरूद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब” का “संक्षिप्त इतिहास” गुरुद्वारा के साथ पवित्र सरोवर सरोवर में मछलियाँ गुरूद्वारा परिसर में दो वर्ष पूर्व मिला कुआँप्रतिदिन चलने वाला लंगरगुरूद्वारा 6वीं पातशाही आज जिस पवित्र स्थान का मैं वर्णन कर रहा
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“दो सौ रुपये दीजिए! सम्मान लीजिए!!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

“तस्कर साहित्यकार” कुछ दिन पूर्व मेरे पास एक जुगाड़ू कवि आये। बोले- “मान्यवर! अपना एक फोटो दे दीजिए!” मैंने पूछा- “क्या करोगे?” कहने लगे- “आपको बाल साहित्य के पुरस्कार से सम्मानित करना है! मैं एक कार्यक्रम करा रहा हूँ। उसमें केवल उन्हीं को सम्मानित किया
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
Feb 20 2010 05:33 PM
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“महर्षि दयानन्द सरस्वती को शत्-शत् नमन!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

आज स्वामी दयानन्द बोधरात्रि है! शिवरात्रि को ही बालक मूलशंकर को बोध हुआ था! परम शैव भक्त कर्षन जी तिवारी के घर टंकारा गुजरात में बालक मूल शंकर का जन्म हुआ था! शिव भक्त होने के कारण इस बालक ने भी शिवरात्रि का व्रत रखा था! रात्रि में शिव मन्दिर में बालक
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
Feb 13 2010 01:19 PM
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“समीर लाल का स्वर सुन लिया!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

“लाइव-संस्मरण” “…… ….. की आवाज पतली है?” दिनांकः 07-02-2010 समयः 9-47 PM अचानक मेरा चैट बॉक्स खुला- Udan: शास्त्री जी प्रणाम कैसे हैं. मुझे: नमस्कार जी! मैं ठीक हूँ आप कैसे हैं? Udan: बस, आपका शुभाशीष है आपके माईक है क्या? एक टेस्टिंग करना था. मुझे: भारत
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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"माँ तुम्हारी आरती में ही मेरा संसार है” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

आपका माँ! दास पर उपकार है उपकार है। आपके आशीष ही, मेरे लिए उपहार है।। आपके बल से कलम-स्याही, सभी की बोलती, कण्ठ में हो आप तो, रसना सुधा सा घोलती, गीत-छऩ्दों में समाया, आपका आधार है। आपके आशीष ही, मेरे लिए उपहार है।। हो रहा सारा जगत्, रौशन तुम्हारे ज्ञान
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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कृपा करो बिजली महारानी! (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक)

कल अपराह्न 3 बजे से हमारे शहर की बत्ती गुल है!आशा है कि आज दोपहर के पश्चात कुछ वैकल्पिक व्यवस्था हो पायेगी!तभी आप लोगों से सम्पर्क होगा!यह सूचना पोस्ट लैपटॉप से बमुश्किल लगा पाया हूँ।अब बिना बिजली के यह भी मजबूरी प्रकट कर रहा है।
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“तब और अब” (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

(श्रीमती रजनी माहर) तब ऱुपये किलो था आटा, अब है कितना घाटा, नानी संग जाती बाजार, नौ रुपये किलो था अनार, एक रुपये में दो किलो ज्वार, गेहूँ चावल की भरमार, कम मिलती थी बहुत पगार, कभी न होते थे बीमार, तन चुस्त थे मन दुरुस्त थे, थोड़े में सब लोग मस्त थे,
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“संस्मरण” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

दादी चम्मच का प्रयोग किया करो!   आज से 45-50 साल पुरानी बात है। उन दिनों एक कबीले की संयुक्त हबेली हुआ करती थी। किसी घर में अच्छी साग-सब्जी बनती थी तो माँग कर खाने में बहुत आनन्द आता था। उन दिनों मैं नजीबाबाद के मुहल्ला-रम्पुरा में रहता था। इसी
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“क्या आप मेरी मदद करेंगे?”

सम्मानित ब्लॉगर मित्रों! क्या आप मेरे लिए मोबाइल नम्बर-09049142729 पर एक फोन कॉल कर सकते हैं? यह नम्बर साहित्य-चोर श्री पारीक मदनलाल/मदनलाल पण्डिया का है। इन्होंने अपने कई ब्लॉग्स पर मेरी दर्जनों रचनाएँ बिना किसी आभार और बिना मेरा नाम दिये लगा रखी हैं।
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“ओह…आज तो भयंकर कुहरा है!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

ये हैं जी! खटीमा में आज सुबह 8 बजे के दृश्य आठ बजे है बहुत अंधेरा, देखो हुआ सवेरा! सूरज छुट्टी मना रहा है, कुहरा कुल्फी जमा रहा है, गरमी ने मुँह फेरा!देखो हुआ सवेरा! भूरा-भूरा नील गगन है, गीला धरती का आँगन है, कम्बल बना बसेरा! देखो हुआ सवेरा! मूँगफली के
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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"कितना कुहरा है?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

कुहरा है कि छँटता ही नही!आज मेरे शहर का सबसे ठण्डा दिन है।खटीमा की सड़कों में दिल्ली जैसी भीड़-भाड़ रहती है। मोटर साइकिलों ने साधारण साइकिलों को तो मात दे दी है लेकिन आज तो मोटर साइकिलों के चक्के जमा हो गये हैं।आज दोपहर को 1 बजे केवल इक्का-दुक्का साइकिल
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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“कहीं धूप, कहीं छाया” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

इस बार की सरदी से जन-जीवन ठप्प नैनीताल में खिली हुई गुनगुनी धूप मगर मैदानी-क्षेत्रों में कुहरे की चादर गहराई। हे प्रभो! अजब है माया, कहीं धूप, कहीं छाया।। ठण्ड की मार के कारण उत्तराखण्ड केकक्षा-एक से कक्षा नौ तक के छात्र-छात्राओं के विद्यालय 15 जनवरी तक
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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""नव-वर्ष 2010" " (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

इस नये वर्ष में आप हर्षित रहें,ख्याति-यश में सदा आप चर्चित रहें।मन के उपवन में महकें सुगन्धित सुमन,राष्ट्र के यज्ञ में आप अर्पित रहें।।
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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"86 वर्षीय बूढ़े-बरगद पर ऐसा गन्दा आरोप ?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

पं. नारायण दत्त तिवारी विलक्षण प्रतिभा के धनी हैं। कुछ तो शर्म करो! 86 वर्षीय बूढ़े-बरगद पर ऐसा गन्दा आरोप ? (चित्र मे पं. नारायण दत्त, डॉ.केडी.पाण्डेय और किनारे डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री) आज समाचार पत्रों मे और नेट पर पं. नारायण दत्त तिवारी के बारे में
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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"चिट्ठा-जगत बन्द क्यों?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

आज 25 दिसम्बर है, यानि बड़ा दिन। चिट्ठा-जगत पिछले 3 दिनों से बन्द पड़ा है। हिन्दी ब्लॉगरों के लिए यह चिन्ताजनक है। और हो भी क्यों नही। दुनिया रंग-रँगीली है। एक धुरऩ्धर महाशय ने तो अपना नाम ही ऐसा रख छोड़ा है कि "लिखते हुए भी लज्जा आती है।" " स्‍वामी
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक