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निशांत का हिंदीज़ेन ब्लॉग

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17 Jun 2010
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अच्छे विचार : बुरे विचार

“मुझे कोई मार्ग नहीं सूझ रहा है. मैं हर समय उन चीज़ों के बारे में सोचता रहता हूँ जिनका निषेध किया गया है. मेरे मन में उन वस्तुओं को प्राप्त करने की इच्छा होती रहती है जो वर्जित हैं. मैं उन कार्यों को करने की योजनायें बनाते रहता हूँ जिन्हें करना मेरे
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मरू-संहिता

सहारा रेगिस्तान को पार करते हुए दो यात्रियों ने एक खानाबदोश बेदुइन की झोपड़ी को देखा और उसमें रुकने की इज़ाज़त मांगी. जैसे सभी बंजारा जातियां करतीं हैं, बेदुइन ने बहुत हर्षोल्लास से उनका स्वागत किया और उनकी दावत के लिए एक ऊँट को जिबह करके बेहतरीन भोजन
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प्रयोजन

एक दिन महान मध्ययुगीन इटालियन कवि दांते एलीघरी एक चिड़ियाघर के पास से गुज़रे और उन्होंने एक पिंजड़े में कैद शेर को देखा. पिंजड़े के भीतर बेबस बैठे शेर ने दांते के ह्रदय में एक अमर छंद रच दिया जो बाद में उनके महान काव्य ‘द डिवाइन कॉमेडी’ में
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शतरंज की बाज़ी

एक युवक ने किसी ईसाई मठ के महंत से कहा – “मैं साधू बनना चाहता हूँ लेकिन मुझे कुछ नहीं आता. मेरे पिता ने मुझे शतरंज खेलना सिखाया था लेकिन शतरंज से मुक्ति तो नहीं मिलती. और जो दूसरी बात मैं जानता हूँ वह यह है कि सभी प्रकार के आमोद-प्रमोद के
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जागरण

कहते हैं कि ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान् बुद्ध जब एक गाँव से गुज़र रहे थे तब एक किसान उनके रूप और व्यक्तित्व की सुगंध से प्रभावित होकर उनके समीप आ गया. “मित्र, आप कौन हैं?” – किसान ने बुद्ध से पूछा – “आपके समीप मुझे ऐसी
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प्यार और तक़रार

रब्बाई इयाकोव की पत्नी उससे बहस करने के लिए सदा मौके की फ़िराक़ में रहती थी. लेकिन इयाकोव उसके उकसाव पर कभी ध्यान नहीं देता था और हमेशा शांत रहता. फिर एक रात भोजन के समय ऐसा हुआ कि मेहमानों के सामने अपनी पत्नी से गरमागरम तक़रार करके इयाकोव ने सभी को हैरत
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सोरेन कीर्केगार्ड के अनमोल वचन

सोरेन अबाये कीर्केगार्ड (1813 – 1855) डेनमार्क के दार्शनिक और रहस्यवादी थे. बीसवीं शताब्दी के चिंतकों पर उनके दर्शन का गहन प्रभाव पड़ा है. उन्होंने मानव जीवन और इसकी प्राथमिकताओं, अनुभवों, अनुभूतियों, संकल्प, और विकल्पों के क्षेत्र में बेजोड़ काम
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अंधा भिखारी

मक्का को जानेवाले हजयात्रियों के मार्ग पर एक अंधा भिखारी बैठा भीख मांग रहा था. एक धर्मपरायण यात्री ने उसके पास आकर उससे पूछा – “बाबा, क्या यहां से गुज़रनेवाले यात्री हमारे प्यारे रसूल के फ़रमान पर अमल करते हुए मुनासिब दान दे रहे हैं?”
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पादरी की प्रार्थना

विवाह कर लेने के उपरांत एक प्रोटेस्टेंट पादरी को शांति से प्रार्थना करने के लिए अवसर नहीं मिल पा रहा था. एक शाम जब वह प्रार्थना करने के लिए बैठा तो पास ही के कमरे में खेल रहे बच्चों के शोर ने उसे परेशान कर दिया. “भगवान के लिए बच्चों को चुप
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मछली पकड़ने की कला (via Hindizen – निशांत का हिंदीज़ेन ब्लॉग)

यह पोस्ट मुझे प्रिय है. इसीलिए मैं इसे दोबारो पोस्ट कर रहा हूं. लाओ-त्ज़ु ने एक बार मछली पकड़ना सीखने का निश्चय किया। उसने मछली पकड़ने की एक छड़ी बनाई, उसमें डोरी और हुक लगाया। फ़िर वह उसमें चारा बांधकर नदी किनारे मछली पकड़ने के लिए बैठ गया। कुछ समय बाद एक
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छाता

ज़ेन गुरु के कक्ष में प्रवेश करने से पहले शिष्य ने अपना छाता और जूते बाहर छोड़ दिए. “मैंने खिड़की से तुम्हें आते हुए देख लिया था” – गुरु ने पूछा – “तुमने अपने जूते छाते के दाईं ओर उतारे या बाईं ओर?” “यह तो मुझे याद
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पिता और पुत्र

एक पिता अपने 25 वर्षीय पुत्र के साथ रेलगाड़ी से कहीं जा रहा था. लड़का खिड़की पर बैठकर बाहर की चीज़ों को बड़े कौतूहल से देख रहा था. बीच-बीच में वह अपने पिता की और देखकर चिल्लाता – “पापा! देखो पेड़ पीछे भागे जा रहे हैं!”. पिता अपने बेटे को
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आलोचना

“दुनिया में कोई भी… कुछ भी पूरी तरह गलत नहीं है. रुकी हुई घड़ी भी दिन में दो बार सही वक़्त बताती है”. – पाउलो कोएलो Filed under: सत्य वचन Tagged: पाउलो कोएलो
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जॉर्जिओ मोरांडी

जॉर्जिओ मोरांडी (1890 – 1964) महान इतालवी चित्रकार थे। उन्होंने बहुत सीमित रंगों का उपयोग करके असंख्य ‘स्टिल लाइफ़’ चित्र बनाए. उनके चित्रों में एक-सी घरेलू वस्तुओं का फीका संयोजन बहुतायत में दीखता है। उनके बाद के लगभग सभी चित्रकारों पर
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क्षमा

एक दिन बुद्ध ने भूमि पर घिसटते हुए एक लंगड़े योगी को देखा. “मैं अपने पापों का फल भोग रहा हूँ” – योगी ने कहा. “तुमने कितने पापों का फल भोग लिया है?” “यह तो मैं नहीं जानता”. “और कितने पापों का फल भोगना शेष
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पाउलो कोएलो कहते हैं कि…

01 – चमत्कार होते हैं… यदि तुम उनमें यकीन रखते हो. 02 – सबको अपना आशीष दो. तुम भी कृपा के पात्र बनोगे. 03 – अपनी मूढ़ताओं को मुस्कान से ढँक दो. चिंता न करो, तुम सिर्फ यही कर सकते हो. 04 – यदि तुम शान्ति की खोज में हो तो प्रेम को मत ढूंढो. [...]
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क्षमादान का मूल्य

क्षमादान की शक्ति और उसके महत्व का मोल वही आंक सकते हैं जिन्हें क्षमादान मिला होता है. कुछ तीर्थयात्रियों का दल मंदिर में दर्शन कर रहा था. उनमें से एक श्रद्धालु को ईश्वर की उपस्तिथि का अनुभव होने लगा. वह समाधि में चला गया और उसने ईश्वर से कहा –
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जॉर्ज लुईस बोर्खेज़

जॉर्ज लुईस बोर्खेज़ [Jorge Francisco Isidoro Luis Borges Acevedo (1899 – 1986)] अर्जेंटीना के महान विचारक थे. वैसे तो वे कवि, कथाकार, निबंधकार, अनुवादक, और पत्रकार भी थे पर मैं उन्हें मुख्यतः विचारक ही मानता हूँ. उनके लेखन पर सर्वेंटीज़, काफ़्का, और
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मौन

किसी प्रान्त का गवर्नर यात्रा के दौरान लाओत्जु के आश्रम के पास से गुजर रहा था. संत के प्रति सम्मान प्रकट करने और ज्ञान प्राप्ति की इच्छा से वह उनके दर्शनों के लिए आ गया. “राज्य की देखभाल करने में मेरा लगभग पूरा समय लग जाता है और मैं दीर्घ सत्संग
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सत्य वचन – मार्क ट्वेन

आज से बीस साल बाद तुम यह सोचकर निराश हो उठोगे कि तुम्हें वह सब नहीं करना चाहिए था जो तुम कर बैठे. इसीलिए मैं तुमसे कहता हूँ कि अपने पाल गिरा दो और सुरक्षित बंदरगाहों से बहुत दूर चले जाओ. पूर्वी हवाओं को पकड़ कर अपने सपनों की राह पर चलते चलो. जाने कितना
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शैतान की दुकान

बदलती हुई दुनिया के साथ ताल-से-ताल मिलकर चलने की इच्छा से शैतान ने यह तय किया कि वह अपने प्रलोभनों के पुराने स्टॉक को सस्ते में निकाल देगा. उसने अखबार में इसके लिए एक विज्ञापन भी छपवा दिया और उसकी दुकान में ग्राहकों की भीड़ लगने लगी. टेबलों पर करीने से
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फलों के चित्र – पॉल सेज़ां

मुझे फलों के चित्र बनाना अच्छा लगता है. वे चुपचाप दीवार पर टंगे हुए अपने रंग उड़ने की माफी मांगते हैं. उनकी सुगंध से विचार जन्म लेते हैं. इन चित्रों में वे अपनी खुशबू लेकर आते हैं और उनकी छूटी हुई ज़मीन, बारिश की जीवनदायिनी फुहारें, व अंधेरे को तोड़ते
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ग्राउचो मार्क्स के बोलवचन

ग्राउचो मार्क्स (1890 – 1977) अमेरिकन कॉमेडियन और फिल्म-स्टार थे. वे अपनी हाज़िर जवाबी और चुटीले कथनों के लिए जाने जाते हैं. आज हिन्दीज़ेन के पाठकों के लिए हर बार से हटकर कुछ अलग. पसंद आनेपर टिप्पणियों में बताइए. 01 – राजनीति समस्याएं ढूँढने
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सत्य – आंद्रे गीद

“उनपर यक़ीन करो जो सत्य की खोज कर रहे हैं. संदेह उनपर करो जिन्हें सत्य मिल गया है”. – आंद्रे गीद Filed under: सत्य वचन
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कैसी अच्छाई? किसकी प्रशंसा?

सीटा के ईसाई मठ में महंत लूकास ने एक दिन सभी शिष्यों को प्रवचन के समय कहा :- “ईश्वर करे कि तुम सभी भुला दिए जाओ”. “यह आप क्या कह रहे हैं?” – उनमें से एक ने कहा – “क्या इसका अर्थ यह है कि कोई भी हमसे जगत के कल्याण
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ईश्वर की परछांई

बहुत पुरानी बात है. कहीं एक भला आदमी रहता था जो सभी से असीम प्रेम करता था और सारे जीवों के प्रति उसके ह्रदय में अपार करुणा थी. उसके गुणों से प्रसन्न होकर ईश्वर ने उसके पास अपना देवदूत भेजा. “ईश्वर ने मुझे आपके पास यह कहने के लिए भेजा है कि वे आपसे
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जीवन के जोखिम

हंसने में मूर्ख समझ लिए जाने का खतरा है. रोयें तो भावुक मान लिए जाने का खतरा है. उंगली थमा दें तो हाथ जकड़े जाने का खतरा है. किसी का कुछ ज़ाहिर कर दें तो अपने राज़ उभर आने का खतरा है. अपनी सोच दुनिया तो बताएं तो सपनों के चोरी हो जाने का खतरा [...]
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प्रार्थना

एक मजदूर की पत्नी बहुत बीमार थी. उसके पास इलाज़ कराने के लिए पैसे नहीं थे. किसी ने उससे कहा कि वह पास में ही रहने वाले बौद्ध भिक्षु से अपनी पत्नी के स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करने के लिए कहे. मजदूर ने बौद्ध भिक्षु को अपनी झोपड़ी में बुला लिया. भिक्षु ने
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झूठी क्षमायाचना

एक अध्यापक को भिक्षु चू लाइ की शिक्षाओं में आस्था नहीं थी. एक दिन उसने चू लाइ का अपमान कर दिया. अध्यापक की पत्नी चू लाइ की भक्त थी. उसने अध्यापक से चू लाइ से अपने कृत्य के लिए क्षमा मांगने को कहा. अध्यापक क्षमा माँगना तो नहीं चाहता था लेकिन पत्नी से
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“मैं वह झूठ हूँ जो हमेशा सच बोलता है” – ज़्यां कॉक्त्यू

सच्चा कवि काव्यात्मकता की परवाह नहीं करता. किसी माली को भी अपने गुलाबों पर सुगंध छिड़कने की ज़रुरत नहीं होती. कलाकार के लिए अपनी कला का वर्णन करना किसी पौधे के लिए वनस्पति विज्ञान की चर्चा करने जितना ही मुश्किल है. आम लोग जिसे पागलपन कहते हैं वह मेरे लिए
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मैं वह झूठ हूँ जो हमेशा सच बोलता है

सच्चा कवि काव्यात्मकता की परवाह नहीं करता. किसी माली को भी अपने गुलाबों पर सुगंध छिड़कने की ज़रुरत नहीं होती. कलाकार के लिए अपनी कला का वर्णन करना किसी पौधे के लिए वनस्पति विज्ञान की चर्चा करने जितना ही मुश्किल है. आम लोग जिसे पागलपन कहते हैं वह मेरे लिए
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दो बूंद तेल

एक व्यापारी ने अपने पुत्र को प्रसन्नता का रहस्य जानने के लिए एक बुद्धिमान वृद्ध के पास भेजा. चालीस दिन और चालीस रातों तक रेगिस्तान में चलता हुआ वह युवक अंततः एक पर्वत के शिखर पर बने हुए सुन्दर किले के पास पहुँच गया. वह बुद्दिमान वृद्ध वहीं रहता था. उस
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जॉर्ज इवानोविच गुरजिएफ़

“हमारी प्रथाएं या संस्कार तभी तक मूल्यवान है जब उन्हें उनके मूल शुद्ध रूप में क्रियान्वित किया जाये. ये ऐसी पुस्तकें हैं जिनमें अथाह सन्देश छिपे हैं. उन्हें समझ सकनेवाले ही उन्हें पढ़ सकते हैं. प्रत्येक संस्कार अपने आपमें सैंकड़ों किताबों और कथाओं
May 09 2010 07:08 AM
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दुःख की रग

घर में टी वी बहुत कम देखा जाता है. मुझे तो वैसे भी बहुत कम समय मिलता है. पत्नी को भी सीरियलों का चस्का नहीं है. पहले कभी था लेकिन मैंने उसके देखते समय कुड़-कुड़ करके वह भी कम करा दिया. बच्चे कार्टून और गाने देखना पसंद करते हैं लेकिन देखते समय टी वी के
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शैतान से सवाल

एक लड़का दुकान से डबलरोटी खरीदने जा रहा था. उसी समय वहां से शहर का मेयर गुज़रा.“तुम्हें पता है वह इतना शक्तिशाली क्यों है? क्योंकि वह शैतान के बताये रास्ते पर चल रहा है” – एक आस्थावान वृद्धा ने लड़के से कहा. लड़के को कुछ समझ में नहीं आया.
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कला, कलाकार, और रचनात्मकता

कुछ नया नहीं सोच पा रहे? बेहतर विचार नहीं आ रहे? रचनात्मकता से कोसों दूर अनुभव कर रहे हैं? आपके लिए मैं लेकर आया हूँ महान कलाकारों द्वारा कला और रचनात्मकता के सम्बन्ध में कहे गए अप्रतिम कथनों का संकलन. कला क्या है? कला के महान रूप को रचनेवाले कलाकार को
टैग: कला
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बच्चन – कविता – जो बीत गई सो बात गई

जो बीत गई सो बात गई जीवन में एक सितारा था माना वह बेहद प्यारा था वह डूब गया तो डूब गया अम्बर के आनन को देखो कितने इसके तारे टूटे कितने इसके प्यारे छूटे जो छूट गए फिर कहाँ मिले पर बोलो टूटे तारों पर कब अम्बर शोक मनाता है जो बीत गई सो [...]
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सत्य वचन

जीवन में दुःख है और पराजय भी है… इनसे कोई भी नहीं बच सकता. लेकिन अपने सपनों के लिए लड़ते हुए कुछ मोर्चों में हार जाना बेहतर है यह जाने बिना हार जाने के कि हम किसके लिए लड़ रहे हैं. (पाउलो कोएलो के ब्लौग से) Filed under: सत्य वचन Tagged: पाउलो कोएलो
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संकल्प की शक्ति

महर्षि रमण बहुत कुशल धनुर्धर भी थे. एक सुबह उन्होंने अपने एक शिष्य को अपनी धनुर्विद्या देखने के लिए बुलाया. शिष्य यह सब पहले ही दसियों बार देख चुका था पर वह गुरु की आज्ञा की अवहेलना नहीं कर सकता था. वे समीप ही जंगल में एक विशाल वृक्ष के पास गए. महर्षि
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हिंदीज़ेन का एक साल पूरा हुआ – यहाँ मस्ती टपकती है:)

आज इस ब्लॉग को एक साल पूरा हो गया है. वैसे तो यह ब्लॉग एक साल से भी पुराना है. पहले ब्लौगर पर चल रहा था, फिर ०1-मई-2009 से इसे वर्डप्रेस के कस्टम डोमेन पर स्थापित कर दिया. एक साल या लगभग डेढ़ साल, इस बीच इसमें अब तक 300 से अधिक पोस्टें छप चुकी [...]
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