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बर्बरता के विरुद्ध

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31 May 2010
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तुम भी हम जैसे ही निकले

फासिस्‍ट ताकतें किसी भी धर्म या देश की हों, वे अल्‍पसंख्‍यकों  को निशाना बनाने का मौका तलाशती रहती हैं। वैसे सालों साल अल्‍पसंख्‍यकों के ज़हर उगलने का प्रचार अभियान तो जारी रहता ही है। यह हालत भारत में ही नहीं बल्कि पाकिस्‍तान में भी है, वहां के
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हिन्दुत्ववादी आतंकवाद का पर्दाफ़ाश

हिन्दुत्ववादी आतंकवाद का पर्दाफ़ाश(संपादकीय, २२ मई,२०१०. ई पी डब्ल्यू)साम्प्रदायिक दुराग्रहों ने आतंकवाद के विरुद्ध हमारे संघर्ष को कमज़ोर कर दिया है__________________________________ मालेगांव में सितम्बर २००६ में हुए बम धमाकों में जब एक स्थानीय मस्जिद
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ईश्वर की सत्ता में यकीन रखने वाले मित्रों से एक अपील!!!

ईश्वर की सत्ता में यकीन रखने वाले मित्रों से एक अपील!!! आनंद सर्वशक्तिमान,सर्वज्ञानी, सर्वत्र परमपिता परमेश्वर जिनकी मर्ज़ी के बिना पत्ता भी नहीं हिल सकता, उनकी सत्ता में यकीन रखने वाले मेरे धार्मिक मित्रों! मेरी तरफ़ से अपने परमपिता से कुछ सवाल करोगे
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संस्कृति के नाम पर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सोशल इंजीनियरिंग परियोजना के तहत बच्चों को मेघालय से कर्नाटक लाया जा रहा है और उन्हें उनकी मूल संस्कृति से काटकर हिंदुत्व की घुट्टी पिलाई जा रही है. 'तहलका' से संजना की रिपोर्ट: कर्नाटक के 35 स्कूलों और मेघालय के चार जिलों में
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गौरव सोलंकी की कविता, ''मैं बिक गया हूँ''

एक वर्ष पहले अपने ब्‍लॉग शब्‍दों की दुनिया पर  गौरव सोलंकी की एक कविता पोस्‍ट की थी, कविता इस ब्‍लॉग के मिजाज के अनुकूल है, इसलिए दोबारा यहां पेश कर रहा हूं...कुछ लोगों ने इस कविता को गौरव की निराशा बताया तो, किसी ने इस पर कविता के मानदंडो पर खरा
Mar 04 2010 09:44 PM
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तसलीमा नसरीन और मक़बूल फ़िदा हुसैन

अमर ज्‍योति तसलीमा नसरीन एक बार फिर चरचा में हैं। इस बार मुद्दा है कर्नाटक के किसी अख़बार में प्रकाशित उनके किसी लेख का कथित अनुवाद। कथित इस लिये क्योंकि स्वयं तसलीमा ने उक्त अख़बार के लिये ऐसा कोई लेख लिखने से इन्कार किया है। उन्होंने लिखा या नहीं यह एक
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Mar 04 2010 06:14 PM
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सीमा आज़ाद की गिरफ्तारी : लोकतन्‍त्र का लबादा खूंटी पर, दमन का चाबुक हाथ में

ज़रूरी नहीं फ़ासीवाद केवल धर्म का चोला पहनकर ही आए, वह लोकतन्‍त्र का लबादा ओढ़कर भी आ सकता है। और ऐसा हो भी रहा है। चुनावों में कांग्रेस की जीत के बाद कई लोगों ने खुशी जाहिर की थी और उन्‍हें लगा था कि चुनावों ने फासिस्‍ट भाजपा को हाशिये पर धकेल दिया है।
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Feb 27 2010 04:40 PM
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संस्कृति के रक्षकों कहो- किसकी रोटी में किसका लहू है?

विप्‍लव राही भारतीय संस्कृति अक्सर खतरे में पड़ जाती है। और फिर उसे बचाने के लिए बहुत से लोग कमर कसने लगते हैं। लेकिन संस्कृति है कि फिर से खतरे में पड़ जाती है….अपनी इस महान संस्कृति को कभी सविता भाभी खतरे में डाल देती हैं, तो कभी सच का सामना इसे
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Feb 17 2010 02:53 PM
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‘जनचेतना’ पुस्तक प्रदर्शनी वाहन पर ए.बी.वी.पी. के गुण्डों का हमला

वाहन पर मौजूद कार्यकर्ताओं से मारपीट, वाहन के शीशे तोडे़ भगतसिंह, प्रेमचंद, राहुल आदि की किताबें फेंकी, आग लगाने की कोशिश प्रेस विज्ञप्ति 20 जनवरी, नई दिल्ली। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के करीब 25 गुण्डों ने आज दोपहर दिल्ली विश्वविद्यालय के कला संकाय
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आतंकवाद का एक चेहरा यह भी...

डॉ. अमर हिन्दुत्ववादी फ़ासिस्टों की एक पुरानी तरकीब है जो लगभग हमेशा कामयाब होती है. साक्षर परन्तु अल्प-शिक्षित निम्न मध्य-वर्ग और मध्य-वर्ग को अपील करने वाले कुछ वाक्यांश, कविताओं के टुकड़े या ऎसी ही कोई अन्य शब्दावली जनता के बीच फेंक कर उसे तब तक
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परोपकार के नाम पर धार्मिक पाखंड थोपने की कवायद

इसाई मिशनरी हों, या हिंदू और मुस्लिम कट्टरपंथी; ये राहत के नाम पर धर्म परिवर्तन, धर्म का पालन करने को बाध्‍य करने से लेकर तरह तरह की पुनरुत्‍थानादी, दकियानूसी हरकतें करते हैं। ताज़ा खबरें गुजरात में चल रहे मुस्लिम राहत शिविरों के बारे
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पुजारियों की पैदावार

साथी अमर के लगातार सहयोग के चलते इस बार हम फ्रंटलाइन के जुलाई 4-17, 2009 के अंक में छपे एक लेख का अनुवाद 'बर्बरता के विरुद्ध' पर दे रहे हैं। इस लेख में मीरा नंदा ने चर्चा की है कि किस तरह विश्‍वविद्यालय का दर्जा प्राप्‍त अनेक शिक्षा संस्‍थान पंडो, पु
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राष्ट्रीय सुरक्षा अकादमी : दिल्ली में बजरंग दल के शिविर में नई पीढ़ी का जन्म।

त हलका के जून अंक में  बजरंग दल के एक कैंप पर तुषा मित्तल की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। हमारे ब्‍लॉगर साथी  अमर  ने उस टिप्‍पणी का अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद करके भेजा है, जिसे  'बर्बरता के विरुद्ध' पर पोस्‍ट किया जा रहा है। साथी
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तरुण विजय क्यों मान गये कि आरएसएस एक हिन्दू दक्षिणपन्थी संगठन है?

अप्रैल में टाइम्‍स ऑफ इंडिया में तरुण विजय के एक लेख पर किसी ने किसी अंग्रेजी पत्रिका की साइट पर एक टिप्‍पणी की थी। उस अंग्रेजी की साइट का नाम तो नोट करना भूल गया था लेकिन उसका मैटर कॉपी कर लिया था। हमारे एक ब्‍लॉगर साथी अमर ने उस टिप्‍पणी का अंग्रेज
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गुजरात में घृणा की राजनीति का ब्‍यौरा देती 'फाइनल सॉल्‍यूशन'

आज हम 'बर्बरता के विरुद्ध' पर राकेश शर्मा के फिल्‍म 'फाइनल सॉल्‍यूशन' प्रस्‍तुत कर रहे हैं। यह फिल्‍म घृणा की राजनीति का बयान है। गुजरात में फिल्‍माई गयी फाइलन सॉल्‍यूशन 2002 में गुजरात में मुसलमानों के नरसंहार के ब्‍यौरे के जरिए भारत में दक्षिणपंथी
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आज के भारत में मुसलमान होने के मायने

सांप्रदायिकता के ख़ि‍लाफ़ कई वर्षों से संघर्षरत 'अनहद' ने 3-5 अक्‍टूबर को एक तीन दिवसीय सम्‍मेलन आयोजित किया था। इस सम्‍मेलन का विषय था 'आज के भारत में मुसलमान होने के मायने'। इस सम्‍मेलन में दंगा, एनकाउंटर पीड़ि‍तों ने अपनी आपबीती सुनाई, और कई एक्टि
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ: भारतीय फ़ासीवादियों की असली जन्मकुण्डली

भारत में फ़ासीवाद का इतिहास लगभग उतना ही पुराना है जितना कि जर्मनी और इटली में। जर्मनी और इटली में फ़ासीवादी पार्टियाँ 1910 के दशक के अन्त या 1920 के दशक की शुरुआत में बनीं। भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में नागपुर में विजयदशमी के दिन
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''देसी'' हिंदुत्‍व के विदेशी संबंध और प्रभाव

उग्र हिंदुत्‍व को समझने के लिए, हमें भारत में उसकी जड़ों के साथ ही उसके विदेशी संबंधों-प्रभावों की पड़ताल करनी होगी। 1930 में हिंदू राष्‍ट्रवाद ने 'भिन्‍न' लोगों को 'दुश्‍मनों' में रूपांतरित करने का विचार यूरोपीय फ़ासीवाद से उधार लिया। उग्र हिंदुत्‍व के
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सन 47 को याद करते हुए — केदारनाथ सिंह की कविता

(1947 में हमारे दिलों पर एक लकीर—बल्कि चीरा—खींच दिया गया था। दुनिया की बड़ी ताकत और उनकी छोटे साझीदारी ताकतों द्वारा देश के आम अवाम को जर्बदस्‍ती हिन्‍दुस्‍तान और पाकिस्‍तान नाम के दो मुल्‍क में बांट दिया गया था। उनके फायदे उनके लिए थे। लेकिन इंसानियत
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Aug 15 2009 09:25 AM
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अच्‍छे नागरिक कभी भी नहीं करते प्रतिरोध — विजयबहादुर सिंह की कविता

'चरणदास चोर' नाटक पर रोक लगने पर कुछेक लोगों के लिखने-बोलने के अलावा आमतौर पर चुप्‍पी छाई हुई है। लगता है अब तमाम प्रतिष्ठित प्रगतिशीलों के लिए हबीव के नाटक पर रोक लगने का विरोध करना भी दायरे से बाहर की चीज हो गया है। सांप्रदायिकता के विरोध पर बड़े-बड़े
Aug 13 2009 11:08 AM
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सिमी के नाम पर

आज हम प्रसिद्ध सांप्रदायिकता विरोधी एक्टिविस्‍ट और आईआईटी मुंबई के पूर्व प्रोफेसर राम पुनियानी का लेख 'बर्बरता के विरुद्ध' पर दे रहे हैं। हालांकि, मैं श्री पुनियानी के सर्वधर्म सम्‍भाव वाले विचारों से सहमत नहीं हूं, और मेरा मानना है कि फासीवाद से लड़ाई
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Aug 09 2009 04:36 PM
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धर्म, सांप्रदायिकता और धर्म-निरपेक्षता : गोरख पाण्‍डेय

धर्म-निरपेक्षता क्‍या है? या हमारे यहां सेक्‍युलरिज्‍म सांप्रदायिकता से लड़ते हुए इतना खोखला, नकली और निरीह क्‍यों नजर आता है? इसकी वजह हमें यह समझ आती है कि धर्म-निरपेक्षता को उसके असली अर्थों में हमने ग्रहण ही नहीं किया। प्रगतिशील कहे जाने वाले तबके ने
Aug 04 2009 11:01 PM
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धर्म, सांप्रदायिकता और धर्म-निरपेक्षता : गोरख पाण्‍डेय (भाग दो)

'धर्म-निरपेक्षता' शब्‍द को उसके असली अर्थ में समझने की ज़रूरत आज पहले से ज्‍यादा मौजूद हैं। चूंकि इसी शब्‍द की आड़ में खोखली धर्म-निरपेक्षता गढ़ी और इस्‍तेमाल की गई वहीं सांप्रदायिकता के विरोध के लिए भी इसी गत्ते की तलवार का इस्‍तेमाल तथाकथित प्रगतिशील
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'बर्बरता के विरुद्ध' के लिए हेडर तैयार किया रवि कुमार जी ने

हमारे मित्र रविकुमार ने, जो 'सृजन और सरोकार' ब्‍लॉग के संचालक भी हैं, 'बर्बरता के विरुद्ध' के हेडर के लिए एक रेखांकन तैयार किया है। उन्‍होंने कुछ और भी रेखाचित्र भेजे हैं जिन्‍हें हम अगली पोस्‍टों के साथ इस्‍तेमाल करेंगे। हम साथी रविकुमार के आभारी हैं।
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Aug 01 2009 09:58 AM
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सांप्रदायिकता-धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ दस्‍तावेज

इंटरनेट खंगालने के दौरान मुझे सांप्रदायिकता और धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ स्रोत के रूप में एक दस्‍तावेज मिला है, जिसमें इन विषयों पर पुस्‍तकों, लेखों, और फिल्‍मों, पत्रिकाओं, गानों आदि की सूची दी गई है। 'बर्बरता के विरुद्ध' के पाठकों को फ़ासीवाद, धार्
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जानिए फ़ासीवाद के कारणों और उससे लड़ने के तरीकों को -4

पिछली पोस्‍ट से आगे बिगुल अखबार के ब्‍लॉग से अभिनव के फासीवाद संबंधी लेख को यहां हूबहू प्रस्‍तुत कर रहा हूं। इसमें फासीवाद के कारणों और आधार की तफसील से चर्चा की गई है। संभवत: यह लेख दो अंकों में आना है, इसलिए इस ब्‍लॉग पर फिलहाल इसका एक ही हिस्‍सा उ
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जानिए फ़ासीवाद के कारणों और उससे लड़ने के तरीकों को -3

पिछली पोस्‍ट से आगे बिगुल अखबार के ब्‍लॉग से फासीवाद संबंधी लेख को यहां हूबहू प्रस्‍तुत कर रहा हूं। इसमें फासीवाद के कारणों और आधार की तफसील से चर्चा की गई है। संभवत: यह लेख दो अंकों में आना है, इसलिए इस ब्‍लॉग पर फिलहाल इसका एक ही हिस्‍सा उपलब्‍ध है
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'अब संसार में ''हिन्‍दू राष्‍ट्र'' नहीं हो सकता...' — गणेशशंकर विद्यार्थी

हमारे देश में सांप्रदायिकता से लड़ने वाले अग्रजों की कतार में निस्‍संदेह सबसे ऊपर शहीद गणेशशंकर विद्यार्थी का नाम लिया जा सकता है। वे हमें याद दिलाते हैं कि अपने वि चारों के लिए जीना क्‍या होता है और प्रतिबद्धता के मायने क्‍या होते हैं। एक ऐसे दौर मे
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प्रो. सभ्‍भरवाल की हत्‍या पर हत्‍यारों का क्रूर अट्टहास और विष्‍णु नागर की कविता

हत्‍यारे जश्‍न मना रहे हैं। इंसाफ उनकी जेब में जो है। कॉलेज में सैकड़ों लोगों के सामने प्रो. सभ्‍भरवाल को मारने वाले एबीवीपी के प्रदेश अध्‍यक्ष और सचिव सबूतों के अभाव में अदालत से बरी हो गये। जज ने माना कि इंसाफ नहीं हो पाया। इंसाफ हो भी कैसे सकता है
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छुपे हुए हिटलरों से सावधान रहो - नागार्जुन

कवि उदयप्रकाश के योगी आदित्‍यनाथ के हाथों सम्‍मान लेने की खबर पर आजकल एक बहस ब्‍लॉगजगत में चल रही है। विचारशून्‍यता के इस दौर में यह बहस भी सांप्रदायिकता के खतरे पर किसी गंभीर विमर्श की बजाय निम्‍न कोटि की थुक्‍का-फजीहत में तब्‍दील हो चुकी है। होना त
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हिंदू कट्टरपंथियों की गुण्‍डागर्दी

सन 1947 में भारत आज़ाद हो गया था और उसके बाद धर्मनिरपेक्षता को हमारे संविधान के एक अंग के रूप में अपनाया गया। लेकिन आज भी हमारे देश में भाषाई, जातीय, और धार्मिक अल्‍पसंख्‍यकों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। व्‍यक्तिगत रूप से मैं किसी ईश्‍वर या धर्म को
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जानिए फासीवाद के कारणों और उससे लड़ने के तरीकों को - 2

बिगुल अखबार के ब्‍लॉग से फासीवाद संबंधी लेख को यहां हूबहू प्रस्‍तुत कर रहा हूं। इसमें फासीवाद के कारणों और आधार की तफसील से चर्चा की गई है। संभवत: यह लेख दो अंकों में आना है, इसलिए इस ब्‍लॉग पर फिलहाल इसका एक ही हिस्‍सा उपलब्‍ध है, उसी को यहां किस्‍त
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जानिए फासीवाद के कारणों और उससे लड़ने के तरीकों को - 1

बिगुल अखबार के ब्‍लॉग से फासीवाद संबंधी लेख को यहां हूबहू प्रस्‍तुत कर रहा हूं। इसमें फासीवाद के कारणों और आधार की तफसील से चर्चा की गई है। संभवत: यह लेख दो अंकों में आना है, इसलिए इस ब्‍लॉग पर फिलहाल इसका एक ही हिस्‍सा उपलब्‍ध है, उसी को यहां किस्‍त
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फासीवाद के लक्षण

इस ब्‍लॉग पर फासीवाद के लक्षणों के बारे में एक पोस्‍ट दी गयी थी। उसी पोस्‍ट को साभार यहां प्रस्‍तुत कर रहा हूं। पहले सोचा था कि इन लक्षणों के भारतीय उदाहरण भी साथ में दिए जाएं तो अच्‍छा होगा, लेकिन फिर लगा कि ब्‍लॉग जगत पर सभी लोग जागरूक हैं, उन्‍हें
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देखिए, फ़ासीवाद और हिटलर के उभार को बयान करती 'ज़ुल्‍मतों के दौर में'

हमने इस ब्‍लॉग की पहली पोस्‍ट में लिखा था कि हमारी कोशिश होगी ...दुनियाभर में फ़ासीवाद के विरुद्ध कवियों-लेखकों-विचारकों के लेखन को सामने लाएं, इस विषय पर ऑडियो-वीडियो सामग्री या उसके परिचय को एक जगह एकत्रित करें...इसी कड़ी में आज हम 'बर्बरता के विरु
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चुनावों में कांग्रेस की जीत से फासीवाद का कुछ नहीं बिगड़ने वाला

चुनावी धमाचौकड़ी खत्म हो चुकी है, और कांग्रेस के नेतृत्व में 79 मंत्रियों वाली सरकार भी अस्तिव में आ गई है। अपनी हार के बावजूद संसदीय वामपंथियों से लेकर कई बुद्धिजीवी तक इसे धर्मनिरपेक्ष ताकतों की जीत और सांप्रदायिक ताकतों की हार बता रहे हैं, जैसा कि