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In The Flux At Half Past Ten

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05 Apr 2010
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medi

ईश्वर   की इस दुनिया में सब कुछ ईश्वरीय इच्छा के फल स्वरुप ही होता है जिसे किस्मत कहते हैं. किस्मत का खेल प्रकृति का ही हिस्सा है - किस्मत के तारों से बुना हुआ ताना बाना. सब कुछ इसी ईश्वरीय इच्छा से घटित होता है.
Apr 05 2010 06:32 PM
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मेडीटेशंस - अध्याय द्वितीय (किश्त - १ )

जर्मनी के क्वादी प्रान्त में, डेन्यूब नदी के तट पर लिखा गया।====================================प्रातः उठने पर अपने आप को बताओ कि आज मैं ऐसे लोगों से मिलने वाला हूँ जो हस्तक्षेपी, कृतघ्न, आक्रामक, धोखेबाज़ या शैतानी सोच के मालिक हैं और साथ ही असामाजिक
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मेडिटेशंस -प्रथम अध्याय (किश्त-९)

ईश्वर का आभारी हूँ मैं जिन्होंने मुझे ऐसे सदगुणी दादा, माँ-बाप, बहन, अध्यापक, सहयोगी, परिवार, रिश्तेदार, मित्र आदि सभी कुछ दिया; साथ ही मुझको भी उनकी शान में गुस्ताखी करने कि भूल से बचाए रखा - हालाँकि मेरा ऐसा स्वाभाव तो है ही कि यदि ऐसा अनचाहा मौका आ
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मेडिटेशंस - प्रथम अध्याय (किश्त - ८)

(औरिलियस अपने पिता के बारे में...)वे किसी प्रतिभावान व्यक्ति को, जो अच्छा वक्ता, ज्ञानी, कानूनविद या नैतिक्शास्त्री या ऐसे ही किसी अन्य विषय या क्षेत्र से आता हो, से मेरे पिता बिना ईर्ष्या किये उसको उसका सामाजिक संस्थानों में उचित स्थान दिलाने में मदद
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मेडीटेशंस - प्रथम अध्याय (किश्त - ४)

१० अलेक्सेंडर दी ग्रामेरियन (भाषाविद अलेक्सेंडर) से सीखा: दूसरों की गलतियों पर बखेडा न खड़ा किया जाए; जब कोई शब्द या व्याकरण या उच्चारण की गलती करे तो उसमें नुक्ताचीनी या व्यवधान न डाला जाए बल्कि सफाई से उस बात का सही रूप प्रस्तुत किया जाए - उत्तर या
Dec 29 2009 11:56 AM
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गुस्ताव - एक कहानी (भाग- २)

गुस्ताव ने " नीड़ का निर्माण फिर" के पन्ने पलटना शुरू कर दिया। बाहर की गर्मी की अपेक्षा अंदर का ताप कम तो था ही, साथ ही साथ वातानुकूलन के कारण बड़ा ही सुकून पा रहा था वो उस कमरे में। आंखों के सामने रखी किताब को छोड़कर मन शायद कहीं और निकल चुका था। कि
Dec 29 2009 11:56 AM
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मेडीटेशंस - प्रथम अध्याय (किश्त - २)

४ अपने दादाजी से मैंने सीखा कि जनता- जनार्दन के स्कूलों (उन दिनों में) कि बजाय घर पर ही अच्छे शिक्षकों से पढ़ना चाहिए। यह भी कि इस सबमें खर्चे कि परवाह न करनी चाहिए। ५ अपने अध्यापक से सीखा कि सर्कस या दौड़ में नीले या लाल दल का पक्ष न लूँ और न ही एक
Dec 29 2009 11:56 AM
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मेडीटेशंस - प्रथम अध्याय (किश्त - १)

१ अपने दादा वेरुस से (की भांति) मैंने शालीनता और नर्म स्वभाव पाया है। २ जैसा लोग कहते भी हैं, और मुझको भी ऐसा याद है, अपने पिता से (की भांति) मैंने सम्पूर्णता और पुरुषत्व पाया है। ३ अपनी माँ से मैंने सीखा : धर्मनिष्ठा, उदारता, ग़लत करने से बचना - यहा
Dec 29 2009 11:56 AM
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गुस्ताव - एक कहानी (भाग- १)

दिमाग तो जैसे कहीं और ही खोया हुआ था, हाँ साईकिल जरूर सड़क पर ही चल रही थी, मानो अपने आप। रोशन के घर पहुंचकर उसके नए एसी की ठंडक में गपियाने का मजा - गुस्ताव मन ही मन पुराने लगभग मिलते जुलते अनुभवों से दो चार हो रहा था। साईकिल के पैडल अपने आप पड़ते जा
Dec 29 2009 11:56 AM
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ये दिल्ली है मेरे यार...

दिल्ली प्रतीक है... उन उत्तेजनाओं की - निर्माण किया जिन्होंने इसका ; उन संतुष्टियों की - सहेजा हमारे लिए जिन्होंने इसको ; उन शक्तियों की - देश चलाती हैं जो; उन् मेधाओं की - भविष्य की कुंजियाँ हैं जो; उन घमंडों की - बोझ होने पर भी लादे है जिनको ; उन द
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Dec 29 2009 11:56 AM
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Self Awareness and Neuroscience

If one sees things the way they are or the most agreesome reality, one can be at peace with self and can even notice the evidences of this peace within. Buddhism calls such a reality as "tattva" or we may also call it "what is" or "thatness" - it is what
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Dec 14 2009 11:51 PM
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मेरी पर्पल ड्रेस

कल मुझको पर्पल ड्रेस पहनकर जाना है स्कूल; चलकर अभी दिलादो मुझको वरना जाओगे तुम भूल; सब बच्चे यही रंग पहनकर कल स्कूल में आयेंगे; मैं ऐसे ही जा पहुँची तो मुझको बहुत चिढ़ायेंगे इस दिन का महत्त्व है कि ये रंग का भान कराता है; खेल खेल में हम बच्चों को नई
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Epicureanism, Aponia, Ataraxia etc.

I do not have enough time today to read all this, so recording the links on the blog to freeze them to read at some other point of time.Links to some interesting works of some great philosophers.The
Nov 12 2009 08:31 AM
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ताओ-ते-चिंग की शिक्षाएं

ताओ-ते-चिंग, छठी शताब्दी ईसा पूर्व (6th Century BC) चीन में "लाओ त्जु " यानी वृद्ध अध्यापक द्वारा लिखी गई शिक्षाप्रद बातों का संकलन है। यह शिक्षाएं कितनी रोचक तथा आज भी कितनी प्रासंगिक है इसकी बानगी देखिये: "यदि आप प्रतिभावान लोगों का बहुत ज्यादा महि
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मेडीटेशंस - प्रथम अध्याय (किश्त - ६)

१६ अपने पिता में मैंने सीखा: नम्र स्वभाव, पूरे सोच विचार के बाद लिए गए निर्णयों के साथ अडिग होकर खड़े रहना; तरह तरह के सम्मानों, तारीफों व दिखावों में तनिक रूचि न रखना; मेहनत व कभी हार न मानने वाला जुझारूपन; हमेशा ऐसी बात सुनने को समय देना व तैयार रहन
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Car Servicing - Go "CARNATION"

Recently when I thought of getting my car serviced, I contacted a friend who owns the similar car, about the nearest authorized service center. He suggested a nearby Maruti service center but I could not really understand the location of it as I am not
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Oct 13 2009 11:52 PM
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मेडीटेशंस - प्रथम अध्याय (किश्त - ३)

८ अपोलोनिअस से सीखा: अपना स्वामी स्वयं बने रह पाना, स्वयं के लिए कुछ भी स्वतः घटित होने देने के लिए न छोड़ना, कभी क्षण भर के लिए भी तर्क का मार्ग न छोड़ना, तेज़ वेदना (दर्द) या कि अपने बच्चे कि मौत और या ही लम्बी चली बीमारी - सदा एक से ही बने रहना। जीता
Oct 02 2009 02:15 PM
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मेडीटेशंस - प्रथम अध्याय ( किश्त - ५ )

१३ केटालुस से सीखा कि : किसी भी मित्र द्वारा की गई आलोचना को नकारा न जाए, भले ही वह आलोचना कितनी भी बेतुकी (unreasonable) जान पड़े; बल्कि उस मित्र को प्रयासों द्वारा पुनः उसके सामान्यतः किए जाने वाले व्यवहार में लौटा लाना चाहिए। ये भी सीखा कि अपने किस
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WATER.ORG : Newsletter for September, 09

http://water.org/2009/09/four-ways-a-toilet-can-change-a-girls-life/
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Sep 16 2009 02:00 AM
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Leaving Delhi

I am sitting in my office now, it is 12:20AM. I am doing a usual 11 hours shift and today's shift started at 6PM (Indian Standard Time) that ends at 5AM. Leaving from home to office is not easy - home pulls backwards and office pulls forward; needless to
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A new project - I M A GEEK NOW

I 've started to work on a project that focuses on teaching the basic IT skills to the elderly people so that they can also be a part of this digital world. These new gadgets should not remain only in their general knowledge domain but the objective of
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गुस्ताव - एक कहानी (भाग - ३)

शाम हो चली थी। दिन भर अपनी गर्मी से धरा को तपाता सूरज थक चुका था। रोशन को स्टेडियम जाना था। गुस्ताव कहीं भी चल सकता था सिवाय घर वापिस लौटने के। पुस्तकें अपने थैले में डालकर गुस्ताव अपनी साइकिल पर रोशन के स्कूटर से मुकाबला करने की कोशिश भर करता बढ़
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Gustav - A Story (Part -1)

Gustav was lost somewhere deep in a trail of thoughts as he cycled his way, it was almost like the bicycle was moving on its own. The fulfillment of having a stimulating conversation with Roshan in the comfort of his newly air-conditioned room – Gustav
Sep 15 2009 12:24 AM
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Epictetus and Enchiridion

On the very first page of the Meditations, I met Epictetus. Epictetus was the greek philosopher who lived from 55AD to 135AD, almost 80 years. Once a slave, this greek philosopher came from the same school of stoic philosophy as the emperor Marcus
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Jul 26 2009 01:57 AM
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A Good Travel Blog Found!

"Google searches at times bring forth some thing that we were not really searching for in the first place, but the some of the links redirect us user to something so engrossing that one tends to forget what he was really looking for."Many a times all of
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Jul 20 2009 03:30 AM
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Pondering Over...

Few changes in the past few days:1. Removing the hindi translation of "The Alchemist" as it is surely a violation of the copyrights of the original owner and it might result in revenue loss for them.In fact, when I started translating it, I had no idea
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हिन्दी ब्लॉग्गिंग का भविष्य - हमारी जिम्मेदारियाँ

हिन्दी ब्लॉग्गिंग के भविष्य पर अपने निहायत निजी विचार सार्वजनिक करना विवादस्पद हो सकता है, इसका अंदाजा है मुझे। लेकिन पिछले दिनों अचानक शुरू हुए विचार अपने मंथन से कुछ प्रेक्षण इकट्ठे कर बैठा जो पहले पहल बड़े ही विचित्र से और असंभव से जान पड़े। ऐसा भी
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कीमियागर - एक रसायनज्ञ (भाग -२, किश्त - ३८)

सभी चीज़ें किसी एक ही चीज़ की विभिन्न अभिव्यक्तियाँ हैं, लड़के ने सोचा। तभी, जैसे की रेगिस्तान ने कीमियागर के कहे को सही साबित कर देना था, दो घुड़सवार पीछे पीछे आते नज़र आए। "तुम दोनों आगेनहीं जा सकते", उनमें से एक ने कहा। "इस इलाके मैं कबीलों में जंग छ
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कीमियागर - एक रसायनज्ञ (भाग -२, किश्त - ३६)

लड़के के दिल ने उसे ये भी बताया कि खुशियाँ तो रेगिस्तान के रेत के एक कण में भी पाई जा सकती है, जैसा कि उस कीमियागर ने कहा था। क्योंकि रेत का एक कण, एक क्षण है सृजन का। ब्रह्माण्ड को करोड़ों वर्ष लगे है इसे ये रूप देने में। " इस धरती पर मोजूद हरेक के ल
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कीमियागर - एक रसायनज्ञ (भाग - २, किश्त - ३५)

ये सही कहा तुमने", उस कीमियागर ने जवाब दिया। "ये वाकई डरा हुआ है कि कहीं अपने स्वप्न कि खोज मैं तुम वो सब न खो बैठो जो तुमने अब तक कमाया है। " "तब मुझे इसकी बात क्यों सुननी चाहिए?" "क्योंकि तुम इसे कभी शांत न रख पाओगे। अगर तुम इसको न सुनने का दिखावा
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कीमियागर - एक रसायनज्ञ (भाग -२, किश्त - ३१)

तब चौथे साल में कहीं जाकर वो चिन्ह तुमसे पीछा छुडा लेंगे, तुम उनको सुनना जो बंद कर चुके होगे। कबीला प्रमुख भी इस बात को भाँपकर तुमको नखलिस्तान के पार्षद के पद से हटा देंगे। लेकिन तब तक तुम एक अमीर व्यापारी बन चुके होगेजिसके पास एक बड़ा धंधा और बहुत स
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कीमियागर - एक रसायनज्ञ ( भाग - २, किश्त - २८ )

तुम्हें मुझसे मिलने कि क्यों इच्छा थी?", लड़के ने पूछा। "शुभ चिन्हों कि खातिर", कीमियागर ने उत्तर दिया। "इस हवा ने मुझे बताया कि तुम यहाँ आओगे और तुमको मदद कि भी जरूरत होगी।" "इस हवा ने मेरे नहीं बल्कि एक अँगरेज़ के बारे में बताया होगा तुम्हें, वोही त
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कीमियागर - एक रसायनज्ञ (भाग -२, किश्त - २७)

अगली सुबह, अल फयूम में दो हज़ार हथियार बंद लोग उन् ताड़ के पेड़ों के गिर्द फ़ैल गए। सूरज के अपने चरम पर पहुँचने के पहले पाँच सौ कबीलाई क्षितिज पर अवतरित हुए। ये घुड़सवार नखलिस्तान में उत्तर कि दिशा से दाखिल हुए थे; ये एक शान्ति भरी यात्रा सी नजर आ रही
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कीमियागर - एक रसायनज्ञ (भाग - २, किश्त - २५)

कबीला प्रमुखों की बहस समाप्त हुई। शीर्ष प्रमुख को सुनने के लिए अन्य प्रमुख शांत बैठे थे। एक ठंडे से चेहरे के साथ उसने लड़के से बात शुरू की। "दो हज़ार वर्ष पूर्व कहीं सुदूर कहीं किसी जगह ऐसे किसी आदमी को, जो अपने स्वप्न में भरोसा करता था, काल कोठरी में
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कीमियागर - एक रसायनज्ञ (भाग - २, किश्त - २४)

लड़का उस नखलिस्तान के ठीक बीचोंबीच ताने विशाल सफ़ेद टेंट के द्वार पर खड़े द्वारपाल से जाकर मिला। "मैं कबीले के प्रमुख लोगों से मिलना चाहता हूँ। रेगिस्तान में देखे गए संकेतों का जिक्र करना चाहता हूँ उनसे। " उससे बिना कुछ बोले वो द्वारपाल अंदर गया और कुछ
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कीमियागर - एक रसायनज्ञ ( भाग -२, किश्त १९ )

अँगरेज़ भी वहां से रफू चक्कर हो गया, कीमियागर को उधर ही ढूँढने जो चला गया था जिधर फातिमा बताकर गई थी। लड़का वहीँ कुँए के किनारे देर तक बैठा रहा। उसे याद आया कि कैसे तरीफा में लेवेंटर हवा एक महिला की इत्र की खुशबु लेकर आई थी। उसने अहसास किया कि उसने त
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कीमियागर - एक रसायनज्ञ ( भाग - २, किश्त - १८ )

तुम किसी ऐसे को जानते हो जो लोगों की बीमारियाँ ठीक करता है", लड़के ने उससे पूछा। "अल्लाह ही करता है जी हमारी बीमारियाँ ठीक", वो बोला, अनजान लोगों से डरा सा नजर आ रहा था वो। "किसी झाड़ फूँक वाले को ढूँढ रहे हो क्या"। उसने कुरान की कुछ आयतें बोलीं और चल
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मनीष से किया वादा पूरा हुआ - कहानी छाप चुका हूँ उसके लिए

मनीष से वादा कर लिया था - कहानी तो लिखनी ही है, बोला था मनीष। पूरा ही पिंजर तैयार किया मनीष ने, मैंने भी उसका इशारा पाते ही रंग भर दिए। मनीष योग सिखाते हैं और मैं एक टेलिकॉम कंपनी में तकनीकी विषयों के शिक्षा से जुड़ा हूँ। कहानी लेखन से दोनों के कार्य
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हिन्दी में ब्लॉग लेखन - व्यापकता और रचनात्मकता साथ साथ

ब्लोगिंग की दुनिया में यूँ तो कई महीने हो गए हैं पर अभी तक सिर्फ़ सर झुका कर लिखता ही जा रहा था । आत्म अभिय्वाक्ति की जैसे कोई परीक्षा देता जा रहा था । काफी सारे अंग्रेज़ी ब्लॉग देखे तो सिर्फ़ ये जानने के लिए कि पुरोधाओं ने ब्लॉग लेखन विधा की सीमायें