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13 Jun 2010
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चीटी कि कहानी

एक छोटी सी चींटी हर दिन दफ्तर में समय से पहले पहुंच जाती और तुरंत काम शुरू कर देती थी। अपने काम से वह खुद काफी खुश थी। उसका आउटपुट काफी ज्यादा था। उसका सर्वोच्च बॉस, जो एक शेर था, इस बात से चकित रहता था कि चींटी बिना किसी पर्यवेक्षक के इतना काम कैसे कर
 
sanjeev persai
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एक अधूरा चिंतन - पत्रकारिता पर

मेरे एक मित्र हैं जो बड़े भाई की तरह है जो पत्रकारिता में ही आज तक मरे और जिए हैं, उन्होंने ही आज याद दिलाया की ३० मई को पत्रकारिता दिवस है उन्होंने अपने ब्लॉग पर पत्रकारिता के बारे में अपने विचार रखें हैं. मैं नहीं जानता कि इस दिवस को मनाने का क्या
 
sanjeev persai
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कुत्तों का रियलिटी शो ?

गडकरी ने लालू और मुलायम को कुत्ता कहा है सबसे अनोखी बात ये है की उन्हें बहुत बुरा भी लगा है और वो बुरा मानकर लखनऊ ,पटना से लेकर दिल्ली तक धरना, प्रदर्शन, बंद और हड़ताल जैसे हथकंडों पर उतर आये हैं . ये अच्छा मौका दिया है गडकरी ने मक्खी मार रहे लगभग खतम
 
sanjeev persai
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शांत रहिये, विकास हो रहा है......

दोस्तों, विकास के दौर में जो शहरों की हालत हो रही है वो किसी से छुपी नहीं है, विकास की परिभाषा सभी ने अपनी अपनी गढ़ी है, ये मेरा विकास और ये तुम्हारा विकास, विकास की मार झेलते हुए संवेदनाएं जाग्रत हो गयीं और कविता बन गयी...... Normal 0 false false false
 
sanjeev persai
May 09 2010 12:16 PM
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एक मां के लिये

वरिष्ठ पत्रकार श्री मनोज कुमार (भैया ) ने एक कविता लिखी और मुझे मेल कर दिया , मुझे अच्छी लगी तो मैंने उसे पूरी दुनिया को पढवा दिया, मैं ऐसा ही हूँ ................बड़ी भली है अम्मा मेरी ताजा दूध पिलाती हैकभी सांची तो कभी अमूल का पैकेट लेकर आती हैरोज रोज
 
sanjeev persai
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जैसे जैसे सोचता हूँ - मन गुस्से से भरता है

अनुपमा को उसकी माँ ने ही मार डाला आखिर क्यों ? ये सवाल आज लगातार सता रहा है, क्योंकि एक स्त्री ही स्त्री की दुश्मन कैसे हो सकती है. पश्चाताप इस बात का है की स्त्री निर्दोष है , क्योंकि उसपर होने वाले हर प्रहार के लिए पुरुष ही दोषी है.परन्तु हे स्त्री कौन
 
sanjeev persai
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सुख की कीमत

एक मूर्तिकार लगातार कई दिनों से जंगल से गुजरने के दौरान एक पेड़ के नीचे पड़े पत्थर पर अपनी थकान मिटाता था. उसे उस पत्थर से जैसे प्यार हो गया था सो उसने सोचा की क्यों न इस पत्थर को एक आकार दे दिया जाए जिसे इसका प्रभाव और सम्मान बढ़ जाए, ऐसा विचार करके उसने
 
sanjeev persai
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आओ खेलें आईपीएल........

टीम एक - ललित मोदी, आई पी एल, बीसीसीआई . पैसा.... नहीं नहीं बहुत सारा पैसा, दुनिया भर के टैक्स चोर, सोती हुई सरकार, बहती गंगा में हाथ धोते राजनेता और अफसर, पैसा कमाने को किसी भी हद तक जाने को तैयार व्यवसायी और सेलब्रिटी, विज्ञापन के लिए ही बने और अपने दम
 
sanjeev persai
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आओ राजा- राजा खेलें

चलो आज राजा-राजा खेलते हैं,चलो ठीक है , मैं पहले राजा था इसीलिए मैं राजा बनूँगाऔर तुम तो हमेशा से प्रजा थे सो तुम प्रजा,किस दुनिया में हो प्रजातंत्र है इसीलिएअब प्रजा ही राजा होती है इसीलिए में ही राजा बनूँगा.चलो ठीक है लेकिन किसी को बताना नहीं कीमें खेल
 
sanjeev persai
Apr 07 2010 11:07 AM
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माँ

मैंने तुम्हारी बांहों के पालने में सोते हुए सपने देखे हैं और पांवों के हिंडोले पर झूलते हुए दुनिया देखी है। जब तुम मेरी बांहों में मनके और गले में चाँद सूरज जड़े-गंडे ताबीज डालती थी, तब मुझे यह कहाँ पता था की तुम्हारा जीवन भी ऐसे ही सूत्रों से बंधा है
 
sanjeev persai
Dec 29 2009 11:54 AM
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प्यार.......

शायद घर का काम ही उसकी जिन्दगी थी। सुबह पाँच बजे से चौका बासन करने में लग जाती थी। हमारे उठने के पहले तो घर के आधे काम ख़तम करके खाने की तैयारी में लगना आदत थी उसकी। बाबूजी सारे कामों में मदद किया करते थे, सुबह से ही पूछते कोई काम हो तो बताओ। पीछे से
 
sanjeev persai
Dec 29 2009 11:54 AM
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विचार मिलें या न मिलें - विचार जारी रहे

कल एक बहुत पुराने मित्र से मुलाकात हो गयी, दरअसल ये मुझसे लगभग 08 सालों बाद मिला है, तब ये कुंवारा था, और इसके विचारों और सोच को देखकर लगता था की जो भी लड़की इससे शादी करेगी हमेशा परेशानरहेगी. इतने सालों में उसने खासी प्रगति की थी, औपचारिक बात के बाद
 
sanjeev persai
Dec 29 2009 11:54 AM
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महिला मुद्दे

मैं जानता हूँ की में जो कहने जा रहा हूँ अंततः मुझपर ही लौट के आ सकता है, लेकिन मैं फिर भी कह इसीलिए रहा हूँ की मुद्दों की बात हो तो मैं न किसी का दोस्त हूँ न किसी का दुश्मन। एक बेनाम टिप्पणी के माध्यम से कोई भोपाल के प्रतिष्ठित अखबार के पत्रकार के द्
 
sanjeev persai
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समाज सेवा से स्वर्ग तक

किसी ने मुझसे कहा था की समाज सेवा का मतलब है समाज का सेवन करने वाला तो किसी और ने कहा की समाज सेवा का मतलब है समाज को सेवन करने योग्य बनने वाला। दोनों ही अपने जगह सही हैं, समाज सेवक थोडी सी समाजसेवा से दम्भी हो जाता है, उसे लगने लगता है की वह जो कुछ
 
sanjeev persai
Dec 29 2009 11:54 AM
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मैं और ब्लॉगर

मैं - ब्लॉगर की समस्या है की वो प्रतिभा का अधिकाधिक प्रदर्शन करने लगा है। वह बुद्धिहीन की तरह व्यवहार करने लगा है। प्रतिभाविहीनता ने उसे अत्यधिक विस्तार दिया है जो घातक है। ब्लॉगर तुम ये तो समझ ही नही पा रहे हो की तुम्हारा औचित्य क्या है, कभी ब्लॉग क
 
sanjeev persai
Dec 29 2009 11:54 AM
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माँ और बेटियाँ

अरे का कुछ काम काज सीख ले, न जाने क्या होगा इस लड़की का ससुराल जाके....... ये जुमला आज भारतीय परिवारों की निशानी बन कर रह गया है। इसमें लड़कियों के प्रति उपेक्षा की भावना साफ़ दिखायी देती है और इसे समाज की मंजूरी मिलने का कारण साफ़ समझ में आता है, जब ह
 
sanjeev persai
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पाकिस्तान समस्या सोच के दायरे

जबसे भारत पर हमला हुआ है हमारे लोग ही दो खेमों में बनते नजर आ रहे है दिल से सोचने वाला वर्ग पूरा न्याय और स्थाई इलाज मांग रहा है दिमाग से सोचने वाला वर्ग स्थितियों के पोस्टमार्टम में लगा है। इससे बुनियादी सवाल सुरक्षा का वही का वही खड़ा नजर आ रहा है।
 
sanjeev persai
Dec 29 2009 11:54 AM
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मन ही मन में चुनाव प्रचार

नेता जी चुनाव प्रचार में व्यस्त थे।अचानक उन्हें एक व्यक्ति उन्हीं का चुनावी बैनर ओढ़ सोया दिखाई दिया।वे दौड़कर उसके पास पहुंचे। चेहरे पर से बैनर हटा कर देखा तो पाया की वो उन्ही का कार्यकर्ता था ।गुस्से से तमतमाए नेताजी ने पुछा-तू यहाँ सो रहा है चुनाव
 
sanjeev persai
Dec 29 2009 11:54 AM
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परसाई जी के पत्र

परसाईजी के नाम श्री मायाराम सुरजन जी का पत्रदेशबन्धु, रायपुर२६ अगस्त,१९७३प्रिय भाई,यूँ तुम इस पत्र के अधिकारी नहीं हो,क्योंकि जब ५-६ महीने पहिले मैंने ५० वर्ष पूरे किये थे तो तुमने मुझ पर कोई प्रशंसात्मक लेख लिखना तो दूर रहा,बधाई की एक चिट्ठी तक नहीं
 
sanjeev persai
Dec 29 2009 11:54 AM
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माँ का गीत

अगर तू सूर्य होतातो दिनभर आसमान में जलता रहताअगर तू चाँद होता तोपूर्णिमा से एकम तक तुझेरोज कसाई के कत्ते से कटना पड़ताअगर तू तारा होता तो मेरे लालमुझसे कितना दूर होताअच्छा हुआ तू बद्रीनारायण हुआ
 
sanjeev persai
Dec 29 2009 11:54 AM
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लाज से नत नयन

लाज से नत नयन की मधुमय कथा हैस्वप्न के मधु चुम्बनों की याद में भरकल्पना में झूमता जब साथ सागरनयन को प्रेयसी छिपना ही वृथा हैलाज से नत नयन की मधुमय कथा हैबंक भू के प्रश्न मांगेंगे ह्रदय जबनख विवशता में कुरेदेंगे धारा तबप्रीत में हाँ की यही तो बस प्रथा
 
sanjeev persai
Dec 29 2009 11:54 AM
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pungibaaj

हिन्दी दिवस विशेष ) हिन्दी दीहिन्दी दिवस पर दुनिया के सभी हिन्दी प्रेमियों को शुभकामनाएं मातृभाषा के प्रति निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।अंग्रेज़ी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन।पै निज भाषाज्ञान बिन,
 
sanjeev persai
Dec 29 2009 11:54 AM
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मैं दृष्टा हूँ

देखता हूँ गगन, सुमन और समुंदर की तरुणाई को,प्रति पल धीमी होती हुई इस समय की अरुणाई को।दु:ख के रक्त कणों से लतपथ जीवन के अवसाद को,या सुख के प्यालों से छके हुए मन के अंतर्नाद को।शीत उष्ण और वर्षा पतझड़ ऋतुएं आती जाती हैं,इस शरीर और मन के द्वारों पर दस्त
 
sanjeev persai
Dec 29 2009 11:54 AM
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लंका-विजय के बाद

श्री हरिशंकर जी परसाई)तब भारद्वाज बोले, "हे ऋषिवर, आपने मुझे परम पुनीत राम-कथा सुनाई, जिसे सुनकर मैं कृतार्थ हुआ। परन्तु लंका-विजय के बाद बानरो के चरित्र के विषय में आपने कुछ नहीं कहा. अयोध्या लौटकर बानरों ने कैसे कार्य किए, सो अब समझाकर कहिये."याज्ञ
 
sanjeev persai
Dec 29 2009 11:54 AM
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pungibaaj

पढ़ाई और बरसात जब भी मेरे मन में पढ़ाई के विचार आते थे जाने क्यों आकाश में काले बादल छा जाते थेमेरे थोड़ा-सा पढ़ते ही गगन मगन हो जाता थापंख फैला नाचते मयूर मैं थककर सो जाता थापाठयपुस्तक की पंक्तियाँ लोरियाँ मुझे सुनाती थींछनन छनन छन छन बारिश की बूँदे
 
sanjeev persai
Dec 29 2009 11:54 AM
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काका हाथरसी के दोहे

डॉक्टर की प्रार्थनाडाक्टर बोले, प्रभु करें ऐसी कुछ तजबीज, अस्पताल में भीड़ हो, क्यू में लगें मरीज।क्यू में लगें मरीज, वायु में होय प्रदूषण, रोगों के कीटाणु, नित्यप्रति करें आक्रमण।औषधि खाकर रोगी आत्मिक लाभ उठाएँ,मर्ज रहे न मरीज, स्वर्ग को सीधे जाएँ।द
 
sanjeev persai
Dec 29 2009 11:54 AM
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विकासवाद के विरुद्ध

प्रणाम करने की मुद्रा में वे इतना झुके की देखते ही देखतेगायब होने लगीरीढ की हड्डीपार्श्व में उभरने लगी एक दुमवक्त बेवक्तमालिकों के आगे हिलाने के लियेकान फैलकर लंबे हो गयेसिर्फ चुगली सुनने के लियेनाखून पैने हो गयेहाथ पंजों में बदल गयेपर अजीब बातकी कटो
 
sanjeev persai
Dec 29 2009 11:54 AM
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बात उल्लू ने कही गधे को गुस्सा आ गया

कौन है जो फस्ल सारी इस चमन की खा गयाबात उल्लू ने कही गुस्सा गधे को आ गयाप्यार कहते हैं किसे है कौन से जादू का नामआंख करती है इशारे दिल का हो जाता है कामबारहवें बच्चे से अपनी तेरहवीं करवा गयाबात उल्लू ने कही गुस्सा गधे को आ गयागुस्ल करवाने को कांधे पर
 
sanjeev persai
Dec 29 2009 11:54 AM
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दारु पुराण- वेदों मैं शराब की महत्ता

महर्षि कश्यप की दो पत्नियां थीं- दीति और अदीति। दीति के पुत्र दैत्य तथा अदीति के पुत्र देवता कहलाए। असुरों ने सुरा न पीने का संकल्प लिया मगर सुरों ने उस प्रतिबंध को नहीं माना क्योंकि उनके पिता महर्षि कश्यप को इससे परहेज नहीं था। संस्कृत में कश्य का अ
 
sanjeev persai
Dec 29 2009 11:54 AM
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जनता से सीधा संवाद

जैसे जैसे चुनाव पास आते जा रहे हैं मंत्रियों और नेताओं की नींद हराम होती जा रही है. समस्या ये है की पार्टी आला कमान ने कठोर शब्दों में कह दिया है की सभी नेता अपने क्षेत्रों मैं लगातार दौरे करें ताकि जनता के बीच रहकर मुद्दों की तलाश करें साथ ही जनता स
 
sanjeev persai
Dec 29 2009 11:54 AM
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बसंती की शादी..........

जय - मौसी, लड़का सत्यम में नौकरी करता है।मौसी - हाय राम !!! और कहीं कोशिश नहीं कर रहा है क्या... ?जय - अरे मौसी दो साल सत्यम में काम करने के बाद कोई कम्पनी लेती ही कहाँ है।मौसी - हाय राम क्या दो साल से सत्यम में ही काम कर रहा है,जय - हाँ मौसी सोचा था
 
sanjeev persai
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उफ़ ये चुनाव - शुक्र है अब ख़त्म हुए

आज की वोटिंग के बाद पंद्रहवी लोकसभा के लिए मतदान प्रक्रिया पूरी हो जायेगी। इस बार मतदाताओं ने बहुत कुछ देखा, कुछ ऐसा की कई मौकों पर लोकतंत्र शर्मसार होते होते बचा और कई बार तो हुआ भी। इस दौरान जो चीज सबसे अधिक याद की गयी वो थे मुद्दे, इस मुद्दा विहीन
 
sanjeev persai
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संवेदनाएं आख़िर क्यों........

बहुत दिन हुए अपने आप को जिए हुए। संवेदनाएं कभी अकेले जीने नहीं देती हैं बहुत कोशिश की कि कोई रास्ता निकले पर ऐसा नहीं हो सका। खासकर उन मौंकों पर जब मुझसे मुझे साक्षात्कार करने का मौका मिलना हो तो मैं कभी सफल नहीं हो पाता। ऐसा क्यों होता है कि किसी एक
 
sanjeev persai
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काहे के राजा काहे के महाराजा

पिछले दिनों मेरे एक पत्रकार मित्र ने एक किस्सा सुनाया जो कुछ यूं था -लोकसभा चुनाव के सिलसिले में मध्य प्रदेश की एक पूर्व मंत्री को वक्तव्य लेने के सिलसिले में फोन लगाया, ये मध्य प्रदेश के एक राज घराने की सदस्य हैं, मित्र ने सीधे ही उन्हें उनके नाम के
 
sanjeev persai