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कुमारेन्द्र

http://kumarendra.blogspot.com/
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15 Jun 2010
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प्रधानमंत्री कार्यालय में हिन्दी की हालत भी देख लें....वाह! वाह!

पी एम् कार्यालय में पढ़ी जाने वालीं पत्रिकाओं और समाचार पत्रों की स्थिति के बारे में आज एक ब्लॉग में देखा साथ में हिन्दी भाषा की पत्र पत्रिकाओं की हालत (संख्या के आधार पर) देखी तो सोचा कि आपके साथ इस स्थिति को बाँट लें।ये जानकारी सूचना अधिकार से मिली
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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पढने का अभाव और लेखन से विरक्ति --- अजीब सी मनोदशा

पूरा दिन गरमी के कारण घर में घुसे रहने के बाद शाम को कुछ बाहर टहलने का मन किया। बाहर निकले भी पर जायें कहाँ यह स्थिति बनी रही, परेशान सा करती रही।कुछ ऐसा ही ब्लॉग लेखन को लेकर हो रहा है। आसपास देखते हैं तो मुद्दों का ढेर दिखता है पर जब लिखने को बैठते हैं
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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यदि ये ही इन्साफ है तो मंजूर नहीं...कुछ तो विचार करो कानूनविदों

भोपाल गैस काण्ड ................... आज हुई है सजा..............पूरे पच्चीस साल बाद................क्या इसी को इन्साफ कहते हैं?इन्साफ के लिए क्या इतने वर्षों का इंतज़ार सही है?यही लोकतंत्र की शक्ति कहलाएगी?क्या प्रभावित परिवार सुकून महसूस
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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सीनियर और जूनियर के मानक क्या हैं और किसके पास हैं??

सीनियर तथा जूनियर का विवाद ब्लॉग के क्षेत्र में नया भले हो पर संसार के लिए नया नहीं है। कॉलेज के समय से लेकर अन्तिम पड़ाव तक यही सीनियर जूनियर का चक्कर चलता रहता है। इसके बाद भी हमें यह नहीं समझ आया कि आखिर कौन से मानक हैं जो सीनियर और जूनियर का निर्धारण
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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एक रहिन ईर, एक रहिन बीर, एक रहिन राजा, एक रहिन हम....

एक रहिन ईर, एक रहिन बीर, एक रहिन राजा, एक रहिन हम,एक रहिन ईर, एक रहिन बीर, एक रहिन राजा, एक रहिन हम।ईर ने कहा चलो शिकार कर आबें,बीर ने कहा चलो शिकार कर आबें,राजा बोला चलो शिकार कर आबें,हमऊँ बोले हाँ चलो शिकार कर आबें।ईर ने मारी एक चिरैया,बीर ने मारी दो
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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पहली और अंतिम चेतावनी --- ब्लॉग पर बनने वालीं एसोसिएशन का पंजीकरण करवाएं

ये बहुत हो गया ड्रामा, अब ये सब नहीं चलेगा। हाँ जी, सही कह रहे हैं, जिसे देखो वो ब्लॉग के नाम पर तमाम तरह की एसोसिएशन बनाने निकल पड़ा है। अब ऐसा ज्यादा नहीं चलेगा। कोई वरिष्ठ के नाम पर तो कोई जूनियर के नाम पर, किसी ने किड्स एसोसिएशन बनाई है तो अभी-अभी
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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ब्लॉग पर दंगल की शुरुआत --- माइक्रो पोस्ट

इंटरनेट पर ब्लॉगिंग की सर्वप्रथम शुरूआत करने वाले का क्या मकसद रहा होगा ये तो पता नहीं पर ये जरूर पता है कि ये तो नहीं रहा होगा जो आजकल दिख रहा है।इन सब बातों पर ध्यान दिये बिना इसपर ध्यान दें तो आपका भी फायदा हो सकता है। चूके तो गये।चित्र गूगल छवियों से
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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दलितों के उत्थान के लिए प्रकट हुईं अंग्रेजी देवी (Godess English)

दलितों की देवी अंग्रेजी देवी के मंदिर की स्थापनापुरुषों के लिए महात्मा बुद्ध और महिलाओं के लिए देवी अंग्रेजी (Goddess English)NDTV पर दिखाए जा रहे कार्यक्रम से रिकोर्ड करके.....
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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यदि बाघ बचाने से फुर्सत मिल गई हो तो अब बचपन बचाने के लिए कुछ करिये

बाल श्रम की एक तस्वीर...............ऐसे बहुत से उदाहरण हमारे आसपास दीखते हैं और हम कहते हैं कि हम बच्चों को संरक्षण देते हैं।ये बच्चा अभी महज दस वर्ष का है.......इसका बड़ा भाई भी काम करता है और बड़ी बहिन भी काम करती है....माँ भी काम करती है.....पिता है
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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काश हमें भी कोई विधायक, सांसद बना दे अथवा बनवा दे

रोज-रोज की बिजली पानी की चकचक देखकर हालत खस्ता हो जाती है। अधिकारियों को फोन करो तो मोबाइल बजता ही रहता है पर कोई उठाता नहीं है। सारे अधिकारियों को आदेश हैं कि सरकारी मोबाइल बन्द न किये जायें सो वे बन्द तो नहीं करते हैं पर उठाते भी नहीं हैं। एक बिजली की
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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साक्षात्कार हेतु छः लाख रुपये रिश्वत न देने का पछतावा है अब हमें.

पता नहीं यह बात सभी के समक्ष रखने लायक है अथवा नहीं पर अब जबकि अदालत की ओर से भी नियुक्तियों की अनुमति मिल गई है तो लगा कि अपनी व्यथा को आप सभी के सामने रख देना चाहिए। अपने मन का बोझ कुछ तो कम होगा।बात दरअसल यह है कि उत्तर प्रदेश के अशासकीय महाविद्यालयों
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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कुछ खास नहीं पर अच्छे लगे ये चित्र -- यदि देखना चाहें तो...

आपके लिए कुछ चित्र जो हमने अपने मोबाईल से निकाले। इन चित्रों में विशेष क्या है ये तो हम खुद नहीं तय कर पाए पर अच्छे लगे, इस कारण से आप लोगों को भी दिखा रहे हैं.....वैसे ये हर बार नहीं होता कि कुछ लिख कर ही दिखाया जाए.....अपना एक ये भी शौक है जो कभी-कभी
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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अभी और कितनों के मरने का इंतज़ार है जनाब....

इस बार बस की बस उड़ा दी गई और लगभग 50 के आसपास लोग मारे गये। नागरिकों द्वारा समाचारों में साफ-साफ कहा जा रहा है कि यदि बस में पुलिस वाले नहीं बैठे होते तो बस को नक्सलियों ने उड़ाया नहीं होता। नागरिकों का आगे यह भी कहना है कि अब यदि बस में पुलिस वाले
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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यौन शिक्षा - चुनौतीपूर्ण किन्तु आवश्यक प्रक्रिया - (भाग - 6)

यौन शिक्षा - चुनौतीपूर्ण किन्तु आवश्यक प्रक्रियाडॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर===============================(6) दायित्व क्या हो हम सभी का======================‘यौन शिक्षा’ के द्वारा सरकार, समाज, शिक्षकों, माता-पिता का उद्देश्य होना चाहिए कि वे एक स्वस्थ
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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यौन शिक्षा - चुनौतीपूर्ण किन्तु आवश्यक प्रक्रिया - (भाग - 5)

यौन शिक्षा - चुनौतीपूर्ण किन्तु आवश्यक प्रक्रियाडॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर===================================(5) महती रूप से आवश्यक है टीनएजर्स के लिए===============================‘सेक्स एजूकेशन’ को लेकर मेरा व्यक्तिगत मत है कि इसकी विशेष आवश्यकता
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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सहवाग की माँ की गलत शिकायत --- लड़कियां ऐसा नहीं कर सकतीं हैं...

समाचारों के द्वारा पता चला कि सहवाग की माँ ने बोर्ड से कहा है कि लड़कियों को खिलाड़ियों से दूर रखा जाये। ध्यान दीजिए लड़कियों को दूर रखा जाये... अर्थात लड़कियाँ खिलाड़ियों के पास आतीं हैं।यह बिलकुल गलत बयानबाजी है सहवाग की माँ की। यह लड़कियों को बदनाम करने की
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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यौन शिक्षा - चुनौतीपूर्ण किन्तु आवश्यक प्रक्रिया - (भाग - 4)

यौन शिक्षा - चुनौतीपूर्ण किन्तु आवश्यक प्रक्रियाडॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर===================================(4) यौन शिक्षा का स्वरूप===================== यहाँ आकर यह तो स्पष्ट होता है कि ‘यौन शिक्षा’ क्यों और कैसी हो। बच्चों की दुनिया पर निगाह डालें तो
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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यौन शिक्षा - चुनौतीपूर्ण किन्तु आवश्यक प्रक्रिया - (भाग - 3)

यौन शिक्षा - चुनौतीपूर्ण किन्तु आवश्यक प्रक्रियाडॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर===================================(3) जिज्ञासा के साथ कौतूहल भी - दस वर्ष से ऊपर की अवस्था==========================================दस वर्ष के ऊपर की अवस्था में आने के बाद शारीरिक
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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यौन शिक्षा - चुनौतीपूर्ण किन्तु आवश्यक प्रक्रिया - (भाग - 2)

यौन शिक्षा - चुनौतीपूर्ण किन्तु आवश्यक प्रक्रियाडॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर===================================(2) यौनांगों के प्रति उत्सुकता - पाँच से दस वर्ष की अवस्था===================================== पाँच वर्ष से दस वर्ष तक की उम्र के बच्चों में
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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फाँसी बनी गले की फाँस

कसाब को फाँसी, कोली को फाँसी....अब और कोई बचा है? नहीं बचा? चलो कोई बात नहीं...।देशवासी फैसले आने के बाद प्रसन्न दिखे किन्तु मन में कुछ इसी तरह के विचार उभरे। अब देखिये कि कब तक फाँसी होती है? अभी तो पहले के 29 बकाया हैं, भले ही राष्ट्रपति जी के पास
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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यौन शिक्षा - चुनौतीपूर्ण किन्तु आवश्यक प्रक्रिया - भाग - 1

यौन शिक्षा - चुनौतीपूर्ण किन्तु आवश्यक प्रक्रियाडॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर===================================‘यौन शिक्षा’, यदि इसके आगे कुछ भी न कहा जाये तो भी लगता है कि किसी प्रकार का विस्फोट होने वाला है। हमारे समाज में ‘सेक्स’ पूरा ‘यौन’ को एक ऐसे
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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कितना इनाम रखे है सरकार हम पर -- कुछ याद आया?

कल रात आदतन टी0वी0 खोलकर समाचार चैनल पर निगाह डालनी शुरू की तो समाचार से रूबरू हुए कि मैकमोहन नहीं रहे। एक पल को शायद साथ में चित्र नहीं आया होता तो पहचान का संकट हमारे सामने खड़ा हो जाता किन्तु चित्र ने पहचान कायम रखी।(चित्र गूगल छवियों से साभार)तुरन्त
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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बेटी और ब्लॉग हुए दो वर्ष के...

समय कितनी तेजी से बीतता है, इसका आभास उस समय होता है जब हम किसी विशेष दिन को याद करते हैं। दो साल पहले की बात है जब हमारे घर पुत्री का जन्म हुआ था। परिवार के सभी लोग इस बात को लेकर संशय में थे कि आज के दौर की तरह ही डॉक्टर कहीं आपरेशन के लिए न कह दे।
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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आइये स्वागत करें अपनी बहिन-बेटी के अविवाहित मातृत्व का..

शीर्षक देखकर चौंक गये होंगे पर चौंकिये नहीं, अब यही होने वाला है समाज में अगले कुछ वर्षों में। हाल के कुछ वर्षों में हमने समाज में जिस तरह से शारीरिक सम्बन्धों के स्वरूप को जिस प्रकार से मान्यता देने का काम किया है उसके अनुसार ऐसा होना आश्चर्य भरा नहीं
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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गोरी चमड़ी वाले का हंटर और हाथरिक्शा खींचता काली चमड़ी वाला

इस चित्र को देखिये, कुछ ख़ास या अलग सा आपको दिखा? दिख तो जरूर रहा है पर समझ नहीं आ रहा है, है न। देखिये, चित्र में दो जने हैं........... एक तो पत्रकार और अब देश का जायका बताने वाले विनोद दुआ हैं और उनके पीछे हाथ रिक्शा खींचता एक और आदमी है।ये चित्र कल टी
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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एक शेर शायद कुछ लोगों को अकल दे दे... आमीन !!!

मेंहदी हसन की गई एक बड़ी प्रसिद्द ग़ज़ल"अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख्यालों में मिलें,जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिले।"का एक शेर...=====================================तू खुदा है न मेरा इश्क फरिश्तों जैसा, दोनों इंसान हैं तो क्यूँ इतने हिज़ाबों में
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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ब्लॉग जगत में आज हमने कर ली चार सौ बीसी

आखिर आज हो ही गई चार सौ बीसी। बहुत विचार किया था पहले भी कि 420 शब्द आया कहाँ से? इतना तो पता था कि 420 का अर्थ कानून की धारा से लगाया गया है और धोखाधड़ी करने वालों को इसी धारा के अन्तर्गत सजा जैसा प्रावधान होगा।आज अपनी 420 वीं पोस्ट पर कुछ चार सौ बीसी
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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ये डिग्रियां भी बाँटी जातीं हैं पड़ोस में...

इन डिग्रियों के बारे में क्या आपको पता है?नहीं?अरे! क्या कह रहे हैं जनाब?ये सारी डिग्रियाँ हमारे पड़ोस में बहुत ही आसानी से उपलब्ध हैं।एक निगाह डाल ही लीजिये, इन पर---B.E. = Bomb Engineering M.B.B.S. = Member of Bomb Blasting Society I.I.T = Islamic
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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पहरेदारों ने लगाईं सुरक्षा में सेंध --- खतरा ही खतरा

सुरक्षा का सवाल और पहरेदारों का दगाबाजी करना....ये स्थिति कोई आज की नहीं पुरातन काल से चली आ रही है। राजा-महाराजाओं के दौर में भी कुछ व्यक्ति जासूसी के लिए रखे जाते थे और कुछ महिलायें भी अपनी सौन्दर्य-क्षमता से शत्रु राजाओं के भेद लेने की कोशिश में लगी
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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मदद की पुकार ब्लोगर्स की तरफ से...यदि इच्छा हो जाए तो...

अविनाश वाचस्पति जी की तरफ से प्राप्त मेल से इस सूचना को आप सभी की जानकारी के लिए....यदि इच्छा हो जाए तो.....यह सूचना नुक्‍कड़ पर Build a better future के रजनीश ने और पिछले दिनों मीडिया मंत्र पर श्री पुष्‍कर पुष्‍प ने लगाई थी। जिसमें मुख्‍यमंत्री को लिखे
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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बहस कोई भी हो किन्तु तथ्यपरक और पूर्वाग्रह रहित होनी चाहिए...

सवाल मन में न उठे तो मन का भावशून्य और विचारशून्य होना समझ में आता है और विचार आने के बाद उसको सकारात्मक दिशा न मिले तो विचारों का उठना निरर्थक जाता है। अकसर देखा गया है कि हम आपस में अथवा किसी चर्चा के दौरान किसी भी ऐसे विषय पर बहस करना शुरू कर देते हैं
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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प्रेरणादायक --- बच्चों की निस्वार्थ सेवा से बची कुत्ते की जान

हमारे मोहल्ले के कुछ बच्चों ने कल वो काम करके दिखाया जिसको करने से पहले नेता, मंत्री मीडिया का सहारा लेते हैं, दस बार सोचते हैं।दोपहर को लगभग एक बजे का समय होगा। घर के पास ही कुत्ते का बच्चा सड़क पर धूप में पड़ा था। घर की गली से निकलने वाले दो-चार लोगों ने
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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आई पी एल, खेल पैसे का खेले, मोदी थरूर --- चन्द हाइकु

आई0 पी0 एल0 के गोरखधंधे का परिणाम क्या होगा ये तो सिर्फ जाँच करने वालों को ही मालूम होगा। सत्यता कुछ भी हो किन्तु यह तो सत्य ही है कि सिवाय हटने-हटाने के कुछ और नहीं होगा।देश के अंधे दीवाने दर्शकों के लिए यही सबक होना चाहिए किन्तु जिस निर्लज्जता से
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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शाश्वत मौन तोड़ने की कोशिश में...एक छोटी सी कविता

समाज में ऐसा तो हो ही नहीं सकता कि आप घर पर ही दुबके बैठे रहें, किसी न किसी काम से घर के बाहर आना ही पड़ता है। बाहर आने के बाद आपको दुनिया की सच्चाई दिखाई देती है। जो सच्चाई अभी तक आप समाचारों के माध्यम से, लोगों के द्वारा सुनते चले आ रहे थे उसे अपनी
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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हंगामा है क्यों बरपा थोड़ी सी जो पी ली है...

इस समय कुछ हल्का फुल्का सा--गुलाम अली, मेंहदी हसन की गाई हुईं कुछ ग़ज़लों के चन्द शेर हमें बहुत ही पसंद आते हैं, शायद आपको भी आयें?------------------------------------------अंदाज अपने देखते हैं आईने में वो, और ये भी देखते हैं कोई देखता न
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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महामशीन के महाप्रयोग का कहीं तो असर दिखाओ यारो!!!

समाचारों के माध्यम से पता चला कि यूरोप की उड़ानें फिर से चालू कर दी गईं हैं। यह कोई समाचार प्रसारित करने के उद्देश्य से नहीं वरन् एक विशेष मानसिकता को उद्घाटित करने के उद्देश्य से कहा गया है।पिछले दिनों समाचार यह भी सुनने को मिला था कि महामशीन को शुरू
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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मेरे बच्चे...तुम्हारे बच्चे....हमारे बच्चे....

ब्लॉग पर तैर रही साम्प्रदायिकता और तनाव से कुछ बाहर आने की कोशिश करिए जनाब.... लीजिये अभी कुछ और नहीं एक हल्का-फुल्का चुटकुला ही पढ़िए.....ठीक है न॥!!!=====================================एक महिला के दो बच्चे थे और उसका पति नहीं था। एक पुरुष के दो बच्चे
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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हंगामा ही रहता है बरपा, संसद सत्र है जब चलता...

देश की संसद में इस समय आई0पी0एल0 को लेकर हंगामा मचा हुआ है। पिछले सत्र में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर हंगामा मचा हुआ था। अब पता नहीं कि अगले सत्र में किस बात पर हंगामा हो?देखने में आया है कि अब संसद में लगभग पूरे सत्र किसी एक ही बिन्दु, किसी एक ही विषय
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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Apr 23 2010 11:24 PM
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ये नहीं रुकता तो लगाओ नारे - "जय श्री राम", "अल्लाह हो अकबर"

पिछले कुछ दिनों से ब्लॉग पर घूमाफिरी तो हो रही है किन्तु बहुत कम टिपियाने का मन कर रहा होता है। इसका एक सबसे बड़ा कारण कुछ ढंग का न लिखा जाना है। इस कुछ ढंग का न लिखे जाने जैसी कोढ़ की स्थिति में खाज जैसी हालत ये हो गई कि ब्लॉग पर भी साम्प्रदायिकता दिखाई
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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इस रंग बदलती राजनीति में, इंसान की कीमत कोई नहीं...

राजनीति में सिद्धान्तों की राजनीति तो समाप्त हो गई और सिद्धान्त विहीन राजनीति की शुरुआत होने लगी। किसी भी स्थिति के सिद्धान्त क्या होगे और कब तक वे लागू रहेंगे यह एक प्रश्न हो सकता है किन्तु हमारा मानना है कि सिद्धान्त वही होते हैं जो कभी बदलते नहीं या
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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