सरयूपारीण's Image

सरयूपारीण

http://saryupareen.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
01 Feb 2010
कुल प्रविष्टियां
14
पाठक भेजे
748
पसंद
113
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
53.43
पसंद करें
2
नापसंद करें

आभार: जे पर भनिति सुनत हरषाहीं | ते बार पुरुष बहुत जग नाहीं ||

निज कबित्त केहि लाग न नीका | सरस होउ अथवा अति फीका ||जे पर भनिति सुनत हरषाहीं | ते बार पुरुष बहुत जग नाहीं ||जग बहु नर सर सरि सम भाई | जे निज बाढी बढ़हिं जल पाई ||सज्जन सकृत सिन्धु सम कोई | देखि पूर बिधु बाढ़इ जोई ||तुलसीदास, रामचरित मानस बालकांड रसीली हो
 
Sudhir (सुधीर)
टैग: ४. अन्य
पसंद करें
0
नापसंद करें

इतिहास की दृष्टि से वर्ण व्यवस्था -भाग ३ (अन्तिम भाग)

"...This hasty survey of historical development of caste sufficiently disposes of the popular theory that caste is permanent institution, transmitted unchanged from dawn of Hindu history and myth"विलियम क्रूक, "दा ट्राइब्स एंड कॉस्ट ऑफ़ दा नॉर्थ वेस्टर्न
 
Sudhir (सुधीर)
Aug 17 2009 07:30 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

इतिहास की दृष्टि से वर्ण व्यवस्था -भाग २

न वर्णा न वर्णाश्रमाचारधर्मा न मे धारणाध्यानयोगादयोपि।अनात्माश्रयाहंममाध्यासहानात्‌ तदेकोऽवशिष्ट: शिवः केवलोऽहम्‌॥जगतगुरु आदि शंकराचार्य द्वारा रचित "दशाश्लोकी" के यह श्लोक७वी शताब्दी में वर्ण-व्यवस्था की धार्मिक मीमांसा और दर्शन में नगण्यता को दिखता है।
 
Sudhir (सुधीर)
Aug 09 2009 10:06 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

कर्ण और वर्ण व्यवस्था

तेजस्वी सम्मान खोजते नहीं गोत्र बतला के,पाते हैं जग में प्रशस्ति अपना करतब दिखला के।हीन मूल की ओर देख जग गलत कहे या ठीक,वीर खींच कर ही रहते हैं इतिहासों में लीक, सूत-वंश में पला, चखा भी नहीं जननि का क्षीर,निकला कर्ण सभी युवकों में तब भी अद्‌भुत वीर।तन से
 
Sudhir (सुधीर)
पसंद करें
0
नापसंद करें

इतिहास की दृष्टि से वर्ण व्यवस्था -भाग १

ब्राह्मण क्षत्रिय विशाम् शूद्राणां च परन्तप।कर्माणि प्रविभक्तानि स्वभावप्रभवैर्गुणै:॥ (गीता १८/४१)अर्थात् ब्राह्मण, क्षत्रिय वैश्य और शूद्र कर्म स्वभाव से हीउत्पन्न गुणों के आधार पर ही विभाजित किए गए हैं।अरविन्द शर्मा की "क्लास्सिकल हिंदू थोअट" में वर्ण
 
Sudhir (सुधीर)
Aug 09 2009 10:06 AM
पसंद करें
8
नापसंद करें

शास्त्रों के अनुसार वर्ण व्यवस्था - भाग ३ (अन्तिम भाग)

तत्र चोद्यमस्ति को वा ब्राह्मणों नाम किं जीवः किं देहः किं जातिः किं ज्ञानं किं कर्म किं धार्मिक इति॥ -- वज्रसूचिका उपनिषद गत सप्ताह हम मनु स्मृति के विषय में चर्चा कर रहें थे। मनु स्मृति में वर्ण व्यवस्था को कर्माधारित ही माना गया हैं। उसके संकर जात
 
Sudhir (सुधीर)
पसंद करें
8
नापसंद करें

शास्त्रों के अनुसार वर्ण व्यवस्था - भाग २

पिछली चर्चा में हम वर्ण व्यवस्था की वेदानुसार व्याख्या कर रहे थे और उसके प्रारंभिक रूप को कर्मगत ही पाया। आज उस चर्चा को वेदों और मनु-स्मृति के अनुसार समझने का प्रयास करेंगे। पिछली चर्चा में यजुर्वेद के शतपथ ब्राह्मण के अनुसार हमने वर्णों के जन्म के
 
Sudhir (सुधीर)
पसंद करें
9
नापसंद करें

शास्त्रों के अनुसार वर्ण व्यवस्था - भाग १

अद्वेष्टा सर्वभूतानाम् मैत्रः करुण एव च। निर्ममो निरहंकारः समदु:खसुखः क्षमी॥ संतुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढ़निश्चयः। माय्यर्पितमनो बुद्धिर्यो मद्भक्तः स में प्रियः॥ अर्थात् जो सभी जीवों (भूतों) के प्रति द्वेष भावः से विहीन हैं, जो सभी के लिए मित्रवत
 
Sudhir (सुधीर)
पसंद करें
7
नापसंद करें

वर्ण व्यवस्था: दो शब्द

इस सप्ताह मैं ब्राह्मण/सरयूपारीण व्यवस्था का जन्म के विषय में वार्तालाप का प्रारम्भ करना चाह रहा था। सौभाग्य से मुझे विलियम क्रूक की "दा ट्राइब्स एंड कॉस्ट ऑफ़ दा नॉर्थ वेस्टर्न प्रोविन्सस एंड अवध" एवं एम ऐ शेर्रिंग की "हिंदू ट्राइब्स एंड कॉस्ट एज रे
 
Sudhir (सुधीर)
पसंद करें
12
नापसंद करें

दैनिक हिन्दुस्तान के रविश जी को एक खुला पत्र.

आदरणीय रविश जी, सहर्ष अभिनन्दन। सर्वप्रथम मैं आपका आभार व्यक्त करना चाहूँगा - मेरे इस प्रयास का संज्ञान लेने और इसके सम्बन्ध में अपने विचारों का प्रकाशन के लिए। आपके विचार, यूँ तो १३ मई २००९ के दैनिक हिन्दुस्तान संस्करण में प्रकाशित हुए किंतु उसके वि
 
Sudhir (सुधीर)
टैग: ४. अन्य
May 24 2009 07:44 AM
पसंद करें
9
नापसंद करें

ब्राह्मण: एक परिचय (भाग ३) - वर्तमान परिवेश में ब्राह्मण

चर्चा प्रारम्भ करने के पूर्व कुछ विचार पिछली चर्चा से - मैंने कर्म श्रेष्टता के आधार पर नेतृत्व करने वाले ब्राह्मण वर्ग के विस्मरण एवं कालांतर में जन्म की व्यवस्था के आधार पर उनके वर्गीकरण और वर्तमान में उनके सामाजिक तिरस्कार की बात करनी चाही थी। संभ
 
Sudhir (सुधीर)
पसंद करें
9
नापसंद करें

ब्राह्मण: एक परिचय (भाग २)

गतांक से आगे ... सर्वप्रथम मैं सभी प्रबुद्ध पाठकों का उत्साह वर्धन के लिए आभार प्रगट करना चाहूंगा। वैसे भी कहा गया हैं कि "दुर्लभम् त्रयमेवैतात् देवानुग्रह्हेतुकम्। मनुष्यत्वं मुमुक्षुत्वं महापुरुषसंश्रयः ॥" अर्थात् मनुष्य जीवन, मोक्ष कमाना और महापुर
 
Sudhir (सुधीर)
पसंद करें
9
नापसंद करें

ब्राह्मण: एक परिचय (भाग १)

सरयूपारीण ब्राह्मणों की व्यवस्था समझने से पहले ब्राह्मण शब्द और उसके व्यापक सन्दर्भ को समझना अत्यन्त आवश्यक हैं। सामाजिक रूढियों और उससे जन्मे विद्वेष से आज ब्राह्मणत्व और उसके आदर की बात जातिवादी दंभ से जोड़ दी जाती हैं। किंतु मूल रूपेण ब्राह्मण कौन
 
Sudhir (सुधीर)
पसंद करें
8
नापसंद करें

प्राक्कथन

इस चिठ्ठे की उत्त्पति मेरे इस एहसास के साथ हुई कि हम किस प्रकार विदेशों में रहते हुए अपने आने वाली पीढियों को उनके पुरखों के बारे में बताएँगे? सहस्र युगों, कल्पों से चली आ रही इस परम्परा को किस प्रकार आर्यावत से बाहार जम्बू द्वीप से सप्त- सागरों की द
 
Sudhir (सुधीर)