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06 Jan 2010
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सभी को नए साल की शुभकामनायें

सबसे पहले सभी को नए साल की ढेर सारी शुभकामनायें. इन पंक्तियों के रचनाकार हेलन को मैं नहीं जनता हूँ। लेकिन उन्होंने जो लिखा है वो आज प्रासंगिक है। हम आज किसी भी सुन्दर चीज देख नहीं सकते है, सिर्फ महसूस कर सकते है। शायद इसी कारण से देश में सिर्फ महंगाई,
 
अवाम
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परंपराओं को समेटे आधुनिक चेन्नई

पिछले हफ्ते चेन्नई जाने का अवसर प्राप्त हुआ. इसका कारण था आठवां भारतीय विज्ञान संचार कांग्रेस इस बार यहीं आयोजित किया गया था. इस चार दिवसीय सम्मेलन (10-14 दिसम्बर ) में भारत के अलग-अलग जगहों से विभिन्न विषयों पर अपने शोध प्रस्तुत किए. चार दिन के इस स
 
अवाम
Dec 29 2009 11:43 AM
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रविन्द्र भवन में मीडिया का मैटिनी शो

भोपाल। पिछले हफ्ते १९ से २४ नवम्बर को रविन्द्र भवन में अख़बारों की दुनिया पर आधारित कई देशों की फिल्में दिखाई गयी। इस दौरान करीब १२-१३ फिल्में दिखाई गयी। पर दर्शकों के लिए ये फ़िल्म महोत्सव तरसता रहा। साथ ही मीडिया आधारित इन फिल्मों को मीडिया ने ही ज
 
अवाम
Dec 29 2009 11:43 AM
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सशक्त आतंकवाद बनाम नपुंषक सरकार

सरकार मैंने सोचा की जब मामला थोड़ा शांत हो जाए तब मैं कुछ लिखूं। इसके साथ ही मैंने नपुंषक शब्द का प्रयोग किया है। इस शब्द का प्रयोग मैं नहीं करना चाहता था, पर मुझे करना पड़ रहा है, क्योंकि मैं मजबूर हूँ। ये शब्द मेरे ब्लॉग के सेहत के हिसाब से ठीक नहीं
 
अवाम
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मां

मां कितनी याद आती है मां बार-बार याद आती है मां घर छोड़कर शहर तों आ गया पर बिन तेरे रह नहीं पाता मां याद आती हैं तेरे हाथ की बनी रोटियां और तेरा दुलार कितना अच्छा होता कि गाँव में ही मिल जाता रोजगार ताकि कभी दूर न होते तेरी ममता कि छांव और प्यार।
 
अवाम
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शुभ दीपावली का अशुभ तोहफा

असम की ताज़ा आतंकवादी घटना सरकार और जनता दोनों के लिए दिवाली का तोहफा है, जो आतंकवादियों ने दिया है। वर्तमान में ये आतंकवादी इतने दुस्साहसी हो गये है कि कही भी और कभी भी बम विस्फोट कर जन-धन को हानि पंहुचा रहे है। उन्हें किसी भी बात का खौफ भी नहीं है।
 
अवाम
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दीपावली की शुभकामनाएं

ये पहली बार है कि दीपावली में घर नहीं जा रहा हूँ। आज से पहले तक घरवाले कह भी रहे थे कि घर आ जाओ पर अब वो भी जान गये है कि अब घर समय से नहीं आ पायेगा। ये तो अब हमारी नियति बन गयी है कि अब हमें घर से बाहर ही सभी त्योहार मनाने है। इस बार सर के साथ डिपार
 
अवाम
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इंसान को इंसान समझने की जरुरत

न तों कोई छोटा होता है और न ही कोई बड़ा। न तों कोई अमीर होता है और न ही कोई गरीब। न तों कोई काला होता है और न ही कोई गोरा। न तों कोई सुंदर होता है और न ही कोई बदसूरत। जरुरत है तों बस इंसान को इंसान समझने की। फ़िर न तों कोई हिंदू रहेगा और न ही कोई मुसल
 
अवाम
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यादें

कविता के मामले में मेरा दिमाग, हाथ और पेन तीनों ही तंग हाल है। बहुत सोचता हूँ कि कोई कविता लिखूं लेकिन उन शब्दों तक पहुच ही नहीं पाता हूँ कि किसी कविता कि रचना कर सकूँ। पर सच है गुरु में बहुत ताकत होती है। भोपाल जब आया तों क्लास में पिछले साल सर ने ऐ
 
अवाम
Dec 29 2009 11:43 AM
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गाँधी और भगत के सपनों का भारत

कल २ अक्टूबर यानी की गाँधी जयंती थी। गाँधीजी जिनके अथक प्रयासों की वजह से हमें आजादी मिली। आप सोच रहे होंगे की मैं भगत सिंह और गांधीजी को एक साथ क्यों याद कर रहा हूँ। चलिए इसका कारण बता देता हूँ। आजादी की लड़ाई में ये दो ध्रुवों के नेता माने जाते है।
 
अवाम
Dec 29 2009 11:43 AM
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संवेदनहीनता की अद्भुत मिसाल

आज कल थोड़ा दुखी, निराश और नाराज हूं, अपने आसपास के लोगों को देखकर। अपने आसपास के माहौल और वातावरण को देखकर। अपने साथ पढ़ने वाले कुछ लोगों की बात करना चाहता हूं। अभी बिहार में आई बाढ़ ने वहां पर भारी तबाही मचाई है। वहां के लोग हैरान परेशान है। लाखों लो
 
अवाम
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आतंकवाद से फ़िर लाल हुई दिल्ली की धरती

फ़िर वही विस्फोट, फ़िर वही चीत्कार बस कुछ फर्क था, तों वो स्थान का। इस बार दहशतगर्दों ने निशाना बनाया देश की राजधानी दिल्ली को। पांच जगह विस्फोट हुए, २० से २५ लोग मारे गये, सैकड़ों घायल हुए। सब कुछ उसी तरह था जैसे कही और बम के फटने के बाद की स्थिति होत
 
अवाम
Dec 29 2009 11:43 AM
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हिन्दी दिवस भाषाऑं में अंतरसंवाद

आज हिन्दी दिवस है। आज हमारे विश्वविद्यालय माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में लगातार तीसरे वर्ष 'भारतीय भाषाऑं में अंतरसंवाद' विषय पर संगोष्टी का आयोजन किया गया। हर बार की तरह इस बार भी देश के कई विद्वानों ने भाग
 
अवाम
Dec 29 2009 11:43 AM
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बिहार को हमारी मदद की जरुरत

बिहार में आई प्रलयंकारी बाढ़ से तों अब सभी लोग परिचित है। उसी के बारें में कुछ बात करनी थी। कहना ये है कि अभी वहां के लोगों को हमारी मदद की जरुरत है। वहां ज्यादा से ज्यादा पैसे की जरुरत है, ताकि उनके पुनर्वास, भोजन, पानी और बीमारियों से बचाव के लिए द
 
अवाम
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पता नहीं हम कब सुधरेंगे !

पता नहीं ये लिखना ठीक होगा या नहीं, मुझे नहीं मालूम । फिर भी इसे नजरंदाज करने का मन नहीं कर रहा है । इस कारण से लिख रहा हूँ । यह अपनी पोल खोलने जैसी बात होगी । चलिए सीधे मुद्दे पर आते हैं । मैं और मेरी तरह मेरे तमाम साथियों ने अभी हाल में ही पत्रकारि
 
अवाम
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इरोम शर्मीला के समर्थन में भोपाल में कैंडल लाइट विजिल

नवंबर, भोपाल। सरकार की दमनकारी नीतियों के विरोध में इरोम शर्मिला ने दस साल पहले आज ही के दिन मणिपुर में आमरण अनशन शुरू किया था। उन्हें सरकार ने घर में ही नजरबन्द कर दिया था और जबरन नाक के रास्ते खाना खिलाया था। वह सैन्य बल (विशेष अधिकार) अधिनियम 19 5
 
अवाम
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जैसे तुम सोच रहे साथी, वैसे आजाद नहीं हैं हम

इधर तो काफी दिन हो गये कुछ लिखा नहीं मैंने. इस कारण से एक अच्छी रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ. यह रचना विनोद श्रीवास्तव की है, इन्हें मैं नहीं जनता हूँ. लेकिन इनकी कविता के माध्यम से इन्हें जान गया हूँ. ये कविता मेरे दोस्त मनोज ने (भोपाल से) मुझे भेजी है.
 
अवाम
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बरेली से जुड़े रहे हैं शहीद-ए-आजम के तार

बरेली। बरेली से भी जुड़े है भगत सिंह के तार। यह लाइन पढ़कर काफी लोग अचरज करेंगे, लेकिन यह सही है। चौंकिए मत, भगत सिंह कभी बरेली नहीं आए पर यहां कुछ ऐसी शख्सियतों ने समय बिताया है या वे आए हैं, जिनका स्वतंत्रता आंदोलन के इस कालजयी शख्सियत से सीधा संबं
 
अवाम
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कुछ छूट सा रहा है..

कुछ छूट सा रहा है, बाकी सब ठीक है. कोई दूर सा हो रहा है, बाकी सब ठीक है. जीवन में अँधेरा सा छा रहा है, बाकी सब ठीक है. अब नहीं सुनाई पड़ेगी वो, हंसी की खनक, न ही बात-बात पर पड़ने वाली डांट जो धीरे-धीरे दे रहे थे मुझे नया जीवन, मेरी कमियों को बताकर उन
 
अवाम
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निश्चित और अनिश्चित

फिर एक धमाका और फिर वही चीख-चीत्कार फिर वही जगह। सब कुछ अब निश्चित होता चला जा रहा है। आतंकियों ने सब कुछ निश्चित कर दिया है कि बम धमाके भी होंगे, लोगों की जान भी जाएगी. जगह भी निश्चित है. कभी दिल्ली, कभी मुंबई, कभी बंगलुरु और कभी असम. गर कुछ अनिश्चि
 
अवाम
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A tribute to Legendary Bhagat Singh

इस बार शहीद-ऐ-आज़म सरदार भगत सिंह के जन्मदिन पर मेरे एक मित्र मनोज ने मुझे उनसे संबंधित कुछ कविताएँ भेजी। इसी को मैं अपने ब्लॉग के माध्यम से आपको प्रस्तुत कर रहा हूँ। ये कविताएँ जेएनयू के प्रोफ़ेसर चमन लाल द्वारा संकलित की गयी है। उम्मीद है आपको पसंद
 
अवाम
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प्रेम की अभिव्यक्तियां

भोजपुरी - हम तोहके चाहिला हो। हिन्दी - हम तुम्हे प्यार करते है। बंगाली - आमी तुमाके भालो बाशी। गुजरती - तुमि प्रेम करो छू। अरेबियन - अहेबिक मोयत English - I love you Polish - Ja Kocham Ciebie French - Je T'aime Czech - Miluji Te Slovakian - Lu'Bim Ta
 
अवाम
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युवा भटकाव

सबसे पहले नए साल की सभी को शुभकामनाएं. नया साल सभी के लिये शुभ हो मंगलमय हो. काफी दिन बाद लिख रहा हूँ. इस वजह से शुभकामनाएं देने में थोड़ी देर हो गयी. खैर बिता वर्ष भी कुछ खट्टी-मीठी यादों के साथ बीत गया और हम फ़िर एक नए वर्ष में हस्तक्षेप कर चुके हैं.
 
अवाम