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23 Apr 2010
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अजब देश के गजब हैं नेता

बचपन में किसी बुर्जुग ने यूं ही हंसी-ठिठोली में मुझे एक विशेष किस्म का पहाड़ा पढ़ाया था। प्राइमरी स्कूल में 2 से लेकर 20 तक का पहाड़ा तो मास्टर जी ने चिल्ला-चिल्ला कर इतना रटा दिया था कि वह ऑटोमैटिक मशीन की तरह जुबान पर चढ़ गया था। कोई बोला नहीं कि
 
मनोज द्विवेदी
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खामोश! मैं महगाई हूँ भाई...

चरण कमल बंदौ हरिराई, आंख खुली तो पाई मंहगाई। जैसे ही यह गीत पुरुषोत्तम महाराज ने स्टेज से गाया, पूरे हॉल में तालियों की गडग़ड़ाहट फैल गयी। ऐसा लगा मानों मंहगाई का पुर्नजन्म हो गया। सभी श्रोतागण मंहगाई के पुर्नस्थापित होने पर गौरवान्वित हो रहे थे। क्योंकि
 
मनोज द्विवेदी
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वालेंटाइन लाइन शाइन बट फाइन....

वैसे तो प्रेम करने का कोई विशेष दिवस निर्धारित नहीं किया जा सकता। क्योंकि प्रेम कब किस तरह और किस रुप में प्रकट हो जाए इसका कोई निश्चित मापदण्ड नहीं है। फिर भी बाजार की ताकतों ने प्रेम को प्रदर्शित करने हेतु दिवस निश्चित कर ही दिया। जब दिवस बन ही गया है
 
मनोज द्विवेदी
Feb 13 2010 12:32 PM
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शुगर फ्री शक्कारोलिज्म !

आमतौर पर पूरे देश भर में 'पिंचिंग कोल्ड' का प्रकोप जारी है। उत्तर भारत की हाड़ कंपाती ठंड से दक्षिण भारत की ठुड्डयां कंपकंपा जा रही हैं और जुबान फिसलन का कीर्तिमान अपने आप बनता जा रहा है। उधर शुगर (वहीं अपना चीनी) भाई! जो जुबान पर चढ़ाने भर से मंहगाई
 
मनोज द्विवेदी
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नववर्ष मंगलमय हो, जिंदगी रसमय हो !

सबसे पहले आपको नये वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं, साथ में बड़े-बड़े फूलों की मालाएं और इससे भी नया साल न समझ में आये तो डिस्को में जाकर, डीजे की धुन में जोर-जोर चिल्लाएं। फिर शायद आपको नया साल मनाने का असीम आनंद आ ही जाये। यदि इससे भी बात न बने तो यंग
 
मनोज द्विवेदी
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पर्यावरण दिवस !

अभी कुछ दिन पहले की ही बात है। पर्यावरण दिवस बड़े धूम-धाम के साथ मनाया गया। आप मुगालते में मत रहिये की इन गोष्ठियों और सभाओं से पर्यावरण को बचा लिया जाएगा। देश-विदेश के वातानुकूलित कमरों में इम्पोर्टेड फर्निचेर पर विराजमान होकर तथा कथित पर्यावरण प्रे
 
मनोज द्विवेदी
Dec 29 2009 11:52 AM
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ये जुटा! जो घूम रहा है, किसको-किसको चूम रहा है!

हमारा देश भारत वैदिक काल से ही विश्व बंधुत्व की भावना से लबरेज रहा है। दुनिया भर के लोगों को अपना भाई और पुरी दुनिया को अपना घर समझना हमारे खून में है। लेकिन इधर कुछ दिनों से एक जूता पुरी दुनिया की सैर पर निकल चुका है। अब इस जूते को सैर कराने का जिम्
 
मनोज द्विवेदी
Dec 29 2009 11:52 AM
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दर्द को कोई नाम दो!

दर्द को कोई नाम न दो, मुझे खुशी की कोई शाम न दो दर्द को कोई नाम न दो.... दिन के उजाले में सोते हुए जागते लोगो को मोहब्बत का कोई पैगाम न दो दर्द को कोई नाम न दो..... शाम ढलते ही चिंगारियां जलाये अधरों पर ठंडी लाशों को मीठी सी कोई मुस्कान न दो दर्द को
 
मनोज द्विवेदी
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स्विस बैंक बोलते नेता, सिसियती जनता!

सच मानिये चुनावी पारे ने प्राकृतिक पारे की गर्मी को मत दे दी है। पता नही क्यूँ भारतीय राजनीती की गर्माहट को गर्मियों में ही गर्म हंडी पर रखा जाता है। यानि चुनाव की तारीखें तपती दुपहरिया में क्यों पड़ती हैं। खैर ये कोई राष्ट्रीय मुद्दे जैसा प्रश्न नही
 
मनोज द्विवेदी
Dec 29 2009 11:52 AM
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इन्द्रप्रष्ठ(दिल्ली) में अर्जुन का अस्तित्व खतरे में!

दिल्ली !!! हमारे देश की राजधानी, चमचमाती कोलतार की काली पट्टी पर सरपट दौड़ती रंग-बिरंगी गाडियां! सत्ता-विपक्ष और आम आदमी का केन्द्र-बिन्दु जहाँ से सबको कुछ न कुछ उम्मीद जरुर रहती है। दिल्ली के बारे में सैकड़ों कहानिया और किम्वदंतियां सुनने को मिल ही
 
मनोज द्विवेदी
Dec 29 2009 11:52 AM
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नोट-तंत्र के महापर्व में थोड़ा-थोड़ा ...

बुद्धू बक्से के खबरिया चैनल में बुद्धिमान एंकर के मुखार्बिंदु से निकालने वाले एक-एक शब्द ह्रदय में शूल से चुभते हैं। मुझे तो चुभते हैं औरों का पता नही, लेकिन उम्मीद है के उन्हें भी ऐसा ही महसूस होता होगा जैसा मुझे। जबसे लोकतंत्र के चुनावी बिगुल की दु
 
मनोज द्विवेदी
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चतुर, चोर, चारण की चरणवंदना

चुनाव की चहचहाहट में चीनी के बढे हुए दाम भी बेमानी से लगाने लगे हैं। मंदी की महामारी में भी मन बल्लिओं उछल रहा है, अरे मेरा नही भाई! ये हाल है, देश के ६७ करोड़ १४ लाख ८७ हज़ार ९३० मतदाताओं का। इन्ही मतदाताओं को लुभाने के लिए मनमाने कम भी किए जा रहे है
 
मनोज द्विवेदी
Dec 29 2009 11:52 AM
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लूटो! "राज" नीति का खजाना खुल चुका है...

समाचारों को पढ़ने, सुनने और मनन करने के बाद मन में बस येही ख्याल आता है। काश! मैं भी राजनेता होता ...चलो कोई नही इस जन्म में नही तो अगले जनम में ही सही। आज भगवान के दर्शन कर लेने की अनंत इच्छा जागृत हो गई। सोचा दर्शन भी हो जायेंगे और अगले जनम का कांट
 
मनोज द्विवेदी
Dec 29 2009 11:52 AM
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दिल्ली से दिल्लगी !!

सुना था दिल्ली , दिलवालों की होती है हर तीसरा सा आदमी, सीप में एक मोती है। हम भी थे दिलवाले, सो आ गए यहाँ पर सोचा की क़द्र होगी, जाए जहाँ-जहाँ पर , पर हाए रे मेरी किस्मत! यहाँ भी दगा दे गई मेरे आने से पहले ही दिल्ली , दिलवालों से खाली सी हो गई । अब त
 
मनोज द्विवेदी
Dec 29 2009 11:52 AM
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बहकाव! वी मस्ट नीड.....

अमेरिका में बराक ओबामा क्या जीते, पुरी दुनिया में ही बदलाव-बदलाव की हवा चलने लगी! ऐसा लगा मानो सब कुछ माउस के क्लिक की तरह बदल जाएगा। हमारे देश में भी बदलाव की सुगबुगाहट सेलावन भरी ठंडी हवा के झोंकों की तरह बहने लगी। क्या नेता, क्या विक्रेता, सब बदले
 
मनोज द्विवेदी
Dec 29 2009 11:52 AM
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स्लुम्दोग तमाचा! इस्माईल इंडिया इस्माईल

बरसों का सुखा ख़त्म ! मुस्कुराइए जनाब अब आप भी सीना तान कर कह सकते हैं की हम भी ओस्कर जीत चुके हैं। मगर किस कीमत पर इसपर भी गौर जरुर फर्मैएयेगा! सीने पर तगमा जरुर जड़ दिया गया है लेकिन गाल पर जो तमाचा पड़ा है उसकी भी गूंज जरुर सुन लीजिये। मै और मेरे क
 
मनोज द्विवेदी
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पंधेर को मिली फंसी, अंधेर गर्दी में और भी हैं......

नॉएडा के बहुचर्चित निठारी कांड में आज फैसले का दिन था। कोर्ट ने पापी पंधेर और खून की होली खेलने वाले सुरेंदर कोली को फांसी की सजा सुनाई है। फैसला सुनते ही वहां मौजूद सैकड़ों लोगों के चेहरों पर खुसी की लकीरें स्पस्ट दिखलाई दे रही थी। इसके आलावा भी देश
 
मनोज द्विवेदी
Dec 29 2009 11:52 AM
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क्रिसमस क्रिसमस हैप्पी क्रिसमस

जिंगल वेल जिंगल वेल...से ही मेल खाता गाना थ्री इडियट्ïस फिल्म में भी है जो आज की कर्णप्रिय मानी जाने वाली धुन में सुबह से ही कानों में रस घोल रहा है। ऑल इज वेल॥ जिंगल वेल के मौके को कैश करने का अपना इंडियन स्टाइल है। आप इसे इडियटपना कहें तो अपनी समझ
 
मनोज द्विवेदी
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दिल्ली की सर्दी ठंडा ठंडा कूल कूल

सर्दियों में सर्दी, उस पर भी दिल्ली की सर्दी! यह तो वही बात हो गयी कि एक तो करेला दूजे नीम पर चढ़ गया। फिल्मों के गीतों में, कहानियों में न जाने कितनी बार दिल्ली की सर्दी का जिक्र आया है। मगर, सच्चाई इधर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। सच तो यही है क
 
मनोज द्विवेदी
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आईटी दूल्हा हाईटेक दुल्हन

दूल्हा शब्द अपने आप में ही इतनी शक्ति रखता है कि हर कुंवारे के रोम-रोम में झूरझूरी पैदा हो जाती है। आप इस झूरझूरी को मोबाइल के वायब्रेशन से कंपेयर कर सकते हैं। क्योंकि हाईटेक ज़माना है और इस कंम्यूटरीकृत माहौल में हिंग्लिश ज्यादा समझ में आती हैं, इसल
 
मनोज द्विवेदी
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बीच बाजारी इन नैनन से

एक दिन सपने में खोया हुआ था। सपने में बस यूं ही सुबह के वक्त टहलने निकला तो सोचा कि चलो कुछ वर्जिस हो जायेगी और बाजार का हाल समाचार भी मिल जायेगा। कॉलोनी से कुछ ही दूर आया था कि किराने की दुकान पर मक्खी मार रहे दुकानदार को देखकर चौंक गया। यह वही दुका
 
मनोज द्विवेदी
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कलजुग में राम नही बस रावण रावण

कलजुग में रामायण नहीं बस रावण-रावणमियां मुसद्ïदी लाल तनतनाये हुये हमारी तरफ ही चले आ रहे थे। आपको बता दूं कि मियां मुसद्ïदी लाल हमारे पड़ोसी हैं और हमारे मुंह लगे मित्र भी। जब कभी भी सुबह के समाचार से उन्हें व्यभिचार, अत्याचार, फर्जी प्रचार या पंचरंग
 
मनोज द्विवेदी
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स्कुल में ग्रेडिंग सिस्टम नही सिस्टम में ग्रेडिंग की सोचिये

एक बार की बात है, पूरब देश में शिक्षा को लेकर बड़ी बहश चली। बहश भी ऐसी की हर कोई शामिल, छोटा बड़ा मंझला कोई नही छुटा। चारों ओर घोर चिल्ल-पों की आवाज आने लगी , कभी रंगीन शीशे के पीछे बैठकर ग्रेडिंग सिस्टम का गुडा- गडित समझाना तो कभी बहस बाजी करके इसके
 
मनोज द्विवेदी
Sep 17 2009 07:18 PM
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रंगीन चश्मा

ज्यादा देर कंप्यूटर पर कम करने से कुछ हो न हो लेकिन ऊपर वाले की सबसे बड़ी नियामत आंखे! थोडी परेशां सी रहती हैं। आँखों की तकलीफ और अपना बटुआ खंगालने के बाद यह फैसला ले पाया की एम्स में दिखाना ही ठीक रहेगा..कम पैसे में कम बन जायेगी। आँखों में सपने पैदा हो
 
मनोज द्विवेदी
Sep 10 2009 11:31 AM
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ओये गे गे क्या करता है बे?

दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद देखिये कैसी उधम मची हुई है। फ़िल्म वाले तो जान छिड़क रहे हैं..शायद अपनी हेरोइनो और साथी महिला कलाकारों से पेट भर गया है। इसलिए नए टेस्ट के लिए दांत चियाड़ रहे हैं। पुरी दुनिया में भारत का संदेश गया हैं की देखो हम भ
 
मनोज द्विवेदी
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एसी कोच में बीड़ी का सुट्टा

हमारे देश को अंग्रेज पोंगा पंथियों का देश कहा करते थे। ये सच भी लगता है क्योंकि यहाँ दिखावट का ही जलवा है। जैसा दिखा दीजिये, लोगों को चुतिया बना सकते हैं। जैसा की हाल ही में पकड़े गए दशियों ठगों ने किया था। एक साधारण चोर थे लेकिन उन्होंने लोगों को ऐस
 
मनोज द्विवेदी
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एक अरब भूखे? भर पेट खाए तब भी मरेंगे!

अभी-अभी ख़बर मिली है की इस साल पुरी दुनिया में भूखों की संख्या १ अरब का आंकडा भी पर करने जा रही है। खाद्य और कृषि संगठन की ताजा रिपोर्ट में यह कहा गया है की इस साल वित्तीय संकट के चलते करीब १ अरब २ करोड़ लोग प्रतिदिन भूखे पेट सोयेंगे। जाहिर है इसमे भी
 
मनोज द्विवेदी
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असली खिलाड़ी हैं टीम पाकिस्तान के !

एक सही और सच्चे क्रिकेट प्रेमी होने के नाते मैं अपनी टीम का तो प्रसंसक हू ही और आजीवन रहूँगा भी। लेकिन मुझे क्रिकेट का खेल भी उतना ही पसंद है जितनी अपनी टीम इंडिया। हार और जीत खेल का हिस्सा होता है और क्रिकेट जैसे खेल में कोई शास्वत विजेता नही रह पाय
 
मनोज द्विवेदी
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चाटुकारों जय हो!!

जबसे यूपीए सरकार को बहुमत मिला है..तभी से जैसे सारे लोग अंधे हो गए है , या यूँ कहिये की अंधभक्ति की नई परिभाषा गढ़ने के लिए लालायित नज़र आ रहे हैं। यही मीडिया कल तक दोनों क्या चारों मोर्चों के बिच कांटे की टक्कर बता कर जनता को गुमराह करने की पुरी कोशि
 
मनोज द्विवेदी
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इंसानों की इस बस्ती में

इंसानों की बस्ती में हम भी थे इन्सान यहाँ इंसानों की इस नगरी में अब बसते हैं इन्सान कहाँ जब बसते ही इन्सान नहीं तो हम खुद को क्यू इन्सान कहें क्यूँ प्रेम, जलन और नफ़रत की पीडा को हम यूँ ही सहें इसलिए छोड़ दी हमने भी इंसानों सी हरकत करना क्या बस जीना ही
 
मनोज द्विवेदी