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31 Dec 2009
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गिनने लगा

मुफलिसी में, घर में सबकी ख़ामियाँ गिनने लगा हद तो ये, मैं बालकों की रोटियाँ गिनने लगा
 
adab-ghar
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ऐलान

ऐलान उसका देखिये, के वो मज़े में है या तो कोई फ़क़ीर है, या फिर नशे में है दौलत बटोर ली मगर अपने तो खो दिये और वो समझ रहा है, बड़े फ़ायदे में है
 
adab-ghar
Dec 29 2009 11:50 AM
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माई....

लाल तेरा कमाल है माई सुनके कितनी निहाल है माई जिनके सर का बवाल है माई उनपे कैसी निहाल है माई चैन से सो रहे हैं क्यूं बच्चे रोटियों का कमाल है माई भूख़ हो तो भजन नहीं होता इक पुरानी मिसाल है माई तेरी ख़िदमत करेंगे ये बच्चे सिर्फ़ तेरा ख़याल है माई नाम बेट
 
adab-ghar
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रोटी सस्ती कर दो

रोटी सस्ती कर दो तो कुछ बात बने मोबाइल सस्ते करने से क्या होगा
 
adab-ghar
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देख ले

मिट गये हम उफ़ न की है देख ले किस कदर दीवानगी है देख ले ज़िन्दगी भर साथ देने की कसम यार पूरी ज़िन्दगी है देख ले ये हवेली कल शहर की शान थी आज ये सूनी पड़ी है देख ले इससे पहले मैक़दा हो जाये बन्द ख़त्म है या कुछ बची है देख ले
 
adab-ghar
Dec 29 2009 11:50 AM
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adab-ghar

जान देते थे वो इस बीमार पर अब दुआओं के भी लाले पड़ गये एक मैख़ाना शहर मे क्या खुला मन्दिरो-मस्ज़िद मे तले पड़ गये ढूंढने निकला था सच्चा आदमी ये हुआ पैरों मे छाले पड़ गये
 
adab-ghar
Dec 29 2009 11:50 AM
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आज़ादी

कोई ताक़त के दम पर कुछ करे,कर ले हमे क्या है इसे कहते हो आज़ादी, तो तुमको ही मुबारक हो
 
adab-ghar
Dec 29 2009 11:50 AM
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adab-ghar

ये रहबर सारे के सारे, जाने क्यूं झूठे लगते हैं .................................................................................. मुझको आज़ादी के नारे, जाने क्यूं झूठे लगते हैं
 
adab-ghar
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अपनापन

सपने सच करने की धुन में, अपने सब खो जायेंगे अपनों से, अपनापन रखना, सपने सच हो जायेंगे हासिल तो क्या होना है बस, भरम तेरा रह जयेगा तेरे आगे, अपने दुखड़े, चल, हम भी रो जायेंगे तनख़्वाह दूर, खिलौनों की ज़िद, और बहाने बचे नहीं आज, देर से घर जाना है, बच्चे ज
 
adab-ghar
Dec 29 2009 11:50 AM
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शरारत

आज बीवी हसीन लगती है मेरी ऐनक बदल गई शायद
 
adab-ghar
Dec 29 2009 11:50 AM
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adab-ghar

मज़हब का जज़्बा जब दिल मे जगने लगता है मासूमो का ख़ून भी मीठा लगने लगता है
 
adab-ghar
Dec 29 2009 11:50 AM
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यारो

ये जो सर पर उधार है यारो जग-दिखावे की मार है यारो तुम समझते हो उसको आवारा वो तो बे-रोज़ग़ार है यारो......
 
adab-ghar
Dec 29 2009 11:50 AM
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friendship day

दुश्मनी के नाम सारी ज़िन्दगी दोस्ती के वास्ते बस एक दिन
 
adab-ghar
Dec 29 2009 11:50 AM
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adab-ghar

कैसे कैसे हैं, हमारे रहनुमा कल हक़ीकत हो गई सबकी बयाँ...
 
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शातिर हो गया

या मेरा दुश्मन ही शातिर हो गया या कोई अपना ही मुख़बिर हो ग्या तू जुदा होना था आख़िर हो गया पर तेरा किरदार ज़ाहिर हो गया मैं जो इस महफ़िल मे हाज़िर हो गया क्या बताऊं किसकी ख़ातिर हो गया जो मकाँ मुझसे नहीं बन पाया “घर” माँ का आना था कि मन्दिर हो गया हर कोई क
 
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कब तक

उनसे अपनापन कब तक आख़िर ये उलझन कब तक इक दिन तो सच कहना था रखता उनका मन कब तक देखें इन दीवारों से बचता है आँगन कब तक अपना चेहरा पहचानो बदलोगे दरपन कब तक
 
adab-ghar
Dec 29 2009 11:50 AM
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दूध

लाख दुनिया के रंजो-ग़म लेंगे तेरे अहसान अब, न हम लेंगे अबके अम्मा की आँख बननी हैं आज से दूध थोड़ा कम लेंगे
 
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सोच तो दूर

सोच तो दूर, तमन्ना जो बता दूं अपनी जाने कितनों कि निगाहों से उतर जाउंगा
 
adab-ghar
Dec 29 2009 11:50 AM
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समझते हैं

ख़ुद को वो पारसा समझते हैं और हमको बुरा समझते हैं मानते हैं किसी ख़ुदा को वो हम किसी को ख़ुदा समझते हैं सामना कैसे करूं मैं उनका वो मुझे बा-वफ़ा समझते हैं आपकी बात का यक़ीन करूं क्या मुझे बावला समझते हैं
 
adab-ghar
Dec 29 2009 11:50 AM
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रिटायर्ड – हर्ट

जब तक मेरी ज़रूरत थी घर में कितनी इज़्ज़त थी खपता रहा ज़िन्दगी भर जितनी मुझमे ताक़त थी बेटों के घर हफ़्ता भर बस रहने की मोहलत थी बहुओं का तो नाम था बस सब बेटों की हरकत थी सोच ले ऐ बच्चों की माँ यही हमारी क़िस्मत थी
 
adab-ghar
Dec 29 2009 11:50 AM
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याद आये

ज़िद पर बाबूजी के चांटे याद आये फिर अम्मा के आटे-बाटे याद आये बाबूजी की बेंत देखते ही मुझको यारों के संग सैर-सपाटे याद आये इतने दिन मेरे घर, इतने भाई के दिन कैसे माँ-बाप के बाँटे याद आये
 
adab-ghar
Dec 29 2009 11:50 AM
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इक राज़

इक राज़ बताया हमे, आँखों के नीर ने पीरों को पीर कर दिया, दुनिया की पीर ने चिडियों को चुगते देखी रहा था, कि अचानक हँस कर कटोरा फेंक दिया इक फ़क़ीर ने मजबूरियों की आड़ मे, गिरता चला गया रोका तो था मुझे बहुत, मेरे ज़मीर ने उस बादशाह का कोई मोहरा नहीं पिटा दी
 
adab-ghar
Dec 29 2009 11:50 AM
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आर्ट गैलरी

लाखों बच्चे तरसें, दाने दाने को भूखे बच्चों की तस्वीरें लाखों की
 
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उसकी पाक़ीज़गी

उसकी पाक़ीज़गी की बात मैं करूं दिन भर ख़्वाब में, बे-लिबास कर के नौचता हूँ उसे
 
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adab-ghar

saare dearo .....ha ha ha ....main to aapaki pratikriyaon kaa jabaab bhi denaa naheen jaanataa ......krapyaa apanaa mob no. apani prtikriyaa ke saath bhejane kee meharbanee karen....meet bahi.....udan tashtari ji aur sabhee....
 
adab-ghar