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छंद प्रसंग

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16 Jun 2010
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छंद प्रसंग

धार पर हम -2 : लोकार्पण और विमर्श(प्रस्तुति:विनोद श्रीवास्तव,कानपुर)11 मई,कानपुर,जुहारीदेवी महिला महाविद्यालय के प्रांगण में गीतकार वीरेन्द्र आस्तिक द्वारा सम्पादित धार पर हम-2 का लोकार्पण सम्पन्न हुआ। इस समारोह का आयोजन काव्यायन ,जनसंवाद तथा बैसवारा शोध
 
भारतेंदु मिश्र
Jun 17 2010 07:08 AM
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गीत के विविध आयाम :

                                       (चित्र में प्रो.सिदूर भाषण
 
भारतेंदु मिश्र
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छंद प्रसंग

समीक्षा
 
भारतेंदु मिश्र
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छंद प्रसंग

मदारी की लड़की(from,anubhooti.com)मदारी की लड़कीसपनों की किरचों पर नाच रही लड़की। अपने ही झोंक रहे चूल्हे की आग मेंरोटी पानी ही तो है इसके भाग मेंसंबंधों के अलाव ताप रही लड़की।ड्योढी की सीमाएँ लाँघ नही पायी है आज भी मदारी से बहुत मार खायी हैतने हुए तारों
 
भारतेंदु मिश्र
May 09 2010 12:41 PM
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छंद प्रसंग

1.गुजरिया रह-रह घबराता है अब मोरा जिया चलो चलें गोदना गोदाये पिया। हाथों मे हाथ लिए मेले मे साथ चलें मैं सब कुछ हार चुकी तुम सब कुछ जीत चुके तुम्ही कहो जादू ये कौन सा किया। दाहिनी कलाई पर नाम मै लिखाऊँगी गाँव की गुजरिया हूँ भूल नही पाऊँगी लुका छिपी मे अब
 
भारतेंदु मिश्र
May 09 2010 12:17 PM
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छंद प्रसंग

अशोक पाण्डेय अशोक की षष्ठिपूर्ति छन्द प्रसंग के अप्रतिम हस्ताक्षर अशोक पाण्डेय अशोक छन्दविधा के आचार्य कवि हैं। उन्हे छन्दविधा की यह अप्रतिम कला अपने पिता स्व.गोमती प्रसाद पाण्डेय कुमुदेश से संस्कार रूप में प्राप्त हुए।मैने ही नही लखनऊ और आसपास के नमालूम
 
भारतेंदु मिश्र
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छंद प्रसंग

समीक्षा 1. परवरिस बिना बढते जन के गीत *भारतेन्दु मिश्रभगवत दुबे छन्द विधाके महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं।वे जबलपुर की कादम्बरी संस्था के नाते भी चर्चित हैं।‘हम जंगल के अमलतास’ उनका नवीनतम गीत संग्रह है।संग्रह में कुछ नवगीत भी स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं।
 
भारतेंदु मिश्र
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दाम्पत्य का आदर्श

दाम्पत्य का आदर्श (तुलसी कृत कवितावली से)जलको गये लक्खन हैं लरिका परिखौ पिय छाँह घरीक ह्वै ठाढे पोछि पसेऊ बयारि करौं अरु पाँय पखारिहौं भूभुरि डाढे तुलसी रघुबीर प्रिया स्रम जानिकै बैठि बिलम्ब लौ कंटक काढे जानकी नाह को नेह लख्यो पुल्क्यो तन बारि बिलोचन
 
भारतेंदु मिश्र
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बातचीत

नवगीतकार :योगेन्द्रदत्त शर्मा भारतेन्दु मिश्र आजकल साहित्यिक मासिक पत्रिका के सम्पादक,अनेक विधाओ के यशस्वी रचनाकार,डाँ योगेन्द्रदत्त शर्मा न केवल श्रेष्ठ नवगीतकार है बाल्कि कथाकार के रूप मे भी चर्चित रहे है । अगस्त 2010 मे योगेन्द्र जी अपने जीवन के साठ
 
भारतेंदु मिश्र
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(शोक गीत)

युवा कवि रामलखन के असामयिक निधन पर रामलखन तिकड्म की दुनिया मे रहकर बहुत जी गये रामलखन बडे बडो के बीच छुपे रुस्तम निकले तुम रामलखन। अपनी शर्तो पर जीने का हस्र यही सब होना था घरवालो को बीच राह मे छोड गये तुम रामलखन। कविता छूटी दुनिया छूटी सारे सपने छूट
 
भारतेंदु मिश्र
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छंद प्रसंग

सातवें आसमान के कवि भारतेन्दु मिश्र छंदोबद्ध कवियों मे जबरदस्त आत्ममुग्धता का गुण पाया जाता है।कभी कभी यही आत्ममुग्धता कवि के विकास में बाधक बन जाती है। तुकों-छंदों की पादपूर्ति करते करते वह यह भी भूल जाता है कि उसका उद्देश्य कविता लिख़ना है और दूसरे
 
भारतेंदु मिश्र
Dec 29 2009 12:01 PM
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अमृत महोत्सव

छंद प्रसंग के केन्द: पं. देवेन्द्र शर्मा इन्द्र के पिछत्तर वर्ष पूरे होने पर यात्रा पिछत्तर वर्ष की भीगा हुआ मन का पुलिन है व्यक्त कर पाना कठिन यह शुभ दिवस है जन्म दिन उस सूर्य का । जिससे प्रकाशित हृद-गगन है गंधमय जिसका सृजन आलोकधर्मा प्रतिफलन वैदूर्
 
भारतेंदु मिश्र
Dec 29 2009 12:01 PM
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छंदप्रसंग के आदर्श :

जयदेव: जयदेव का आविर्भाव ग्यारहवी शती में हुआ।उनकी कृति गीतगोविन्द भारतीय साहित्य में मील का पत्थर मानी जाती हैं। जयदेव युगप्रवर्तक कवि के रुप मे जाने जाते हैं।जयदेव में कवि प्रतिभा के साथ- साथ दर्शन ,कला धर्म ,और संस्कृति की अनेक लोकोन्मुख परंपरायें
 
भारतेंदु मिश्र
Dec 29 2009 12:01 PM
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छंद की शक्ति

छंद हमारे जीवन की शक्ति है . छंद मनुष्य होने की पहचान है . अच्छी छंदोबद्ध कविता मनुष्य की प्रगतिशीलता के द्वार खोलती है . मानवीय सभ्यता का इतिहास इस बात का साक्षी है . अच्छी गजलें और गीत ताउम्र लोगों की जुबान पर चढ़े रहते हैं . असल में गतिशीलता बनाये
 
भारतेंदु मिश्र
Dec 29 2009 12:01 PM
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वंदना

भारति जय विजय करॆ कनक शस्य कमल धरॆ लंका पदतल शतदल गर्जितोर्मि सागर जल धोता शुचि चरण युगल स्तवकर बहु अर्थ भरॆ भारति जय विजय करॆ निराला
 
भारतेंदु मिश्र
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छंद प्रसंग जनवरी, 2009

प्रिय पाठक , नया साल आपके जीवन को नई स्फूर्ति से भर दे। समृद्धि सदैव बनी रहे और उन्नति के मार्ग हमेशा खुले रहें। – भारतेंदु मिश्र
 
भारतेंदु मिश्र
Dec 29 2009 12:01 PM
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श्रृद्धांजलि

न होना नईम का भारतेन्दु मिश्र गीत नवगीत की समकालीन काव्य धारा के प्रमुख कवि नईम नही रहे। जैसा कि उनके गीत की निम्न पंक्तियों में ध्वनित होता है- काशी साधे नही सध रही, चलो कबीरा मगहर साधें सौदा सुलुफ कर लिया हो तो, चलकर अपनी गठरी बाँधें । अपनी गठरी हर
 
भारतेंदु मिश्र
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छंद प्रसंग

छंदप्रसंग के आदर्श:आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री डॉ. भारतेन्दु मिश्र सब अपनी अपनी कहते है। कोई न किसी की सुनता है ,नाहक कोई सिर धुनता है दिल बहलाने को चल फिर कर,फिर सब अपने में रहते है। सबके सिर पर है भार प्रचुर,सबका हारा बेचारा उर अब ऊपर ही ऊपर हँसते,भ
 
भारतेंदु मिश्र