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22 Mar 2010
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माया की माला की माया

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने स्वयं को दलितों व पिछड़ों का मसीहा बनाने या दिखाने के लिए जितने प्रयास किए, वे ही उन्हें विवादों में डालते गए। किन्तु मायावती ने इस बात की तनिक भी परवाह नहीं की कि कौन क्या कह रहा है। हर विरोध इस तर्क की बलि चढ़ता
 
श्याम नारायण प्रधान
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महिला आरक्षण और राजनीति का खेल

केंद्र सरकार ने महिलाओं को संसद और विधान सभाओं में ३३ प्रतिशत आरक्षण देने के लिए एक कदम बढ़ा लिया है। राज्य सभा में इस विधेयक को पारित कराने में बेशक काफी हंगामा हुआ। विभिन्न दलों के सात सांसदों का निलंबन भी देखा गया। मजेदार पहलू यह है कि यादव बंधुओं के
 
श्याम नारायण प्रधान
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फिदा हुसैन का विदा होना

हुसैन साहब विदा हो गए हैं। कतर के नागरिक हो गए हैं। इसलिए कि भारत में, उनके अपने देश में उन्हें पराया कह दिया गया। बड़े ही अफसोस की बात है। हुसैन साहब चित्रकार हैं, बड़े चित्रकार हैं- देश के ही नहीं, दुनिया के बड़े चित्रकार। उनका जितना मान अपने देश में
 
श्याम नारायण प्रधान
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अपराध और राजनीति-1

राजनीति में अपराधियों की जिस जमात पर हमारा सारा जोर रहता है, उससे इतर हमारे पास कुछ ऐसे शरीफों की भी जमात है जो बस दिखती शरीफ है। इनमें वे सारे लोग आते हैं जो प्रशासन का अंग हैं और उनकी मर्जी के बिना लोगों का काम नहीं हो सकता। बिना रिश्वत दिए कोई काम
 
श्याम नारायण प्रधान
Dec 29 2009 12:02 PM
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अपराध और राजनीति

लोकतंत्र की जो सबसे बड़ी ताकत है, लगता है वही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गई है। ताकत तो है सबकी भागीदारी लेकिन अपराधियों के मैदान में आ जाने से इसका प्रभामंडल हल्का हो गया है। अपराधियों ने अपने अपराधों की कालिख से बचने के लिए राजनीति की चमक का सहारा ले ल
 
श्याम नारायण प्रधान
Dec 29 2009 12:02 PM
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क्या जनता चाहती है जागना

आम चुनाव होने वाले हैं। चुनावी शोर बढ़ने लगा है। हर कोई जनता को जगाने की वकालत कर रहा है। मानो जनता सो रही है और चुनाव के नगाड़ों का शोर उन्हें जगा नहीं पा रहा है। कोई लीड इंडिया कह रहा है तो कोई जागो रे चिल्ला रहा है, कोई जन जागरण अभियान चला रहा है त
 
श्याम नारायण प्रधान
Dec 29 2009 12:02 PM
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छत्तीसगढ़ के पुलिस वालों के लिए मोमबत्ती जलेगी क्या?

जब कुछ लोगों की वीरता और कर्त्तव्यनिष्ठा का गुणगान किया जा रहा हो तो तीखे सवाल उठाना बेअदबी के दायरे में आ सकता है। इसे बेसिरपैर की बातें कह कर टाला भी जा सकता है। लेकिन उन सवालों की अनदेखी उन लोगों पर संदेह की कालिख गहराई से पोत सकती है, जिनसे ये सव
 
Shyam N P
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कितने दलों की जरूरत है

यह लोकतंत्र की ही महिमा है कि राजनीतिक दलों की भरमार हो गई है और यही इसकी ताकत भी है । हर दल अपनी अपनी ताकत के सहारे यह साबित करने में जुटा है कि उसका दल ही इस देश को आगे ले जा सकता है , लोकतंत्र को मजबूत बना सकता है । उनका सोचना भी सही है । क्यों कि
 
Shyam N P
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दल और गठबंधन

यह लोकतंत्र की ही महिमा है कि देश में राजनीतिक दलों की भरमार हो गई है और शायद यही इसकी ताकत भी है। हर दल अपनी अपनी ताकत के सहारे यह साबित करने में जुटा है कि उसका दल ही इस देश को आगे ले जा सकता है, लोकतंत्र को मजबूत बना सकता है। उनका सोचना भी सही है।
 
Shyam N P
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