आओ चुगली लगायें's Image

आओ चुगली लगायें

http://chughalkhor.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
08 Mar 2010
कुल प्रविष्टियां
25
पाठक भेजे
528
पसंद
21
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
21.12
पसंद करें
0
नापसंद करें

ये कैसी पत्रकारिता

पत्रकार रहते पत्रकारिता पर लिखना काफी मुसीबत भरा काम है। ये ठीक वैसा ही है जैसे तालाब में रहकर मगरमच्छ को चुटकी काट लेना। फिर भी आज मन नहीं मान रहा। लखनऊ के हमारे एक पत्रकार बंधू हैं जिनसे जुडी घटना का ज़िक्र अपने ब्लॉग पर ना कर पाऊं तो आत्मग्लानी मुझे
 
जैगम मुर्तजा
Feb 12 2010 12:00 PM
पसंद करें
1
नापसंद करें

गंगा के लिए एक नयी पहल

गंगा सिर्फ एक नदी नहीं बल्कि पूरी सभ्यता है। इस के दोनों तटों पर मानवीय जीवन का विकास हुआ । मगर लगता है की यही विकास विनाश का रूप लेता जा रहा है। गंगा की जैव विविधता खतरे में है और उसे बचाने की ज़िम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं है। गंगा के एकमात्र रामसर
 
जैगम मुर्तजा
टैग: गंगा
पसंद करें
0
नापसंद करें

चुगलखोरी के फायदे

झूठ और सच के साथ चुगलखोरी का अनूठा रिश्ता है। एक चुगलखोर को अमूमन झूठा साबित करने की कोशिशें लगातार की जाती हैं मगर असलियत यही है की चुगलखोर से ज़्यादा सच कोई बोलता भी नही। एक चुगली लगाने में कितनी मशक्क़त करनी पड़ती है, इस बात को इस जालिम ज़माने में
 
जैगम मुर्तजा
पसंद करें
1
नापसंद करें

गंगा को मैला किस ने किया ?

राजा भागीरथ अपने पूर्वजों को श्राप से मुक्ति दिलाने के लिए अथक परिश्रम कर गंगा को धरती पर लाये थे। उनके गणों को तो मुक्ति मिल गई मगर गंगा धरती पर आकर मैली हो गई। आज गंगा को प्रदूषण के श्राप से मुक्ति दिलाने के लिए कोई भागीरथ नही मिल रहा। यह कोई एक कह
 
जैगम मुर्तजा
पसंद करें
0
नापसंद करें

आओ लोहिया जी के लिए राजनीती राजनीती खेलें!!!

लोहिया जी की पुण्य तिथि है। आओ चलो राजनीती राजनीती खेलते हैं। इस से बेहतर श्रधांजलि हम उन्हें दे भी नही सकते। अब हमारे ज़माने में सिद्धांत, राजनैतिक मूल्य और राजनैतिक सोच जैसी चीज़ें तो बची नही हैं। ना ही हमारे पास लोहिया जैसी दृढ इच्छा शक्ति है और न
 
जैगम मुर्तजा
पसंद करें
0
नापसंद करें

चिट्ठाजगत को बचाइए प्लीज़ !!!

क्या हम लोग आज़ादी के मायने जानते हैं? ये एक ऐसा सवाल है जिस से हम आजादी के बासठ से ज़्यादा साल गुज़र जाने के बाद भी जूझ रहे हैं। जवाब भी सीधा सा है। हम आज़ादी के साथ जीना सीख गए गए हैं और इस हद तक आजाद हैं के अब दूसरों की आज़ादी में खलल पैदा करने लगे ह
 
जैगम मुर्तजा
पसंद करें
0
नापसंद करें

राष्ट्रीयता, धर्म और हम!

राष्ट्रीय राजमार्ग 24 अब चार लेन का है और जल्दी ही 6 लेन का भी हो जाएगा। इतना ही नही सड़क के बीच में एक हरित पट्टी भी है जो कम से कम 5 फीट चौडी तो है ही। ज़ाहिर है इतने सब के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को वाया मुरादाबाद लखनऊ से जोड़ने वाले इस राजमार्
 
जैगम मुर्तजा
पसंद करें
0
नापसंद करें

छात्राओं के कमरे में असमय क्यो गए ए एम यू के वी० सी० ?

क्या एक कुलपति को अधिकार है कि वो लड़कियों के कमरे में बगैर अनुमति लिए घुस जाए ? या फिर लड़किओं के हॉस्टल का समय, बे- समय दरवाज़ा खटखटा दे? कोई माने ना माने, मगर अलीगढ मुस्लिम विश्विद्यालय के कुलपति को इस बात से कोई फर्क नही पड़ता की वो जिस कमरे में वह
 
जैगम मुर्तजा
पसंद करें
0
नापसंद करें

कहाँ है बया का घोंसला ?

शायद आपको याद हो कि बचपन में एक गौरय्या नाम की चिडिया आपके घर आँगन में फुदकती फिरती थी? आपको भी याद नही आ रहा? कोई बात नही। बया का घोंसला तो याद होगा? जी हाँ वही। खूबसूरत सा, ऊंचे ऊंचे पेड़ों पर लटका रहने वाला। ज़रा घर से बाहर निकल कर देखिये। कहीं मिल
 
जैगम मुर्तजा
पसंद करें
0
नापसंद करें

गंगा की गोद में .

आज पित्र विसर्जन अमावस्या थी सो मैंने सोचा क्यों ना मै भी गंगा स्नान कर ही आऊं। सौभाग्य से गंगा मेरे घर से महज़ छै: किलोमीटर की दूरी पर है बहती है। हालाँकि 'बहती' शब्द का इस्तेमाल पर कुछ लोग अतिशयोक्ति कहकर आपत्ति लगा सकते हैं फ़िर भी गंगा तो बहती ही है।
 
जैगम मुर्तजा
पसंद करें
0
नापसंद करें

आरुशी का कातिल कौन?

आरुशी तलवार हत्याकांड में एक बार फिर सी०बी० आई० के हाथ जांच में निराशा ही लगती दिख रही है। जिस मोबाइल फ़ोन के दम पर खबरिया चैनल जाँच एजेंसियों के हाथ कातिल तक पहुँचने का दावा कर रहे थे वो किसी काम का भी नही निकला। एक तो सोलह महीने बाद किसी फ़ोन से डाटा
 
जैगम मुर्तजा
पसंद करें
0
नापसंद करें

बेरंग पान, बेनूर होंट

अगर आप पान खाने के शौकीन हैं तो आपकी सेहत के साथ साथ जेब के लिए भी बुरी ख़बर है। मौसम की मार और बीमारी के चलते इस बार पान की फसल को काफ़ी नुकसान हुआ है। इसका सीधा असर बाज़ार में पान की कीमतों पर पड़ा है। आम तौर पर दो से तीन रूपये में बिकने वाले सादे पान के
 
जैगम मुर्तजा
Sep 15 2009 07:33 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

बादल हुए बेईमान सजनी...

बरसात के मायने ही बदल गए लगते हैं। अब ना वो पहले जैसी झमाझम बारिश होती है और ना ही पहले जैसे कजरारे बादल आसमान पर नज़र आते हैं। याद आते हैं वो दिन जब पानी में कागज़ की कश्तियाँ मन की हिलोरों सी डोलती हुई दूर निकल जाती थीं। जगह जगह भरे हुए पानी में घर
 
जैगम मुर्तजा
पसंद करें
0
नापसंद करें

बारिश पर सट्टा लगाओगे क्या?

चार दिन की लगातार बारिश ने लोगों को परेशान कर दिया। और लोगों को भी क्या, सच कहिये तो खुदा की ख़ुद की परेशानी बढ़ा दी। हर तरफ़ से एक ही आवाज़, 'भगवान् बस भी करो'। अल्लाह भी परेशान, ये आदमी है या कुछ और? अरे कोई जुबां भी है इसकी? अभी कल तक तो इन सबकी साझा
 
जैगम मुर्तजा
Sep 12 2009 04:14 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

दिल्ली में दिल नही लगता...

उस रोज़ जाने मेरा वक्त ही ख़राब आया था या फिर नियति को यही मंज़ूर था, कि मैं दिल्ली चला गया। दिल्ली यूँ तो मुझ से कभी दूर नही रही मगर ना जाने क्यों दिल्ली जाकर हमेशा ही मेरा दिल उचाट हो जाता है। इस में दिल्ली का कोई दोष नही। दोष तो मेरी आदतों का है जो
 
जैगम मुर्तजा
Sep 12 2009 03:39 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

जब गीदड़ कि मौत आती है...

कहते हैं की जब गीदड़ की मौत आती है तो वो शहर की तरफ़ भागता है।मगर आजकल ऐसा नही होता। शहर जंगल की तरफ़ भाग रहे हैं और रफ्तार भरे हाईवे गीदड़ की मौत का कारण बन रहे हैं। जी हाँ अब गीदड़ मरने के लिए शहर नही आता बल्कि सिर्फ़ हाईवे पार करने की कोशिश करता
 
जैगम मुर्तजा
पसंद करें
1
नापसंद करें

छक्को के खेल में विश्व विजेता जी हार

भारत भर में धोनी की टीम का मर्सिया पढ़ा जा रहा है। २०-२० विश्व कप में भारत की असमय विदाई क्या हुई मनो हर तरफ शोक ही शोक। आखिर क्रिकेट भारत में किसी धर्म से तो कम नहीं। मगर चलो अच्छा ही है। कम से कम दूसरे खेलों से जुड़े लोगो के लिए तो ये तसल्ली की ही बा
पसंद करें
2
नापसंद करें

एक रोती कराहती नदी का अफसाना

गंगा नदी से मात्र दस किलोमीटर दूर , राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या २४ पर ओद्योगिक नगरी के रूप में विकसित होता एक छोटा सा कस्बा है गजरौला। यहाँ के लोग अक्सर दावा करते हैं कि मुंबई के बाद शायद गजरौला ही है जो कभी नही सोता। आप रात को किसी भी समय यहाँ उतर जाइ
पसंद करें
1
नापसंद करें

पानीपत का तीसरा , चौथा और पांचवा युद्घ : अर्थार्थ भाजपा की कहानी

भाजपा में घमासान मची है। हारी हुई सेना के सेनापति एक दूसरे के खून के प्यासे हो रहे हैं। दल साफ़ तौर पर दोगुटों में बटा नज़र आ रहा है। एक दल जड़ो की और वापसी का नारा दे रहा है तो दूसरे को विचारधारा में ही खोटनज़र आ रहा है। कुछ सेनानी मात्र संगठन राष्ट्रीय
पसंद करें
1
नापसंद करें

लालू जी को गुस्सा क्यों आता है ?

लालू जी नाराज़ हैं पर अपनी नाराजगी छिपा नही पाते। दिल में एक टीस सी है। लाख दबाना चाहते हैं मगर दर्द है की जुबां पर आ ही जाता है। अब जुम्मा जुम्मा चार दिन ही की तो बात है। ठाट से सत्ता के गलियारों में दनदनाते फिरते थे। उनकी रेल थी की बगैर सिग्नल दस ज
पसंद करें
3
नापसंद करें

संसद में स्वीट डिश...

आधी आबादी का दर्द सीने में पालकर भारत सरकार संसद में महिला आरक्षण बिल पास करवाने की जुगत में है। शरद यादव के बाद अब मुलायम सिंह यादव इसके विरोध में सामने आए हैं। इधर युवा एजेंडे को आगे बढ़ाने में लगी कांग्रेस किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नही है।
पसंद करें
2
नापसंद करें

ओबामा की उलट बंसियां

बुश अंकल आजकल काफ़ी परेशान हैं। पता नही ये ओबामा को क्या हो गया है? जहाँ देखो अनाप शनाप बक आते हैं। एक तो पहले से ही छवि ख़राब थी अब पता नही कहीं मुह दिखाने लायक छोडेंगे भी या नही? अब देखो तो सही, अच्छा खासा मिस्र घूमने गए थे और जाने क्या अनाप शनाप ब
पसंद करें
1
नापसंद करें

चीन का प्यार , चीनी कि मार

चुगलखोर को समाचार मिला है कि चीनी के दाम अभी और बढ़ेंगे। पहले से ही पच्चीस के पर जा चुकी चीनी का स्वाद कड़वा लग रहा था और अब तो चीनी का नाम सुनकर ही रूह काँप जाती है। चाय पिए अब दिन नही हफ्ते गुज़र जाते हैं। इधर सरकार भरोसा दिला रही है कि चीनी कि मिठास
पसंद करें
2
नापसंद करें

चुगली की महत्ता

चुगली लगाना कोई आसान काम नही मगर इस मगर कुछ लोगो को इसमे महारत हासिल है। अब हर कोई तो किसी कला का महारथी नही हो सकता। सो भगवान् नो कुछ खास लोगो को ही इस नेक काम के लिए चुना। इतिहास में सबसे पहले चुगलखोर के तौर पर नारद मुनि का नाम मिलता है। उनके समय म
पसंद करें
3
नापसंद करें

.......... आओ चुगली लगायें

काफी समय बाद चुगलखोर पर वापसी ही है। इसका कारण आम चुनाव में मेरी व्यस्तता रही। बहरहाल दोबारा चुगली का सिलसिला आगे बढाते हैं। हमारे यहाँ की एक मशहूर कहावत है की "चोर से कहे चोरी कर और सास से कहे तेरा घर लुट रहा है" । इस बात के कई निहितार्थ हैं। मगर चू