फ़िलहाल बहुत व्यस्त होने के कारन नया कुछ लिख नहीं पा रहा .लेकिन ब्लॉग ' पठन ' चलता रहता है .और आजकल तो ' बज्बजाहट ' ने काफी कुछ आसान कर दिया है .चाह कर भी कई आलेखों पर टिप्पणियां नहीं दे पा रहा पर कहीं कहीं टिपिया भी देता हूँ. इस बीच बहुत कुछ
तारिख : १९ दिसंबर २००९ . न्यू योर्क ,अमेरिका .माता मौली तथा पिता रणजीत को प्रथम संतान भाग्य . पुत्र भाग्य . आज साल के पहले दिन यह शुभ समाचार जानने का भाग्य मिला.साल का पहला दिन मेरे पूरे जीवन में ,कभी इतना भाग्यशाली नहीं रहा ,गो कि हमेशा रहा . रणजीत
आज राम नवमी के दिन मैं हिंदू हूँ ! इसलिए मुझे हर एक आस्था और विस्वास का अधिकार है । और अपनी समझ से उसका अन्तर्निहित सत्य समझ कर उसे जीने का भी । जरूरत पड़े यदि तो , अपनी इश्वर प्रदत्त बुद्धि और ज्ञान से उसे त्यागने और निंदा का भी अधिकार समझता हू
जैसा मन वैसी वाणी , जैसी वाणी वैसी क्रिया । सद्विवेकी सत्यशीलता मन , वचन और कर्म में एकरूप होती है । ....................सुभाषित । सत्यम ब्रूयात ,प्रियम ब्रूयात ,न ब्रूयात अप्रियम सत्यम । .................... . सुभाषित। सत्य वह नहीं है जिसमे हिंसा भर
कौन हो तुम ? तुम ! या हो सकते हो । मेरे भाग्य लेख पर लिखी सुन्दरतम कविता........... संक्षिप्त , अधूरी .........किंतु स्वयम में एक तृप्ति ! जैसे ?........चिर आकंछित कल्पित स्वप्न का अभिसार! कभी न ख़त्म होने वाले सुखद महा काव्य की , पहली पंक्ति का सम्प
इस बार एक गीत। चाँद गगन में जब उगता है तेरी याद चली आती है। साथ चांदनी के धरती पर, तेरी याद चली आती है। चाँद नीहार भरी आंखों से रोते लगते तारे बन जाते आँसू रजनी के ओस बिन्दु हैं सारे बीलख बीलख कहती बयार है दूर देश मत जारे अनसोयी रातों में देखूँ मैं स
जनाब आलिमान , ख़बर आयी है की ये जो अमिताभ बच्चन हैं इनके वालिद कोई डा.हरबंश राए हुआ करते थे और शाइर थे. इनकी एक किताब हुयी है मधुशाला । जिसके मानी मयखाना होता है । इसमे कहीं मयखाने को मस्जिद से ऊँची जगह दे दी गयी है । खास बात ये है ये है की.....इतने
बात करीब ५२-५३ साल पहले की। बचपन यूं पी के प्रतापगढ़ जिले के एक गाँव मरुआन में बीता । खेत खलिहान खेती बारी खेतखलिहान ," size="0" -->आम महुआ नीम वगैरह ....जैसे की गाँव होते थे . जिस गाँव में स्कूल था वहीं से अगले गाँव बाजार था. छोटा सा . वहां कुछ छोटी
तेरी रजा रजा रहे , मेरी भी रजा हो | तेरा खुदा khuda rahe ,mera bhee ho? to ho !! --------------------------------------------------- मेरा तेरा ,खुदा अलग | अलग अलग, नहीं सजा || जो जुल्म है, वो जुर्म है | जो हो सजा , तो हो सजा || ----------------------
आज २३ सितम्बर २००८.ठीक सौ साल पहले हिन्दी का दिनकर उगा था। कभी हुँकार करता कभी वीरता, त्याग, साहस, पौरुष और दान को ही नहीं ,जीवन के संज्ञान के नैतिक आधार को अमरत्व देते महादान के महा रथी की रश्मियाँ बिखेरता कभी चतुरंग संस्कृति के अध्याय लिखता तो कभी
माँ से मेरा मतलब मातृत्व से है । हर औरत के मातृत्व से /चाहे हिंदू चाहे मुस्लमान / चाहे सिख या चाहे किरिस्तान / चाहे भारत हो इरान हो कोई इंगलिस्तान हो या जापान हो / काली गोरी पीली नीली या लम्बी छोटी मोटी पतली / माँ बस माँ है / भावना या भावानात्माकता क
एक सलाम । शास्त्री जी, मैं तो पहले ही कह चुका .आपकी तराश विश्वास बढाती है.और मेरे लिए.तराश ही तराश ....जरूरी है.धन्यवाद .आपकी हर बातसही है.करूंगा। 'शास्त्री' शब्द भारत की एक परिपूर्ण ज्ञान राशि का प्रतीक है.मेरी बढ़ती हुयी जवानी में मेरे भारत के स्वप
मैं व्यक्तिगत रूप से बालेन्दु जी का आभारी हूँ। अगर उन्होंने जामुवंत की तरह न कहा होता कि.........का चुप साध रह्यो ........तो ? देवनागरी टंकण सीखने की बजाय .......अंगरेजी की तरह का सॉफ्टवेर इजाद होने का इंतज़ार ........कि आपतो बोलते जाओ ख्वान .....लिख
सुन लो अब जनता के इरादे सुन लो जनता का ऐलान नहीं चलेगा नहीं चलेगा गिरते पड़ते हिंदुस्तान आसमान है अपनी मंजिल आसमान अपना स्थान हिंदुस्तान...............हिंदुस्तान टूटे फूटे बेदम वादे नही सहेगा हिंदुस्तान नहीं रहेगा भूखा नंगा तरसा तरसा हिंदुस्तान लूटमा
दोस्तों और पाठकों से माफी मांगूंगा देरी के लिए भी और विषयांतर के लिए भी . पिछली पोस्ट की टिप्पणी में बताया था की इस वक़्त न्यू योर्क में हूँ और वर्त्तमान मेयर ब्लूमबर्ग के खिलाफ लड़ रहे अश्वेत बिल थाम्पसन के चुनाव प्रचार टीम का हिस्सा बनने के लिए ही आ
मेरी पिछली पोस्ट की टिप्पणी में श्री गिरिजेश राव जी ने पूछा था " आप नेता भी हैं ? " जबाब देना मुश्किल है और मुश्किल नहीं भी है . मुश्किल यह है कि किसी वक़्त सुभाष चन्द्र बोस 'नेताजी' कहलाते थे .आज नेता कहलाया
अरसा हो गया आपके बीच आए . और आपको पाए . मन लगा रहता था पर कुछ जिम्मेदारियों आ गयीं , कुछ मैंने ले लीं । जुलाई के पहले हफ्ते न्यूयार्क से वापसी पर हमेशा की तरह सीधे गाँव पहुँचा माँ के पास . सोचा था की दो दिन साथ बिता फ़िर मुंबई जाऊंगा . पर पाया की माँ
बाल्मीकि' के राम राम थे , तुलसी के भगवान राम थे । ' कथा ' सुनायी बाल्मीकि ने ' राम' की , पर मात्र कथा थी ? सीता की व्यथा थी ! संत थे , थे तटस्थ ,वे कवि थे । बस वही कहा , जो घटा , घटा कर नहीं कहा , कविता थी ! तुलसी तो थे संत , राम 'आराध्य' थे । ' धर्म
अपने इसी पोस्ट पे मैंने १२ मार्च को लिखा ' श्रीमती रिजवाना 'शमा' कश्यप अब तो सच बोलें '। वह पोस्ट मैंने हटा दी है । कुछ और पोस्टें भी जो सम्बंधित थीं ,जिनमे गंभीर आरोप थे। 'शमा' पर एक अपराधिक षडयंत्र का आरोप। एक मानव जीवन को नष्ट करने के कारण बन जाने