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कविता :बंदरिया नाच दिखाती
बंदरिया नाच दिखातीएक बंदरिया नाच दिखावे ।बन्दर खड़े-खड़े पछतावे ॥ मदारी रोज पैसा कमावे । बंदरिया बन्दर को चिढावे ॥एक दिन बन्दर गुस्सा हो बैठा । बंदरिया बोले ले खाले भांटा ॥ बन्दर चिढ़कर गुस्से में बोला । चुप हो जा वरना जाग जायेगा मेरा शोला ॥ फिर भागेगी
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Jun 17 2010 02:47 PM


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