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क्या सच मे हमने बहुत तरक्की कर ली है?क्या सच मे हम पढे-लिखे कहलाने का हक है?
कहने को हमने बहुत तरक्की कर ली है मगर इक्कसवी सदी मे जब हम छुआछूत की बात करते हैं तो हमारी तरक्की की पोल खुल जाती है.इंसान होकर जब हम इंसान को सिर्फ़ एक बीमारी की वजह से अलग-थलग बस्ती बसाकर जीने पर मज़बूर कर देते हैं तो खुद हमारी इंसानियत पर सवाल खडे हो
Jun 10 2010 08:16 PM


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