Jayant Chaudhary's Image
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
17 Jun 2010
कुल प्रविष्टियां
77
पाठक भेजे
1789
पसंद
196
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
23.23
पसंद करें
2
नापसंद करें

** काँपते हाथों में **

है यकीन मुझे,जानता हूँ, कितेरे काँपते हाथों में,जान अभी बाकी है...माना बहुत है,पर, तू भार उठा,जोर लगा, किअरमान एक बाकी है....यह जिंदगी,एक प्याला है,और मौत,तेरी साकी है...पीता चल,चलता चल,जब तक,जाम एक बाकी है....मधु बहती है,कविता उड़ती है,पंखों में
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
0
नापसंद करें

~ स्वर्णिम जीवन ~

जब तक है आस, संग संग प्रयास, मन में विश्वास, पाने की प्यास, उच्छल तरंग, दिल का म्रदंग, बाजे है संग, भर कर उमंग, हिरदय प्रसन, होकर मगन,बढ़ते हैं पाँव,उठते हैं हाथ,सच हों स्वपन, बने स्वर्णिम जीवन....जयंत चौधरी(बैठे बैठे एक ख्याल मन में आ गया...)
 
Jayant Chaudhary
Jun 16 2010 10:16 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

वक्त के थपेड़े...

वक्त के निर्दयी थपेड़ों ने,कैसा परिवर्तन कर दिया,जो तूफानों में भी जलता था,वो दिया आज बुझा दिया...
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
0
नापसंद करें

ढूंढ़त है तब पावत नाय

ढूंढ़त है तब पावत नाय, पावत है तो जानत नाय,जान सके तो जान ले मनवा, हाथन फिसलत जाय...जीवन में मानव कितनी ही चीजों को ढूंढ़ता रहता, जैसे शांति, प्रेम, समय, सुख, भगवान् आदि.और जब वो पास में होती हैं तो या उन्हें पहचानता नहीं, या फिर उसकी कीमत नहीं
 
Jayant Chaudhary
Jun 03 2010 08:29 PM
पसंद करें
1
नापसंद करें

...इश्क ऐसा ही सही...

हम जिन पर मर मिटे,उन्होंने कभी जाना भी नहीं,इश्क करना खता है,तो, इसकी ये सजा ही सही...मेहँदी की तरह पिस गए,कितने ही अरमान मेरे,बस यह सोच के खुश हूँ,कि, निखर गए हाथ तेरे...ख़ुशी दो पल की माँगी थी,जन्नत की फरमाइश ना की,थी बहुत दो गज जमीन ही,सारे आसमान की
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
0
नापसंद करें

() सतरंगी हुए सपने मेरे ()

सतरंगी हुए सपने मेरे,जब से पड़े हैं कदम तेरे,जीवन से मिटे हैं अँधेरे,रातों को मिले ज्यों सबेरे,और मधुमय हुए हैं बसेरे,डाले खुशियों ने मन में डेरे...सतरंगी हुए सपने मेरे,जब से पड़े हैं कदम तेरे....करवट बदली इस जिंदगी ने,और आखें खोली पलकों ने,ख़ुशी मन में
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
3
नापसंद करें

*** बूँद रक्त की, बाँकी है एक ***

मन में क्यों रखता है भय,होगी बस तेरी ही विजय,मन का छोटा सा संशय,बन बैठेगा तेरी पराजय..तू आज, हार को हरा दे,पराजय को पराजित कर दे,आज विधान को बदल दे,तू ख़ुद ही, लकीरें खींच दे...जो हाथ हैं, तो उनको उठा,औ कदम हैं, तो उनको बढ़ा,तुझे, बैठने से क्या मिला,तू
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
1
नापसंद करें

एक दिया बुझ गया

जीवन था उसका क्षणिक,तेज था किन्तु अधिक,कई दीयों को कर प्रज्वलित,एक दिया, अचानक बुझ गया....नकारात्मकता हुयी हरित,और मन का तम हुआ मृत,करके जीवन-राह प्रकाशितएक दिया, आंधी में बुझ गया....आत्मा को रखके पवित्र,करके हम सबको मोहित,छोड़ गया हमको वो मित्र,एक दिया,
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
1
नापसंद करें

तुम कैसे अमर हो जाते हो?? (~जयंत)

बर्फीली चोटियों पर तुम,क्यों अपना शरीर गलाते हो? जम जाता है जहाँ समय भी,क्यों अपना रक्त बहाते हो?तपती मरूभूमि में तुम,क्यों अपना बदन झुलसाते हो?जल जाता है जहाँ लौह भी,तुम कैसे साहस बचाते हो?पथरीले उत्तंग पहाड़ों पर तुम,क्यों अपने घुटने छिलवाते हो?पनप ना
 
Jayant Chaudhary
टैग: वीरता
पसंद करें
1
नापसंद करें

कहाँ गया वो? उसे खोजो..

एक नादाँ बालक था वो, जग से अनजाना था वो, ओस की बूँद सा था वो, जाने कहाँ गया वो.... रोते रोते हँसता था वो, गैरों के लिए रोता था वो, उजली किरण सा था वो, जाने कहाँ गया वो....कालचक्र में पिस गया वो,धूल में गुम गया वो,कैसे बिछड़ गया वो, जाने कहाँ गया वो...माँ
 
Jayant Chaudhary
टैग: समाज
पसंद करें
0
नापसंद करें

~~ आल इज्ज़ वेल!! ~~

भैया सब् ठीक है!! चाचू सब् ठीक है!! बेटा सब् ठीक है!! आल इज्ज़ वेल!!मेरी बेटियों को बहुत ही पसंद आता है यह गाना, और मुझे भी॥यह तो मेरे जीवन का मूल मन्त्र रहा आया है वर्षों से, और अब इसे एक सुन्दर गाने के रूप में देखना... आनंद आगया।जो हो रहा है, वोह भी
 
Jayant Chaudhary
टैग: साहस
पसंद करें
0
नापसंद करें

Jayant Chaudhary

लिखने कुछ और बैठा था... लिख कुछ और रहा हूँ।समय का ही फेर है... जो मन में था उसे लिखने में देर हो गयी और अवसर चूक गया॥समय समय की ही बात है।यह समय होता ही है ऐसा... निर्दयी,कभी किसी के लिए ठहरता ही नहीं,जब कभी चाहो तो गुजरता ही नहीं॥यह समय होता ही है
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
1
नापसंद करें

हिन्दू “नाबालिग” लड़की भगाना शरीयत के मुताबिक जायज़ है? तथा दीप प्रज्जवलित करना “गैर-इस्लामिक” है? : पढ़िये दो सेकुलर खबरें (सुरेश

सुरेश जी,आपको शत शत नमन...कृपया और ऐसे भदकाऊ पोस्ट लिखते रहें ताकि सलीम जैसे लोग और भड़क सकें आप के खिलाफ।आखिर सच तो कड़वा होता है। तो कड़वी गोली आसानी से नहीं खाई जाती है ना!!!!जहां तक न्यायालय की बात है... तो क़ानून अंधा ही तो होता है॥ खराबी तो क़ानून में
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
2
नापसंद करें

वर्ष नया, विचार पुराने?

गत का अंत और नव का आगमननव वर्ष के स्वागत में कितने ही परिचितों ने पत्र (ईमेल) लिखे, और ना जाने कितनों ने किस किस तरीके से मनाया गत का अंत और नव का आगमन... किन्तु ऐसे कितने हैं जिन्होंने सचमुच नवीनता और परिवर्तन लाने का प्रयास किया है?परिवर्तन तो संसार का
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
0
नापसंद करें

भगत सिंह (नाटक - नवीनतम - भाग २) ~जयंत

द्रश्य २ : ( चंद्रशेखर और सुखदेव बैठे हैं ... पीछे से भगत , दत्त और राजगुरु आते हैं ) भ : साथियों , आपका परिचय करा दूँ। ( इशारे के साथ ) आप हैं राजगुरु , बटुकेश्वर दत्त , सुखदेव , और आप हैं चंद्रशेखर आजाद। दा : मित्रों , आप सब को पता होगा की आज की सभ
 
Jayant Chaudhary
टैग: वीरता
पसंद करें
0
नापसंद करें

अमर जवान - ब्लॉग इंग्लिश में

प्रिय मित्रों, एक ब्लॉग जो कुछ अमर जवानों के लिए समर्पित है। नीचे 'अमर जवान' पर क्लिक करें। अमर जवान वन्दे मातरम!!! ~जयंत
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
6
नापसंद करें

अब काहे का वो, राष्ट्र-गान??

हो गया सरे आम , अपमान अब काहे का वो , राष्ट्र - गान?? नहीं मोल तेरा अब , संविधान चुप बैठे रहे गृहमंत्री , श्रीमान आज़ादी का था जो , नारा उससे ना रहा अब , नाता नहीं पूज्य है भारत , माता कैसा है ये खेल , विधाता ? ' लज्जा ' नहीं आती इन्हें , ज़रा जिनने ले
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
2
नापसंद करें

राम लीला इं डल्लास - वीडियो

नमस्ते, हमने डलास में राम लीला का प्रदर्शन किया था। आज आप सब के सामने राम लीला के वीडियो ले कर आ रहा हूँ॥ बहुत दिनों से लिख नहीं पा रहा हूँ क्योंकि अति व्यस्त हो गया हूँ... क्षमा करें! कृपया नीचे लिखे लिंक पर क्लिक करें. भाग 1 भाग 2 भाग 3 भाग 4 भाग 5
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
1
नापसंद करें

राम लीला

एक हैं श्रीमती फ्रूत्वाला कल्पना उन्होंने दी मुझे राम-लीला की कल्पना, जब हम चले उसे करने साकार, तब हमारा साथ देने आए भाई किशोर, बहुत कठिन थी, लम्बी थी डगर, समय कम था, हम चल पड़े मगर, जब मन में हुयी थोडी उथल-पुथल, पूरी तरह साथ देने आयी सोनल, मन में जो
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
0
नापसंद करें

राम लीला - २

रावण की खोज में एकहुए पाताल आकाश, तब जा कर मिले डॉ कागल प्रकाश, और फ़िर काम आया मेरा मित्रा, श्रीमती धाम संगीता बनी सुमित्रा, सिंघासन से उठ कर बने दसरथ, अपने नंदलाल जी हैं बड़े समर्थ, अपनी पुरानी एक्टिंग याद आयी, और ज्योति जी बनी कौशल्या माई, हमें संध
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
1
नापसंद करें

अमेरिका में राम लीला

आप सब को दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं... विगत कई महीनों से राम लीला के कारण अत्याधिक व्यस्त हो गया था॥ अतैव कुछ लिख नहीं पाया॥ आज आपके सामने उस प्रयास का एक छोटा सा उदाहरण देता हूँ। http://www.hindimedia.in/index.php?option=com_content&task=vi
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
0
नापसंद करें

नाटक भगत सिंह - यु ट्यूब पर..

यू ट्यूब पर कुछ हिस्से... हमारे नाटक के... कृपया नीचे दिए लिंकों पर क्लिक करें..द्रश्य १द्रश्य २द्रश्य ३द्रश्य ४-१द्रश्य ४-२अंत
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
0
नापसंद करें

नाटक भगत सिंह - अन्तिम भाग

द्रश्य ३:सारे एक के बाद एक आते हैं...>आ : मित्रों अब हमें आगे की योजना बनानी है...सु : (विवश होकर) हमने समझा था की फिरंगी ऑफिसर के वध से फिरंगियों को सबक मिलेगा, उन्हें हिन्दुस्तानी जीवन की कीमत का आभास होगा।दा : वो हमारी कोई कीमत नहीं करते हैं॥ कीडे
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
0
नापसंद करें

** जीवन क्या है? ** (~जयंत)

वो जीवन भी क्या जीवन है, जो घुटनों पर चल कर हो कटा, वो हस्त नहीं, बस माटी है, जो जिस तिस के आगे हो फैला, सीना वो व्यर्थ किया धड़का, जिसमें ना स्वाभिमान भरा, उत्तम है शीश, जो भूमि पर पड़ा, जब कंधों पे रहा, तब नहीं झुका.... ~जयंत चौधरी July 11, 2009
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
2
नापसंद करें

* राह में हो अँधेरा तो...! * (~जयंत)

कई घटनाएँ देखकर (और कुछ का भुक्तभोगी बनकर) मन थोड़ा सा विचलित हो गया था... विगत कई दिवसों से समय का घोर अभाव चल रहा था... और उससे बड़ी बात थी; मन लग नहीं पा रहा था .. कविता, साहित्य आदि में... बहुत सी व्याधियां हैं और चुनौतियां हैं अभी जीवन में.... संघ
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
2
नापसंद करें

भगत सिंह (नाटक - नवीनतम) ~ जयंत

भूमिका: मैं हूँ बटुकेश्वर दत्त ... मैंने वही हूँ जिसने भारत की आज़ादी के लिए भगत सिंघ , चंद्रशेखर आजाद , राजगुरु और सुखदेव जैसे वीरों और देश - प्रेमियों के साथ कंधे से कंधा मिला कर फिरंगिओं से लड़ाई की थी॥ एक दिन हमने पंजाब असेम्बली में धमाका कर ब्रिता
 
Jayant Chaudhary
टैग: वीरता
पसंद करें
3
नापसंद करें

मन जिसका जैसा रहे, वैसा देखे आँख (~जयंत)

मन जिसका जैसा रहे , वैसा देखे आँख , कूड़े सी ताते दिखे , स्वर्ण मुद्रिका लाख ॥ - मन के भावों ने अनुसार , द्रष्टिकोण भी बदल जाता है ॥ संसार में प्राणी को वोही दिखाई देता है जो वो देखना चाहता है ॥ जिसके मन में गन्दगी है , उसे स्वर्ण का ढेर ( याने गुणों
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
7
नापसंद करें

< विदेशों में हिन्दी में जो लेखन हो रहा है वह सब दो कौडी का है > (~जयंत)

एक ' वरिष्ठ लेखक ' के एक साक्षात्कार से कुछ पंक्तियाँ मेरे मन को कचोट कर रह गयीं , नीचे देखें ..... " यह कहना मुश्किल है की इसका ( विदेशों में हो रहे हिन्दी के लेखन ) हिन्दी पर कितना प्रभाव पड़ेगा . दो टूक कहूँ तो शायद कुछ भी नही . पर एक चीज साफ़ है की
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
10
नापसंद करें

कसाब के मुकदमे पर 30 लाख का खर्च और सैकड़ों जान बचाने वाले को 500 रुपये

कसाब के मुकदमे पर 30 लाख का खर्च और सैकड़ों जान बचाने वाले को 500 रुपये अपनी आजादी को हम हरगिज बचा सकते नहीं... सर झुका सकते हैं, लेकिन सर कटा सकते नहीं.. धर्म निरपेक्ष पार्टियों के राज में यही सब होना है.. वैसे मेरा भी एक छोटा सा रोना है... जैसी होगी
 
Jayant Chaudhary
Jun 23 2009 11:42 AM
पसंद करें
1
नापसंद करें

* स्वर्ण मुद्रिका लाख * (जयंत)

मन जिसका जैसा रहे , वैसे देखे आँख , कूड़े सी ताते दिखे , स्वर्ण मुद्रिका लाख ॥ - मन के भावों ने अनुसार , द्रष्टिकोण भी बदल जाता है ॥ संसार में प्राणी को वोही दिखाई देता है जो वो देखना चाहता है ॥ जिसके मन में गन्दगी है , वो स्वर्ण के ढेर ( याने गुणों क
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
4
नापसंद करें

~ माथा भूमि पर धरा... पर माथा धरा ना कबहूँ.. ~ (जयंत)

मन में राखे अंहकार , क्या पायेगा उस पार , जीव अकेला ही चले , पीछे रह जाए संसार ॥ सत् असत का रहत है , मन में सदा संघर्ष , सत् पर जोर लगाय ले , जो पाना हो उत्कर्ष ॥ मूरत आगे तू रहत, मन मूरत ज्यों नाहीं, क्षण क्षण चौकड़ी भरे, ज्यों मृग वन माहीं॥ माथा भूम
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
5
नापसंद करें

* जीवन को तू बना बहार * (~जयंत)

मन के जीते जीत है , और मन के हारे हार, मन चाहे तो पतझड़ भी, बन जाए बसंत बहार ... सुख दुःख का तो लगा रहेगा , जीवन में मेला बारंबार , अश्रु बहा के व्यर्थ ना करना , तू अद्भुत जीवन - उपहार ... जैसा मन चाहे तू जी ले , मन को तू कभी मत मार , जीवन का अनुपम अ
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
7
नापसंद करें

*** दिशाएँ बनी अग्नि की लहरें.. ***

दिशाएँ बनी अग्नि की लहरें, वायु के कण भी थे सहमें सहमें... बहती थी मृत्यु हवाओं में, तब कूद पड़ा था वो उस रण में... मैं पीछे ना हटूँ, उसका प्रण था, माँ पर न्यौछावर कण कण था... हौसला बढ़ता उसका हर पग था, भीषण होता जितना भी रण था... विस्मृत कर वो फेरों
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
2
नापसंद करें

Jayant Chaudhary

एक नया प्रयोग .... पिछली बार इसी विषय पर एक कविता लिखी थी ... अब उसी को दूसरे रूप में लिखा है ॥ आशा करता हूँ अच्छा लगेगा॥) वो बिस्तर पर , एक चादर सी बिछी होगी , एक निर्जीव , शरीर सी पड़ी होगी , तन के कोलाहल से , मन की दूरी रखती होगी , अपने मन में उठती
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
4
नापसंद करें

** आख़िर वो भी एक माँ थी.....** (~जयंत)

उस चादर की तरह , वों भी सिमटी रहती थी , चादर की सलवटों के जैसे , उसके जीवन में तहें रहती थी .... उस चादर की तरह , हर दिन कुचली जाती थी , चादर की चुप्पी के जैसे , उसकी जुबान भी बंद रहती थी ... उस चादर की तरह , यहाँ वहाँ फेंकी जाती थी , लाचार चादर के ह
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
7
नापसंद करें
पसंद करें
2
नापसंद करें

** वो.. ** (~जयंत)

घर के आँगन में , अपने से भी छोटे, एक कोने में , दबा , सिकुड़ा , बैठा था वो ... हवा में उड़ते , हर ओर से उठते , कोलाहल में , मधुर संगीत - रस, घोलता था वो ... हर आते जाते , सजे संवरे, आगन्तुक के नेत्रों में , उपेक्षा की छवि देख , सहता था वो ... अपने फटे
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
3
नापसंद करें

> मलाई कम है!!! < (~जयंत)

ये अपनी चांदी की थाली में , मलाई कम देख , रोते हैं , और देश के लाखों बच्चे, अब तक भूखे, रोते रोते सोते हैं... अपने इटालियन ग्लास में , विदेशी मय कम देख , दुखी हैं , और देश के करोड़ों घरों में, अब तक पानी की गलियाँ, सूखीं हैं ... मंत्रालय बंटवारें में
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
3
नापसंद करें

मेरे ब्लॉग के 'अनुसरण' के लिए धन्यवाद... (~जयंत)

प्रिय रिचा जी ने सुभारंभ किया , मुनीश जी ने फ़िर सहारा दिया , मार्क जी ने ब्लॉग को ' मार्क ' किया , राजकुमारी जी ने राज - दान दिया , तृप्ति जी ने टिप्पणियों से तृप्त किया , नेहा जी ने नेह - रस बरसा दिया , संगीता जी ने सदैव प्रेरित किया , अनिल भाई ने क
 
Jayant Chaudhary
पसंद करें
2
नापसंद करें

* वो, चुप खड़ी... * (~जयंत)

जो, चुप खड़ी, परदे के पीछे, तेरे सपनों को रंगने, ख़ुद को ही पीसती रही, तेरे हिस्से के दुःख सहती रही, तुझे सुखों की छाव में सुलाती रही, तेरे अस्तित्व हेतु, ख़ुद मिट कर मिटटी बनी, और खुद को मिटा, तुझमें जीती रही, रज बन, तेरी ठोकरें खाती रही, आंसुओं में,
 
Jayant Chaudhary