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** काँपते हाथों में **
है यकीन मुझे,जानता हूँ, कितेरे काँपते हाथों में,जान अभी बाकी है...माना बहुत है,पर, तू भार उठा,जोर लगा, किअरमान एक बाकी है....यह जिंदगी,एक प्याला है,और मौत,तेरी साकी है...पीता चल,चलता चल,जब तक,जाम एक बाकी है....मधु बहती है,कविता उड़ती है,पंखों में
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Jun 17 2010 11:15 AM


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