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ek kahani - aav, bhaav aur prabhaav ki !

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26 Mar 2010
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अमरीका में आकाश वाणी भाग 3

वक़्त कैसे बीतता है, पता ही नहीं चलता, है न ?अब देखो, मुझे रेडियो में एंकर करते हुए दो महीने बीत गए हैं , पता ही नहीं चला ......... मुश्किलें तो आती रहीं ... रोज़ दफ्तर में देर से पहुंचना ... बच्चों को समय से पहले उठा कर जल्दी से स्कूल के लिए तैयार करना
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कौन सा युवा?

बहुत दिन से एक 40 वर्षीय नेता को युवा शक्ति के प्रणेता के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। युवा को सपने दिखाए जा रहे हैं। यानी उसको महान बता कर एक बार फिर उसके मताधिकार का दोहन करने का प्रयास किया जा रहा है। और भारत का युवा इसी को सच मान कर सपने देख भी
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अमरीका में आकाश वाणी भाग २

कई गलत जगहों पर घूम फिर कर , ढूंढते ढूंढते मैं रेडियो स्टेशन पर पहुँच गयी | तीन बड़े बड़े लम्बे लम्बे टावर खड़े थे सामने जिन पर लाल बत्ती टिम-टिम कर रही थी |मेरा दिल बहुत बुरी तरह से धड़क रहा था |बड़े दरवाज़े से अन्दर गयी तो वहां कोई नहीं था , एक अँगरेज़ के
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अमरीका में आकाश वाणी भाग १

कई साल पहले टेक्सास से वापस आते हुए मन में ख्याल आया था की कितना अच्छा होता अगर बे एरिया का भी अपना रेडियो स्टेशन होता | उस वक़्त टेक्सास में मैं "सलाम नमस्ते " - चौबीस घंटे वाला इंडियन रेडियो स्टेशन -सुन कर बहुत खुश हुयी थी|बरसों बाद जब सुना की के.एल.
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Mar 11 2010 05:26 AM
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चाँद चकोर

किसी गुलसितां में चहकती थी हरदम , दो आंखों में उसकी महकती थी शबनम , सभी फूल पाती उसी पर फ़िदा थे , जो गूंजे सदा में उसी की सदा थे | थी लाडो सभी की चहेती चकोर , कूदती भागती थी वो चारों ही ओर , था मासूम दिल ऐसा , भोली सी सूरत , थी उसके लिए ये जहाँ खूबसू
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गंगा मौसी

किसी देश में नदी किनारे , था मेरा एक गाँव, धेनु, धरा , धन, धाम प्रचुर था, थी पीपल की छाँव, उसी गाँव में मेरी प्यारी गंगा मौसी रहती थी, था कोई न रिश्ता उनसे, यूँ ही मौसी कहती थी , हर गर्मी में गाँव जो जाती मैं उनसे ही खेली थी, मैं थी नौ की, बीस की वो
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ईदगाह

ईदगाह ( मुशी प्रेमचंद की कहानी ' ईदगाह ' पर आधारित ) हामिद था एक अच्छा बेटा अपनी माँ का प्यारा , बूढी आमना की धुंधली आंखों का तारा , गाँव में जब मेला था पाक ईद के मौके पर , लगी हुई थी खालिदा , रोटी में चूल्हे चौके पर , पोता मेरा खाना खाकर मेले में फि
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हार की जीत

वतन की मिट्टी से हमने जो विरासत पाई है , वही कहानी और सीखें फिर याद किसी को आई हैं , कोशिश शुरू हुई है , उस शिक्षा को दोहराने की , गाने की , दर्शाने की , जीवन के एक अफ़साने की , हार की जीत ( सुदर्शन जी की कहानी ' हार की जीत ' पर आधारित ) एक गाँव में
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परीक्षा

मुशी प्रेमचंद की कहानी ' परीक्षा ' पर आधारित ) जब सुजानगढ़ का दीवान उमर से थक चला था , सोचा की मैं स्वयं चुनूं , दीवान नया भला सा , हुई घोषणा , पूर्ण राज्य में होगा चुनाव दीवान का , परिचय होगा , सब गुणियों के , आन , बान और शान का , हर कोने से आए सज्ज
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मत थम ....जरा आहिस्ता चल........

कनिका, तुम्हें पता है दुनिया का सबसे शांत ज्वालामुखी कहाँ है ?" किचेन में सफाई करते हुए सुजाता ने अपनी सहेली से फ़ोन पर पूछा| "अरे यार , इतनी रात को तुम्हें जी. के. सूझ रहा है ? चलो, तुम्हीं बता दो कहाँ है ?" कनिका ने बहुत ही अलसाए ढंग से कहा | "हमार
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अपना भी कोई एक घर होगा !

अगर कौडियों में सबसे अच्छे इलाके में घर चाहिए तो अभी के अभी इस पते पर पहुँच जाओ .... और सुनो मेरा अप्रूवल पेपर ले जाना .... और हाँ बस उनके रेट पर ऑफर दे देना | मैं कल ही वापस आ रहा हूँ |" देव, हमारे एजेंट ने एक ही साँस में इतनी लम्बी बात कह डाली | ऐस
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दिल का हाल सुने दिलवाला....

तन्मय सीरीज़ पार्ट ३ "तन्मय, तुमसे बड़ा ईडिअट मैंने आज तक नहीं देखा | विश्वास नहीं होता की तुम ऐसा कर सकते हो| क्यों तन्मय ? क्यों किया ऐसा तुमने ?" गुस्से में सुजाता कुछ भी कह रही थी | "कम ओन, इसमे इतनी बड़ी बात क्या है ? " बड़ी सरलता से तन्मय ने कहा|
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कतरा कतरा मिलता है ..कतरा कतरा पीने दो ....

सुजाता, लगता है मुझे अवोइड करने की कोशिश कर रही हो | क्यों सही कहा न ??" तन्मय ने मुस्कुराते हुए कहा | "कोशिश नहीं तन्मय , कर रही हूँ | काम बहुत आ गया है " सुजाता ने व्यस्तता जताते हुए कहा | "मेरी टीम को जोइन क्यों नहीं किया , और तो और, किसी इंडियन क
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मुड मुड के ना देख ...मुड मुड के ...

सुजाता , कॉफी पीने चलोगी ?" बहुत सकपकाते हुए तन्मय पूछ पाया था फ़ोन पर | " चलो " एक शब्द का जवाब सुनकर शायद तन्मय को बहुत हैरानी हुई | सोचा था कुछ सवाल जवाब होगा | क्यों ? कहाँ ? कब ? कैसे ? कितनी सारी प्रक्टिस भी की थी उसने उन सवालों का अंदेशा कर के
Dec 29 2009 11:57 AM
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कम्बक़्त इश्क है जो.- सोनी_सीरीज़ पार्ट २

आज सोनी का जन्म दिन है | मुझे अच्छे से याद है | कैसे भूल सकती हूँ | हॉस्टल में उसे मेरे हाथ की बनी केक सबसे अच्छी लगती थी | किसी को नहीं देती थी | अकेले सारा का सारा खा लेती थी ! आज इतवार है | पता नहीं अभी उठी होगी की नहीं .. "हे, सोनी, मैं हूँ ... उ
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फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी !-मौसी_सीरीज़-२

क्या करें मौसी ? आधे घंटे से पार्किंग ही नहीं मिल रही , उधर सगाई का मुहूर्त निकला जा रहा है ," मैंने बड़ी कातरता से पूछा| "ये मुआ पार्किंग -शार्किंग तो अपने यहाँ नहीं होता | तेरे मौसाजी तो जहाँ कहीं गाडी खड़ी कर देते हैं और हम तो ऐसे ही चल देते हैं | य
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छोटी छोटी बातों की है यादें बड़ी !-मौसी_सीरीज़-१

बड़ी खलबली मची है | हर तरफ़ कुछ न कुछ बिखरा है .. किसी का शर्ट प्रेस नहीं है तो किसी की बिंदी नहीं मिल रही | कभी कोई बच्चा रो रहा है तो किसी ओर हँसी के ठहाके सुने दे रहे हैं | बिल्कुल इंडिया की तरह लग रहा है | आज घर - एक घर की तरह लग रहा है .... पर मौ
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कभी कान्धा भीगा है आपका?_सोनी_सीरीज़_पार्ट १

कभी कान्धा भीगा है आपका? यूँ तो हम सब दिल भिगोते हैं , कभी कभी आँखें भी भीगती हैं , ये सब 'अपने' गम की निशानी हैं | लेकिन भीगा कान्धा, एक प्रतीक है, एक सहेली या दोस्त के दुःख का | किसी मित्र को आपकी ज़रूरत होती है तभी भीगता है आपका कान्धा | मेरी एक सह
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ये जो मन की सीमा रेखा है ...

ये क्यूबिकल भी कितने खुले होते हैं न .... भावनाओं जैसे ...कहाँ से कौन सी बात अनचाहे ही कानों में पड़ जाए, पता ही नहीं चलता | यूं तो सबको क्यूब एटिकेट खूब सिखाया जाता है - दूसरों की बात नहीं सुनते, दूसरों की मेल नहीं पढ़ते |पर हम भी तो इंसान हैं .. कैसे बच
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अफसाना लिख रही हूँ - भारत गाथा -२

"चाची, एक और पूडी देना " घर में खाना परोसने का काम बुलबुल था ; बच्चे कभी पूडी कभी सब्जी कभी खीर की मांग किये जा रहे थे | इतनी ख़ुशी थी की हर बच्चा स्वतः ही खाना बड़ी इच्छा से और बड़ी मात्रा में स्नेह से खा रहा था | और इन सबसे दूर बुलबुल के बच्चे विडियो
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कभी नीम नीम कभी शहद शहद - (भारत गाथा -१ )

आज चार बजे आँख खुल गयी ... कल तीन बजे ही सुबह हो गयी थी और परसों तो एक बजे से ही नींद उछन गयी थी | भारत से अमरीका पहुँचते पहुँचते समय बदल जाता है ..... हाँ वाकई समय बदल जाता है | साथ बदल जाती है इंसान की सोच और रवैया | ये बदलाव मैं खुद में महसूस कर रही
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एक लड़का और लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते

ऑफिस का काम ख़त्म नहीं हुआ था | पर मन ही नहीं लग रहा था | छोडो कल करेंगे ... किसी भी बात में फोकस नहीं हो रहा था | कार के ऑन होते ही सी डी प्लेयर बज उठा | दिन का सबसे अच्छा वक़्त होता है बिना कुछ सोचे , बिना किसी शोर के, बस चुप चाप गाना सुनना , कोई भ
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फूल भी हो दरमियाँ तो फासले हुए !

ईमेल दूसरी बार खोला .....सोच कर की शिष्टता के लिए ही सही , जवाब तो देना चाहिए | पर फिर से बंद कर दिया .. नहीं , क्या फायदा ...फिर से वही होगा ....नो, नॉट अगेन ...... जब से विश्वास टूटा है , दोस्तों पर से , दोस्ती पर से , किसी से हँस के बात करने को भी
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नाम का इनाम !

साधना को रात भर नींद नहीं आई थी | आज उसे देश का सबसे बड़ा सम्मान जो मिलने वाला था - फिल्म जगत की सबसे मशहूर अदाकारा होने का | ये कलाकार भी अजीब होते हैं | इनके लिए क्या जीवन है और क्या अभिनय , ठीक से कहा नहीं जा सकता | ख़ुशी तो थी ही पर एक तरह का डर