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अभी बस चांद उगता है
समीर लाल 'समीर' अभी बस चांद उगता है, सामने रात बाकी है बड़े अरमान से अब तक, प्यार में उम्र काटी है पुष्प का खार में पलना, विरह की आग में जलना चमन में खुशबु महकी सी, प्रीत विश्वास पाती है. गगन के एक टुकडे़ को, हथेली में छिपाया है दीप तारों के चुन चुनकर
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Dec 29 2009 11:55 AM


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