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जयहिंदी

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31 Dec 2009
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मनुष्य रंगों को क्यों पहचान पाता है?

मानव निरीक्षण - 4 मनुष्य उन प्राणियों में से है जिनमें रंगों की पहचान की क्षमता काफी विकसित होती है। रंगों की पहचान करने के लिए हमारी आंखों में तीन प्रकार के प्रकाश-संवेदी शंकु कोशिकाएं हैं, जो क्रमशः लाल, हरे और नीले रंगों के प्रति संवेदनशील होती है
 
बालसुब्रमण्यम
Dec 29 2009 11:40 AM
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ईश्वर को नमन क्यों?

बिना बोले बातचीत - 6 ईश्वर या हमसे बड़े एवं शक्तिशाली व्यक्ति के प्रति आदर प्रकट करने के लिए हम उनके सामने घुटने टेकते हैं (ईसाई), शरीर को झुकाते हैं (मुसलमान), या साष्टांग प्रणाम करते हैं (हिंदू)। इन सब चेष्टाओं में जो सामान्य बात है वह यह है कि हम अ
 
बालसुब्रमण्यम
Dec 29 2009 11:40 AM
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ज्ञानेश्वरी

ज्ञानेश्वरी महाराष्ट्र के संत कवि ज्ञानेश्वर द्वारा रची गई श्रीमदभगवतगीता की अद्वितीय टीका है। यह ग्रंथ ज्ञानेश्वर की सबसे महत्वपूर्ण कृति मानी जाती है। इसमें ज्ञानेश्वर के व्यक्तित्व और उनके दर्शन की झांकी मिलती है। ज्ञानेश्वरी एक अत्यंत लोकप्रिय कृति
 
बालसुब्रमण्यम
Sep 04 2009 07:13 AM
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दुहराना या दोहराना?

अनुवाद, संपादन और प्रूफ-शोधन के व्यवसाय से जुड़े होने के कारण मुझे शब्दों की सही वर्तनी और प्रयोग पर काफी ध्यान देना होता है। हिंदी में अनेक शब्दों के लिए एक से अधिक वर्तनियां चलती हैं। मैं कोशिश करता हूं कि विभिन्न विकल्पों में से मानक हिंदी द्वारा
 
बालसुब्रमण्यम
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Sep 03 2009 11:41 AM
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जाति-धर्म के बंधनों को तोड़ता त्योहार ओनम

आज ओनम है, केरलवासियों का सबसे लोकप्रिय त्योहार। ओनम तब आता है जब वर्षा ऋतु समाप्ति पर होती है और चारों ओर हरियाली ही हरियाली दिखाई देती है। नदी-नाले, तालाब और कुंए स्वच्छ जल से लबालब भरे होते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य अपने चरमोत्कर्ष पर होता है।किंवदंती है
 
बालसुब्रमण्यम
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Sep 02 2009 09:18 AM
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जिन्ना, जसवंत और भारत का भविष्य

जिन्ना पर जसवंत सिंह द्वारा लिखी गई किताब (जिन्ना – भारत विभाजन के आईने में, राजपाल एंड सन्स, रु. 599) के प्रकाशित होते ही जसवंत को भाजपा से निष्पासित कर दिया गया और गुजरात में पुस्तक पर बैन लगा दिया गया।दोनों ही बातें हमारे वैचारिक परिपक्वता पर प्रश्न
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 24 2009 09:51 AM
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आइए आपको सिखाता हूं दक्षिण भारतीय मोदक बनाना

आज गणेश चतुर्थी है। घर में दक्षिण भारतीय शैली में मीठे मोदक बने। मैंने आपको बताने के इरादे से बनाने की सारी विधि का फोटो ले लिया ताकि आप भी इस स्वादिष्ट व्यंजन का कभी मजा ले सकें।क्या-क्या चाहिए होगातो सबसे पहले आवश्यक चीजों की सूची देख लेते हैं। आपको
 
बालसुब्रमण्यम
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एडोब इनडिजाइन सीएस4 और हिंदी

विश्व भर में डीटीपी के लिए अब अधितर एडोब इनडिजाइन का ही उपयोग हो रहा है। इसने अपने प्रतिद्वद्वी डीटीपी सोफ्टवेयरों को या तो कहीं पीछे छोड़ दिया है, या उन्हें खरीदकर अपने में मिला लिया है। पहले वर्ग में आते हैं क्वार्क एक्सप्रेस, फ्रंटपेज, और माइक्रोसोफ्ट
 
बालसुब्रमण्यम
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Aug 19 2009 09:52 AM
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हिंदी का पहला उपन्यास

हिंदी का पहला उपन्यास होने का गौरव लाला श्रीनिवास दास (1850-1907) द्वारा लिखा गया और 25 नवंबर 1885 को प्रकाशित परीक्षा गुरु नामक उपन्यास को प्राप्त है। लाला श्रीनिवास दास भारतेंदु युग के प्रसिद्ध नाटकार थे। नाटक लेखन में वे भारतेंदु के समकक्ष माने जाते
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 18 2009 09:00 AM
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जुए बीनना और बतियाना

मानव निरीक्षण - 5क्या आप बता सकते हैं, बंदरों की सबसे प्रिय आदत क्या है? वह है एक दूसरे के शरीर से जुए बीनना। जुए बीनने की यह आदत उनकी सामाजिक व्यवस्था में काफी महत्व रखती है। मनुष्यों में भी जुए बीनने की बंदरों की आदत का समतुल्य व्यवहार होता है? वह है,
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 17 2009 09:13 AM
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नए मंगल फोंट की त्रुटियां

विंडोस प्रचालन तंत्र में हिंदी के लिए डिफोल्ट फोंट मंगल है। इस कारण यह फोंट हिंदी के लिए सर्वाधिक उपयोग किए जानेवाले फोंटों में से एक है।एस्थेटिक्स (सुंदरता) की दृष्टि से देखें, तो मंगल फोंट कुछ कहने लायक नहीं है। उसके बारे में बस इतना ही कहा जा सकता है
 
बालसुब्रमण्यम
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शहीद खुदीराम बोस

आज यदि हम स्वतंत्र हवा में सांस ले पा रहे हैं, तो यह उन अनेक वीर भारतवासियों की बदौलत है जिन्होंने अपने वतन को अंग्रेजों के चंगुल से आजाद करने के लिए अपनी जान तक की बाजी लगा दी थी। उनमें से एक अमर शहीद खुदीराम बोस थे। आइए आज, 15 अगस्त के दिन उन्हें याद
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 15 2009 09:07 AM
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ईश्वर की उत्पत्ति

मानव निरीक्षण - 3धर्म और दर्शन की चिरंतन गुत्थी है यह प्रश्न कि ईश्वर है या नहीं। ईश्वर को मानने का मुख्य कारण यह है कि बिना ईश्वर की कल्पना किए इस असीम ब्रह्मांड की उपस्थिति को समझना कठिन है। यही कारण है कि बड़े से बड़े वैज्ञानिक भी अपनी खोजों से इसी
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 13 2009 08:33 AM
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मनुष्य को गरम खाना क्यों पसंद है?

मानव निरीक्षण - 2जब आप किसी होटल में जाते हैं और खाना मंगाते हैं, तो आप वेटर को कई बार यह हिदायत देना नहीं भूलते कि गरमा गरम खाना ले आओ।क्या आपने सोचा है कि हमें गरम खाना ज्यादा पसंद क्यों आता है? आखिर गरम और ठंडे खाने में पौष्टिकता की दृष्टि से कोई फर्क
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 12 2009 07:43 AM
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मनुष्य बाल से वंचित क्यों हुआ

मानव निरीक्षण - 1पिछले पोस्ट में मैंने डेसमंड मोरिस नामक वैज्ञानिक की मानव-व्यवहार संबंधी दो पुस्तकों का जिक्र किया था, मैन वाचिंग और द नेकड एप। इनमें मनुष्य-व्यवहार के बारे में ढेरों जानकारी है। इस लेख से शूरू करके आगे के कुछ लेखों में इसी पुस्तक के कुछ
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 11 2009 07:11 AM
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घर की चाहरदीवारी और राष्ट्रों की सरहदें

बिना बोले बातचीत - 7हममें से प्रत्येक को हमारे चारों ओर कुछ न्यूनतम जगह की आवश्यकता होती है। इस जगह के भीतर कोई अन्य व्यक्ति घुस आए तो हम घबराहट महसूस करने लगते हैं। किसी के निजी क्षेत्र में घुसना उस पर आक्रमण करने के बराबर है। साधारणतः यह निजी क्षेत्र
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 10 2009 08:04 AM
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हाथ मिलाने का असली अर्थ

बिना बोले बातचीत - 5शारीरिक चेष्टाएं कुछ विशिष्ट संदर्भों में विशिष्ट अर्थ भी ग्रहण कर लेती हैं। उदाहरण के लिए नृत्य की मुद्राओं को लिया जा सकता है। प्रत्येक मुद्रा का अर्थ हमारी संस्कृति द्वारा निर्धारित होता है। एक अन्य उदाहरण परिवहन पुलिस द्वारा उपयोग
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 08 2009 09:16 AM
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सायास शारीरिक चेष्टाओं से बातचीत

बिना बोले बातचीत - 4पिछले लेख में हमने देखा कि हमारे मनोभावों को अनेक शारीरक चेष्टाएं भी व्यक्त करती है। मन में किसी प्रकार के भाव आने पर उस भाव से जुड़ी शारीरिक चेष्टाएं भी दिखाई देने लगती हैं। इन्हें देखकर कोई समझ सकता है कि हमारे मन में किस तरह के भाव
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 07 2009 07:22 AM
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मुहावरे और शारीरिक चेष्टाएं

बिना बोले बातचीत - 3बिक्री कर्मचारी अपने ग्राहक को कोई चीज बेच पाता है या नहीं, यह ग्राहक पर उसके अच्छा प्रभाव डालने पर निर्भर करता है। चूंकि उसे ग्राहक से काम निकालना होता है, इसलिए उसमें उसके प्रति दैन्य भाव जागाना फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए वह
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 06 2009 06:59 AM
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साक्षात्करों में सफलता

बिना बोले बातचीत - 2मान लीजिए, दो उद्योगों के प्रतिनिधि व्यावसायिक समझौता करने हेतु एकत्र हुए हैं। दोनों अपनी-अपनी कंपनी के उच्च पदाधिकारी हैं और उनका ही निर्णय अंतिम होगा। इसलिए समझौते की शर्तों पर सहमति होती है या नहीं, यह इन दोनों प्रतिनिधियों पर
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 05 2009 07:57 AM
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बिना बोले बातचीत -1

राजनीतिकों, अभिनेताओं, कूटनीतिज्ञों, बिक्री कर्मचारियों व अन्य अनेक व्यवसायी लोगों की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वे अपने प्रतिद्वंद्वियों के हावभावों, उनके अव्यक्त विचारों व मनस्थिति का कितना सटीक आंकलन कर पाते हैं। इसके लिए इन सभी लोगों को मनुष्य
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 04 2009 08:51 AM
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महाभारत किसने लिखा?

आप सोच रहे होंगे, यह भी कैसा सवाल है। कौन नहीं जानता कि महाभारत को व्यास ऋषि ने लिखा है। पर आपका यह उत्तर गलत है। विश्वास नहीं होता? तो पढ़िए आगे।जब भगवान व्यास ने महाभारत की कहानी मन में रच ली थी तो उनके सामने एक गंभीर समस्या आ खड़ी हुई। व्यास जी महाभारत
 
बालसुब्रमण्यम
Aug 03 2009 10:05 AM
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हिंदी का पहला समांतर कोष

हिंदी का पहला समांतर कोष (थिसोरस) अरविंद कुमार और उनकी धर्म पत्नी कुसुम कुमार ने तैयार किया है। अरविंद कुमार माधुरी नामक फिल्म पत्रिका के संपादक रह चुके हैं। इस कोष को पूरा करने में उन्हें 25 साल लगे। कोष को दिल्ली स्थित नेशनल बुक ट्रस्ट ने प्रकाशित किया
 
बालसुब्रमण्यम
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Aug 02 2009 09:57 AM
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तिलक का महत्व

शायद भारत के सिवा और कहीं भी मस्तक पर तिलक लगाने की प्रथा प्रचलित नहीं है। यह रिवाज अत्यंत प्राचीन है। माना जाता है कि मनुष्य के मस्तक के मध्य में विष्णु भगवान का निवास होता है, और तिलक ठीक इसी स्थान पर लगाया जाता है।मनोविज्ञान की दृष्टि से भी तिलक लगाना
 
बालसुब्रमण्यम
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बानेश्वर का मेला

बानेश्वर का मेला दक्षिण राजस्थान के बड़े मेलों में से एक है। यह वागड़ प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात के जनजातीय लोगों का मेला है। राजस्थान के दक्षिण भाग को वागड़ प्रदेश कहते हैं। यह एक सुंदर और रमणीय प्रदेश है जो राजस्थान के सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय
 
बालसुब्रमण्यम
Jul 31 2009 10:24 AM
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क्या बोनसाई रखना भारतीय दृष्टि में उचित है?

बोनसाई वाले लेखों पर कुछ प्रतिक्रियाएं आई हैं, जो कुछ-कुछ इस प्रकार की है – जानकारी तो बहुत अच्छी प्रदान की आपने। किंतु मन में एक शंका है कि कहीं बोनसाई बनाने के चक्कर में हम लोग वृक्ष के विकास को बाधित करके कुछ गलत तो नहीं करते। मेरे विचार से तो यह
 
बालसुब्रमण्यम
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क्या सगुनिए सचमुच भूमिगत जल खोज पाते हैं?

गांवों में किसानों की एक आम समस्या यह होती है कि कुंआ या तालाब खोदने के लिए सही स्थान क्या हो जहां खोदने से पानी मिले और वह मीठा हो। कुंआ या तालाब खोदने का काम श्रम और व्यय साध्य होता है और यदि वह विफल हो जाए या खारा पानी मिले, तो किसान तबाह हो सकते
 
बालसुब्रमण्यम
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बोनसाई बनाने की विधि

बोनसाई पर पिछले पोस्ट के पाठकों ने बोनसाई बनाने की विधि के बारे में जानना चाहा है। इसलिए इस पोस्ट में इसके बारे में कुछ सामान्य जानकारी दे रहा हूं। बोनसाई, अर्थात बौने आकार के वृक्ष, उगाने का शौक आपका और आपके परिवार का कई पीढ़ियों तक मन बहला सकता है,
 
बालसुब्रमण्यम
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बोनसाई -- दोने में दरख्त

बोनसाई बौने वृक्ष उगाने की प्राचीन कला का नाम है। उसका उद्भव सैंकड़ों वर्ष पहले भारत में हुआ था। उसके उद्भव की कहानी काफी रोचक है। आयुर्वेद में अनेक प्रकार की औषधियों का उपयोग होता है। वैद्य लोग अधिक उपोयगी औषधियों को अपने बगीचे में उगाते थे। इन औषधिय
 
बालसुब्रमण्यम
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कल हमने देखी हैरी पोटर की नई फिल्म

कल मैं अपनी दोनों बेटियों के साथ हैरी पोटर एंड द हाफ ब्लड प्रिंस देख आया। मेरी पत्नी आने को राजी नहीं हुईं, उन्हें हैरी पोटर में कोई दिलचस्पी नहीं है। इसके लिए हम उन्हें मगल कहकर चिढ़ाते हैं। (मगल क्या है यह वे ही जानेंगे, जो हैरी पोटर और उसकी दुनिया
 
बालसुब्रमण्यम
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रोने का लाभ

अमरीका के मिनेसोटा नामक स्थान के वैज्ञानिकों के अनुसंधानों से पता चला है कि मनुष्य शायद तनाव की अवस्था में शरीर में बने हानिकारक रसायनों से पीछा छुड़ाने के लिए रोता है। इन वैज्ञानिकों ने तनावग्रस्त अवस्था में आंखों से बहे आंसू और आंखों में धूल, हवा आद
 
बालसुब्रमण्यम
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जुकाम के जलवे

बारिश के मौसम के साथ ही बीमारियों का मौसम भी शुरू हो जाता है। एक आम बीमारी जुकाम है। उसके बारे में जानिए कुछ रोचक तथ्य। औसतन एक व्यक्ति को हर साल 3-4 बार जुकाम हो जाता है। जुकाम की बीमारी एक विषाणु (वाइरस) के कारण होती है। जुकाम लाने के लिए केवल 10 व
 
बालसुब्रमण्यम
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सब खुश हैं बादलों के शासन में

अब बरसात का मौसम अच्छी तरह जम गया है और पिछले तीन-चार दिनों से हर दिन दो-तीन घंटे तेज बारिश हो रही है। अब 42 डिग्री वाली गरमी के वे त्रस्त कर देनेवाले दिन भूल से गए हैं और दिल-दिमाग पर नई ऋतु के आगमन की फिजा छा गई है। मौसम का हम पर कितना गहरा प्रभाव
 
बालसुब्रमण्यम
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राहुल सांकृत्यायन चर्चा : सहमति

इस लेख माला का संदर्भ जानने के लिए पहले का यह लेख देखें - राहुल सांकृत्यायन और डा. रामविलास शर्मा पहले सोचा था कि डा. रामविलास शर्मा ने राहुल सांकृत्यायन की रचनाओं की समालोचना करते हुए राहुल जी की निराधार धारणाओं के उदाहरणों का जो ढेर लगाया है, उसका
 
बालसुब्रमण्यम
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बताइए अस्त-व्यस्त वस्त्र नियंत्रक क्या है

आज ईमेल में यह मिला। शायद आपने इनके बारे में पहले भी पढ़ा होगा, फिर भी यादें ताजा कर लीजिए। यदि नहीं पढ़ा हो तो ये आपको बहुत मजेदार लेगेंगी। वैसे भी इन्हीं के वंशज, डिसिप्लिनाचार्य और साइबरित्य ब्लोग जगत में आजकल धूम मचाए हुए हैं। अतः उनके पूर्वजों क
 
बालसुब्रमण्यम
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राहुल सांकृत्यायन चर्चा : ऋग्वेद के दार्शनिक महत्व का अवमूल्यन

इस लेख माला का संदर्भ जानने के लिए पहले का यह लेख देखें - राहुल सांकृत्यायन और डा. रामविलास शर्मा राहुल जी में जो अनेक अंतर्विरोध हैं, उनमें से एक ऋग्वेद के दार्शनिक महत्व को लेकर है। वे ऋग्वेद को दार्शनिक दृष्टि से महत्वहीन मानते हैं, पर उनके ही विव
 
बालसुब्रमण्यम
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क्या ब्लोग साहित्य है? - शिवकुमार मिश्र जी को उत्तर

मेरे क्या ब्लोग साहित्य है? लेख पर शिवकुमार मिश्र और ज्ञानदत्त पांडेय का ब्लोग में मिश्र जी ने एक पोस्ट लिखा है जिस पर काफी प्रतिक्रियाएं आई हैं। मैं इस पोस्ट पर देर से पहुंचा इसलिए इस बहस में वहां भाग न ले पाया, पर सब टिप्पणियों के अंत में मैंने अपन
 
बालसुब्रमण्यम
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राहुल सांकृत्यायन चर्चा : दर्शन और धर्म का घालमेल

इस लेख माला का संदर्भ जानने के लिए पहले का यह लेख देखें - राहुल सांकृत्यायन और डा. रामविलास शर्मा डा. शर्मा ने राहुल जी के विचारों के विवेचन के लिए उनके जिन ग्रंथों को चुना है, वे ये हैं – अकबर ऋग्वेदिक आर्य जय यौधेय दर्शन दिग्दर्शन दिमागी गुलामी दिव
 
बालसुब्रमण्यम
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राहुल सांकृत्यायन और डा. रामविलास शर्मा

पिछले एक पोस्ट में मैंने राहुल सांकृत्यायन की रचनाओं के बारे में डा. रामविलास शर्मा के मत का जिक्र किया था, जो उन्होंने अपनी पुस्तक इतिहास दर्शन के "इतिहास दर्शन और राहुल सांकृत्यायन" वाले अध्याय में व्यक्त किए हैं। यह पुस्तक वाणी प्रकाशन, 21-ए, दरिय
 
बालसुब्रमण्यम
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साहित्य का मूल्य

क्यों इस पचड़े में पड़ें कि साहित्य क्या है? और ब्लोग क्या है.. क्या साहित्य की कोई परिभाषा हो सकती है या क्या इसे परिभाषा में बांधा जा सकता है... कतई नहीं जो आपके लिए साहित्य है वह मेरे लिए कुड़ा हो सकता है और जो आपके लिए कुड़ा हो वह मेरे लिए साहित्
 
बालसुब्रमण्यम