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ननिहाल

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08 Mar 2010
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ज्ञ से ज्ञानी........

ज्ञ कहता है प्यारे बच्चों,अब आई है मेरी बारी,शांत होकर बैठो सभी,सुनो मेरी कहानी प्यारी।ज् व ञ के मिलने से,मैं अस्तित्व में आया,वर्णमाला का अंतिम वर्ण,और संयुक्ताक्षर कहलाया।कुछ लोग मेरा उच्चारण,'ग्य' करते जैसे विग्यान,तो कुछ लोग मेरा उच्चारण,'ज्न' करते
 
प्रभाकर पाण्डेय
Mar 04 2010 03:57 PM
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त्र से त्रिशूल.....

त्र कहे मेरे प्यारे बच्चों,अपने बारे में बताता हूँ,मैं हूँ एक संयुक्ताक्षर,ज्ञ के पहले आता हूँ,त् और र के मिलने से, मैंने अपना रूप है पाया,मुझे बहुत खुशी है कि,वर्णमाला ने मुझे अपनाया,त्रिनेत्र, त्रिशूल, त्रिपुरारी में मैं,मित्र, शत्रु में भी हूँ मैं,आप
 
प्रभाकर पाण्डेय
Feb 28 2010 03:56 PM
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क्ष से क्षत्रिय.....

क्ष कहता प्यारे बच्चों,अपने बारे में बताता हूँ,वर्णमाला में भले हूँ मैं,पर संयुक्ताक्षर कहलाता हूँ।क् और ष के मिलन से,मेरा यह रूप है आया,क्षत्रिय, कक्षा जैसे शब्दों में,मैंने अपने आप को पाया।__________________________________________ क्ष से क्षत्रिय,
 
प्रभाकर पाण्डेय
Feb 27 2010 09:55 AM
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ह से हाथी.....

                  ह कहता है, प्यारे बच्चों,देखो आई प्यारी होली,रंग खेलने निकल पड़ी है,मस्तानों की टोली,तुम भी जाओ, खेलो होली,अबीर व गुलाल उड़ाओ,पिचकारी में भर-भर के
 
प्रभाकर पाण्डेय
Feb 26 2010 03:43 PM
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स से सरौता...

स कहता है प्यारे बच्चों,एक कहानी सुनाता हूँ,इस कहानी के माध्यम से,एकता का पाठ पढ़ाता हूँ।एक किसान के थे दो लड़के,वे सदा आपस में लड़ते,इधर-उधर वे घूमा करते,कोई काम नहीं थे करते।किसान उनको बहुत समझाता,अच्छी-अच्छी बात बताता,पर वे अनसुनी कर देते,अच्छी बात पर
 
प्रभाकर पाण्डेय
Feb 18 2010 03:38 PM
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ष से षट्कोण....

ष कहता है, प्यारे बच्चों,देखो नया साल है आया,अशांति का मिटा अँधेरा,ढेर सारी खुशियाँ लाया।सुख-शांति हो चारों ओर,यह नव-संदेश है लाया,लड़ाई-झगड़ों को करके खत्म, यह प्रेम-भाईचारा बढ़ाने आया।मन लगाकर करो पढ़ाई,आगे बस तुम बढ़ते जाओ,करके अच्छे-अच्छे काम,सबके
 
प्रभाकर पाण्डेय
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श से शरीफा

श कहे मेरे प्यारे बच्चों, शब्दकोश क्या है, बताता हूँ, और इसकी उपयोगिता को भी, सरल शब्दों में समझाता हूँ। जिसमें क्रम से रहते बहुत शब्द, अधिकतर अपने अर्थों के साथ, किसी-किसी में पर्याय भी होते, तो किसी-किसी में मुहावरा भी साथ। कुछ एक भाषा में ही होते,
 
प्रभाकर पाण्डेय
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ढ से ढक्कन......ढ से ढोल

ढ कहता है ढम-ढम-ढम, देखो, खरगोश ढोल बजाए, हिरण, गदहे, बंदर के संग, छोटू हाथी भी गीत गाए, सिंहराजा बनकर दूल्हा, मन ही मन मुस्कुराएँ, वनवासी सब बने बराती, हुड़दंग मचाते जाएँ, उधर सिंहनी के घर, सब विवाह के गीत गाएँ, सिंहनी भी दुल्हन बनकर, आज बहुत इठलाए।
 
प्रभाकर पाण्डेय
Dec 29 2009 11:45 AM
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ड से डमरू......ड ,से डलिया

ड कहता है डुग-डुग-डुग, प्यारे बच्चों मेरी बात सुनो, मन लगाकर करो पढ़ाई, पढ़-लिखकर होशियार बनो। अंधेरे का नामोनिशान मिटे, तुम ऐसा प्रकाश बनो, करके अच्छे-अच्छे काम, गाँधी जैसा तुम महान बनो। भारत माँ के सच्चे सेवक, और सच्चे तुम लाल बनो, देश सेवा का व्रत
 
प्रभाकर पाण्डेय
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वह भारत देश हमारा है।

वह भारत देश हमारा है, सब देशों से न्यारा है। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जहाँ प्रेम से रहते, प्रेम, मानवता, भाईचारा, जहाँ हैं फलते-फूलते। वह भारत देश हमारा है, सब देशों से न्यारा है। जहाँ खेत में रामू काका, सुबह कलेवा करते, रात होते ही चुन्नू-मुन्नू,
 
प्रभाकर पाण्डेय
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ठ से ठठेरा, ठग से ठग

ठ कहता है प्यारे बच्चों, हमें कुछ कर दिखाना है, भेदभाव, घृणा को भगाकर, प्रेम, भाईचारा बढ़ाना है, करके अच्छे-अच्छे काम, देश में सुख-समृद्धि लाना है, सबसे प्यारा, देश हमारा, संदेश, घर-घर में पहुँचाना है। १. ठ से ठठेरा , हमें पढ़ना है, काम यह अभी करना ह
 
प्रभाकर पाण्डेय
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ट से टमाटर...ट से टट्टू

ट कहता है, टन, टन, टन, कौवा घंटी बजा रहा है, कबूतर, कोयल, मैना के संघ, मुर्गा भी स्कूल जा रहा है। आज चील अध्यापकजी, गणित के सवाल बताएँगे, और कठफोड़वा गुरुजी भी, हमें एकता का पाठ पढ़ाएँगे। हम मन लगाकर करें पढ़ाई, जीवन होगा सदा सुखदाई, सब करेंगे अपना ग
 
प्रभाकर पाण्डेय
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ञ कहता है प्यारे बच्चों, सुन लो ध्यान से मेरी बातें, ङ, ञ, ण हैं, हिंदी के ऐसे वर्ण, जो किसी शब्द में पहले नहीं आते, पर शब्दों में बने रहकर, ये अपना भान सदा कराते। अधिक बार ये आधा ही आते, और अपनी जगह बिंदी दे जाते, जैसे- चंचल, गंगा, ठंडा, मंगल, मंजु
 
प्रभाकर पाण्डेय
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झ -- झंडा

झ कहता है, झम-झम-झम, देखो बरस रहा है पानी, भीग रहे हैं पेड़ व पौधे, भीग रहा नदी का पानी, भीग रहे हैं खेत-खलिहान, भीग रहे मेरे नाना-नानी। चलो कागज की नाव बनाएँ, वर्षा-जल में इसे तैराएँ, बारिश का आनन्द उठाएँ, बचपन अपना सफल बनाएँ।। ___________________ ब
 
प्रभाकर पाण्डेय
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ज -- जहाज

ज कहता है, जय हिंद बोलो, बोलो, भारत माँ की जय, जय बोलो भगत, आजाद की, नेताजी व गाँधीजी की जय, जय बोलो, शास्त्री, पटेल की, १५ अगस्त, २६ जनवरी की जय, जय बोलो तुम शिवा, प्रताप की, बोलो, माँ भारती की जय, जय हो सदा भारत वीरों की, जय हो , हो जय , जय , जय ।
 
प्रभाकर पाण्डेय
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छ -- छाता

छ कहता है छमछम-छमछम, देखो नाच रहा है भालू, बंदर डमरू डमका रहा है, मेढक भी डोल बजा रहा है, गा रहा है गदहा गाना, हेंको - हेंको , ता - ना - ना - ना। __________________ छ से छाता , छ से छड़ी , छाते में होती कई कड़ी, गोल-गोल होता है छाता, धूप,बारिश से हमे
 
प्रभाकर पाण्डेय
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च -- चरखा

च कहता है चाँद बनो तुम , चाँद जैसे काम करो तुम , जब सूरज डूब जाता है , अंधकार फैल जाता है , तब चाँद आ जाता है , रोशनी कर जाता है। _______________ च से चरखा होता है, इससे सूत बनता है, गाँधीजी इसे चलाते थे, स्वदेशी की बात बताते थे। ________________ ___
 
प्रभाकर पाण्डेय
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भ से भक्त.........

भ कहता है प्यारे बच्चों, संज्ञा के बारे में बताता हूँ, आज थोड़ा अलग हटकर, मैं व्याकरण तुम्हें पढ़ाता हूँ। किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान आदि, के नाम को संज्ञा कहते हैं, हर वस्तु, वह जगह संज्ञा है, जिसमें हम सब रहते हैं। दिल्ली, मुम्बई, कोलकता, हैं संज्ञा
 
प्रभाकर पाण्डेय
Dec 29 2009 11:45 AM
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ब से बकरी........

ब कहता है बकबक करना, अच्छी बात नहीं है बच्चों, बकवादी अच्छे नहीं समझे जाते, लोगों के उपहास हैं बन जाते। सत्य बोलो और मीठा बोलो, सबके दिल में मिश्री घोलो, इससे इतना सुख पाओगे, सबके प्यारे बन जाओगे।। ____________________ ________________________ ब से ब
 
प्रभाकर पाण्डेय
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फ से फल..........

फ कहे मेरे प्यारे बच्चों, तिरंगे की बात बताता हूँ, 26 जनवरी व 15 अगस्त को, मैं भी इसे फहराता हूँ। कश्मीर से कन्याकुमारी तक, फैला देश महान है मेरा, यह अभिमान व शान है मेरा, यह भगवान व ईमान है मेरा। इस देश की शान तिरंगा, लहर-लहर लहराता है, इसके नीचे खड
 
प्रभाकर पाण्डेय
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न से नदी........न से नल

न कहता है प्यारे बच्चों, आलस्य कभी करना नहीं, हर काम करो मन लगाकर, बेवजह तुम डरना नहीं, मंजिल तुम्हें मिल जाएगी, बस कहीं रूकना नहीं, जीत तुम्हें मिल जाएगी, पीछे कभी हटना नहीं। _________________ ________________________ न से नदी , बस बहना जाने, थकना,
 
प्रभाकर पाण्डेय
Dec 29 2009 11:45 AM
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त से तकली.........त से तराजू

त कहता है, प्यारे बच्चों, तुम बनो सबके दुलारे, अच्छे काम करते जाना, मेहनत से पढ़ते जाना। सूर्य जैसा तुम चमकोगे, गुलाब जैसा तुम महकोगे, प्यार करे तुम्हें दुनिया सारी, तुम्हारी सूरत लगे सबको प्यारी।। ________________________________ ___________________
 
प्रभाकर पाण्डेय
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व से वकील....

व कहे, मेरे प्यारे बच्चों, मेरे पास आओ ना, मेरे अच्छे संदेशों को, घर-घर में पहुँचाओ ना, किसी को कभी दुख मत देना, आपस में मिलजुल कर रहना, सबसे प्यारा मानव धर्म, तुम इसको अपनाओ ना, व कहे मेरे प्यारे बच्चों, मेरे पास आओ ना। तुम राम, कृष्ण को याद करो, सब
 
प्रभाकर पाण्डेय
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ल से लड्डू....

ल कहता है, प्यारे बच्चों, वह भारत देश महान है, जहाँ जन्म लिए कृष्ण व राम, जहाँ बहतीं पावन नदियाँ अविराम, शिवा, प्रताप, लक्ष्मी की गाथाएँ, जहाँ लोग गाते सुबह व शाम हैं, वह भारत देश महान है। उत्तर में स्थित हिमालय, जिसकी शान बढ़ाए, भारत के गौरव-गाथा को
 
प्रभाकर पाण्डेय
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र से रस्सी...र से रथ...

र कहता है, प्यारे बच्चों,क्रिया-विशेषण क्या है बताऊँगा,पर क्रिया-विशेषण बताने से पहले,मैं तुमको 'क्रिया' समझाऊँगा।'क्रिया' शब्द का है वह रूप,जो कर्म होने को बताता है,सीधे और साफ तौर पर,काम का 'करना' 'होना' आता है।खाना, पीना, रोना, सोना,ये सब तो क्रियाएँ
 
प्रभाकर पाण्डेय
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य से यज्ञ..........

य कहता है , प्यारे बच्चों,आज विशेषण की बारी है,शब्द ब्रह्म और ब्रह्म ही शब्द,शब्दों की दुनिया निराली है।जो संज्ञा की विशेषता बताए,वह विशेषण कहलाता है,संज्ञा के गुण आदि को बताने,यह उसके साथ आता है।छोटा, बड़ा, अच्छा, बुरा,ये विशेषण कहलाते हैं,इसी तरह के और
 
प्रभाकर पाण्डेय
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म से मछली.....

म कहता है, प्यारे बच्चों,आज सर्वनाम की बारी है,अपना ज्ञान बढ़ाने हेतु,हमें पढ़ना रखना जारी है।संज्ञा के बदले आनेवाले,सर्वनाम कहलाते हैं,और कई संज्ञाओं के बदले,कभी एक ही सर्वनाम पाते हैं।जैसे, सीता व राम के लिए,'वह' भी सर्वनाम आता है,ये संज्ञाएँ जो बताना
 
प्रभाकर पाण्डेय
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प से पतंग.........

प कहता है, प्यारेलाल,मेरे पास आओ तुम,गुड्डी और मुन्नी को भी,मेरे पास लाओ तुम,मेरे पास हैं, कुछ खिलौने,उन्हें लेकर जाओ तुम,खेलो और खेलाओ सबको,सबका मन बहलाओ तुम।।________________________________________________________प से पतंग, चलो उड़ाएँ,हवा से इसकी बात
 
प्रभाकर पाण्डेय
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ध से धनुष.........ध से धर्म

ध कहता है धमधूसर लाल, मेरे पास आओ तुम, गुड्डी व गुड़िया को भी, मेरे पास लाओ तुम, मेरे पास हैं कुछ खिलौने, वे लेकर जाओ तुम, खेलो और खेलाओ सबको, सबका मन बहलाओ तुम। _______________________ __________________________ ध से धनुष व ध से धर्म , धर्म यानि सच्
 
प्रभाकर पाण्डेय
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द से दवात...........द से दही

द कहता है, प्यारे बच्चों, तुम्हें विलोम सिखाता हूँ, शब्दों के बीच उल्टेपन को, अपनी भाषा में समझाता हूँ। बड़ा का विलोम होता छोटा, और पतले का विलोम है मोटा, दिन का रात, सुबह का साम, व सम्मान का विलोम है अपमान। आने का जाना, हँसने का रोना, लेने का देना व
 
प्रभाकर पाण्डेय
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थ से थाली........थ से थन

थ कहता है, प्यारे बच्चों, कुछ काम की बात बताऊँ, अक्षर, शब्द के बारे में, मैं आज तुम्हें पढ़ाऊँ। अक्षर से मिलकर बनते शब्द, शब्दों से वाक्य बन जाता, इन वाक्यों के प्रयोग से, कोई अपनी बात कह जाता। कोई लिखता कविता , कोई कहानी लिख जाता, इन शब्दों की महिमा
 
प्रभाकर पाण्डेय
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ण कहता है, प्यारे बच्चों, मैं अपनी बात बताता हूँ, अपना प्रयोग अब घटता देख, मैं बहुत सकुचाता हूँ। पर मुझे बहुत खुशी होती, शब्दों के बीच में आकर, अपने मित्र-संबंधियों का, थोड़ा संसर्ग भी पाकर। वाण, रण जैसे शब्द, जो संस्कृत में आए हैं, बिना किसी बदलाव क
 
प्रभाकर पाण्डेय