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रात
नीला गगन फिर झुक रहा हैटिमटिमाते तारों के बोझ से धरती कि साँसें सन चुकी हैं सर्द हो चुकी ओस से आज चुप सी है चंचल चांदनी भी झींगुर भी आज कुछ कुछ अनमने हैं ...पत्ते भी आज जाने क्यों तनिक उनींदे हैं फुनगी पे टिक कर सो गयी चंचल हवा भी ..समय ने आज शायद नैन
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Mar 13 2010 10:19 PM


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