LIFE: AS I SEE IT's Image
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13 Mar 2010
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रात

नीला गगन फिर झुक रहा हैटिमटिमाते तारों के बोझ से धरती कि साँसें सन चुकी हैं सर्द हो चुकी ओस से आज चुप सी है चंचल चांदनी भी झींगुर भी आज कुछ कुछ अनमने हैं ...पत्ते भी आज जाने क्यों तनिक उनींदे हैं फुनगी पे टिक कर सो गयी चंचल हवा भी ..समय ने आज शायद नैन
 
Paridhi Jha
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अतीत की यादें

वक्त की आँधी चली यादों के पन्ने फर्फराएमन में चुभन सी है नयी .. लो आज फिर तुम याद आये वो हँसते पल वो रोते पल पल पल में सपने संजोते पल फिर आज मन को छू गए मृत प्रेम के वो मौन साये कुछ कड़वे से कुछ मीठे से और कुछ निगोड़े सीठे से झगडों का खेल निराला था
 
Paridhi Jha
Feb 13 2010 09:59 PM
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अनाम

आज फ़िर मैंने खुली आँख से सपना देखादिल ने फ़िर दूर कहीं आज वो अपना देखाधुंधला था सब कुछ पराया था जहाँमेरा कुछ भी नही कुछ और ही पाया था वहाँअकेले रास्ते गलियाँ गुम से गुमसुम मुकामकोहरे की बाहों मे लिपटे हुए किस्से तमामअँधेरी स्याह थी दुनिया -- खामोशी बसी
 
Paridhi Jha
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कच्ची धूप

कच्ची धूप गुनगुनी धूपभोली सी अनमनी धूपअम्बर से छन-छन के गिरतीकरवटें सी बदलती धूपपत्तों के तन से टकरातीहवा के झोंकों मे बलखातीफूलों की पंखुदी चूम करगुलशन नए खिलाती धूपकभी मेरे आँचल से छन करपलकों की चिलमन के नीचेकभी नाच कर कभी उफ़न करसपने नए दिखाती धूपनए
 
Paridhi Jha
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गुज़ारिश

एक बात कहूँ सुनते हो ना ?बस यूँ ही तुम दिल में रहना मैं द्वार हृदय के खोलूंगी पर मुख से कुछ ना बोलूंगी तुम स्वयं समझना भाव मेरे मुझको अपने दिल में रखना जब राह कठिन हो जीवन की मुझको अपने संग पाओगे हर कदम पे फूल बिछाऊंगी तुम जब जब कदम उठाओगे बस नहीं भूलना
 
Paridhi Jha
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आर्तनाद

उद्विग्न मनस उच्चाट पटल पर क्रूर विधाता क्या लिख डाला? प्रेमामृत की गागर फूटी बहा कटुक क्यों अन्तर हाला ? संतप्त कष्ट से व्याप्त दुखी मन कहे किसे ये मर्म ये गाथा ? कुटिल काल ने ग्रास बनाया चुटकी भर सिन्दूर का वादा .... व्याकुल आँखे नीर बहा कर आख़िर अ
 
Paridhi Jha
Dec 29 2009 11:58 AM
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तरंगें

तरंगें गहरे पानी में उठती है उफन कर कभी कभी फ़िर एक हवा के झोंके में नश्वर लीला मिट जाती है उजले दिन की रंगत सारी खोती है सागर के तल में काली सी एक परछाई में यूँ ही गुप चुप मर जाती है एकांत रात की बाहों में पानी की बूंदों की लहरी उठती है मन के क्रंदन
 
Paridhi Jha
Dec 29 2009 11:58 AM
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आह्लाद

आज सब नया सा है , हर लम्हा हर धड़कन हर पत्ता हर तिनका, आज सब मी कोई बात है या बदल गया है कुछ मुझ मे? हाँ ... मुझमे ..... आज मैं खुश हूँ आज मैं दुनिया बदल दूँगी ... आज दिल मे एक ललक सी है ..... आज मैं कुछ भी कर सकती हूँ .... आज बादलों की सीढ़ी बुन कर .
 
Paridhi Jha
Dec 29 2009 11:58 AM
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प्रश्नावली

क्या ऐसा दिन भी आयेगा जब तुम यादें बन जाओगे? सूरज हो आज मेरे जीवन का कल कोहरा बन खो जाओगे? सर्दी की धूप से नर्म गर्म क्या मुझे सदा गर्माओगे? या तिनका तिनका टूट टूट पतझड़ मे गुम h ओ जाओगे? मेरे हाथों की मेहंदी मे अब नाम तुम्हारा सजता है मेहंदी के रंग स
 
Paridhi Jha
Dec 29 2009 11:58 AM
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गुस्ताख सवाल

नन्हा सा एक नगमा कुछ नए नए अरमान खुरचन कुछ ख्वाब की चलो आज ढूंढ ही लूँ कुछ गर्मी धूप की एक मुठ्ठी ही सही एक प्याला chashanee chaandani की तौल लूँ बूँदें कुछ प्यार की एक चुटकी दांत की सहमी see कुछ हँसी jehan में भींच लूँ gunguni आंच सी ख़ुशी कुछ झीनी
 
Paridhi Jha
Dec 29 2009 11:58 AM
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अनाम

आज फ़िर मैंने खुली आँख से सपना देखा दिल ने फ़िर दूर कहीं आज वो अपना देखा धुंधला था सब कुछ पराया था जहाँ मेरा कुछ भी नही कुछ और ही पाया था वहाँ अकेले रास्ते गलियाँ गुम से गुमसुम मुकाम कोहरे की बाहों मे लिपटे हुए किस्से तमाम अँधेरी स्याह थी दुनिया -- खाम
 
Paridhi Jha
Dec 29 2009 11:58 AM
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ये शाम

रोज़ दिल पूछता है शाम क्यो आती है तन्हाई भरी शाम क्या सिर्फ दर्द लाती है? नही ये सच नही कि शाम मे सिर्फ दर्द है शाम साथ अपने कितने वाकये ले आती है। शाम आती है तो फिर चाँद साथ लाती है चाँदनी जैसे तेरी छुअन ठंडक पहुँचाती है शाम के साथ बहती आती ठंडी पुर
 
Paridhi Jha
Dec 29 2009 11:58 AM
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दिव्य दृष्टि

आंखों को कम मत आन्किये आंखें खदान है सपनो की गहराईयां इन की थामे है खामोशियाँ ग़ैर अपनों की छुपा है इन के गह्वर मे हरेक भाव इस दिल का इन ही के झुकने उठने से बंधा है अर्थ हर वचन का ख़ुशी इन मे झलकती है जो कोई ख्वाब सच होता है कसक के बादल छाते है जो को
 
Paridhi Jha
Dec 29 2009 11:58 AM
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कच्ची धूप

कच्ची धूप गुनगुनी धूप भोली सी अनमनी धूप अम्बर से छन-छन के गिरती करवटें सी बदलती धूप पत्तों के तन से टकराती हवा के झोंकों मे बलखाती फूलों की पंखुदी चूम कर गुलशन नए खिलाती धूप कभी मेरे आँचल से छन कर पलकों की चिलमन के नीचे कभी नाच कर कभी उफ़न कर सपने नए
 
Paridhi Jha
Dec 29 2009 11:58 AM
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अक्स

सपनों की नर्म परछाइयों से फिर तुम्हारा अक्स निकला धुँधला धूमिल धुला हुआ सा फिर तुम्हारा अक्स निकला पास आता है मेरे, फिर दूर क्यों रह जाता है? नर्म रुई की तरह हाथों मे चूर क्यो रह जाता है? कच्ची गुनगुनी धूप सा सर्द मन को गर्माता है सरदी की ओस मे सना ह
 
Paridhi Jha
Dec 29 2009 11:58 AM
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आशा वसंत

विश्वा सुंदरी धरा विभूषित सुगम सरल पुश्पाभूषण से कनक रंग मय रक्त वर्ण सम विविध रंजनाभूषण से भरा हुआ है मन्द हास्य से पुलकित हुई हवा का स्वर कुसुमित हो इस नयी छटा मे कुंठित मानव मन तरुवर नयी धूप के छद्म रुप ने वृक्षों को ललकाया है कभी झूमती कभी सम्हलत
 
Paridhi Jha
Dec 29 2009 11:58 AM
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The Glorious Moments

Sitting in the waiting area of the Mumbai airport, I looked around myself, noting the subdued activity of the airport, the half sleepy travelers, the cafe shops with dimmed lights, and yards and yards of gleaming floors devoid of the tapping feet. It
 
Paridhi Jha
Nov 26 2009 12:02 AM
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स्मृति

दिन बीत गए जाने कितने जाने कित पल छिन बीत गएअब दरस को तरसे मेरे नैन, सुनना चाहे मन बोल नएस्मृति पट पर अंकित छवि है तेरी, विरह की पीर चुराती हैपर अनायास, यूँ ही अक्सर कुछ प्रश्न नए दे जाती है .....क्या अब भी बाल की नटखट लट घुन्घ रा कर माथा छूती है?भौहें
 
Paridhi Jha
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काश

काश वो दिन मुझे मिल जाएँ फ़िर से एक नीड़ बनाने की चाहत है..... चुन कर मुट्ठी भर तिनकों से वो तिनके आशा से जगमग ..... स्वर्णिम मुझे मिल जाएँ फ़िर से एक नीड़ सजा लूँ आज कहीं एक छोटी सी दुनिया चुन कर एक नीड़ सजा लूँ आज तेरे आने के कुछ सपने बुन कर एक पर्ण
 
Paridhi Jha
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तेरा अक्स

सपनो की नर्म परछाइयां आज फ़िर तेरा अक्स ले आई हैं आंखों से नींद गई नही है अभी ...... इसलिए अब भी दिख जाता है तेरा अक्स .... जो कहीं दूर से मुस्का रहा है ... पहले की तरह तेरा अक्स .... जो अब भी भरमा रहा है .... पहले की तरह करवटें भी अजीब होती हैं ....
 
Paridhi Jha
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LIFE: AS I SEE IT

अतीत की झीनी चादर की ओट में कई किस्से छिपा रखे हैं बूढी ज़िंदगी ने वो कच्ची धुप के दाडिम भी, जो कमरे की बंद दीवारों पर अब भी चढ़ा करते हैं याद दिला जाते हैं माँ की गोद और कुछ लम्हे फुर्सत के वो शांत नीरव सी दुनिया मेरी और माँ का हौले से गुनगुनाना मान
 
Paridhi Jha
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Hope Eternal

O' the land of endless light!!My heart cries out for your delightsWhere fears are slain and hopes remainDistress is lost and smiles are brightA land so calm a land so quietWith gentle breeze in starry nightsThe pulls are strong from earth's armsThe land
 
Paridhi Jha
Nov 22 2008 11:38 AM
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Misery

After the fall of the midnightbefore the breaking of dawnyour shadow falls on my sensesI remember days long gone....How could it all turn to the worst o'dearfrom lovely dreams to nighmareshow could you just shut our love off?how could you stop to
 
Paridhi Jha
Sep 27 2008 08:27 PM
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MA

A lady with a gentle nature, lovely smile, beautiful eyes, even more beautiful heart, hidden pockets of awesome strength, believer in God, truth, honesty and good will.. Add a dash of wicked temper, a steady hand in dealing with people, utmost love for
 
Paridhi Jha
Jun 11 2008 10:04 PM
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Foolishness

Tremble O Mighty HeartYou are about to fall againIs it not ironic that An angel's face does you in?Broken betrayed and bleedingYou have still remained beatingSarcasm your shield; Cynicism your swordIs it not ironic thatA dreamer's talk does you in?You
 
Paridhi Jha
Jan 29 2008 09:23 PM
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LIFE: AS I SEE IT

To Love or Not To Love--- That’s the Question?Unpredictable are the paths of love;The twists and turns all a tangled web,Magical is the shine of love;Golden, bright and warm….The journey on this path is adventurous;It needs hope faith and courage.Hope of
 
Paridhi Jha
Jan 13 2008 08:09 PM
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LIFE: AS I SEE IT

FORM MOTHER TO CHILDI gave birth to youAnd my milk will give you lifeYou are my first borneVery special.. and a gift of GodI will cherish you forever…….You rest your head on my heartYour heart, beats along with mineAnd as you sleep on.. trusting meI let
 
Paridhi Jha
Apr 24 2007 05:14 PM
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AND THEN THERE WAS ONE:

It was May 19th when The Idiot entered our home. He was 2.24 kgs, barely 10 inches tall from the floor, had a thin body, a sorry face, and a really thin tail. I looked at him and thought, “God!! Couldn’t they (Runjhun and Vihan) find a pretty dog?”It was
 
Paridhi Jha
Feb 19 2007 03:26 PM
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The handsome male

He is handsome, one of the best males made by God. He has black-blond hair, with a tendency to curl. And his eyes? They are awesome, the color of honey and gold.He has a silly grin.He is powerful, has very strong white teeth, he has sharp ears. He is so
 
Paridhi Jha
Feb 13 2007 03:13 PM
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bonding..........of love?

Today I had an illuminating experience early in the morning. I am in the habit of going for walking or jogging early in the morn, as part of my exercise routine.You will not beleive the sensory perceptions of early morning world..........the light is so
 
Paridhi Jha
Feb 09 2007 02:55 PM