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apni baat! Umesh Pathak ke saath.

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14 Jun 2010
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मुझे चाँद चाहिए :आत्मविश्वास कि गाथा

-उमेश पाठक पश्चिमी दार्शनिक हईड़ेगर ने कहा था - मनुष्य इस संसार में एक फेंकी हुयी सत्ता है। कभी -कभी जिंदगी के थपेड़ों को महसूस करने के बाद उसकी ये बात सच प्रतीत होती है!कभी हम इतने मजबूर होतें हैं कि जो निर्णय नियति लेती है उसे स्वीकार करने के अलावा
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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आइये धुम्रपान के खिलाफ आह्वान करें !

-उमेश पाठकवर्षों पहले आयी देवानंद की फिल्म काला पानी का एक सदाबहार गीत है-मै जिंदगी का साथ निभाता चला गया,हर फ़िक्र को धुएं में उडाता चला गया! बड़ा ही प्यारा सगीत था जयदेव का और मोहम्मद रफ़ी सधी हुयी आवाज़ ने गाने में जो मस्ती और बेफिक्री बिखेरी थी उसे आज
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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दिल में उमीदें जगाओ तो सही!

-उमेश पाठकमित्रों बदलते मौसम की तरह वक्त के साथ इन्सान की सोच भी बदलती है!हमारी सोच कही न कही से हमारे अपने व्यक्तित्व को परिलक्षित करती है !किसी शायर ने कहा है-वक्त के साथ तो हालात भी बदलता है!ज़हीन वो है जो ज़माने के साथ चलता है !आज कुछ ऐसी ही पंक्तिया
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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खरी बातें सोने के सामान होती हैं !

-उमेश पाठक कहते हैं की सोना हमेशा मूल्यवान होता है! वक्त के साथ उसकी कीमत भी बढती रहती है ! कुछ खरी बातें भी सोने के ही सामान होतीं हैं जिनकी कीमत कभी भी कम नहीं होती ! छोट-छोटे दोहे ,सूक्तिय और संस्कृत के शलोक इसके प्रमाण हैं !जीवन के इस आपाधापी में हम
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
May 24 2010 06:18 PM
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आइये सीखे कुछ हिंदी के समानार्थी शब्द !

- उमेश पाठकनमस्कार दोस्तों ! महानगरों में आज-कल हिंदी भाषा की दुर्दशा है,खास तौर पर हमारे युवा हिंदी में काफी दिक्कत महसूस करतें हैं! कभी -कभी तो सामान्य सा कोई शब्द भी उनकी समझ में नहीं आता! हिंदी न केवल हमारी रास्ट्र भाषा है बल्कि यह दुनिया की उन कुछ
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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apni baat! Umesh Pathak ke saath.

रात हमारी आँखों से फ़िर बही कहानी अम्मा की, खिड़की से जब सटकर महकी रात की रानी अम्मा की!दादा की वो गिरी हवेली ,टुटा तुलसी का चौरा ,पिछवारे की नीम भी जाने ,उमर खपानी अम्मा की!हम लोगो को खिला-पिला के, जब अम्मा थक जाती थी,हमने देखी पानी पीकर, भूख छुपानी
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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एक नाज़ुक एहसास !

-उमेश पाठकदोस्तों ! काफी समय के बाद किसी से मिलना तो सबको अच्छा लगता है लेकिन कोई ऐसा जिससे ,आप जेहनी तौर पर जुड़े हों और वर्षों से उसका कुछ पता न हो....एक दिन अचानक ...फोन की घंटी......और फिर मिल-बैठ कर माजी (अतीत ) को कुरेदना /महसूस करना ........एक अजीब
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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प्रेरक बातें !

दोस्तों जीवन में आगे बढ़ने के लिए बहुत सी चीजों की ज़रूरत पड़ती है!परिश्रम,समय का सदुपयोग,दूरदर्शिता, लक्ष्य पर दृष्टि आदि! लेकिन इन सबके अलावा कुछ बातें ऐसी भी हैं जिनके महत्व को नकारा नहीं जा सकता है !किसी शायर ने कहा है- "फूल मुर्झातें हैं अल्फाज नही
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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इन्सान और जानवर !

कहते हैं की इन्सान पहले जानवर था! समाजशास्त्र में भी आज भी यह पढाया जाता है कि Man is a social animal .इस चित्र को ज़रा ध्यान से देखिये क्या ये जानवर आपको इन्सान नहीं लग रहें हैं? ....आज जब इन्सान अपनी सारी मर्यादाएं ,नैतिकता और मूल्य भूल चूका है ऐसे में
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
Apr 17 2010 05:10 PM
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एक बोध कथा

जीवन में जब सब कुछ एक साथ और जल्दी - जल्दी करने की इच्छा होती है , सब कुछ तेजी से पा लेने की इच्छा होती है , और हमें लगने लगता है कि दिन के चौबीस घंटे भी कम पड़ते हैं , उस समय ये बोध कथा , " काँच की बरनी और दो कप चाय " हमें याद आती है । दर्शनशास्त्र के
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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दर्दों का एक जखीरा सैलाब बन गया !

(हर इंसान के दिल में कुछ न कुछ अनुभूतियाँ होती हैं और वह उसे किसी न किसी रूप में व्यक्त करने की कोशिश करता है ......लीजिये एक ईमानदार कोशिश ,आपके सामने प्रस्तुत है ) - उमेश पाठकदर्दों का एक जखीरा सैलाब बन गया !जी लेंगे,खुश रहेंगे बस खाब बन गया!दुशवारियां
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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कोई दर्द जो दिल में होता है!

-उमेश पाठकचेहरे से बयां हो जाता है,अफसाना जो न दिखता है,कोई ग़मगी हो चुप रहता है ,कोई दर्द की गजलें लिखता है,कही कोई आहें भरता है ,कही कोई गुमसुम रोता है,कोई दर्द जो दिल में होता है, कोई दर्द जो दिल में होता है!भूली बिसरी सी चाहो में ,जेहन की पुरानी
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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कोई दर्द जो दिल में होता है !

-उमेश पाठकचेहरे से बयां हो जाता है,अफसाना जो न दिखता है,कोई ग़मगी हो चुप रहता है ,कोई दर्द की गजलें लिखता है,कही कोई आहें भरता है ,कही कोई गुमसुम रोता है,कोई दर्द जो दिल में होता है, कोई दर्द जो दिल में होता है!भूली बिसरी सी चाहो में ,जेहन की पुरानी
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
Mar 07 2010 07:58 PM
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कुछ दूर हमारे साथ चलो ...

कुछ दूर हमारे साथ चलो ,हम दिल की कहानी कह देंगे !समझे ना तुम जिसे आंखों से ,वह बात जुबानी कह देंगे !जो प्यार करेंगे जानेंगे ,हर बात हमारी मानेंगे ,जो जले नहों खुद उल्फत में ,वह आग को पानी कह देंगे !जब प्यास जवाँ हो जायेगी,एहसास की मंजिल पाएंगे,खामोश
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
Mar 07 2010 10:43 AM
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apni baat! Umesh Pathak ke saath.

रंगों का त्योहार मुबारक हो।खुशियों की फुहार मुबारक हो।सात रंग से सजे आपका तन-मन जीवन।एक नहीं,दो नहीं ,सौ बार मुबारक हो। नव संवत और होली की हार्दिक शुभकामनाएं । - उमेश पाठकblogspot/lakg
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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apni baat! Umesh Pathak ke saath.

उमेश पाठक -मित्रो, आज काफी दिनों के बाद कुछ लिखने बैठा हूं ,सच तो ये है की "रोजी-रोटी की चकरघिन्नी" से वक्त थोडा निकालना मुश्किल हो जाता है! बहरहाल ....बचपन की सुनी-पढ़ी कुछ कविताओं की पक्तियां जो कभी हममें जोश भर देती हैं तो कभी आत्मविश्वाश ! आज आप सभी
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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नया साल और नयी चुनौतियाँ

नये साल का आगाज हो चुका है इसके साथ ही नयी चुनौतियां भी हैं इस नये साल में देश के सामने भी और पूरे विश्व के सामने भी। साल दो हजार नौ मे जहां मंदी की मार हर तरफ दिखायी पड़ी वहीं विश्व की सबसे मजबूत समझी जाने वाली अमेरिकी और जापानी अर्थव्यवस्था धरासायी
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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कुछ ज़रूरी प्रश्न: बी जे एम् सी २ सेमेस्टर,हिन्दी के लिए

कुछ ज़रूरी प्रश्न: १. अनुवाद से आप क्या समझते हैं? अनुवाद के प्रकारों का वर्णन कीजिये? २.अनुवाद के तत्वों की व्याख्या कीजिये? ३.सम्पादकीय क्या है? सम्पादकीय पृष्ठ के तत्व क्या-क्या हैं? ४.विराम चिन्ह क्या हैं?इनकी क्या उपयोगिता है? ५.भाषा और बोली में
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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Important Terms in Advertising :Key words

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Umesh Pathak / उमेश पाठक
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क्या है ज़िन्दगी?

उमेश पाठक क्या है ज़िन्दगी?अपने आप में ये बड़ा सवाल है! लगातार जीते चले जाना उतार -चढाव को झेलना या जिंदादिली?जवाब कोई एक नही हो सकता ,ये सारी बातें जिंदगी में शामिल है ,वास्तव में जिंदगी एक फूल के जैसी है,जिसके अलग-अलग हिस्सों में कई रंग होते हैं!अग
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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ये इन्कलाब गुज़र जाने दो !

उमेश पाठक ये इन्कलाब गुज़र जाने दो ! चढा सैलाब उतर जाने दो! प्यास बुझती नही मैखानों में , तुम अपनी यादों के पैमाने दो! दार पर मुझको चढा दो यारो, नाम कुछ इश्क में कर जाने दो! उनसे मिलने की तमन्ना है जवां लगी है आस ,मगर जाने दो ! अपने बारे में कभी सोचे
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
Dec 29 2009 11:52 AM
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बाबूजी के न रहने पर.....

थका हारा इन्सान जब तपती धूप में थक कर किसी घने बरगद की छावं में विश्राम करता है,ऐसे में जो अनुभव होता है वैसा ही पिता के साए का भी अनुभव होता है!सचमुच कितना सुकून मिलता है जब तक सर पर पिता का साया होता हैआज इसे मै बड़ी शिद्दत से महसूस कर रहा हूं !दर्
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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प्रभाष जोशी का जाना !

हिंदी के जाने-माने पत्रकार प्रभाष जोशी का निधन हो गया है. वर्षों से हिंदी अख़बार जनसत्ता से जुड़े रहे प्रभाष जोशी को गुरुवार की रात दिल का दौरा पड़ा था. गुरुवार रात क़रीब साढ़े ग्यारह बजे उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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दीपावली की शुभकामनाएं !

पूरी हो हर बात जो दिल में आपने पाली हो ! मंगलमय हम सबकी हर बार दिवाली हो ! असतो माँ सद गमय , अर्थात अन्धकार से प्रकाश की और ले चलो ! अंधकार और प्रकाश जो सत्य और असत्य के प्रतीक हैं , इनको मान कर हम दीपावली को सत्य की असत्य पर विजय के रूप में मनातें ह
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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उधार की शहरी जिंदगी

उमेश पाठक यू तो सबकी जिंदगी जीने के अपने तरीके होते हैं और हर आदमी अपने हिसाब से ही जीता है लेकिन शहरी जिंदगी का अपना अलग ही रूप है ! इस भौतिक युग में जहा आम आदमी दाल - रोटी से जूझ रहा है वहीँ शहरी मध्य वर्ग अपनी आवश्यकताओं / उपभोग की वस्तुओं के लिए
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
Oct 14 2009 07:50 PM
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माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है।

"इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती हैमाँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है।अभी ज़िंदा है माँ मेरी, मुझे कुछ भी नहीं होगामैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती हैजब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती हैमाँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती हैऐ अंधेरे देख ले
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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भगवती चरण वर्मा :व्यंग-चित्र के सफल चितेरे !

हिन्दी साहित्य में यू तो एक से बढ़ कर एक नाम हैं , मगर जिस सहजता के साथ भगवती चरण वर्मा गुदगुदा कर व्यंग का तीर छोड़ते हैं , वह बहुत कम देखने को मिलता है ! " वसीयत " उनकी ऐसी ही एक कालजयी रचना है ! वसीयत के अलावा सबही नचावत राम गोसाई भी उनकी कलम की ते
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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सांप - सीढ़ी और इन्सान की ज़िन्दगी !

- उमेश पाठकहम सभी बचपन में लूडो में सांप-सीढ़ी का खेल खेलते रहे हैं!बड़ी कोशिशों के बाद १०० (लक्ष्य) तक पहुचना और अचानक एक सांप के काटने के बाद फ़िर शून्य पर पहुच जातें हैं! इंसानी जिंदगी की भी कुछ ऐसी ही फितरत है !हमारे अच्छे-बुरे कर्म भी सांप और सीढ़ी की
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
Sep 25 2009 12:27 PM
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मेरे यकीन का जब उसने इम्त्तिहान लिया...

- उमेश पाठकमेरे यकीन का जब उसने इम्त्तिहान लिया॥जो सच नही था ,उसको भी उसने मान लिया !दिल को समझाने की कोशिश मेरी बेकार हुयी,मेरे दिल ने भी तो उसी का कहा मान लिया !बेवफाई-वफ़ा ,सभी है,पर यकीन के बाद ,आसमान भी तो मिल जाता है ,ज़मीन के बाद ,जिसमे बसती है ,
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
Sep 16 2009 06:52 PM
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हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं और फादर कामिल बुल्के !

-उमेश पाठक अपनी बात ....के समस्त पाठकों को हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं! कितना अच्छा हो की इस अवसर पर हम फादर कामिल बुल्के से सबक लें,जिन्होंने बेल्जिंयम् में पैदा होने के बाद भी पूरी ज़िन्दगी भारत में रह कर हिन्दी की सेवा की ! फ़ादर कामिल बुल्के एक ऐसे
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
Sep 14 2009 07:47 AM
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मीडिया की भाषा :

बीबीसी हिन्दी एक प्रतिष्ठित समाचार सेवा है,प्रमाणिकता और विश्वश्नियता के सन्दर्भ में इसकी मिसल दी जाती है! कैसे गढ़ती है बीबीसी अपनी भाषा ,क्या तयारी होती है ,इन प्रश्नों के समाधान के लिए जानते है बीबीसी से ही उसकी भाषाई विशेषता के बारे में ! -उमेश पाठक
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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पत्रकारिता में हिन्दी और पत्रकारिता शिक्षण के अंतर्विरोध

भारत में पत्रकारिता की शुरुआत कलकत्ता (आज के कोलकाता )में १७८० में हुई थी! एक अहिन्दी भाषी प्रान्त होने के बाद भी हिन्दी पत्रकारिता को शुरू करने का श्रेय कलकत्ता को जाता है!"जेम्स अगस्टस हिक्की " के बाद पंडित युगुल किशोर शुक्ल ने १८२६ में "उदन्त मार्तंड
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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कुछ हास्य व्यंग!

अक्ल बड़ी या... महामूर्ख दरबार में, लगा अनोखा केस फसा हुआ है मामला, अक्ल बङी या भैंसअक्ल बङी या भैंस, दलीलें बहुत सी आईं महामूर्ख दरबार की अब,देखो सुनवाई मंगल भवन अमंगल हारी- भैंस सदा ही अकल पे भारी भैंस मेरी जब चर आये चारा- पाँच सेर हम दूध निकारा कोई
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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ज़िन्दगी !

उमेश पाठक कछुए वाली खोल जिन्दगी, गले पड़ी सी ढोल जिंदगी ! रोजी -रोटी के सवाल पर, पढ़ती है भूगोल जिन्दगी ऊपर से हसती -मुस्काती , भीतर पोलमपोल जिन्दगी ! ख़ुद से भी बातें करने में , करती टाल-मटोल जिन्दगी ! न जाने कब बीच सफ़र में , करे बिस्तरा गोल जिन्दगी
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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दर्द जब साथ है....

इस दुनिया में शायद ही कोई ऐसा होगा जो कभी रोया नही हो ,हर इन्सान कभी न कभी आहत या घायल हो कर ,दुःख से घबरा कर ,रोता ज़रूर है!कहते हैं की रोने से दुःख कम हो जाता है,जी हल्का हो जाता है!ये काफी हद तक सच भी है,लेकिन सबसे करीबी मित्र को अपना दुःख बताने प
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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बहुत खूबसूरत हो तुम !

बहूत खूबसूरत हो तुम, बहुत खूबसूरत हो तुम ! कभी मैं जो कह दूं मोहब्बत है तुम से ! तो मुझको खुदाया गलत मत समझना ! के मेरी जरुरत हो तुम, बहुत खूबसूरत हो तुम ! है फ़ुलों की डाली, ये बाहें तुम्हारी ! है खामोश जादू निगाहें तुम्हारी ! जो काटें हों, सब अपने द
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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समेत लो,कुछ दे कर जा रहा है..गुजरता पल !

मिनट ,घंटा ,दिन, महीने, साल गुजरते चले जाते हैं- हम चाहें या न चाहें!सुख-दुःख,अच्छा- बुरा कुछ न कुछ ज़रूर होता है बीते सालों में ,हर किसी के साथ!कभी कोई कड़वी याद हमारा मन कसैला करदेती है तो कभी सुखद दिनों की यादे अपनी बौछारों से हमें भिगो जाती हैं!ह
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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यादें !

जिद थी पागलपन की हद तक ,दर्द का दर्पण साथ लिए ! जाने कब हम निकल पड़े थे , ज़ख्मो की सौगात लिए ! मन को बहुत संभाला लेकिन ,दिल के हाथों हार गया , यादों की लश्कर का खाली ,आज न कोई वार गया ! कर बैठा मई आत्मसमर्पण,वक्त से कुछ लम्हात लिए! रोजी -रोटी की उलझन
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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दवा को दर्द की तलाश है!

ऐसा कौन सा इन्सान होगा जिसे दर्द से कष्ट नही मिलता होगा!आदिकाल से ही हम सुखों की चाह में निरंतर दुःख झेलते आ रहे हैं!इस चाह की बजाय अगर दुखो को ही प्यार से अपना लिया जाए तो शायद उनसे मिलने वाली पीडा कम हो जाए! जब ख़ुद को देखता हूँ तो ऐसा लगता है जैसे
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक
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पहचान का संकट बनाम दिल्ली प्रवास !

यूँ तो हर और है बेशुमार आदमी, फ़िर भी तनहाइओं का का शिकार आदमी ! दिल्ली में एक दुकान पर जहा मेरा लगभग रोज का आना-जाना था ,एक आदमी को अक्सर देखता था!सम्बन्ध केवल एक-दुसरे को देखने का ही था,एक दिन करीब ४ साल के बाद हमारा परिचय होता है और वो व्यक्ति बतात
 
Umesh Pathak / उमेश पाठक