Nitin Jalan's Image
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
21 May 2010
कुल प्रविष्टियां
17
पाठक भेजे
278
पसंद
9
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
16.35
पसंद करें
1
नापसंद करें

प्रतिबिम्ब

अकेलेपन के साए सच लगते हैं इस अंधेर कमरे में कुछ ढूँढता एक कदम लम्बे रास्ते चले थे एक, निकले कई थामे वक़्त का हाथ दूर निकल आये अरसा लगता है पल-पल पिछड़े मोड़ पर थमे थे न मूड़ सके हम, रुके कई यह कैसी है जंजीरें पैरों में लिए फिरते है सीने से लगाये [...]
 
mequitnever
पसंद करें
0
नापसंद करें

Praan प्राण প্রান

Performed by Matt Harding. Music by Gary Schyman. Sung by Palbasha Siddique. Penned by Rabindrnath Tagore. Published in his Nobel award winning book of Bengali poetry, Gitanjali, in 1910. It took 100 years to understand this poetry and make others
 
mequitnever
Mar 20 2010 11:16 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

कटाक्ष Sarcasm

आधुनिक युग का भारतीय एक झुण्ड के आचरण या व्यवहार को सभ्यता कहते हैं | सभ्यता के शुरुआत में स्त्री-पुरुष की भूमिका (लिंग भूमिका) को परिभाषित किया गया था और स्त्री-पुरुष के कार्यों को प्रस्तावित कर, एक झुण्ड को समाज की संज्ञा दी गयी थी| जब यह
 
mequitnever
पसंद करें
0
नापसंद करें

कुछ खोई हुई

आज मैं अपने डेस्क को ठीक कर रहा था और कहीं कोने से मेरे हाथ एक फोल्डर लगा | उस फोल्डर में रंगीन कगाज़ में लिखी मेरी पांच कवितायेँ मिली – चार हिंदी और एक अंग्रेजी | अंग्रेजी कविता “Only I could ever” पिछले पोस्ट में प्रस्तु
 
mequitnever
Dec 29 2009 12:02 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

आज एक हर्फ़ को फिर ढूंढता फिरता है ख्याल

आज एक हर्फ़ को फिर ढूंढता फिरता है ख्याल मदभरा हर्फ़ कोई, ज़हर भरा हर्फ़ कोई हर्फ़ = letter, ख्याल = imagination, idea मदभरा = filled with eulogy, ज़हर = poison, भरा = filled with दिलनशी हर्फ़ कोई, क़हर भरा हर्फ़ कोई आज एक हर्फ़ को फिर ढूंढता फिरता है ख्याल
 
mequitnever
टैग: Life
पसंद करें
0
नापसंद करें

अंतरिम

क्या है, क्यों है, कैसे है सोचता था जब पाया तो बहुत खुश हुआ उसके बाद क्या ? पाया, वो मिल गया अब कहाँ, किधर, किसको ढूँढना, चाहत, प्यास, होड़, जिद्द -लक्ष्य के अनेक रूप है पर मैंने एक नया रूप पाया -अलक्ष्य से लक्ष्य का लक्ष्य शून्य ! अंतरिम, मध्यांतर,
 
mequitnever
पसंद करें
0
नापसंद करें

इतना आसान है क्या

ख़ुशी ढूँढना इतना आसान है क्या पता नहीं था फिर इतनी दूर क्यों है ख़ुशी मौज और साहिल के बीच का खेल है निराला कभी चडाव कभी उतराव क्या स्थिरता यही है चैन ढूँढना इतना आसान है क्या पता नहीं था फिर इतनी दूर क्यों है चैन सूरज और चाँद के बीच का खेल है निराला कभी
 
mequitnever
टैग: life
Aug 22 2009 08:34 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

Yearn

Yearn, yearn and yearning I yearn for it It that has been so delusive That has been illusive Illusive so much that I want to live in it Dwell in my yearn Yearn that so deep and rusty Quenching but dried up into the last inch of the hollow of my heart I
 
mequitnever
टैग: life
Jul 23 2009 11:09 AM
पसंद करें
5
नापसंद करें

कौआ छू गया

यह एक मज़ेदार प्रसंग है | मर्द और औरत दोनों ही इस बात को बड़ी दिलचस्पी से लेते है | मगर बूढ़े लोग – शरीर से या दिमागे से बूढ़े लोग – इसकी बात करने को क्रोधी नज़र से देखते है | ऐसा ही कुछ था मेरे भी परिवार में| छोटा था तो स
 
mequitnever
टैग: Life
पसंद करें
1
नापसंद करें

द आर्ट ऑफ़ वार – अध्याय 1

सन् 1910 में लिओनेल गिल्स द्वारा अनुवादित, “द आर्ट ऑफ़ वार” का पहला अध्याय हिंदी भाषा में प्रस्तुत है | ” द आर्ट ऑफ़ वार ” सुन जू द्वारा, पुरातन चीनी भाषा में, लिखित एक निबंध है | इस निबंध को 500 BC में लिखा गया था ऐ
 
mequitnever
पसंद करें
1
नापसंद करें

द आर्ट ऑफ़ वार

सुन जू – वू राज्य का सेनापति ” द आर्ट ऑफ़ वार ” सुन जू द्वारा, पुरातन चीनी भाषा में, लिखित एक निबंध है | इस निबंध को 500 BC में लिखा गया था ऐसा माना जाता है | यह निबंध बांस से बनी किताब पर लिखी पायी गयी थी | ” द
 
mequitnever
पसंद करें
1
नापसंद करें

द प्रिन्स (1532 में प्रकाशित)

द प्रिन्स ” इतालवी भाषा में लिखित एक राजनीतिक निबंध है | इसे निकोलो माक्यावैली ने सन् 1513 में लिखा था | इसका प्रकाशन माक्यावैली के मरने के पांच सालो बाद सन् 1532 में इटली के फ्लोरेंस राज्य में हुआ था | “द प्रिन्स” की
 
mequitnever
पसंद करें
0
नापसंद करें

माक्यावैली के प्रसिद्ध कथन, ” द प्रिन्स ” से

निकोलो माक्यावैली द्वारा, इतालवी भाषा में, लिखित ” द प्रिन्स ” की चर्चा जारी रखते है | पिछले पोस्ट में ” द प्रिन्स ” में निहित माक्यावैली के, विभिन्न विषयों पर, विचारों का सारांश प्रस्तुत है | पिछले पोस्ट को पढ़ने के
 
mequitnever
टैग: Politics family
पसंद करें
0
नापसंद करें

द प्रिन्स (1532 में प्रकाशित)

द प्रिन्स ” एक राजनीतिक निबंध है | इसे निकोलो माक्यावैली ने सन् 1513 में लिखा था | इसका प्रकाशन माक्यावैली के मरने के पांच सालो बाद सन् 1532 में इटली के फ्लोरेंस राज्य में हुआ था | “द प्रिन्स” की चर्चा करने से पहले नि
 
mequitnever
पसंद करें
0
नापसंद करें

Only if I could ever

If I could ever don’t try If I could ever not fail If I could ever not stop thinking If I could ever not give up If I could ever not halt myself If I could ever not turn back If I could ever not gone If I could ever not stop waiting If I could ever
 
mequitnever
टैग: life
May 20 2009 12:11 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

रक्स

चलाचल हूँ मैं एक अंधेर नगरी को ढुँढता हूँ रौशनी दम घुटता है कुछ अच्छा नहीं लगता पर चलना है , गुजरना क्या था क्या हो गया ख़त्म करना है मझधार में क्यों अटका न इधर का न उधर का रुक गयी है हवा और बस है इंतज़ार चलाचल हूँ मैं मिलती हैं कहीं एक किरण पकड़ने क
 
mequitnever