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कतरनें

http://katrane.blogspot.com/
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13 May 2010
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बरखा दत्त ,जो एक पत्रकार भी हैं |

देश में अब चैनलों के साथ साथ पत्रकारों की टी आर पी भी तय होने लगी है निश्चित तौर पर ख़बरों का सनसनीखेज होना भी इसलिए अनिवार्य होता जा रहा है ख़बरों की सनसनी के पीछे छुपा सच हमेशा चौंका देने वाला होता है,इस वक़्त देश में बरखा दत्त की टी आर पी निस्संदेह बहुत
 
आवेश
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जेड एडम्स का "सेक्स मेनियाक "गाँधी

किसी भी व्यक्ति की सेक्सुअल लाइफ को सार्वजानिक करना खुद को चर्चा में लाने का बेहद आसान तरीका है,लेकिन अगर वो व्यक्ति कोई नामचीन शख्शियत हो तो उन्हें एक्सपोज करने के नाम पर की गयी कोई भी कोशिश चर्चाओं के साथ साथ धन की चाशनी मिलने की भी वजह बन जाती है
 
आवेश
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तमगों के लिए हत्याएं

माफियाओं और गुंडों के आतंक से कराह रहे प्रदेश में पुलिस का एक नया और खौफनाक चेहरा सामने आया है ,आउट ऑफ़ टर्न प्रमोशन पाने और अपनी पीठ खुद ही थपथपाने की होड़ ने हत्या और फर्जी गिरफ्तारियों की नयी पुलिसिया संस्कृति को पैदा किया है ,नक्सल फ्रंट पर हालात और
 
आवेश
Feb 20 2010 06:39 PM
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सत्ता,साजिश और सीमा आजाद

जब कभी लोकतंत्र में सत्ता के चरित्र पर से पर्दा उठता है उस वक़्त शर्मिंदगी नहीं साजिशें होती हैं ,उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद से शनिवार शाम पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्त्ता सीमा आजाद एवं उनके पति विश्व विजय की गिरफ्तारी इसी साजिश का हिस्सा है ,उन्हें माओवादी
 
आवेश
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हम अमेरिकी दलाल नहीं हैं भारत भूषण

पिछले दस वर्षों में हिंदी पत्रकारिता का स्वरुप तेजी से बदला है ,वेब पत्रकारिता के आने के साथ साथ पूरे परिदृश्य में आश्चर्यजनक ढंग से प्रगतिशील पत्रकारों का जमघट सा लग गया है ,कुछ ऐसी वेबसाइट्स , पत्रिकाएं और अखबार देखने को मिल रहे हैं जिनमे मौजूदा
 
आवेश
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वो आज भी क्लास की पिछली सीट पर बैठते हैं

वो आज भी क्लास की पिछली सीट पर बैठते हैं ,आज भी उन्हें अपने जैसे ही अन्य छात्रों के साथ बैठकर खाना खाने से डर लगता है ,आज भी उन्हें हमेशा इस बात का डर होता है कि किसी भी वक़्त किसी भी बात को लेकर उनकी सारी काबिलियत को धत्ता बताए हुए ,उनके सारे सपनों को
 
आवेश
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आवेश को जो याद है..... ...

आज मै ३७ साल का हो गया ,पापा की साईकिल पर आगे बैठ पूरा बनारस शहर घूमते ,छत की मुंडेर से स्कूल से पढ़कर लौट रही माँ की बाट जोहते और मिठाइयों के लिए देर रात तक जागने वाले आशु ने आज अपने बचपन को बहुत पीछे छोड़ दिया है ,सच कहूँ तो मुझे अपने हर जन्मदिन पर
 
आवेश
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पा ,पत्रकारिता और पतन

आपमें से बहुतों ने ' पा ' देखी होगी और उसमे भीड़ द्वारा , पत्रकारों की पिटाई का नजारा देखा होगा , हमने भी देखा | सच तो ये है वो एक दो सीन देखकर मुझे भी किसी आम दर्शक की तरह सकून मिला , शायद अगर ऐसा रियल लाइफ में हुआ होता तो ये भूलकर कि मै भी एक पत्रका
 
आवेश
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पा ,पत्रकारिता और पतन

आपमें से बहुतों ने ' पा ' देखी होगी और उसमे भीड़ द्वारा , पत्रकारों की पिटाई का नजारा देखा होगा , हमने भी देखा | सच तो ये है वो एक दो सीन देखकर मुझे भी किसी आम दर्शक की तरह सकून मिला , शायद अगर ऐसा रियल लाइफ में हुआ होता तो ये भूलकर कि मै भी एक पत्रका
 
आवेश
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'पा' ,पत्रकारिता और पतन

आपमें से बहुतों ने 'पा' देखी होगी और उसमे भीड़ द्वारा , पत्रकारों की पिटाई का नजारा देखा होगा,हमने भी देखा |सच तो ये है वो एक दो सीन देखकर मुझे भी किसी आम दर्शक की तरह सकून मिला ,शायद अगर ऐसा रियल लाइफ में हुआ होता तो ये भूलकर कि मै भी एक पत्रकार हूँ
 
आवेश
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अमृता -इमरोज और साझा नज्म

पंद्रह दिनों पहले अमृता एक बार फिर इमरोज़ के सपनों में आई, बादामी रंग का समीज सलवार पहने |'सुनते हो ,कमरे में इतनी पेंटिंग क्यूँ इकठ्ठा कर रखी है ?अच्छा नहीं लग रहा ,कुछ कम कर दो "|अमृता कहें और इमरोज़ न माने ,ये तो कभी हुआ नहीं ,अब इमरोज़ ने कमरे से
 
आवेश
Dec 13 2009 10:00 AM
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सिस्टम ,सोसाइटी और सहमे शहर -26/11

हम मुंबई में घटित २६/११ के आतंकी हमले की बरसी माना रहे हैं ,मोमबत्तियां जला रहे हैं ,मर्सिया पढ़ रहे हैं ,और यह सब कुछ यह मानते हुए कि इस देश में कभी भी कहीं भी २६/११ जैसी घटनाएँ हो सकती हैं |जब सिस्टम का आम जनता से कोई वास्ता नहीं रह जाता तब सिर्फ और
 
आवेश
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आग ,आटा और लोहा

रोटियों की सही सेंक के लिए, आग और आटे के बीच लोहे को आना पड़ता है|लोकतंत्र में अति का परिणाम अगर देखना हो तो पश्चिम बंगाल आइये ,सामाजिक ,सांस्कृतिक ,बौद्धिक और साहित्यिक तौर पर शेष भारत के सन्मुख जबरिया उदाहरण बनने की कोशिश करता हुआ यह राज्य आज राजनै
 
आवेश
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सनसनी .समझौतों और सिक्कों पर पलती पत्रकारिता

राजदीप सरदेसाई हालिया प्रकाशित अपने लेख में कहते हैं 'विश्वश्नियता के मुद्दे पर भारतीय पत्रकार ,चैनल सम्पादक और कुछ हद तक अखबार के सम्पादक भी अपनी जमीन खोते जा रहे हैं' |पुण्य प्रसून वाजपेयी को पत्रकारिता के खिलाफ राजनैतिक अतिवादिता से गहरी शिकायत है
 
आवेश
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प्रोफाइल फैक्टरी ऑफ़ मीडिया

दैनिक जागरण के संस्थापक स्वर्गीय नरेन्द्र मोहन को आपमें से बहुतेरे लोग जानते होंगे एक अखबार के संस्थापक सम्पादक और राज्य सभा के पूर्व सदस्य के रूप में मैं भी उनको जानता हूँ मैं उन्हें एक प्रखर चिन्तक और दार्शनिक कवि के रूप में भी जानता हूँ मुझे ये भी
 
आवेश
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भैंस ,लड़की और आई.ए .एस

मुझे चार भैंस चाहिए ,न एक कम न एक ज्यादा ! मुझे आई.ए .एस बनना है !आप भी कहेंगे ,भला भैंस से आई.ए.एस कोई कैसे बनता है ?जी नहीं ,बनता है !अगर नहीं बनता है तो भी बनने की कोशिश करता है |चलिए आपको सुना ही देता हूँ भैंस से आई.ए .एस बनने के कोशिशों की कहानी|ये
 
आवेश
Sep 14 2009 09:18 PM
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चूल्हा ,चक्कड़ और चौथी दुनिया की कवितायें -२

चौथी दुनिया का मौसम आजकल बेहद खुशगवार है ,हो भी क्यों न ,शेफाली पाण्डेय ,जेनी शबनम ,आशा प्रकाश ,पारुल , शिखा वार्ष्णेय ,प्रीति टेलर ,कुसुम ठाकुर ,संगीता , सरीखे नामों ने समूची समकालीन कविता के उबाऊ स्वरुप को बदल कर रख दिया है यहाँ इन्टरनेट पर ये महिलायें
 
आवेश
Aug 29 2009 08:28 AM
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बुर्का बैन और बवाल

आयशा आस्मिन अपने कॉलेज इसलिए नहीं जा रही हैं क्यूंकि उनके बुर्का पहनने पर प्रबंधन को ऐतराज है |'सच का सामना' में जारा अपनी अम्मी ,अब्बा और अपने मंगेतर के सामने अपने पूर्व प्रेमी के साथ शारीरिक संबंधों का सच हँसते हुए बयां कर रही हैं|शाहरुख़ नाराज हैं
 
आवेश
Aug 20 2009 05:19 PM
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ब्लागर्स पार्क में रिसते रिश्ते

वो डरते हैं कि रिश्तों के रिसाव से जुडा सच, उनकी निजता को भंग कर देगा |वो डरते हैं अपनी पहचान बताने में !उन्हें डर हैं अभिव्यक्ति पर रिश्तों के गहराते असर से !उन्हें लगता है सच के सामने आने से उनकी बेबाकी ,बेईमानी में तब्दील होकर सबके सामने आ जायेगी
 
आवेश
Aug 07 2009 07:22 AM
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हत्याओं के बीच तुम्हारी हत्या

प्रमिला के पेट पर पुलिस की लाठियों की चोट अब एक बड़ा घाव बन गयी है ,डॉक्टर कहते हैं कि अब वो जीवन में कभी दुबारा माँ नहीं बन सकेगी,पुलिस ने प्रमिला के साथ साथ उसके पांच साल के बेटे के हाथों को भी पीट-पीट कर लहू लुहान कर दिया था |रामसकल अब सपने देखने से
 
आवेश
Aug 03 2009 11:31 PM
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सच का सामना :लाइव विथ मोचीराम

साथियों ,सच का सामना में आज हमारे सामने हैं मोचीराम ,हंसिये मत यही नाम है इनका |इनको विश्वास है कि ये सच का सामना कर सकेंगे |हम हमेशा की तरह पूछेंगे २१ सवाल ,सही जवाब देने पर इन्हेमिलेंगे १ करोड़ रुपए |हमारा पहला सवाल मोचीराम आपके लिए , तुमने कितने दिन से
 
आवेश
Jul 27 2009 04:58 PM
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हमने मरना सिख लिया है !

हम सब बच्चे पैदा करने से डरते हैं क्यूंकि हम जानते हैं हम उन्हें बेबसी और आंसू के सिवा कुछ नहीं दे सकते |चौंकिए मत ये किसी पिक्चर का डायलाग नहीं ,जिंदगी से बुरी तरह थक चुकी उन औरतों की जुबान है ,जिनके लिए न सिर्फ सरकार बल्कि हम सबकी आँख का पानी मर चूका
 
आवेश
Jul 25 2009 11:20 AM
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बलात्कार का दलित मतलब

ये मेरे अखबारी जीवन का शायद सबसे खराब दिन था ,बरसात की बूंदें चेहरे पर थप्पड़ जैसे लग रही थी ,गाँव के बाहर बिना छप्पर की एक झोपडी में पूरी तरह से भीगी चंदा ,रूपा और तारा (काल्पनिक नाम )एक कोने में सिमटी हुई थी,महज 5000 रुपयों में उन नाबालिग़ लड़कियों के
 
आवेश
Jul 23 2009 09:29 AM
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शर्म शर्म शर्म शर्म शर्म ...............

क्या आप किसी गैर पुरुष के साथ सोयी हैं ?क्या आपने कभी अपनी बेटी की उम्र की लड़की के साथ सम्भोग किया है ?क्या आपने अपने कभी अपने पिता को थप्पड़ मारा है ?क्या ये सवाल आपके मनोरंजन की वजह हो सकते हैं ?क्या आपको एक करोंड़ रूपए दिए जाएँ तो आप टीवी पर सबके स
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बारूद के ढेर पर बैठा हिन्दुस्तानी स्विट्जरलैंड

देश की उर्जा राजधानी में महज एक सप्ताह के भीतर अलग अलग हुए विस्फोट में लगभग ४२ जाने गई हैं , देश की उर्जा जरूरतों को पुरा करते करते थक चुकी सोनभद्र - सिंगरौली पट्टी , जिसका नाम भी बहुतों ने नही सुना होगा , फ़िर भी सुर्खियों में नही है | मेरी ये पोस्ट
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लालगढ़ में लालसलाम

धूमिल की एक कविता अक्सर मेरे जेहन में उतर आती है ,जो कुछ इस तरह है - वो धड से सर ऐसे अलग करता है जैसे मिस्त्री बोल्टू से नट अलग करता है तुम कहते हो हत्याएं बढ़ रही हैं मैं कहता हूँ कि मेकनिस्म टूट रहा है लालगढ़ में सचमुच मेकेनिस्म टूट रहा है ,ये मेकेन
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ऑस्ट्रेलियाई मूसल में हिन्दुस्तानी सर

नस्लवाद का प्रतीक बनते जा रहे ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर हमले की खबरें इन दिनों सुर्खिया बनी हुई हैं दो चार दिनों में इस मामले में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के और भी गरम होने के आसार हैं | क्रिकेट हो या पढाई , नस्लवाद ऑस्ट्रेलिया के चरित्र का हिस
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जूता खाओ ,ऑस्ट्रेलिया जाओ

नस्लवाद का प्रतीक बनते जा रहे ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर हमले की खबरें इन दिनों सुर्खिया बनी हुई हैं दो चार दिनों में इस मामले में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के और भी गरम होने के आसार हैं |क्रिकेट हो या पढाई ,नस्लवाद ऑस्ट्रेलिया के चरित्र का हिस्स
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सेक्स क्रांति में तब्दील हो रही रक्त क्रांति

नक्सली संगठनों में यौन उत्पीडन का भयावह दौर - पुलिस और नक्सलियों के बीच पीस रही महिला गुरिल्लायें नक्सली संगठनों ने सामाजिक राजनीतिक बदलाव की मुहिम छोड़ कर महिलाओं का बर्बर उत्पीड़न शुरू कर दिया है उत्तर प्रदेश,बिहार झारखण्ड और छतीसगढ़ के सीमावर्ती आदि
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पाकिस्तान से आखिरी ट्रेन(last train from pakistan)

मरघट में तब्दील होती जा रही स्वात घाटी में रहने वाले तमाम हिन्दू और सिख परिवार ,तालिबानियों के उत्पीडन और जजिया कर से आजीज आकर अपना घर -बार छोड़ कर जा चुके हैं |उन घरों में जहाँ कभी ठहाके गूंजा करते थे वहां अब या तो तालिबानी लडाकों के जेहादी स्वर गूंज
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मेरी बहन शर्मीला

क्या आप इरोम शर्मीला को जानते हैं ?वो दुनिया के सबसे बड़े लोकतान्त्रिक राष्ट्र में पिछले ८ सालों से भूख हड़ताल पर बैठी है ,उसके नाक में जबरन रबर का पाइप डालकर उसे खाना खिलाया जाता है ,उसे जब नहीं तब गिरफ्तार करके जेल भेज दिया जाता हैं , वो जब जेल से छ
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मुद्दे पर मीडिया:संसदीय चुनाव और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया

भय और भूख से नाराज मतदाता , सतही मनोरंजन से गिरती जनतंत्र की गरिमा भूख और भय से निराश लोक , थका हुआ निस्तेज तंत्र और सर्वग्रासी बाजार में अपने उत्पाद को बेचने के लिए आतुर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया | मीडिया का काम सिर्फ आम आदमी तक खबरें पहुँचाना ही नहीं रह
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मीडिया के घोडे और उनका सच

इंटरनेट पर कुछेक विवादास्पद पत्रकारों ने ब्लाग जगत की राह जा पकड़ी है, जहां वे जिहादियों की मुद्रा में रोज कीचड़ उछालने वाली ढेरों गैर-जिम्मेदार और अपुष्ट खबरें छाप कर भाषायी पत्रकारिता की नकारात्मक छवि को और भी आगे बढ़ा रहे हैं। ऊंचे पद पर बैठे वे व
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आजाद भारत का गांधी

वो देश के पहले प्रधानमन्त्री पंडित नेहरु का वंशज है , वो महात्मा गाँधी के नाम की चादर ओढ़ कर देशज राजनीति की सरमायादारी का दावा करने वाले परिवार का एक सदस्य है , वो उस माँ का बेटा है जिसे गाय का दूध पीना भी हिंसक लगता है , परन्तु अपने पुत्र की शाब्दि
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माओवादियों का मायामोह

आतंकी हमलों से थर्रा रही देश की आम जनता के सामूहिक कत्लेआम की तैयारियां शुरू हो गयी है ,कत्ल भी उन हाथों के द्वारा जिन्हें हमने ,खुद पर शासन करने का अधिकार दिया गुंडों माफियाओं को संसद और विधानसभाओं के गलियारों का सुख दिलाने में फिलहाल कोई राजनैतिक द
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लोकतंत्र के उत्सव में चुनाव आयोग का मर्सिया

विश्व के सर्वाधिक शक्तिशाली लोकतंत्र में नयी सरकार का गठन होने को है ,एक बार फिर चुनावी महाभारत में जनता को अपने मताधिकार के अस्त्रों का प्रयोग करना है लोकसभा चुनाव के प्रथम चरण के मतदान में अब जबकि मात्र ३० दिन रह गए हैं फिर भी पूरे देश में चुनाव का