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16 Jun 2010
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चाय बिन मांगे , पानी मांगे से हम पिलाने लगे ---एक ग़ज़ल

कहते हैं -- अतिथि देवो भव: । हमारे देश में अतिथि का आदर सत्कार करना परम कर्तव्य माना जाता है । लेकिन ऐसा लगता है कि बदलते ज़माने के साथ यह सोच भी बदल रही हैं ।बोर्ड रूम में मीटिंग चल रही थी । अस्पताल की गर्म समस्याओं पर गर्मागर्म बहस चल ही थी । बाहर भी
 
डॉ टी एस दराल
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जब वफादार ही बेवफा हो जाये , तो क्या कीजे ----

बेशक कुत्ता एक वफादार प्राणी है । लेकिन यदि आपके प्रिय टॉमी , मोती , जूजू या पूपू को कोई गली का कुत्ता काट ले और उसे रेबीज़ हो जाये तो वही स्वामिभक्त , जान से भी प्यारा आपका पालतू कुत्ता , आपकी जान का दुश्मन बन सकता है । जी हाँ , मनुष्यों को रेबीज़ का
 
डॉ टी एस दराल
Jun 14 2010 05:44 AM
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क्यों नींद उनको सारी रात नहीं आती----

भाई तिलक राज कपूर जी का लेख पढ़कर ग़ज़ल लिखना सीखने का प्रयास किया है । इस में मत्ला और मक्ता सहित सिर्फ पांच शेर (अश`आर ) कहे हैं । इसमें काफिया --आत है जैसे गात , रात , बात आदि । रदीफ़ है --नहीं आती । पहले शेर यानि मत्ला में काफिया और रदीफ़ दोनों मिसरों
 
डॉ टी एस दराल
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कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे ---एक शाम वरिष्ठ कवि गोपाल दास नीरज जी के साथ ---

२८ मई को दिल्ली के हिंदी भवन में सुप्रसिद्ध वरिष्ठ कवि एवम गीतकार श्री गोपाल दास नीरज का एकल काव्य पाठ सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । ८६ वर्ष की आयु में भी नीरज जी का कविता के प्रति उत्साह देखकर दंग रह जाना पड़ा ।उनके लिखे गीत हिंदी फिल्मो में अपनी धूम
 
डॉ टी एस दराल
Jun 07 2010 05:33 AM
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दिल्ली की गर्मी और बब्बे का चमत्कार ---

गर्मियों के दिन । दिल्ली की भीषण गर्मी । ऐसे में यदि बिजली भी गुल हो जाये तो फिर सब भगवान भरोसे ।बचपन में जब गाँव में रहते थे तो उन दिनों बिजली भी नहीं होती थी । जेठ की तपती रातों में गरमागर्म लू के थपेड़े, घर के आँगन में बिछी चारपाई से टकराते , तो लगता
 
डॉ टी एस दराल
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क्या करूँ कंट्रोल नही होता ---विश्व तम्बाकू रहित दिवस पर एक रचना ----

क्या करूँ कंट्रोल नही होता --- आज विश्व भर में विश्व तम्बाकू रहित दिवस मनाया जा रहा है। क्यों न जो लोग धूम्रपान करते हैं , आज के दिन प्रण करें कि आज के बाद वो कभी धूम्रपान नही करेंगे। दिल्ली जैसे शहर में जहाँ प्रदुषण पर तो नियंत्रण किया जा रहा है, वहीं
 
डॉ टी एस दराल
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कभी कभी प्रकृति भी पक्षपात कर जाती है ---

हमारा देश एक विशाल देश है। यहाँ जितनी विविधताएँ और अनेकतायें देखने को मिलती हैं , उतनी शायद कहीं और नहीं मिलेंगी। उत्तर में हिमालय पर्वत श्रंखला , दक्षिण में कन्याकुमारी में मिलते तीन तीन सागर , पश्चिम में सूखा रेगिस्तान और पूर्व में सबसे अधिक बारिस वाला
 
डॉ टी एस दराल
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सोमवार की एक शाम --ललित शर्मा जी के नाम ---

रविवार का दिन । छुट्टी का दिन । काम से आराम का दिन । आराम --यदि नसीब हो सके तो ।अक्सर इस मृत्युलोक में मनुष्य जीवन की दिनचर्या में इस कदर फंसा रहता है , कि आराम सिर्फ ख्वाबों ख्यालों में ही रह जाता है। इसी रविवार अविनाश जी ने एक ब्लोगर मिलन का कार्यक्रम
 
डॉ टी एस दराल
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यहाँ हैल्थ की मजबूरी है , वहां वैल्थ की मजबूरी है ---

ब्लोगिंग में आजकल जो गहमा गहमी , वाद विवाद और आरोप प्रत्यारोप हो रहे हैं , उनसे अलग कुछ ऐसे मित्र ब्लोगर भी हैं जो सभी विवादों से दूर निर्विकार भाव से हिंदी सेवार्थ कार्य में लीन हैं। ऐसे ही एक मित्र हैं , मुंबई में रहने वाले श्री नीरज गोस्वामी जी , जो
 
डॉ टी एस दराल
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अपनेपन की मिठास का अहसास आदमी को तभी होता है जब आदमी अपनों से दूर होता है---

कभी कभी मैं सोचता हूँ कि अपनेपन की मिठास का अहसास आदमी को तभी होता है जब आदमी अपनों से दूर होता है। दिल्ली जैसे बड़े शहर में जहाँ पडोसी पडोसी से बात करने में दिलचस्पी नहीं रखता , वहीँ घर से बाहर निकलते ही मनुष्य का स्वरुप बदल जाता है । वही पडोसी जो घर के
 
डॉ टी एस दराल
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क्या हिंदी ब्लोगिंग का पतन शुरू हो गया है ?

पिछली पोस्ट पर एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण सामाजिक विषय पर आप सभी मित्रों के विस्तृत और निष्पक्ष विचार पढ़कर पोस्ट के सफल होने का आभास हुआ। इसके लिए आप सभी बधाई के पात्र हैं । यूँ तो किसी भी बात पर सभी का एकमत होना संभव नहीं , तथापि, काफी हद तक सहमति नज़र आई।
 
डॉ टी एस दराल
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क्या एक ही गोत्र में विवाह मान्य होना चाहिए ? एक नज़र ---

पिछले कुछ समय से अचानक अख़बारों की सुर्ख़ियों में ओनर किलिंग पर एक सैलाब सा आ गया है। एक के बाद एक ऐसी कई घटनाएँ घटित होने के कारण , सभी का सोचना आवश्यक है कि क्या सही है , क्या गलत । जिसे आप सही समझते हैं , क्या दूसरे उसे गलत कहते हैं । हालाँकि सभी का
 
डॉ टी एस दराल
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कोबाल्ट ६० --इंसान का दोस्त भी , दुश्मन भी ---

पिछले दिनों दिल्ली के मायापुरी क्षेत्र की कबाड़ की मार्केट में एक अत्यंत भयानक हादसा हुआ । हुआ यूँ कि दिल्ली विश्वविध्यालय के केमिस्ट्री विभाग ने २५ साल से बेकार पड़ा कबाड़ ऑक्शन कर दिया । लेकिन दुर्भाग्यवश इसमें सक्रीय कोबाल्ट ६० जैसा अत्याधिक असरदार
 
डॉ टी एस दराल
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मेरा भारत महान --

ज़रा कल्पना कीजिये -एक नदी में बाढ़ आ रही है । आप किनारे पर खड़े हैं । तभी एक आदमी डूबता हुआ दिखाई देता है । आप मदद करना चाहते हैं । लेकिन तभी एक कुत्ता भी डूबता हुआ नज़र आता है । आप सिर्फ एक को ही बचा सकते हैं।आप एक एनीमल लवर ( पशु प्रेमी ) हैं । अब आप
 
डॉ टी एस दराल
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पता ही नही चलता कि भिखारी कौन और दाता कौन है---

कहते हैं --एक मच्छर आदमी को क्या से क्या बना देता है । इसी तरह एक छोटी सी पिन कंप्यूटर का बेडा गर्क कर देती है । ये तो हमने अभी जाना । अब हुआ यूँ कि हम ज़नाब की सफाई करने बैठे और की बोर्ड का तार निकाल कर जब दोबारा डालने लगे तो ज़रा चक्कर खा गए। लगे अक्ल
 
डॉ टी एस दराल
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हाइपर्तेन्शन ( उच्च रक्त चाप )---एक मौन कातिल ----

हाइपर्तेन्शन यानि हाई ब्लड प्रेशर ( उच्च रक्त चाप ) एक ऐसी बीमारी है जिसके बीमार को बीमार होने का अहसास ही नहीं होता । और जब होता है तब तक कई मामलों में देरी हो चुकी होती है । इसीलिए इसको साइलेंट किल्लर यानि मौन कातिल कहा जाता है।प्रो श्रीधर द्विवेदी
 
डॉ टी एस दराल
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यादों के झरोखों से --१९६९ का भारत ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टेस्ट मैच ---

आई पी एल ३ निकला जा रहा है । और हम तो एक भी मैच नहीं देख पाए । कल दिल्ली में दिल्ली का आखिरी मैच भी हो गया । क्या करें काम , काम और काम । लगता है इस बार भी ख्वाबों ख्यालों में ही रह जाएगी क्रिकेट।लेकिन अपना तो उसूल है की जब गर्मी सताए और कहीं जा न पायें
 
डॉ टी एस दराल
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क्या आप ब्लोगिंग नाम के नशे के शिकार हैं ----ज़रा सोचिये ---

सूत न कपास , जुलाहों में लट्ठम लट्ठा ! अनिल पुसदकर जी की यह पोस्ट पढ़कर , बहुत दिनों से जो मैं महसूस कर रहा था और एक बार एक व्यंग लेख के रूप में इशारा भी कर चुका हूँ , आज खुल्लम खुल्ला लिखने का मन कर रहा है ।मेडिकल प्रोफेशन , ब्लोगिंग , कवितायेँ , हास्य
 
डॉ टी एस दराल
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बैसाखी के शुभ दिन १००वी पोस्ट और शादी की सालगिरह ---क्या इत्तेफाक है --

लो जी आज हमारा भी शतक पूरा हो गया।१ जनवरी २००९ को बनाये गए ब्लॉग को आज एक साल , तीन महीनेऔर १३ दिन हो गए हैं ।कछुए की चाल से चलते हुए , हमने भी शतकीय दोड़ पूरी कर ही ली ।इत्तेफाक देखिये की आज ही बैसाखी भी है ।और आज ही हमारी शादी की सालगिरह भी है।१३
 
डॉ टी एस दराल
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विश्व स्वास्थ्य दिवस पर मिला , डॉक्टरों को सम्मान ---

सतयुग , त्रेता युग, द्वापर युग और अब कलयुग ।कलयुग यानि काला युग। काला धंधा , काला धन , काला अंतर्मन ।यही तो है कलयुग का प्रभाव।इस प्रभाव से कोई भी क्षेत्र नहीं बचा है। यहाँ तक कि चिकित्सा जगत पर भी इसका प्रभाव पड़ा है ।तभी तो मानवीय और नैतिक मूल्यों का
 
डॉ टी एस दराल
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कभी साथ बैठ गपियाओ , तो जाने ---

आज सरल शब्दों में एक सीधी सादी सी रचना , बस यूँ ही ।मेरा मेरा करती है दुनिया सारीमोहमाया से मुक्ति पाओ , तो जाने ।दावत तो फाइव स्टार थी लेकिनभूखे को रोटी खिलाओ , तो जाने ।राह जो दिखाई है ज्ञानी बनकरखुद भी चलकर दिखाओ , तो जाने ।रुलाने वाले तो लाखों मिल
 
डॉ टी एस दराल
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दिल्ली दर्शन --आज सैर कीजिये दिल्ली के लाल किला की ---

दिल्ली का एतिहासिक लाल किला । वही लाल किला जिसे शाहजहाँ ने बनवाया और जहाँ उनके बाद , बहादुर शाह ज़फर तक सब मुग़ल बादशाह रहे ।वही लाल किला , जिसके लिए नेता जी सुभाष चन्द्र बोस ने आज़ाद हिंद फ़ौज को ललकारा था -चलो दिल्ली।जहाँ आज़ाद हिंद फ़ौज के सैनिक पहुंचे तो
 
डॉ टी एस दराल
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मीना कुमारी --एक खूबसूरत अदाकारा --आज उनकी पुण्य तिथि है --

आज वितीय वर्ष का क्लोजिंग डे है। इत्तेफाक देखिये , आज ही 5० और ६० के दशक की मशहूर अदाकारा ट्रेजिडी क्वीन मरहूम मीना कुमारी जी की भी पुण्यतिथि है।आज का लेख उन्ही की याद में समर्पित है। अभी कुछ दिन पहले फिल्म पाकीज़ा देखने का इतेफाक हुआ । शोले के बाद यदि
 
डॉ टी एस दराल
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मलाई वो खा रहे हैं , हम तो खाली उंगलियाँ चाट रहे हैं --

पिछली पोस्ट में मैंने एक बेहद गंभीर मुद्दे को एक पहेली के रूप में उठाया था । इस पर कुछ बड़ी दिलचस्प टिप्पणियां पढने को मिली। श्री जी के अवधिया जी , मिहिरभोज जी , ऍम वर्मा जी , अंतर सोहिल , ललित शर्मा जी , डॉ मनोज मिस्र जी , डॉ महेश सिन्हा जी , चंदर सोनी,
 
डॉ टी एस दराल
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ऐसा क्यों कि हमारे डॉक्टर देश छोड़ विदेश की ओर मूंह मोड़ रहे हैं---

भारत में करीब ३०० ऍम सी आई द्वारा स्वीकृति प्राप्त मेडिकल कॉलिज हैं , जिनमे से करीब ३५००० छात्र प्रति वर्ष मेडिकल डिग्री प्राप्त कर डॉक्टर बनते हैं। हालाँकि डॉक्टरों की संख्या वांछित डॉक्टर पोपुलेशन रेशो के हिसाब से काफी कम है। फिर भी प्रति वर्ष पास होने
 
डॉ टी एस दराल
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हँसना जरुरी है ----

परिस्थितियोंवश पिछले एक सप्ताह से नेट से दूर रहना पड़ा । इसलिए समय ही नहीं मिल पाया , लिखने और पढने का । आज आपके सन्मुख आ पाया हूँ। नोट: ऐसा प्रतीत होता है कि आजकल के भाग दौड़ और तनावपूर्ण जीवन में लोग हँसना ही भूल गए हैं। तभी तो अधिकतर लोगों के माथे पर
 
डॉ टी एस दराल
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विश्व गुर्दा दिवस पर जानिए , किडनी फेलियर के बारे में ---

अख़बारों की सुर्ख़ियों में किडनी कांड के बाऱे में तो आपने सुना ही होगा। कभी कभी गलत तरीके से किया गया सही काम भी एक काण्ड बन जाता है। आज विश्व गुदा दिवस ( वर्ल्ड किडनी डे ) है।आइये जाने , कैसे रोका जा सकता है , किडनी फेल होने को ताकि फिर कोई नकली डॉक्टर
 
डॉ टी एस दराल
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ऐसी होती है नारी ---

आज महिला दिवस के अवसर पर , एक छोटी सी रचना , नारी के विभिन्न रूपों को समर्पित :मात पिता को पुत्रीबेटा बन कर संभालतीसेवाभाव में न हारी ,ऐसी होती है नारी।कौर बांटे भाई सेत्याग की बने मूर्तीरहे फ़र्ज़ पर बलिहारी ,ऐसी होती है नारी।पति प्रेम में प्रेयसीसमर्पण
 
डॉ टी एस दराल
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दो जिस्म मगर एक जान हैं हम ---

देसां में देस हरयाणा --जित दूध दही का खाना । ये गीत बचपन में बहुत सुनते थे --आकाशवाणी के दिल्ली केंद्र पर।लेकिन क्या आप जानते हैं की हरियाणा राज्य पहले पंजाब का ही हिस्सा था।सन १९६६ में भाषा के आधार पर हरियाणा , पंजाब से अलग हुआ स्वतंत्र भारत के १७ वें
 
डॉ टी एस दराल
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Mar 05 2010 03:00 PM
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होली के नज़ारे --हंसी के फव्वारे --बुरा न मानो होली है ---

होली त्यौहार है --रंगों का , उमंगों का । हंसने हंसाने का , खाने खिलाने का । मिलने मिलाने का । और सबको प्यार से गले लगाने का ।अब देखिये हमने होली कैसे मनाई ---I :होली खेलने हम घर से निकलेएक पडोसी नज़र आये ,हमने उनके गालों पे गुलाल लगाये ,फिर प्यार से गले
 
डॉ टी एस दराल
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Mar 01 2010 01:00 PM
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बस हमने बचपन में कभी होली नहीं खेली--जानते हैं क्यों ---

वक्त बदल जाता है । हालात बदल जाते हैं। और कई बातें , कई रिवाजें वक्त की परतों के नीचे दब कर रह जाती हैं।ऐसा ही है , होली मनाना । जी हाँ , होली अलग अलग राज्यों में अलग अलग तरीके से मनाई जाती है।ब्रिज की होली को कौन नहीं जनता। लेकिन हरयाणवी होली ! शायद
 
डॉ टी एस दराल
Feb 27 2010 09:00 PM
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जाने कहाँ खो गई खुशबू गुलाबों की ---

आज सारा देश लुप्त होते जा रहे बाघों के लिए चिंतित है। होना भी चाहिए । आखिर वन्य जीवन हमारी धरोहर है।लेकिन हम इसे अपने ही हाथों नष्ट किये जा रहे हैं। इंसान की लालच की प्रवर्ति इतनी बढ़ गई है की वह इस बेशकीमती खजाने को मिटाने पर तुला है।अब ज़रा इस तस्वीर
 
डॉ टी एस दराल
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Feb 26 2010 03:00 PM
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क्या आप चाय के रूप में ज़हर पी रहे हैं ?

क्या आप चाय पीते हैं ? --ज़रूर पीते होंगे ।क्या आप ट्रेन में सफ़र करते हैं ? --कभी कभी तो करते ही होंगे ।क्या आप ट्रेन में सफ़र करते हुए , प्लेटफार्म की चाय पीते हैं ? --सम्भावना हैं ज़रूर पीते होंगे ।बेहतर है --मत पीजिये । क्योंकि पता नहीं चाय के रूप
 
डॉ टी एस दराल
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Feb 24 2010 03:30 PM
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दिल्ली के गार्डन ऑफ़ फाइव सेंसिज में, आनंद लीजिये गार्डन टूरिस्म फेस्टिवल का ---

दिल्ली में डेढ़ महीने की सर्दी के बाद कुछ दिनों से मौसम बदल सा गया है। हवा में ठंडक कम और उष्मा बढ़ने लगी है। नर्म सुहानी धूप खिली है। बसंत ऋतू अपने पूरे जोबन पर आ चुकी है। हवाओं में फूलों की भीनी भीनी खुशबू छा गई है। ऐसे में दिली वाले घर कहाँ बैठे रह
 
डॉ टी एस दराल
Feb 22 2010 07:00 AM
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अब आप ही बताइये की ये विश्वास है या अंध विश्वास !

आज खुशदीप सहगल की पोस्ट पढ़कर मुझसे रहा नहीं गया और आज पोस्ट न लिखने का दिन होते हुए भी ये पोस्ट डाल रहा हूँ। हमारा देश एक धार्मिक देश है जहाँ विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोग मिलकर रहते हैं।जहाँ भी देखो मंदिर, मस्जिद , गुरद्वारे और गिरिजा घर दिखाई दते
 
डॉ टी एस दराल
Feb 19 2010 08:00 PM
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कौन अधिक सुखी ---आदि मानव या आधुनिक मानव ?

आदि मानव रहता था ---हरे भरे घने जंगलों में ।जहाँ था, नीला आसमान ,स्वच्छ वायु, स्वच्छ शीतल नीर के झरने व नदियाँ , हरी भरी वादियाँ , शांत वातावरण । कोई भाग दोड़ नहीं , कोई चिंता नहीं, जो मिल गया -खा लिया , भले ही कंद मूल ही सही ।आधुनिक मानव रहता है
 
डॉ टी एस दराल
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Feb 18 2010 08:03 AM
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वो वैलेंटाइन डे कब आएगा---? एक सोच ---

आज वैलेंटाइन डे पर दो रचनाएँ --पसंद आपकी।गत वर्ष इसी दिन :अपनी काम वाली बाई ,जब दस बजे तक न आई।तो मैडम को गुस्सा आया,उसका मोबाईल मिलाया।वो बोली ,बीबी जी , हम तो आजवैलंटाइन डे मना रहे हैं।हमारे पतिदेव हमेंएक रोमांटिक फ़िल्म दिखा रहे हैं।स्ल्म्दौग करोडपति
 
डॉ टी एस दराल
Feb 14 2010 09:50 AM
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क्या इतने सारे इत्तेफाक होना भी एक इत्तेफाक है ?

यह भी एक इत्तेफाक है की बहुत पहले , शायद तब हम नए नए डॉक्टर बने थे , हमने स्वर्गीय काका हाथरसी को सुना और उनकी हास्य कविताओं के दीवाने हो गए ।बरसों बाद २००७ में दिल्ली हंसोड़ दंगल में कविराज अशोक चक्रधर का सामना हुआ, ज़ज़ के रूप में । इत्तेफाक।फिर २००८
 
डॉ टी एस दराल
Feb 10 2010 03:00 PM
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आखिर मिलने की चाह हमें खींच कर ले ही गई ---

कहते हैं , चाहने वाले उड़कर, दौड़कर , चलकर , तैरकर पहुँच ही जाते हैं। ऐसा हमने स्कूल की बायोलोजी की किताब में पढ़ा था , पोलिनेशन एंड फ़र्तिलाइज़ेशन के चैप्टर में।हालाँकि हालात तो ऐसे न थे , फिर भी हम भी पहुँच ही गए --दिल्ली के ब्लोगर मिलन में ।और चुरा लिए
 
डॉ टी एस दराल
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मैन प्रोपोजिज-- गौड डिस्पोजिज।

कहते हैं, मैन प्रोपोजिज-- गौड डिस्पोजिज। यानि आदमी सोचता कुछ और है , और हो कुछ और जाता है।मैंने सोचा था इस बार आपके मनोरंजन के लिए एक हास्य कथा प्रस्तुत करूँगा। लेकिन उसे पोस्टपोंड करके फ़िलहाल यही लिखना पड़ रहा है। दरअसल परसों रात पिताजी का ब्लड प्रेशर
 
डॉ टी एस दराल
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