Dhirendra Singh's Image
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
12 May 2010
कुल प्रविष्टियां
31
पाठक भेजे
630
पसंद
27
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
20.32
पसंद करें
0
नापसंद करें

राजभाषा कार्यान्वयन समिति और राजभाषा अधिकारी

भारत सरकार के सभी कार्यालयों,उपक्रमों,बैंकों आदि में राजभाषा कार्यान्वयन को सुचारू, सुनियोजित और सुंदर ढंग से संचालित करने के लिए राजभाषा कार्यान्वयन समिति का गठन किया गया है। इस समिति का गठन प्रत्येक कार्यालय, शाखा आदि में अनिवार्य है। इस समिति की बैठक
 
धीरेन्द्र सिंह
टैग: लेख
पसंद करें
0
नापसंद करें

राजभाषा ब्लॉगिंग

हिंदी की तमाम विधाओं पर नित नए ब्लॉगर आ रहे हैं तथा इसे सशक्त और प्रभावशाली बनाने में अपना योगदान कर रहे हैं। हिंदी की एक विधा राजभाषा के ब्लॉगरों की और देखें तो ढूंढने पर भी अंगुलियों पर गिनने वाले बहुत कम ब्लॉगर मिलते हैं। यह स्थिति क्यों है यह एक
 
धीरेन्द्र सिंह
टैग: लेख
पसंद करें
0
नापसंद करें

हिंदी प्रशिक्षण को मोहताज राजभाषा अधिकारी

भारत सरकार की राजभाषा नीति के अंतर्गत सभी केन्द्रीय कार्यालयों, उपक्रमों, बैंकों में राजभाषा विभाग की स्थापना की गई है तथा इस विभाग के कार्यों के लिए राजभाषा अधिकारी की नियुक्ति की गई है। विगत 25-30 वर्षों से राजभाषा कार्यान्वयन से जुड़े इन राजभाषा
 
धीरेन्द्र सिंह
टैग: लेख
Apr 10 2010 10:17 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

महिला दिवस और राजभाषा

मेरे मन में भी महिला दिवस और राजभाषा विचार कौंधा था तब मैं भी आपकी ही तरह आश्चर्यचकित हुआ था। आख़िरकार इस महिला दिवस पर मैं क्या लिखूँ यह सवाल तो मेरे सामने खड़ा ही था। ना जाने क्यों यह विषय मुझे नया, आकर्षक और चुनौतीपूर्ण लगा। अब आप यह मत कहिएगा कि
 
धीरेन्द्र सिंह
टैग: व्यंग
पसंद करें
0
नापसंद करें

हमारी हिंदी

हमारी हिंदीहमने जब से हिंदी को, हमारा बना दियाहिंदी को धारा का एक, किनारा बना दियादुनिया सिमट रही है, एक गॉव की तरहहिंदी को भावों का, एक ईशारा बना दिया।बस ऐसे ही चलती है हिंदी, कभी हिंदी चित्रपट पर, कभी दूरदर्शन के चैनलों पर, कभी गीतों-गज़लों में, कभी
 
धीरेन्द्र सिंह
टैग: लेख
पसंद करें
0
नापसंद करें

भाषाई जाल - अस्तित्व और अस्मिता

भारत देश की परम्परा में वसुधैव कुटुम्बकम का सिद्धान्त पल्लवित होते रहता है जिसे भूमंडलीकरण ने और गति प्रदान की है। वसुधैव कुटुम्बकम पूरे ब्रह्मांड को एक परिवार के रूप में मानता है जिसके अनेकों कारण हैं। आज मानव यह बखूबी अनुभव करने लगा है कि दुनिया सि
 
धीरेन्द्र सिंह
Dec 29 2009 11:50 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

अंग्रेज़ी की दुहाई.

अभिव्यक्ति के लिए ही नहीं बल्कि राष्ट्र की सभ्यता और संस्कृति के लिए भी उस राष्ट्र की भाषा का महत्व होता है। भाषा विज्ञान भी इस तथ्य को मानता है। यह तथ्य है कि किसी भी समाज के विकास में केवल भाषा का योगदान नहीं रहता है किन्तु विकास के क्रम में भाषा क
 
धीरेन्द्र सिंह
Dec 29 2009 11:50 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

राजभाषा अनुशासन

अनुशासन शब्द एक निर्धारित व्यवस्था का द्योतक है। देश, काल, समय और परिस्थिति के अनुरूप अनुशासन में यथावश्यक परिवर्तन होते रहता है। अनुशासन के लिए हमेशा एक सजग, सतर्क तथा कठोर पर्यवेक्षक की आवश्यकता नहीं होती है बल्कि स्वनुशासित होना बेहतर होता है। स्व
 
धीरेन्द्र सिंह
पसंद करें
0
नापसंद करें

राजभाषा: राजभाषा चौक

राजभाषा: राजभाषा चौक
 
धीरेन्द्र सिंह
Dec 29 2009 11:50 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

राजभाषा चौक

महानगरों तथा नगरों में राजभाषा चौक का अस्तित्व पाया जाता है। यह चौक पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से लगातार अपनी उपस्थिति में वृद्धि करते हुए प्रगति दर्ज़ करते जा रहा है। राजभाषा चौक एक विशिष्ट चौक है जिसका अस्तित्व सूक्ष्म है पर प्रभाव व्यापक है। यह च
 
धीरेन्द्र सिंह
Dec 29 2009 11:50 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

तरन्नुम-ए-कपास

कपास के विभिन्न रूपों को लोग बखूबी जानते हैं पर बहुत कम लोगों को जानकारी है कि कपास के विभिन्न गुणों में एक गुण इसके तरन्नुम का है। कपास और तरन्नुम ? कृपया चौंकिए मत। आज जबकि देश में विभिन्न नई योजनाओं, नवोन्मेषी कल्पनाओं का दौर चल रहा है तब ऐसी स्थि
 
धीरेन्द्र सिंह
पसंद करें
0
नापसंद करें

हिंदी कार्यशाला - आयोजन एवं संयोजन

विभिन्न केन्द्रीय कार्यालयों, उपक्रमों, सरकारी बैंकों में राजभाषा कार्यान्वयन की एक चुनौती हिंदी में कामकाज करने का प्रशिक्षण प्रदान करना है। सामान्यतया अधिकांश कर्मचारी अपने टेबल का कार्य अंग्रेजी में ही करना पसन्द करते हैं। अंग्रेजी में कार्य करने
 
धीरेन्द्र सिंह
पसंद करें
0
नापसंद करें

मराठी अस्मिता और भारतीय भाषाऍ

भाषा के लिए सुर्खियों में रहनेवाला महानगर मुंबई संभवत: एकमात्र महानगर है जो वर्षों से मराठी अस्मिता की बातें कर रहा है, संघर्ष कर रहा है। यह केवल कुछ व्यक्तियों तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसे मराठी भाषियों का समर्थन भी प्राप्त है। यदि मैं कहूँ कि कुछ
 
धीरेन्द्र सिंह
टैग: लेख
पसंद करें
0
नापसंद करें

हिंदी दिवस की आवश्यकता

हिंदी तेरे रूप अनेक पर सबसे चर्चित रूप है तेरा राजभाषा. आज तेरा जन्मदिन है और मेरी धड़कनें तुझे वैसे ही बधाई दे रही हैं जैसे एक पुत्र अपनी माँ को बधाई देता है, आर्शीवाद लेता है. आज बहुत खुश होगी तू तो, हो भी क्यों नहीं साहित्य, मीडिया, फिल्म, मंच से लेकर
 
धीरेन्द्र सिंह
टैग: लेख
Sep 14 2009 08:55 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

हिंदी दिवस पर अभिलाषा

हिंदी दिवस भाषा का तपिश भरा दिन होता है। प्रतिवर्ष प्रशंसाओं और आलोचनाओं आदि से परिपूर्ण यह दिन शाम होते होते चर्चाओं, प्रतिक्रियाओं आदि से थक कर निढाल हो जाता है। या यूँ भी कहा जा सकता है कि दिवस चेतनाशून्य हो जाता है। यह विचार केवल कुछ हिंदी दिवस की
 
धीरेन्द्र सिंह
टैग: लेख
Sep 12 2009 09:44 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

राजभाषा के राग

राजभाषा को देश अभी भी समझ रहा है। इस समझ में ऊभरे नए-नए विचारों की नई-नई बोलियॉ होती हैं पर सबसे मज़ेदार बात यह है कि इन बोलियों के भाव दशकों पुराने होते हैं। चूँकि राजभाषा हिन्दी को अभी भी हमारा देश समझने में की प्रक्रिया में है इसलिए इन रागों को अब भी
 
धीरेन्द्र सिंह
टैग: व्यंग
पसंद करें
0
नापसंद करें

भाषा युद्ध

प्रत्येक राष्ट्र के भाषाविद्, राजनेता, सामाजिक कार्यकर्ता आदि एक स्वर में मातृभाषा में ज्ञानार्जन तथा अभिव्यक्ति को महत्व देते रहे हैं। सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक कारणों से यह संभव नहीं हो पाता कि प्रत्येक व्यक्ति की मातृभाषा को व्यापक प्रचार-प्रसार मिले
 
धीरेन्द्र सिंह
टैग: लेख
Jul 29 2009 02:51 PM
पसंद करें
4
नापसंद करें

भाषा के दृष्टिकोण से भारत और चीन

दक्षिण एशिया में सुपर पॉवर बनने की होड़ भारत और चीन के मध्य जारी है तथा दोनों देश समय-समय पर अपनी वर्चस्वता का दावा करते रहते हैं। सुपर पॉवर बनने के लिए किसी भी देश को सामाजिक, आर्थिक, बौद्धिक आदि क्षेत्रों में अपनी वर्चस्वता बनानी पड़ती है तथा इस वर
 
धीरेन्द्र सिंह
पसंद करें
3
नापसंद करें

हिंदी-राष्ट्र की धड़कन-राष्ट्र की सोच.

भारत देश में आम बोलचाल की भाषा, फिल्मों तथा दूरदर्शन के निजी चैनलों पर चटखती-मटकती हिंदी, राष्ट्र की धड़कनों को बखूबी बयॉ कर रही है परन्तु यह हिंदी राष्ट्र की सोच को अभिव्यक्ति नहीं कर पा रही है। इसके परिणामस्वरूप राष्ट्र की धड़कनों और राष्ट्र की सोच
 
धीरेन्द्र सिंह
पसंद करें
4
नापसंद करें

हिंदी, मुकाबला और दिबांग

एनडीटीवी इंडिया ने दिनांक 06.06.2009 को रात्रि 8.00 बजे मुकाबला कार्यक्रम प्रस्तुत किया जिसका विषय था – “क्या अंग्रेज़ी हमारे देश में नई गुलामी की निशानी है ?” इस कार्यक्रम का संचालन श्री दिबांग कर रहे थे। विषय मेरी रूचि का था तथा मुझे लगा कि काफी शो
 
धीरेन्द्र सिंह
पसंद करें
3
नापसंद करें

हिंदी के इन सफेद हाथियों का सच.

राजभाषा अधिकारियों को निशाने पर ऱखना एक फैशन बन चुका है। जब जी में आता है कोई ना कोई विचित्र विशेषणों का प्रयोग करते हुए राजभाषा अधिकारियों पर उन्मादी छींटें उड़ा जाता है । इसी क्रम में एक नया लेख नवभारत टाइम्स, मुंबई संस्करण में दिनांक 29 मई 2009 को
 
धीरेन्द्र सिंह
पसंद करें
1
नापसंद करें

हिंदी और अंग्रेज़ी तथा हिंदीभाषी

हिंदी भाषा का उपयोग करनेवाले तथा हिंदी के शुभचिंतक सामान्यतया हिंदीभाषी माने जाते हैं। हिंदीभाषियों में हिंदी भाषा विषयक प्रमुखतया दो वर्ग है जिसमें एक वर्ग (इसे आगे प्रथम वर्ग के नाम से जाना जाएगा) हिंदी के स्वाभाविक विकास के संग उसकी विशिष्टता को ब
 
धीरेन्द्र सिंह
पसंद करें
2
नापसंद करें

चैनलों का हिन्दी चलन

हिंदी, राष्ट्र के माथे की बिंदी, यह वाक्य अनजाना नहीं है और न ही अस्वाभाविक। वैश्वीकरण की धुन में विश्व की सभी भाषाओं के रूपों में परिवर्तन हो रहा है तो भला हिंदी क्यों पीछे रहे। इसके भी रूप-रंग में कई परिवर्तन हो रहा हैं पर जितने करीब और स्पष्टता से
 
धीरेन्द्र सिंह
पसंद करें
1
नापसंद करें

ओ मेरे मितवा

इन्टरनेट जगत में राजभाषा विषय पर गिने-चुने लोग ही दिखलाई पड़ते हैं जिनके स्वर में हमेशा एक पुकार सुनाई पड़ती है जैसे विरह वेदना में मन पुकार उठे “आ जा तुझको पुकारे मेरे गीत रे ओ मेरे मितवा”। यह पुकार किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं है बल्कि यह आवाज़ ए
 
धीरेन्द्र सिंह
पसंद करें
0
नापसंद करें

प्रौद्योगिकी से प्रीत

व्यक्ति की चाहत हो या ना हो प्रौद्योगिकी से प्रीत करनी ही पड़ती है। आज प्रौद्योगिकी ललकार रही है कि मुझसे बच कर दिखाओ तो जानें। चमकती स्क्रीन से आँखें प्रभावित हो सकती है, चश्मा आँखों से या आँखें चश्मे से बेपनाह मुहब्बत शुरू कर सकती हैं, अंगुलियों मे
 
धीरेन्द्र सिंह
टैग: व्यंग
पसंद करें
0
नापसंद करें

कारोबारी हिंदी और साहित्यिक हिंदी.

स्थूल रूप से आकलन किया जाए तो वर्तमान में हिंदी के कुल तीन प्रमुख रूप हैं जो कारोबारी हिन्दी, साहित्यिक हिंदी और आम बोलचाल की हिन्दी है। हिन्दी इतिहास के पन्नों को पलटने पर यह स्पष्ट होता है कि विगत में हिंदी कामकाज की भाषा नहीं बन सकी थी किन्तु हिंद
 
धीरेन्द्र सिंह
पसंद करें
2
नापसंद करें

अंग्रेज़ी और शन्नो

दिनांक 18 अप्रैल, 2009 को समाचार की सुर्खियों में एक 11 वर्षीय बालिका शन्नो की मृत्यु की ख़बर के साथ-साथ अंग्रेज़ी भाषा की भी चर्चा थी। समाचार में उल्लेख था कि अंग्रेज़ी का अल्फाबेट याद न करने पर शिक्षिका मंजू ने शन्नो को दंडित करते हुए उसके कंधे पर
 
धीरेन्द्र सिंह
पसंद करें
2
नापसंद करें

अंग्रेज़ी की कठिनाई.

भारत देश में प्राय: यह कहा जाता है कि अंग्रेज़ी एक अंतर्राष्ट्रीय भाषा है तथा इस भाषा के द्वारा विश्व के ज्ञान, सूचनाओं आदि की खिड़कियॉ खुलती हैं। इस सोच के विरोध में भारत देश में अनेकों बार स्वर उठते रहे हैं तथा इस कथन की सत्यता पर प्रश्नचिन्ह लगाते
 
धीरेन्द्र सिंह
टैग: लेख
पसंद करें
0
नापसंद करें

राजभाषा तथा हिंदी साहित्यकार.

एक युग वह भी था जब हिंदी कार्यालयों की देहरी तक भी अपना प्रभाव निर्मित नहीं कर सकी थी। एक सामान्य धारणा थी कि हिंदी बातचीत और गानों-बजानों की भाषा है। यह मान्यता भी निर्मित हो चुकी थी कि हिंदी में कारोबारी अभिव्यक्तियाँ संभव नहीं है । भारतीय संविधान
 
धीरेन्द्र सिंह
पसंद करें
0
नापसंद करें

अलसाया मौसम

मौसम के अलसाया होने से अनेकों प्रभाव होते हैं तथा एक खामोश उदासी लिपटी रहती है। मौसम के मिज़ाज को दो लोग बखूबी पढ़ते रहते हैं या यूँ कहें कि मौसम से दो लोग बहुत जल्दी प्रभावित होते हैं एक तो मौसम विभाग तथा दूसरे कवि। मौसम में जो उतार-चढ़ाव आते रहता है उ
 
धीरेन्द्र सिंह
टैग: व्यंग
पसंद करें
0
नापसंद करें

प्रशिक्षण

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, मुंबई से हार्बर लाईन द्वारा शाम के समय पनवेल की ओर जानेवाली लोकल ट्रेन के डिब्बे सामान्यतया मानखुर्द स्टेशन के बाद आसानी से सॉस लेने लगते हैं और इसी स्टेशन से ट्रेन में मौसमी फल, अगरबत्ती, रूमाल, दॉत मज़बूत करने के पावडर और ना
 
धीरेन्द्र सिंह