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14 Jun 2010
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हैं उठ रहीं मेरे मन में खराब-सी बातें-gazal

हैं उठ रहीं मेरे मन में खराब-सी बातेंथीं करनी तुमसे मुझे बेहिसाब-सी बातेंहो तुम  भी, हम भी हैं जब साफगो, उठीं फिर क्योंहमारे बीच बताओ नकाब-सी बातेंबगैर जाम के मदहोश कर दिया उसनेरहा वो करता ही हर पल शराब-सी बातेंइलाही तुम ही हो क्या रूबरू मेरे ये
 
श्याम सखा 'श्याम'
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फ़ुटकर शे‘र-१२- श्याम सखा ‘श्याम‘

जिन्दगी भर जिन्दगी खेल दिखाती है रहीजीतकर भी हारना मुझको सिखाती है रहीफ़ाइलातुन,फ़ाइलातुन,फ़ इ लातुन फ़ेलुनमेरा एक और ब्लॉग http://katha-kavita.blogspot.com/my another blog http://katha-kavita.blogsot.com/
 
श्याम सखा 'श्याम'
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मर गया मैं तो कौन पूछेगा-gazal

चुप रहूँगा तो अनकही होगीगर कहूँगा तो दिल्लगी होगीआया होगा बुझाने को तब कौनआग पानी में जब लगी होगीसो रहा दिन है तानकर चादररात तो सारी शब जगी होगीमर गया मैं तो कौन पूछेगाजिन्दगी मिस्ले-खुदकुशी होगी बम गिरेंगे कभी जो धरती परशोर के बाद खामुशी होगीमौत पीछा
 
श्याम सखा 'श्याम'
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चल छैंयां-छैय़ां वाली इस पीढी को तो---gazal

फूल बुरा लगता है,पान बुरा लगता हैजब टूटे दिल तो भगवान बुरा लगता हैचल छैंयां-छैय़ां वाली इस पीढी को तोयारो मीरा पगली,रसखान बुरा लगता हैदेव अतिथि होता होगा मेरे यार कभी अब तो घर आया मेहमान बुरा लगता हैवक्त नया आया है,आये संस्कार नयेअब तो झूठ भला,ईमान बुरा
 
श्याम सखा 'श्याम'
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फ़ुटकर शे‘र न १२-श्याम सखा ‘श्याम’

मुझे जिन्दगी की दुआ दे गयामसीहा भी मुझको सजा दे गयालगा डूबने बेखुदी में मैं जबकोई मुझको तेरा पता दे गयामेरा एक और ब्लॉग http://katha-kavita.blogspot.com/my another blog http://katha-kavita.blogsot.com/
 
श्याम सखा 'श्याम'
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gazal k bahane

हो गई फ़िर से खता हैदिल तुझे जो दे दिया है गम से बचकर है निकलनाप्यार ही इक रास्ता है   आ रही शायद वही हैदिल मेरा जो झूमता हैहै धरा अपनी हंसी इतनीचाँद पीछे     घूमता    है  ढूंढता है ‘श्याम किसकोदिल
 
श्याम सखा 'श्याम'
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ये कैसी तकदीर लिखी तुमने-गज़ल

ये कैसी तकदीर लिखी तुमनेपावों में जंजीर लिखी  तुमनेसांसे दी ,धड़कन भी दी लेकिनक्या जीने की तदबीर लिखी तुमने ढूंढ़ रहा है बेचारा रांझाइस बार नहीं हीर लिखी तुमनेनन्हे-मुन्नो की तख्ती पर क्योंबात गुरू-गम्भीर लिखी तुमनेफ़ूलो की महफ़िल में क्यों यारब
 
श्याम सखा 'श्याम'
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कोई तो मतलब होगा- gazal

होने को तो सब होगालेकिन जाने कब होगाचाहेगा जब रब यारामिलना अपना तब होगाजब तब खत लिखता है जोकोई खैरतलब होगादंगो की फसलों का तोबीज सदा मजहब होगानाहक मिलता वो कहाँ हैकोई तो मतलब होगा‘श्याम’ मिलेगा जब हमकोसचमुच यार गजब होगा मेरा एक और ब्लॉग
 
श्याम सखा 'श्याम'
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वक्त मज़े में गुजरेगा- gazal

गिर-गिर कर तू सँभलना सीखपल-पल रंग बदलना सीखक्या पाया हँसकर अब तकयार हसद में जलना सीखदुनिया छलती है सबकोतू दुनिया को छलना सीखपाँवों से सब चलते हैंसर के बल तू चलना सीखवक्त मज़े में गुजरेगाहर  साँचे में ढलना सीख हर साजिश को कर दे खाकशोला बनकर जलना
 
श्याम सखा 'श्याम'
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जिस्म तो तूने नवाजा, खूबसूरत है उसे

कोई मेरे जख्म सी दे, चैन आये तब कहींकोई मेरे गम खरीदे, चैन आये तब कहींजिस्म तो तूने नवाजा, खूबसूरत है उसे गर कहीं से रूह भी दे, चैन आये तब कहींसूखकर सहरा हुए हैं, नैन मेरे देख तो इनको सुख की भी नमी दे, चैन आये तब कहींछू रहे हैं दुश्मनों 
 
श्याम सखा 'श्याम'
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रोज लड़े हम तुम--gazal

राहत के दो पलआंखो से ओझलरोज लड़े हम तुमनिकला कोई हलन्यौता देतीं नितदो आंखे चंचलझेल नहीं
 
श्याम सखा 'श्याम'
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फ़रेब छल,झूठ आप रखिये सँभाल साहिब-gazal

रहेंगे हम, घर में अपने ही मेहमान कब तकरखेंगे यूं बन्द ,लोग अपनी जुबान कब तकफ़रेब छल,झूठ आप रखिये सँभाल साहिबभरोसे सच के भला चलेगी दुकान कब तकचलीं हैं कैसी ये नफ़रतों की हवायें यारोबचे रहेंगे ये प्यार के यूं मचान कब तकहैं कर्ज सारे जहान का लेके बैठे
 
श्याम सखा 'श्याम'
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खुदकुशी ठान ली चिरागों ने-गज़ल

 दिल में लेकर जो  प्यास बैठीं हैंक्यों समन्दर के पास बैठी हैं पालकी के यूं पास बैठी हैंसारी सखियां उदास बैठी हैखुदकुशी ठान ली चिरागों नेऑंधियां बदहवास बैठी हैंमौत ने खत्म कर दिये शिकवेसौतनें आस पास बैठी हैंबेटे आफ़िस,बहुएं गईं दफ़्तरघर
 
श्याम सखा 'श्याम'
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मत जुबाँ सी, अरे ‘श्याम’ तू

दर्द दिल में है पर मुस्करासाँस खुलकर ले और खिलखिलाकर्ज तेरा है तू ही चुकासर मगर अपना तू मत झुकाहाँ गिले-शिकवे होंगे सदातोड़ मत प्यार का सिलसिलागर नहीं दम कि सच कह सकेबैठ तू बन कर इक झुनझुना मत जुबाँ सी, अरे ‘श्याम’ तूचोट खाई है तो
 
श्याम सखा 'श्याम'
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-थप्पड़-----कहानी

        झूठी कहानी लिखना, मेरे वश की बात नहीं है । क्योंकि झूठी कहानी लिखने वाले को, सच का गला घोंट कर मारना पड़ता है ।  वैसे सच कभी नहीं मरता । सच न पहले मरा है न आगे कभी मरेगा । मरता है सिर्फ झूठ बोलने वाला और चूंकि
 
श्याम सखा 'श्याम'
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सुनकर सच कोई पास नहीं आया

मुझको झूठ कभी रास नहीं आया सुनकर सच कोई पास नहीं आयासमझे कौन भला  अब दुख हाकिम का हुक्म बजाने  को   दास नहीं आया भूखे पेट  सदा  सोये  हम   यारो करना लेकिन उपवास नहीं आया पाँव 
 
श्याम सखा 'श्याम'
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gazal k bahane

मुझको झूठ कभी रास नहीं आया सुनकर सच कोई पास नहीं आयासमझे कौन भला  अब दुख हाकिम का हुक्म बजाने  को   दास नहीं आया भूखे पेट  सदा  सोये  हम   यारो करना लेकिन उपवास नहीं आया पाँव 
 
श्याम सखा 'श्याम'
Mar 08 2010 08:39 AM
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सच बोलना आदत रही कब है मेरी

माना तेरे हाथों में कोई पत्थर न था पर क्या तेरी हर बात में नश्तर न थासच बोलना आदत  रही  कब  है   मेरीपर झूठ कहने का  वहां अवसर न थाबीवी मेरी बच्चे मेरे मैं भी तो था था तो मकां भी मेरा लेकिन घर न थाजलथल हुआ था शहर मेरे दोस्तोबादल
 
श्याम सखा 'श्याम'
Mar 03 2010 09:49 AM
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तू आए तो मने दीवाली मेरे दिल की खोली में

 करता हूं  हर सालतेरा इन्तजार होली मेंतू आए तो मने दीवालीमेरे दिल की खोली मेंऔर फ़िर ऐ जानेमनआए मुन्ना या मुन्नीहर साल तेरी झोली में जो बात है तेरी आंखो मेंकहां वो किसी बन्दूक की गोली मेंराधा का श्याम है वो तो-मीरा का श्याम हैगोपियों मे मिल
 
श्याम सखा 'श्याम'
Mar 01 2010 04:56 AM
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यही तो होली की मस्ती है

  देखूं तुमको भांग जो पीकेअबीर गुलाल लगें सब फ़ीकेमोतियाबिन्दी नयनो  में काजल ्नित करता मुझको है पागलअदन्त मुंह और हंसी तुम्हारीइसमे दिखता ब्रह्माण्ड है प्यारीतेरा मेरी प्यार है जारी  जलती हमसे दुनिया सारीक्या समझे ये दुध-मुहें बच्चेकैसे
 
श्याम सखा 'श्याम'
Feb 27 2010 08:05 AM
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हमने जिस जालिम को चाहा----gazal

55दोस्त लुत्फे इन्तजार अपना यूं ही जाता रहाहाय! वो कमबख्त हरदम वक्त पर आता रहाजिसके भी हाथों में गुलदस्ते हम थमाते रहेउसके ही हाथों में पत्थर बारहा आता रहाजुल्म ढ़ाकर भी उसे था इस कदर हम पर यकींअपने हक में वो गवाही हमसे दिलवाता रहावो था मानिन्दे कसम तो
 
श्याम सखा 'श्याम'
Feb 23 2010 07:08 AM
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जिसको भी मारा अपनो ने मारा है-gazal

१२१खारा है सागर सचमुच खारा है नदिया ने फ़िर भी सब कुछ वारा हैसातों के सातों सुर हैं उसकी मुठ्ठी मेंकहने को वो बेचारा इक तारा हैजीत सदा सच की होती कहने भर कोसच बेचारा द्वापर में भी हारा हैबेशक यह  सुन्दर और गठीली भी हैदेह मगर कहते सांसो की कारा
 
श्याम सखा 'श्याम'
Feb 19 2010 05:34 PM
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मेरी जां मुझको बस अपना कहो ना-gazal

नहीं कहना अगर सहरा को सहरावही किस्सा पुराना सा कहो ना बहुत प्यारा है दोबारा कहो ना नहीं कहना अगर सहरा को सहरा इसे तुम रेत का दरिया कहो ना जरूरत है कहां रिश्तों की हमको मेरी जां  मुझको बस अपना कहो ना नहीं अच्छा घुमाकर बात करना जो भी कहना है बस सीधा
 
श्याम सखा 'श्याम'
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Feb 18 2010 08:56 AM
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श्याम सखा-साहित्य अकादमी हरियाणा का सदस्य मनोनीत

प्रिय मित्रोआप को यह जानकर खुशी होगी किआप सरीखे मित्रों की दुआओं से मुझेसाहित्य अकादमी हरियाणा का तीन वर्ष के लिये सदस्य मनोनीत किया गया है-यह दूसरी बार है कि आपके इस नाचीज मित्र को सदस्य बनायागया है।इसके अलावा आपका यह मित्र पंजाबी साहित्य अकादमी हरियाणा
 
श्याम सखा 'श्याम'
टैग: gazal
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मुझको नशे से ज्यादा नशा,

यूं तो वो हमेशा ही दिल के पास में रहापर,उसका जल्वा मुस्तकिल कयास में रहाउसको ही ढूंढते रहे,कैसे थे बेखबरहर वक्त ही जो अपने आस-पास में रहाखुशबू बसी हुई है जिस तरह से फूल में ऐसे ही कुछ वो मेरी सांस-सांस में रहावो जिन्दगी से दूर, बहुत दूर जा बसेता-उम्र
 
श्याम सखा 'श्याम'
टैग: gazal
Feb 16 2010 06:26 PM
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नुकसान आपका ही है

गज़ल सरीखी खूबसूरत कहानी-- अगर आपने नहीं पढी अब तक क्लिक करें व पढेंपसन्द न आये तो दाम वापिसरसभरी ---(किशोर प्रेम की कोमलांगी कहानी)एक और कहानी-  "एनकाउंटर—-ए लव स्टोरी":   मेरा एक और ब्लॉगhttp://katha-kavita.blogspot.com/my another
 
श्याम सखा 'श्याम'
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रसभरी ---(किशोर प्रेम की कोमलांगी कहानी)

इसी कहानी के दो अंश- १-- [एक अजीब मिठास लिये रसभरियों का, कसैला स्वाद मुझे कभी नहीं भाया था। हाँ उन्हें देखना अलबत्ता मुझे अच्छा लगता था; उन्हें देख मुझे यूँ लगता था जैसे कोई गदराया बदन, कल्फ लगी मलमल की साड़ी से बाहर निकला जा रहा हो। मुझे रसभरी के झीने
 
श्याम सखा 'श्याम'
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चुप भी तो रह पाना मुश्किल-gazal- श्याम सखा श्याम

अपनों को समझाना मुश्किलचुप भी तो रह पाना मुश्किलखोना मुश्किल पाना मुश्किलखाली मन बहलाना मुश्किलमौन रहें, तो बात बने कबकहकर भी सुख पाना मुश्किलबैरी सावन बरसे रिमझिमरातों का कट पाना मुश्किलसुलझों को उलझाना आसांउलझों को सुलझाना मुश्किलdbgm-3 मेरा एक और
 
श्याम सखा 'श्याम'
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क्या खबर थी कि वो इक रोज पराया होगा

जब हुनर उसको खुदा ने ये सिखाया होगाएक कतरे में समन्दर जा समाया होगादिल तेरा उसने कभी जो यूं दुखाया होगाउसको भी यार नहीं  चैन तो आया होगाउसको मालूम था जब इसका उजागर होनाप्यार  क्यों उसने जमाने से छुपाया होगाबन के तूफ़ान जो दिल में मेरे आया
 
श्याम सखा 'श्याम'
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एनकाउंटर—-ए लव स्टोरी

(मित्रो अब तक आप मेरी गज़लों को पसन्द कर मेरा हौसला बढाते रहे हैं ,ँ सेआज मैं बतला दूं कि मैं मूलत: कथाकार हू और मा शारदे की अनुकम्पा से अब तक १२५-१३० कहानी लिख पाया हूं। आप सरीखे मित्रों की दुआओं १०-१२ कहानियां पुरस्कृत भी हुईं। वहएक उपन्यास को M.A final
 
श्याम सखा 'श्याम'
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जीवन भी क्या खूब तमाशा है

पल में तोला,पल में माशा हैजीवन भी क्या खूब तमाशा हैमुंह में डालो बस घुल जाएगायारो ,ग़म क्या एक बताशा हैमेरे मन में तो है रहती हरदमतुझसे मिलने की अभिलाषा हैवक्त बुरा है तब ही तो बैठी हर इक मन में आज हताशा हैलौट सदा जो आ जाती मन मेंवो दोशीजा ही तो आशा हैना
 
श्याम सखा 'श्याम'
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कुछ फ़ुटकर शे‘र-११

यूं भला कब तक मेरा इम्तिहान लोगे तुमइस तरह तो एक दिन मेरी जान लोगे तुमहै खड़ी इक फ़स्ल गम की दिल में मेरेदर्द की इस फ़स्ल का भी लगान लोगे तुमएक पैसा दे के मैने दुआ थी चाही जबकह उठा तब था फकीर आसमान लोगे तुम ?फ़ाइलातुन,फ़ाइलातुन,मफ़ाइलुन,फ़ेलुनमेरा एक और
 
श्याम सखा 'श्याम'
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हम तुम्हारे है नहीं कुछ भी मगर

हम तुम्हारे है नहीं कुछ भी मगरगर मिलें तो जिन्दगी जाये सँवरबाँकी चितवन और थी तिरछी नजरचढ़ गई तलवार ज्यों हो सान परघटता बढ़ता चाँद तो है बेवफ़ारात फ़िर भी है उसी की हमसफ़रअब महाभारत रुके कैसे भला आ खड़े हैं जब सभी मैदान परभूलना मुमकिन कहाँ है दोस्तोदेखना उसका
 
श्याम सखा 'श्याम'
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फ़ुटकर शे‘र नं ११- हैं बहुत नाजुक मगर

हैं बहुत नाजुक मगर डरते नहीं हैं आइने फ़र्क शाहो बांदी में करते नहीं हैं आइने टूट जाते हैं बिखर जाते है फ़िर भी दोस्तो अक्स दिखलाने से तो हटते नहीं हैं आइने i ईता दोष गज़ल में दूर कर लिया है मे रा एक औ र ब्लॉग http://katha-kavita.blogspot.com/ my anothe
 
श्याम सखा 'श्याम'
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मै भला कब सुधरने वाला हूँ

आज कुछ कर गुजरने वाला हूँ बन के खुशबू बिखरने वाला हूँ तोड़ दो कसमें, दो भुला वादे मैं तो खुद भी मुकरने वाला हूँ टूटकर बिखरा हूं इस तरह यारो अब कहाँ मैं संवरने वाला हूँ जिन्दगी कर दे हसरतें पूरी खुदकुशी अब मैं करने वाला हूँ देख लो तुम मुझे सजा देकर मै
 
श्याम सखा 'श्याम'
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दुश्मन यार जमाना है

खुद को ही समझाना है यानि पहाड़ उठाना है प्यार कभी होता होगा अब तो यार फ़साना है केवल शक के कारण ही उलझा तान-बाना है नाचे है, क्यों दिल मेरा मौसम खूब सुहाना है उसका बचना मुश्किल है दुश्मन यार जमाना है आज नहीं तो कल यारा लौट सभी को जाना है तुमसे दूर ‘सखा
 
श्याम सखा 'श्याम'
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पुराना शे‘र नई बहर में--श्याम सखा

दिल आज फ़िर फ़साद करने लगा है उस बेवफा को याद करने लगा है बेताब रूह थी कभी मिलने को ‘ श्याम ’ अब जिस्म भी जिहाद करने लगा है मुस्तफ़इलुन,मफ़ाइलुन,फ़ाइलातुन २ २ १ २ , १२ १ २ . २ १२ २ मेरा एक और ब्लॉग http://katha-kavita.blogspot.com/ my another blog http://
 
श्याम सखा 'श्याम'
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दस नंबरी शे‘र यानी--

फ़ुटकर शे‘र-नं १० दिल भी क्या-क्या फ़साद करता है चाहे जब तुझको याद करता है तुझसे मिलने को रूह ही तो नहीं जिस्म भी अब जिहाद करता है कहानी पढ़्ना चाहें तो यहां क्लिक करें-दावा है पसन्द आएगी भारत से श्याम सखा की कहानी: एनकाउंटर my another blog http://katha
 
श्याम सखा 'श्याम'
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दिल की बस इतनी खता है

दिल की बस इतनी खता है वो तुझे ही चाहता है जिन्दगी है, या सजा है वक्त कितना बेवफ़ा है दिल की बस इतनी खता है वो तुझे ही चाहता है प्यार जब ग़म की दवा है रूह फिर क्यों ग़मजदा है सिर्फ़ सच ही तो कहा था हो गया वो क्यों खफ़ा है जुल्म सहना, मुस्कराना आपकी बेढ़ब
 
श्याम सखा 'श्याम'
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घर आपका टूटा नहीं होता ---गज़ल

उसको अगर परखा नहीं होता सखा घर आपका टूटा नहीं होता सखा मैने तुझे देखा नहीं होता सखा फिर चाँद का धोखा नहीं होता सखा हर रोज ही तो है सफर करता मगर सूरज कभी बूढ़ा नहीं होता सखा इजहार है इक दोस्ताना प्यार तो इसका कभी सौदा नहीं होता सखा उगने की खातिर धूप भी
 
श्याम सखा 'श्याम'