खुली खिड़की's Image

खुली खिड़की

http://window84.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
01 Jun 2010
कुल प्रविष्टियां
36
पाठक भेजे
928
पसंद
61
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
25.78
पसंद करें
1
नापसंद करें

पितृ पर्वत - मेरे लिए स्वर्ग सा

इंदौर में मेरी सबसे पसंदीदा जगह है पितृ पर्वत। जहाँ पहुंचते ही मैं तनाव मुक्त हो जाता हूँ, शायद इसलिए कि वहाँ बुजुर्गों का बसेरा है, और मुझे बुजुर्गों के साथ समय बिताना ब्लॉगिंग करने से भी ज्यादा प्यारा लगता है, लेकिन शर्त है कि बुजुर्ग सोच से युवा होने
Jun 01 2010 04:01 PM
पसंद करें
5
नापसंद करें

अलविदा दोस्तो, जिन्दगी रही तो हजार मुलाकातें

हैप्पी तेरा फोन, पास बैठे मेरे मित्र यशपाल शर्मा ने फोन को मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा। मैंने फोन को थामते हुए..हैल्लो हैल्लो किया, सामने से संदीप सर की आवाज आई, "हैप्पी तुमको आज दो बजे जयदीप सर ने रॉल्टा बजाज वाली बिल्डिंग में बुलाया है। मैं सीट से उठा, और
पसंद करें
2
नापसंद करें

लिखने कुछ और बैठा था...लिख बैठा माँ के बारे में।

गाँव के कच्चे रास्तों से निकलकर शहर की चमचमाती सड़कों पर आ पहुंचा हूँ। इस दौरान काफी कुछ छूटा है, लेकिन एक लत नहीं छूटी, फकीरों की तरह अपनी ही मस्ती में गाने की, हाँ स्टेज से मुझे डर लगता है। गाँवों की गलियाँ, खेतों की मिट्टी, खेतों को गाँवों से जोड़ते
टैग: मैं
पसंद करें
2
नापसंद करें

उस दिन का पागलपन

दो बजे में कुछ मिनट बाकी थे, और स्कूल की छुट्टी वाली घंटी बजने वाली थी, लेकिन हम दूसरे गाँव से पढ़ने आते थे, इसलिए हमारे लिए स्कूल की छुट्टी वाली घंटी से ज्यादा महत्वपूर्ण था बस का हॉर्न। उस दिन जैसे ही बस ने गाँव के दूसरे बस स्टॉप से हॉर्न  दिया, तो
टैग: मैं
पसंद करें
1
नापसंद करें

मुझे माफ कर देना, नालायक बच्चा समझकर

पिछले कई दिनों से उलझन में था, करूं या न करूं। दिल कहता था करूं और दिमाग कहता था छोड़ यार। वैसी ही स्थिति बनी हुई थी, जैसे प्रेमी को पहला पत्र लिखने के वक्त बनती है, कई कागद काले कर दिए, फिर फाड़कर फेंक दिए, ऐसे ही कई नाम लिखे और मिटा दिए, लेकिन कल रात एक
पसंद करें
1
नापसंद करें

स्लैमबुक और उसकी मानसिकता

कुछ दिन पहले बठिंडा से मेरे घर अतिथि आए थे, वो मेरे खास अपने ही थे, लेकिन अतिथि इसलिए क्योंकि वो मुझे पहले सूचना दिए बगैर आए थे, और कमबख्त इस शहर में कौएं भी नहीं, जो अतिथि के आने का संदेश मुंढेर पर आकर सुना जाएं। वो आए भी, उस वक्त जब मैं बिस्तर में था,
टैग: इंदौर
पसंद करें
0
नापसंद करें

जब हुआ नाड़ी निरीक्षण

गत 17 फरवरी से योग शिविर जा रहा हूँ, एक दोस्त के निवेदन पर, ताकि दोस्ती भी रह जाए और सेहत में भी सुधार हो जाए। योग शिविर में जाकर बहुत मजा आ रहा है, क्योंकि वहाँ पर बच्चा बनने की आजादी है, जोर जोर से हँसने की आजादी है, वहाँ पर बंदर उछल कूद करने की आजादी
Feb 19 2010 02:16 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

जो हूँ वैसा रहना

मैं कल से क्यों नहीं डरता? मैं कल के बारे में क्यों नहीं सोचता? मेरी पत्नि अक्सर मुझ पर चिल्लाती है| चिल्लाए भी क्यों न वो, कल से जो डरती है, जिसके चक्कर में वो आज भी खो बैठती है। मुझे नहीं पता चला कब और कैसे मुझे आज से नहीं अब से प्यार हो गया। जो हूँ
Feb 15 2010 08:44 PM
पसंद करें
5
नापसंद करें

मेरे घर आई नन्ही परी

छ: फरवरी 2010 को सुबह सात बजकर 58 मिनट पर हिम्मतनगर (गुजरात) स्थित अस्पताल वरदान में इस नन्ही परी का जन्म हुआ। एक झलक खुली खिड़की के पाठकों और मेरे दोस्त जनों के लिए। फिलहाल नाम नहीं रखा गया, लेकिन मैंने उसको रिधम कहना शुरू कर दिया है। मेरे पास समय कम था,
पसंद करें
2
नापसंद करें

कीचड़ में खेलता वो मासूम सा बच्चा

एक फूल सा बच्चा, गली में खड़े पानी के कारण हुए कीचड़ के बीचोबीच मस्ती कर रहा है। उसको कितना आनंद महसूस हो रहा था, उसका तो अंदाजा नहीं लगा पाऊंगा। हाँ, लेकिन उसके चेहरे की खुशी मेरे दिल को अद्भुत सुकून दे रही थी। उसको कीचड़ में उछल कूद करते देख, घर के भीतर
टैग: Blog Likhi
पसंद करें
2
नापसंद करें

जब मुश्किल आई, माँ की दुआ ने बचा लिया

var BW = new UWA.BlogWidget({moduleUrl:'http://www.netvibes.com/modules/feedReader/feedReader.php?feedUrl=http%3A%2F%2Fpunjab84.blogspot.com%2Ffeeds%2Fposts%2Fdefault'});BW.setPreferencesValues({'nbTitles':'2',
टैग: मैं
पसंद करें
3
नापसंद करें

जब प्यार हुआ मुझे

यही दिन थे (मई-जून), वेबदुनिया में आए अभी छ: महीने हुए थे। घर से कभी बाहर नहीं निकला था, इसलिए इन दिनों मैंने वेबदुनिया छोड़ने का मन बना लिया था, लेकिन कहते हैं ना कि समय से पहले और किस्मत से ज्यादा किसकी को कुछ नहीं मिलता, ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ, मुझे
पसंद करें
2
नापसंद करें

इम्तिहानों के दिन और फिल्म चस्का

बचपन गुजर चुका था, और हम किशोर अवस्था से युवास्था की तरफ दिन प्रति दिन कदम बढाते जा रहे थे। ये उन्हीं दिनों की बात है। हम सब दोस्त एक कमरे में बैठकर इम्तिहानों के दिनों में पढ़ाई करते थे। पढ़ाई तो बहाना होती थी सच पूछो तो मौज मस्ती करते थे। कभी दलजिंदर के
पसंद करें
0
नापसंद करें

आखिर मिला ग्रीन सिग्नल

शनिवार की रात को करीबन पौने दस बजे उसकी (मेरी पत्नी) बस गंगवाल बस स्टैंड से रवाना होनी थी और वो शादी के खुलासे के बाद पहली बार अपने घर जा रही थी, क्योंकि कुछ दिन पहले मेरे ससुर जी का फोन आया था और बोले थे कि घर में हवन रखा है, अगर तुम आओ तो अच्छा है,
 
कुलवंत हैप्पी
पसंद करें
0
नापसंद करें

....वो खुशी खुशी लौट आए

आज बुधवार का दिन है, और चिंता की चादर ने मुझे इस कदर ढक लिया है, जैसे सर्दी के दिनों में धूप को कोहरा, क्योंकि आते शनिवार को मेरी पत्नी शादी के बाद पहली बार मायके जा रही है, और वादा है अगले बुधवार को लौटने का. तब तक मेरा इस चिंता की चादर से बाहर आना
 
कुलवंत हैप्पी
पसंद करें
0
नापसंद करें

...लड़का होकर डरता है

बात है आज से कुछ साल पहले की, जब मैं शौकिया तौर पर अपने एक बिजनसमैन दोस्त के साथ रात को मां चिंतपूर्णी का जागरण करने जाया करता था और आजीविका के लिए दैनिक जागरण में काम करता था। एक रात उसका फोन आया कि क्या हैप्पी आज जागरण के लिए जाना है? मैंने पूछा कह
 
कुलवंत हैप्पी
पसंद करें
0
नापसंद करें

..जब भागा दौड़ी में की शादी

आज से एक साल पहले, इस दिन मैंने भागा दौड़ी में शादी रचाई थी, अपनी प्रेमिका के साथ. सही और स्पष्ट शब्दों में कहें तो आज मेरी शादी के पहली वर्षगांठ है. आज भी मैं उस दिन की तरह दफ्तर में काम कर रहा हूं, जैसे आज से एक साल पहले जब शादी की थी, बस फर्क इतना
 
कुलवंत हैप्पी
पसंद करें
0
नापसंद करें

वेलेंटाईन डे पर सरप्राइज गिफ्ट

शनिवार को वेलेंटाइनज डे था, हिन्दी में कहें तो प्यार को प्रकट करने का दिन. मुझे पता नहीं आप सब का ये दिन कैसा गुजरा,लेकिन दोस्तों मेरे लिए ये दिन एक यादगार बन गया. रात के दस साढ़े दस बजे होंगे, जब मैं और मेरी पत्नी बहार से खाना खाकर घर लौटे, उसने मजाक
पसंद करें
7
नापसंद करें

शौचालय और बेसुध मैं

मुझे वो दिन कभी नहीं भूलता। उस दिन मैं काम कर कर बेसुध हो चुका था। मेरा शरीर गतीविधि कर रहा था, जबकि मेरा दिमाग बिल्कुल सुन्न हो चुका था, क्योंकि काम कर कर दिमाग इतना थक चूका था कि उसमें और काम करने की हिम्मत न थी। मैंने अपनी कुर्सी छोड़ी, और टहलने के
पसंद करें
6
नापसंद करें

मेरे पिता और पक्षी फीनिक्स

कुछ दिन पहले मैं अहमदाबाद के रेलवे स्टेशन पर खड़ा बठिंडा को जाने वाली रेलगाड़ी का इंतजार कर रहा था, मैं खड़ा था, लेकिन मेरी नजर इधर उधर जा रही थी, लड़कियों को निहारने के लिए नहीं बल्कि कुछ ढूंढने के लिए, जो खोया भी नहीं था। इतने में मेरी निगाह वहां पर स्
 
कुलवंत हैप्पी
टैग: पिता
पसंद करें
6
नापसंद करें

महिलाओं का मेरे प्रति आकर्षण-पार्ट-2

आज वो बैंक भी बदल गया और मेरा बैंक खाता भी। वो बैंक अब एचडीएफसी हो गया जो कभी बैंक ऑफ पंजाब हुआ करता था, मेरा खाता भी अब इस बैंक में आ गया। वो वाला नहीं नया बैंक खाता, वो तो बहुत पहले ही बंद हो गया था, लेकिन वो पहला बैंक खाता मुझे आज भी याद है। उस बै
 
कुलवंत हैप्पी
टैग: kulwant happy
पसंद करें
1
नापसंद करें

महिलाओं का मेरे प्रति आकर्षण

मैंने अपनी जिन्दगी में बहुत बार इस बात का अहसास किया है कि मर्दों के मुकाबले महिलाओं का मेरे प्रति आकर्षण ज्यादा रहा है। अगर आज मैं पीछे मुड़कर देखता हूं तो मुझे बहुत सी महिलाएं याद आती हैं, जिनका मेरे प्रति आकर्षण था, हर आकर्षण का मतलब शारीरिक संबंधो
 
कुलवंत हैप्पी
पसंद करें
0
नापसंद करें

मेरी दस नंबरी टी-शर्ट

मुझे टी-शर्टों से बेहद प्यार था, मुझे टी-शर्ट और जींस पहना शुरू से ही अच्छा लगता है, लेकिन आजकल टी-शर्ट पहना कम हो गया, क्योंकि मेरा पेट बाहर आ गया है। जब मैंने वेबदुनिया को ज्वॉइन किया, तो मुझे पता चला कि वेबदुनिया में ऑफिस ड्रेस रूल हैं, लेकिन मैं बंदा
टैग: मैं
Sep 20 2009 07:40 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

श्राद्ध खिलाने के लिए खिलाओ रिश्वत

आज मैंने भी अपनी मां का श्राद्ध पाया, लेकिन खुद ही घर में खाया। सचमुच! यकीन नहीं आता होगा न। मुझे भी यकीन नहीं आ रहा था क्योंकि मां को पूर्वजों की रोटी खिलाते हुए देखा, किसी गरीब घर के बच्चों या परिवारजनों को। आज मेरी पत्नी बोली हम किसी पंडित पंडितायन
पसंद करें
0
नापसंद करें

जब छोड़कर चली गई मां

मुझे आज भी याद है, वो काला दिन, जब मेरी मां ने सरकारी अस्पताल के बिस्तर पर अपनी मां (मेरी नानी) की बांहों में दम तोड़ दिया था। उस दिन मेरी मौसी, मामी, मेरी नानी और मैं, गुलूकोज की बोतल का खत्म होने का इंतजार कर रहे थे, उस पर निर्भर था मेरी का मां जीवन।
टैग: माँ
पसंद करें
0
नापसंद करें

जब मिल बैठे तीन यार, मैं, मुकेश और गीत

गुरूवार का दिन और मैं पूरी तरह मुकेशमयी हो चुका था। सुबह सुबह तो मैंने श्री मुकेश को श्रद्धांजलि देते हुए पोस्ट लिखी। और उसके बाद मैंने इंटरनेट पर उसके गीतों को सर्च किया..और फिर डाउनलोड किया। फिर मुकेश के गीत सुनता गया और उसमें रमता गया। इन गीतों को
टैग: मुकेश
पसंद करें
0
नापसंद करें

खून से लथपथ पिता जब घर पहुंचे

सुबह के चार बजे घर का दरवाजा किसी द्वारा खटखटाने की आवाज आई और मेरी मां दरवाजे की तरफ दौड़ी, क्योंकि आधी रात के बाद से वो मेरे पिता का इंतजार कर रही थी, जिसको ढूँढने के लिए मेरे परिवार के सदस्य गए हुए थे। ऐसे में अगर हवा भी दरवाजा खटखटा देती तो भी स्वाभिक
टैग: पिता
पसंद करें
0
नापसंद करें

तोतली जुबान से जब पिता को टोका

रात का समय था और हमारे घर मेरे पिता श्री अपने एक अन्य दोस्त के साथ बैठकर शराब का लुत्फ उठा रहे थे. मैं दूर खड़ा इस दृश्य को बड़ी गौर से देख रहा था, पता नहीं मुझे क्या हुआ, मैं उनके पास गया और बोला, अंकल जी अगर आप ने शराब पीनी है तो हमारे घर में मत आया
पसंद करें
0
नापसंद करें

एक आंसू गिरा उसकी आंख से....

वो ही रेलवे स्टेशन, वो ही रेलगाड़ी, पर कुछ बदलाव था इस बार। फर्क इतना था कि कभी इस गाड़ी से मैं आया था, और आज इस गाड़ी से कोई जा रहा था। जैसे परिंदे दाने चुगने के बाद अपने घरों की तरफ चल देते हैं, वैसे ही एक परिंदा आज यहां से उड़कर अपने घर जाने को तैयार था,
टैग: friend
पसंद करें
3
नापसंद करें

माँ छांव तो बाप कड़ी धूप

जब भी पिता ने हमको मारने की कोशिश की, मां बीच में दीवार बन खड़ी हो गई। हमारे तन पर पड़ने वाली लठें उसने अपने तन पर सही। हमारे बचाव में जब भी मां उतरती तो पिता के मुँह पर एक बात होती थी कि 'माँ बिगाड़ती है और पिता संवारता था'। पिता के इन शब्दों से मैं कु
 
कुलवंत हैप्पी
पसंद करें
3
नापसंद करें

एक कश ने बिगाड़ दिए

कहते हैं कि एक कदम हमको मंजिल तक पहुंचता है तो वहीं धुएं का एक कश बर्बादी की डगर पर खींच ले जाता है, आम लोगों की तरह मेरे भी दोस्त थे, उनके पास समय बहुत था, तो एक दिन मस्ती मस्ती में, मजाक मजाक में किसी के कहने पर धुएं का एक कश ले लिया, फिर तो क्या क
 
कुलवंत हैप्पी
पसंद करें
7
नापसंद करें

मां से तोड़ आया अनजाने में रिश्ता...

यारों मैं इतना बुरा भी नहीं कि मां की कदर न करूं, मैं भी आपकी तरह मां से बहुत प्यार करता हूं और करता था एवं करता रहूंगा. लेकिन एक दिन अनजाने में उस मां से रिश्ता तोड़ आया, जब मुझे मालूम हुआ तो मैं बहुत रोया. हुआ कुछ इस तरह कि आज से तीन साल पूर्व जब मे
 
कुलवंत हैप्पी
पसंद करें
4
नापसंद करें

मैं, मेरे पिता और तालिबान

कीबोर्ड की टिकटिक से कोसों दूर, अपने होमटाउन में पूरा एक महीना बीत किया. लेकिन तालिबान ने वहां पर भी पीछा नहीं छोड़ा. खबरिया चैनलों के कारण हर घर में तालिबान टीवी की स्क्रीन पर नजर आता है, लोगों के दिमागों पर ही नहीं छाया बल्कि लोगों की जुबां पर भी ता
 
कुलवंत हैप्पी
पसंद करें
2
नापसंद करें

जब यारों के लिए लिखे प्रेम पत्र

वो दिन बहुत याद आते हैं, जब हम सब दोस्त मिलकर एक घर में एकत्र होते थे और पढ़ा करते थे, पढ़ने वाले तो दो ही थे, बाकी तो मौज मस्ती करने के लिए आते थे. शाम को रोटी खाने के बाद दूध पीकर घर से पढ़ाई का बहाना बनाकर जल्दी भागना मुझे याद है, हम सब मेरे एक दोस्त
 
कुलवंत हैप्पी
पसंद करें
3
नापसंद करें

मेरे गांव का 'निराला बीच'

गोवा के बीच कैसे हैं या फिर पांडुचेरी के समीप बना खास विदेशियों के लिए एक बीच कैसा है. मैं नहीं जानता, क्योंकि कभी जाने का मौका ही नहीं मिला. इन बीचों के बारे में सुनने को अक्सर मिल जाता है क्योंकि इन बीचों पर विदेशी महिला पर्यटकों के साथ सामूहिक बला
 
कुलवंत हैप्पी
पसंद करें
2
नापसंद करें

बस याद है एक होली...

हरियाणा के रतिया शहर की बात है....जब घर में से रंग उठाकर मजाक मजाक में अपनी भाभी पर डाल दिया, जिसकी उम्र समय समय करीबन 27 की होगी, और मेरी करीबन दस ग्यारह की. उसके बाद करीबन सुबह ग्यारह बजे से शाम चार बजे तक वो मुझ पर रंग गिराती रही, क्योंकि उनकी होल
 
कुलवंत हैप्पी
टैग: इंदौर