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अ-शब्‍द

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31 Dec 2009
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उम्र मुठी में ऐसे आती है

पहले पहल जापानी सभ्‍यता पर पश्चिम का प्रभाव सिर चढकर बोला था लेकिन हिरोशिमा और नागासाकी के हादसे के बाद जापान ने अपनी परंपराएं खुद गढी हैं। उन्‍हीं में शामिल है स्‍वस्‍थ दिनचर्या। जापान में या तो फास्‍ट ट्रेनें चलती हैं या लोग पैदल चलते हैं।जापानी लोग
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यौवन की चाह

क्‍‍या एंजेलिना जोली ने बोटोक्‍स के इंजेक्‍शन लिए हैं, सनी देओल ने नए बाल उगवाए हैं, जेनिफर लोपेज का फ‍िगर कास्‍टेमिक सर्जरी से जवान हुआ है, देवआनंद कौन सी डाई लगा रहे हैं, अमिताभ बच्‍चन इस उम्र में भी इतनी उछल-कूद कैसे कर पाते हैं उनके सामने उनका बे
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खुशखबरी। चांद के साथ मैं भी लौट आया हूं

खुशखबरी।खुशखबरी।खुशखबरी। चांद मोहम्‍मद अपनी फ‍िजां के पास लौट आए हैं यह कहते हुए कि उन्‍होंने जो कुछ भी अत्‍याचार किया वह किसी के दबाव में किया और वह आज भी अपनी फ‍िजां से बेपनाह मोहब्‍बत करते हैं। मेरे ब्‍लागर साथियों मुझे जैसे ही यह खबर मिली मुझे लग
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आइला रे... बेटियों के प्रति इतनी नफरत

दोस्‍तों, कहने को तो हम कई मामले में अफलातून हो गए हैं। विज्ञान से खलिहान तक तरक्‍की के नये-नये आयाम कायम कर लिये हैं। पर आज भी हमारे समाज के किसी कोने से कई ऐसी घटनाएं उजागर होती रहती हैं जो हमारे सभ्‍य होने और तरक्‍की के दावे को पलभर में झूठला देती
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दुनिया की सबसे छोटी पतंग और बैट

यूपी के सहारनपुर जिले के बीएससी के छात्र विपिन कुमार ने मात्र १.3 सेमी का क्रिकेट बैट और दो मिमी की दुनिया की सबसे छोटी पतंग बनाने का दावा किया है। विपिन अब अपने इस प्रयास को गिनीज बुक आफ वर्ल्‍ड रिकार्ड में दर्ज कराना चाहते हैं। गांव कुरलकी निवासी 2
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अगर आपकी प्रेमिका का सेलफोन बंदर छिन ले जाए

तनिक सोचिये......आप किसी पार्क में अपनी प्रेमिका के साथ व्‍यस्‍त हों और वैसे वक्‍त में कोई बंदर आपको परेशान करे तो आपको कैसा लगेगा। जी हां, ऐसी एक सत्‍य घटना पेश है- दिल्‍ली या आगरा से मेरठ होकर हरिद्वार जाने के रास्‍ते में खतौली आता है। वहां चीतल पा
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शायद आप इस युवती को पहचानते हों

गुरुवार की शाम को जीआरपी ने बरेली रेलवे स्‍टेशन के यार्ड में खडे त्रिवेणी एक्‍सप्रेस की बोगी से एक युवती को बरामद किया। पूछताछ के बाद जब युवती ने कुछ नहीं बताया तो इसे महिला थाने भेज दिया। वहां महिला कांस्‍टेबल ने पूछताछ की तो उसने अपना नाम कुसुम मिश
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खुशी की बात

हर दूसरा आदमी विश्‍व का सबसे खुश व्‍यक्ति होने का दावा एक बार जरूर करता है। इसकी वजह यह है कि हर आदमी के पास सबसे ज्‍यादा खुश होने का एक न एक पल अवश्‍य मौजूद है। दार्शनिकों की चिंता अधिकतर व्‍यक्ति की नकारात्‍मक भावनाओं को घटाने की रहती है। अब तक इस
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झूठ का 'सच'

आदमी झूठ बोले बिना क्‍यों नहीं रह सकता। क्‍या वह नहीं जानता कि झूठ बुरा होता है। इस बुराई के अहसास के बावजूद झूठ बोलने का दबाव कहां से आता है- दरअसल, जब तक सच अपने जूतों के फीते बांध रहा होता है तब तक झूठ आधी दुनिया का चक्‍कर काट चुका होता है। यानी झ
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जूते के शिकार सभी प्रत्‍याशी विजयी

यह महज इत्‍तेफाक नहीं तो क्‍या है कि इस चुनाव में जिस प्रत्‍याशी के उपर भी जूते फेंके गए वह जीत गया। गृहमंत्री पी चिदंबरम, लालकृष्‍ण आडवाणी और नवीन जिंदल ये सभी चुनाव जीत गए। इन सभी पर प्रेस कांफ्रेंस के दौरान या चुनाव प्रचार के दौरान जूते फेंके गए थ
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रिश्‍तों की नई दुनिया

अंतरराष्‍ट्रीय परिवार दिवस पर विशेष यूं तो अब तक न जाने कितनी ही बार इस विषय पर हमारे ब्‍लागर साथियों ने अपने-अपने ढंग से बातें की हैं, फ‍िर भी संदर्भ मौजू है। मैं बात कर रहा हूं सोशल नेटवर्किंग की। हमारी नयी पीढी इंटरनेट के जरिए अपना नया समाज बनाने
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ऐ मां तेरी सूरत से बढकर भगवान की सूरत क्‍या होगी...

बेसन की सोंधी रोटी पर, खटी चटनी जैसी मां, याद आती है, चौका बासन, चिमटा-फुंकनी जैसी मां, बीवी, बेटी, बहन पडोसन थोडी-थोडी सबमें दिनभर एक रस्‍सी के उपर चलती नटनी जैसी मां। निदा फाजली साहब की इन पंक्तियों के साथ मदर्स डे पर पेश है यह तस्‍वीर-
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असफल पिता?

गांधीजी में एक द्वैधता थी, क्‍योंकि वे स्‍नेही पिता और महान तथा दुर्धष करिश्‍माई नेता होने की भूमिका साथ-साथ निभाना चाहते थे। उन्‍होंने चारों बेटों (हरिलाल, मणिलाल, रामदास और देवदास ) में अपनी ही छवि देखी और समझ नहीं पाये कि हरिलाल हरिलाल थे और मणिला
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बापू की कामांधता ने ले ली उनके पिता की जान

मात्र तेरह वर्ष की आयु में विवाह के उपरांत गांधीजी की कामांधता बेकाबू हो उठी थी, इस कामांधता से कस्‍तूरबा त्रस्‍त थीं। लेकिन इससे मुक्‍त होने के लिए 1906 तक प्रतीक्षा करनी थी, जब गांधीजी ने ब्रह़मचर्य का व्रत लिया। गांधीजी के पिता की मौत के समय की घट
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बापू का दुखी दांपत्‍य

आम धारणा है कि महात्‍मा गांधी और कस्‍तूरबा आंधी एक आदर्श और असाधारण दंपती थे, लेनिक वस्‍तुत: वे भारत की किसी भी साधारण विवाहित इकाई की तरह ही थे। उनके 62 साल के विवाहित जीवन में सामान्‍य उतार-चढाव आते रहे। आरं‍भिक वर्ष तनावों, झगडों, गलतफहमियों और लग
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वीर्यपात और गंदे सपनों से विचलित हो उठते थे बापू

ब्रह़मचर्य के प्रयोग की हठधर्मिता और इसके साइड इफेक्‍ट से बवंडर खडा हो गया जिसके कारण गांधीजी का पूरा परिवार अशांत हो चुका था। बिनोबा भावे, काका कालेलकर और नरहरि पारिख जैसे उनके घनिष्‍ठ सहयोगियों ने विरोध-स्‍वरूप हरिजन के संपादक मंडल से त्‍यागपत्र दे
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स्‍त्री बनना चाहते थे गांधीजी

गांधीजी में स्‍त्री बनने की गहरी चाह थी। उन्‍होंने मनु गांधी से कहा था, मैं तुम्‍हारी मां हूं। मनु गांधी ने भी इस विषय पर - बापू- माई मदर नाम से एक पुस्तिका लिखी थी। जब गांधीजी के चचेरे भाई मगनलाल गांधी का निधन हुआ तो गांधीजी ने कहा था- मुझे विधवा कर
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सेक्‍स और महात्‍मा गांधी

महात्‍मा गांधी के बारे में पढना कभी भी उबाऊ नहीं रहा। तभी तो रोमां रौला ने उन्‍हें दूसरे ईसा मसीह की संज्ञा दी थी। ठीक ईसा मसीह की तरह ही गांधीजी सहनशीलता भी पीडा और मौत का प्रतीक बन गयी। गांधीजी वैसे इक्‍का-दुक्‍का लोगों में शुमार हैं, जिन्‍होंने खु
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माडलिंग में भी महात्‍मा गांधी सबके बापू

माडल व माडलिंग - ये दो शब्‍द ऐसे हैं जिन्‍हें सुनने या पढने के बाद हमारे जेहन में किसी सुंदर काया की लडकी या चिकने-चुपने या फ‍िर रफ--टफ युवक की छवि उभरने लगती है। और वह भी किसी न किसी प्रोडक्‍ट के साथ। यानि, हर माडल की पहचान किसी न किसी प्रोडक्‍ट के
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मंगलसूत्र पहनते हैं पार्टी के कार्यकर्ता

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हिंदू विवाह में मंगलसूत्र का क्‍या महत्‍व है। इसकी पवित्रता और इसका क्‍या रस्‍म-रिवाज है। पर क्‍या आपने कभी सोचा है कि मंगलसूत्र का कोई राजनीतिक उपयोग भी हो सकता है। नहीं न। तो लीजिये पढिये यह रोचक जानकारी- यह चुनावी सीजन
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बिन मांगे बीवी मिले, मांगे मिले न भीख

मानो या न मानो। है सत्‍य घटना। यूपी के बागपत जिले में पिछले दिनों हुआ यह अजीब वाकया। मुजफ़फरनगर जिले के गांव बिराल का एक फकीर जिसका नाम धनराज है भीख मांगते-मांगते एक दिन पहुंचा बागपत जिले के गांव लुहारी में। एक दर पर भीख दे दो की रट लगाते-लगाते काफी
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क्‍या आप जरनैलिज्‍म से सहमत हैं

दोस्‍तों दो सप्‍ताह बाद लौटा हूं। एक नये ख्‍यालात के साथ! आपने गौर तो किया ही होगा जितने ही जूता प्रकरण हुए उनमें ज मुख्‍य रुप से उपस्थित रहा है। जैदी-जार्ज, जरनैल और अब जिंदल। खैर मैं यहां आपका तव्‍वजों दूसरी बात की तरफ चाहता हूं। मेरे मन में एक विच
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मत जाना भूल, बन जाओगे अप्रैल फूल

आज पहली अप्रैल है, तो सतर्क रहिए, कहीं कोई आपको मूर्ख न बना दे। दोस्‍त-परिचित आपकी कमजोरियों से वाकिफ होते हैं, इसलिए छठी इंद्री को जगाकर रख्रिए। हर खबर सुनने के बाद सोचिए-विचारिए, उसके बाद ही खबर पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करें। इस बार युवाओं में खास
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ताकि पैदा हो सकें अच्‍छे पत्रकार

भारतीय प्रेस परिषद के अध्‍यक्ष न्‍यायमूर्ति बीएनरे ने कहा है कि पत्रकारिता शिक्षण संस्‍थानों के नियमन के लिए नियंत्रक संस्‍थान बनाया जाना चाहिए। उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर पत्रकारिता को चिकित्‍सा प्रबंधन, इंजीनियरिंग और अन्‍य व्‍यवसायिक विषय
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भोजपुरी गजल

एक जिंदगी सहकल रहे मन तनी बहकल रहे तन-बदन के के कहो सांस ले दहकल रहे मन के वन में आग-जस जाने का लहकल रहे चांद के आगोश में चांदनी टहकल रहे रात रानी रात-भर प्‍यार से महकल रहे दो छन में कुछ अउर कुछ भइल छन में मन में कुछ अउर कुछ भइल तन में फूल सेमर के दि
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ताकि गुजर न जाए गोधरा

डब्‍ल्‍यू एच आडिन एक शायर था, उसने कहा था अगर हम एक-दूसरे से प्‍यार नहीं करेंगे तो मर जाएंगे। मैं भी इस बात को मानने लगा था पर अब असहमत होना चाहता हूं। जंगल से शहर की यात्रा में बहुत पाया आदमी ने। चार की जगह दो पैर पर चलना सुहाया आदमी को। पर बाकी है
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गुजर न जाए गोधरा

डब्‍ल्‍यू एच आडिन एक शायर था, उसने कहा था अगर हम एक-दूसरे से प्‍यार नहीं करेंगे तो मर जाएंगे। मैं भी इस बात को मानने लगा था पर अब असहमत होना चाहता हूं। जंगलों से शहर तक की यात्रा में बहुत पाया आदमी ने। चार पैरों की जगह दो पैर पर चलना सुहाया आदमी को।
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यौन आलोचना में उलझे लेखक-पत्रकार

यह कटू सत्‍य है कि समाज के सामान्‍य लोग लेखकों, पत्रकारों पर पूर्ण रुप से विश्‍वास नहीं करते। यही वजह है कि हमेशा ही इनकी निजी जिंदगी के बारे में लोग बडे ही उल्‍टे-पुल्‍टे सवाल करते हैं। वे यह जानने को इच्‍छुक होते हैं कि क्‍या निजी जीवन में भी इनका
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शिवगंगा में संगम

उफ... ऐसे नहीं... क्‍या कर रहे हो... मेरा पैर ढको... जैसी विचलित करने वाली आवाज से मैं जूझ ही रहा था कि धडाधड पप्पियों-झप्पियों की बारिश होने लगी। यह सब कुछ हो रहा था मेरे सामने वाली बर्थ पर। बात 14 मार्च की है। मैं शिवगंगा एक्‍सप्रेस से वाराणसी से ग
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स्‍त्री मुक्ति या देह मुक्ति

स्त्री-शरीर के साथ शुचिता का जो तमगा लटका दिया गया है (पुरुष जिससे पूरी तरह मुक्त है), उससे स्त्री को मुक्त होना ही होगा। विधवा, तलाकशुदा, बलात्‍कार की शिकार स्त्रियां दूसरे पुरुष के लिए क्यों त्याज्य हैं? सच पूछा जाये तो यह समस्या स्त्रियों से ज्याद
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नारी मुक्ति या देह मुक्ति

हिंदी के कुछ काम कुंठित स्त्री चिंतक व विचारक सेक्‍स की मुद्रा बनाकर सेक्स मुक्ति में ही स्त्री मुक्ति का महामंत्र खोजने में लगे हैं। संयोग से कुछ प्रतिभाग्रस्त लेखिकाएं अपने लेखन को इसी के आग्रह पर फार्मूलाबद्ध कर रही हैं, जिसे कुछ पत्रिकाएं समकालीन
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पुरस्‍कार गुणवत्ता का पर्याय नहीं

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो हमेशा ही निर्भीक बने रह सकते हैं। कोई भी लालच उन्हें डिगा नहीं सकता, और न ही कोई प्रलोभन उन्हें प्रभावित करता है। लालसाविहीन ऐसे लोग हमेशा ही समाज के लिए प्रेरक होते हैं, और अनुकरणीय भी। प्रख्यात साहित्यकार व शीर्षस्थ कवि प्रो
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दुखद - यादवेंद्र शर्मा चंद्र नहीं रहे

प्रख्‍यात साहित्‍यकार यादवेंद्र शर्मा चंद्र का बुधवार को जयपुर में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार थे। 77 वर्षीय चंद्र अपने पीछे पत्‍नी और तीन बेटे छोड गए हैं। चंद्र ने अपनी रचनाओं से समाज को नई दिशा देने का काम किया। उनकी रचनाएं पाठकों के मन पर अम
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फ‍िजा की फ‍ितरत

खबर है, हरियाणा के पूर्व उप मुख्‍यमंत्री चंद्रमोहन के साथ प्रेम विवाह के चलते मीडिया की सुर्खियां बटोरने वाली फ‍िजा शीघ्र ही फ‍िल्म में नजर आएंगी। उन्‍हें फ‍िल्‍म देशद्रोही-2 के सेट पर देखा गया। उन्होंने मीडिया से बातचीत भी की। फ‍िल्म देशद्रोही के अभ
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पाक तूने क्‍या किया ?

पाकिस्‍तान के लाहौर में टेस्‍ट क्रिकेट खेलने गई श्रीलंका टीम के खिलाडियों पर जानलेवा हमले और उन्‍हें बंधक बनाने की कोशिश पर खेल जानकार विश्‍वमोहन मिश्रा की त्‍वरित टिप्‍पणी... पाकिस्‍तान यानी आतंकवाद का सुरक्षित गढ़.... जी हां जिसका डर था वही हुआ। भा
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भोजपुरी गजल

एक मन भ्रमर फेरु गुनगुनाइल बा प्रेम-सर में कमल फुलाइल बा आंख के राह चल के, आंतर में आज चुपके से के समाइल बा दूब के ओस कह रहल केहू रात भर नेह से नहाइल बा रस-परस-रुप-गंध-शब्‍दन के वन में, मन ई रहल लोभाइल बा जिंदगी गीत हो गइल बाटे राग में प्रान तक रंगाइ
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शोक संदेश - संजय सिरोही नहीं रहे

मित्रों हमने अपने एक युवा पत्रकार साथी पचीस वर्षीय संजय सिरोही को खो दिया। रविवार रात एक बजे दैनिक जागरण, मेरठ आफ‍िस से घर लौटते वक्‍त किसी काल रुपी वाहन ने उसे हमारे बीच से छिन लिया। मोटरसाइकिल से घर लौट रहे संजय की मौत वाहन से टक्‍क्‍र लगने के बाद
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पिंक पैंटी का चटपटापन

मीडिया जगत में इन दिनों जिन मुद़दों पर खासी बहस चल रही है। मैं यहां उन पर आप सभी का ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा- भाग एक - पिंक पैंटी का चटपटापन श्रीराम सेना ने मंगलौर के पब में जाकर जिस तरह से लडकियों पर बर्बरता दिखायी उसके बाद मीडिया जगत में इस पर ख