Words from my Soul's Image
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04 May 2010
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Mazdooro ki duniya me,

Mazdooro ki duniya me,mazdooro ki koi kimat nahi,mazdooro ki mazduri ka phal,mujh jaisa tatha-kathit intellectual,kha rahe, unki aakho ke samne,thenga dikha ke,Unki aapsi takrar,mera bana unke,sosan karne ka hathiyar,1rs ka kaam kara ke,chauani dene ka
 
"Azad Sikander"
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किताब के हर .........

किताब के हर , पन्ने पर हर अछर, नैनो को तेरे नाम सी लग रही, मन को हर चीज तेरी तस्वीर सी लग रही जाने अनजाने यह क्रम बार- बार दोहरा रहा, लगता हैं जैसे अपने आप को खो कर तुम्हे पाने कि राह हैं !!!!!! "Azad Sikander"
 
"Azad Sikander"
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सारी प्रिथ्वी को कागज.....

सारी प्रिथ्वी को कागज, सारी जंगल को कलम, सातों समुद्रो को स्याही, बना कर लिखने पर भी, मैं बयान नहीं कर पाऊन्गा, "आप" से " तुम " में , जितना खुशी हुई थी, उससे कई गुना ज्यादा, "तुम" से "आप" में दुख होती हैं, पर........ मैं तब भी वही था , अब भी वही हुँ
 
"Azad Sikander"
Dec 29 2009 11:55 AM
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सड़क के बिच में चलना चाहिऐ ....

माँ !!!!! ये क्या? तुम मुझे बार-बार सड़क के किनारे से पकड़ कर बिच सड़क पर क्युँ ला रही हो? तुम ही ने .तो बताया था पैदल सड़क के बाँए ओर चलना चाहिऐ! फिर…….! हां सही कहा था मगर बेटी लालूजी ने वादा किया था सड़के हेमा मलाली कि गाल कि तरह बनाएगे लेकिन…. हम
 
"Azad Sikander"
Dec 29 2009 11:55 AM
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कैसे हो हमारा देश विकसित.......

कैसे हो हमारा देश विकसित जब आज के युवा पढने के नाम पर मस्ती करते हैं, क्युकी पढना नहीं चाहते ये समय हैं कहाँ इनके पास? कया होगा पढ कर? क्या होगा बाउजी का पैसा? अभी तो हमारे दादाजी कमा रहे हैं!!!!!!! "Azad Sikander"
 
"Azad Sikander"
Dec 29 2009 11:55 AM
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आज गोधिली वेला में...

आज गोधिली वेला में छत से देखा, बुरखा पहने, लड़की? औरत? बुढिया? पता नहीं, कोई सस्त्री, जो अहसास दिला गई, उसमे और कफ़न में लिपटे हुए लास में सिर्फ एक फ्रक हैं इसके आलावा, कोई अंतर नहीं जी रही तन लिए वह स्त्री, मन तो पिंजरे में बंध हैं, जिसकी कुंजी हमारे
 
"Azad Sikander"
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लोग नकारते हैं हमें.......

लोग नकारते हैं हमें, पुछ्ते हैं क्या जरुरत हैं आपकी, क्या करते हैं आप हमारे लिए, आप तो बस कल्पना लोक में खोये विचरते हैं क्या सच हैं यह? नहीं, हम आइना हैं, वो आइना नहीं जिसमे बाहरी रूप दिखता हैं, वो आइना हैं जिसमे आपके भीतर का रुप दिखता हैं देख कर डर
 
"Azad Sikander"
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क्या दे रहा हुँ उनको.......?

क्या दे रहा हुँ उनको(माता-पिता), जिनके दम पर खड़ा हुँ, कुछ नहीं शिवाए दुःख के, उनकी फिदरत सी बन गई है दुखो को सह कर सुख देना, हमारी फिदरत बन गई है सुखो को भोगते हुए उनको दुःख देना, ऐसा क्युँ करता हुँ, क्या यह सही है? नहीं फिर भी ऐसा करता हुँ, ये संस्
 
"Azad Sikander"
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मेरी नज़रे, न…न , हमारी नज़रे…

मेरी नज़रे, न…न हमारी नज़रे… मेरी ऊंगली, न…न हमारी उँगली… क्युं उठती है उनकी(सरकार) तरफ, क्या चाहती है उनसे, क्या इशारा करती है उनकी और, मैं न…न हम सभी चाहते है हर समस्या का समाधान उनसे, मैं, न… न हम भी क्या करे चाहते तो हैं करना हल, पर बिन पेन्दे का ल
 
"Azad Sikander"
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अभी तो फाका है,

अभी तो फाका है, चलो, घसको, घूसो, चढ़ो, आगे बढ़ो. अभी तो हवा आने जाने की, जगह है मतलब फाका है, लोकल परिवहन में, दिल्ली की कड़कडाती जाड़ में, पसीना आने लगे, गर्मियों में बरसात सा भीगने का, अहसाह होने लगे, फिर भी , अभी तो हवा आने जाने की, जगह है मतलब फा
 
"Azad Sikander"
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हम सभी नशे में चूर हैं

हम सभी नशे में चूर हैं , शायद तुम अपने बटुआ में पड़े पैसे के नशे में, चमचमाती कार में बैठे खुबसूरत , बीबी की खूबसूरती के नशे में, आली सान बंगला होन के नशे में, बाप के जायज या नाजायज पॉवर के नशे में, या झूटी सानो साकोत के नशे में , आदि- आदि, मैं तो चूर
 
"Azad Sikander"
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आज मैं हिमालय की कन्दराओँ में

आज मैं हिमालय की कन्दराओँ में , जाना चाहता हुं, दुनिया दारी की मोह- जाल छौड़ जाना चाहता हुं, यहाँ ना-ना प्रकार की कृतिम सुख, खोखला दिखावा , किसी के दुःख में स्वभाविक दुःख, किसी के खुशी में हँसने की झूठी कोशिस अब बर्दास्त नहीं होता , अपने स्वाभाविक कर्
 
"Azad Sikander"
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नैनौ में समुद्र भरे हुए.........

नैनौ में समुद्र भरे हुए, दिल में तूफान लिए मन में द्दुंद लिए अपने सपनो को अमावस कि काली रात में गला घोट के लबो पर मुस्कराहट बिखरते हुए चहरे पर ताज़गी लाते हुए देह में चंचलता लिए चमकीली लाल साडी से तन को ढके हुए अनिश्चित भाविये कि और मंगल गीत के साथ औ
 
"Azad Sikander"
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प्रेमी प्रेमीका का प्रेम भी..........

प्रेमी प्रेमीका का प्रेम भी, अजीब प्रेम प्रसंग हैं हर प्रेमी जानने को रहता है , बेकरार की मेरी प्रमिका के दिल में कितनी चाहत है मेरे लिए क्यो करती है मुझ से प्रेम सारी दुनिया में से मैं ही क्यो बसता हुँ उसके दिल में? ठीक यही , हर प्रेमीका अपने प्रेमी
 
"Azad Sikander"
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तुझको आना होगा

तुझको आना होगा किया वादा निभाना होगा तुम बिन ये फगुआ फीका रे इह फगुआ में रंग हिन् दिल में प्यार के रंग भरना होगा तुझको आना होगा रे तुम बिन लागे ये मन, बिन मछली के ताल आजा रे इह फगुआ में तुम बिन होली के रंग फीका रे आजा-आजा रे भर दे इस फगुआ में प्यार क
 
"Azad Sikander"
Dec 29 2009 11:55 AM
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उत्पाद .........

इल्जाम न लगाओ बेवफ़ा हैं हम दिल तुम्हारा चुरा कर तोड़ दिया हमने कभी पूछा मुहबत थी आप से हमें पूछोगे भी कैसे? और क्यों? उत्पाद जो समझ रखा हैं, आप और आपके समाज ने कास समझ पाते हमें आप हम स्त्री भी हैं प्राणी… "Aazd Sikander"
 
"Azad Sikander"
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बाबा ने किया प्रावधान

बाबा ने किया प्रावधान , अनुसूचित जाती व जनजाति को, मिलगा आजादी के कुछ वर्षो तक, आरछ्न का लाभ नुमाइन्दे हमारे आजादी के इतने वषो के बाद भी सकते रहे वोट कि आग में कुर्सी कि भूख बढ़ा-बड़ा आरछन कि तारीख phir हम पिछडे वर्ग क्यों न करे मांग हमे भी दो हमारे
 
"Azad Sikander"
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मेरी कलम चलते-चलते ...........

मेरी कलम चलते-चलते रुक सी जाती हैं लेखनी के भाव- लय बिच में ही भंग हो जाती हैं मुझमे हिमालय सा द्रिद्ता तो हैं पर सागर सा गहराई नहीं उत्साह तो हैं मगर वह भी अधूरा शायद इसलिय की मैं खुद हुं अधुरा तुम बिन………… "Azad Sikander"
 
"Azad Sikander"
Dec 29 2009 11:55 AM
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"Words from my Soul": मेरे जेब में पड़े चंद सिक्को की खनखनाहट कुछ कहती हैं!

मेरे जेब में पड़े चंद सिक्को की खनखनाहट कुछ कहती हैं!
 
"Azad Sikander"
Dec 14 2009 12:38 AM
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मेरे जेब में पड़े चंद सिक्को की खनखनाहट कुछ कहती हैं!

मेरे जेब में पड़े चंद सिक्को की खनखनाहट कुछ कहती हैं पैदल चलने के दरमाया निरंतर गिरते पैसो के मूल्य के दौर में खुशी की वह गीत जिसे अर्जित करने में जलाया दिन-भर शरीर का खून जिससे मिलेगा आज शाम और कल सुबह का नून - भात “मुझे और सिर्फ मुझे,” रात के सोने
 
"Azad Sikander"
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शाम को सोने के, पहले पिता हुँ कि,

शाम को सोने के, पहले पिता हुँ कि, भूल सकू दिन कि उठाई गई तकलीफो को जिससे मिला शाम का भोजन भूल सकू बेवजह कि गलियों को, जिसका हक़दार मैं नहीं भूल सकू मेह्न्ताना कि कमी को जिसका हक़दार मैं हुँ भूल सकू सर पर छत नहीं भूल सकू बचा स्कुल जाना चाहता है भुल सक
 
"Azad Sikander"
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काश कभी ये हो जाये

काश कभी ये हो जाये काश कभी ये हो जाये, मेरी धड़कने दूर बैठे, परदेश मे भी वैसे सुनाई दे, जैसे मेरे बगल में बैठा हो, काश कभी ये हो जाये कि, तेरी खुशी मेरे अरमानों के साथ जुड़ जाये, जैसे शरीर से आत्मा जुड़ां है. काश कभी ये हो जाये , तेरी याद आये, और तू, नज
 
"Azad Sikander"
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Main paristitiyua ka gulam nahi

विपरीत परिस्तितिया,हर किसी के जिंदगी में आती हैं,किसी के मुकदर में कम,किसी के मुकदर में जादा,हर परिस्तिति का अपना ही मजा हैं,कोई हँस के उड़ा देता हैं,कोई रो के परेशान होता हैं,हम तो मजा lete hai,uske sath do- do haath kar ke,use harne ki kosis kar ke,koi
 
"Azad Sikander"
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Sep 18 2009 10:18 PM
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मैं तो ओरिजनल हुं न

बीती रात मेरे पड़ोस के, घर का कीमती सामान चोरी हो गया। जिस बस स्टाप से बस पकड़ता था, उसका ढाचा चोरी हो गया। बिजली का तार चोरी हो गया, जिससे रोसन होता था मेरा, मोहल्ला , सडको पर लगा अलकतरा भी , चोरी हो गया। यारो चोरी होने की लिस्ट, यहाँ से सुरु होती है
 
"Azad Sikander"
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"जिंदगी है अनमोल"

मेरी - तुम्हारी, उसकी - उसका , हम सभी की जिंदगी, मेरी "जान" की लटो की तरह है। जैसे कंघी उलझे लटो को सुलझाती है, और हवा का झोका, उसे पुनः उलझती है। ठीक ऐसे ही हम पल- पल , जिंदगी के उलझे सवालो को, तरह- तरह से सुलझाते है , एक पल सुलझती है तो दुसरे पल पु
 
"Azad Sikander"
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In the Night

In the night,The light of full moon,falls in the river,Whose reflection,Falls on the surrounding,Beauty the reflection,Seen that night,In "chotta nagpur pathar"As mind blowing,Whose beauty is joy forever to me,Whenever i remember that moment."Azad
 
"Azad Sikander"
टैग: meri kavitaye
Oct 18 2008 06:26 PM